आयकर विधेयक 2025

आयकर विधेयक 2025

पाठ्यक्रम – मुख्य परीक्षा के अंतर्गत सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 – भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास, सरकारी बजट, राजकोषीय नीति, उदारीकृत धनप्रेषण योजना (LRS)  

प्रारंभिक परीक्षा के लिए – राजकोषीय घाटा, पूंजीगत लाभ कर, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT),101वाँ संशोधन अधिनियम 2016, GST परिषद, प्रतिभूति लेनदेन कर, कॉर्पोरेट कर, लाभांश, इनपुट टैक्स क्रेडिट, कर चोरी।

 

ख़बरों में क्यों ? 

 

 

  • हाल ही में भारत की संसद के दोनों सदनों द्वारा आयकर विधेयक, 2025 को पारित कर दिया गया है। 
  • इस आयकर विधेयक 2025 का मुख्य उद्देश्य 1961 के मौजूदा आयकर अधिनियम को अधिक सरल, संक्षिप्त और व्यावहारिक बनाना है, ताकि करदाताओं और प्रशासन – दोनों के लिए इसे समझना और लागू करना आसान हो।

 

आयकर विधेयक 2025 की मुख्य विशेषताएँ :

 

  1. डिजिटल क्षेत्र की व्यापक परिभाषा : इस विधेयक में वर्चुअल डिजिटल स्पेस की परिभाषा का विस्तार किया गया है, जिसमें ईमेल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन अकाउंट्स, क्लाउड स्टोरेज, वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इससे कर अधिकारियों को टैक्स चोरी या आय छिपाने की आशंका में, पासवर्ड तक पहुँचने या उन्हें बायपास करने का अधिकार मिल सकता है। इसके साथ ही कंपनियों को इसमें सहयोग देना पड़ सकता है।
  2. कर वर्ष का नया ढाँचा : पुराने ‘मूल्यांकन वर्ष’ और ‘पिछले वर्ष’ की अवधारणाओं को हटाकर “कर वर्ष” (Tax Year) की नई एकीकृत प्रणाली लागू की गई है, जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक मानी जाएगी।
  3. रिफंड नियमों में लचीलापन : अब केवल समय पर दाखिल आयकर रिटर्न ही नहीं, बल्कि विलंब से दाखिल रिटर्न पर भी रिफंड का दावा किया जा सकेगा।
  4. उदारीकृत धनप्रेषण योजना (LRS) पर स्रोत पर कर संग्रहण (TCS) से राहत : विदेशों में शिक्षा के उद्देश्य से भेजे जाने वाले धन पर स्रोत पर कर संग्रहण (TCS) नहीं लगेगा, यदि वह वित्तीय संस्थाओं द्वारा प्रेषित किया गया हो।
  5. शून्य कर कटौती प्रमाणपत्र : जिन करदाताओं की आय पर कोई कर देय नहीं है, वे पूर्व में ही शून्य कर कटौती प्रमाणपत्र ले सकेंगे।
  6. सीमित देयता भागीदारी (LLP) के लिए वैकल्पिक न्यूनतम कर (AMT) स्पष्टता : सीमित देयता भागीदारी (LLP) पर वैकल्पिक न्यूनतम कर (AMT) की स्पष्ट रूप से वही लागू व्यवस्था होगी, जैसी अन्य करदाताओं के लिए है। AMT यह सुनिश्चित करता है कि छूटों व कटौतियों के बावजूद, न्यूनतम कर भुगतान किया जाए।

 

भारतीय कर व्यवस्था की मौजूदा चुनौतियाँ :

 

 

  1. पूर्वव्यापी कराधान : न्यायिक फैसलों की अनदेखी करते हुए किये गए पूर्व-तारीख से कर संशोधन, निवेशकों का विश्वास डगमगाते हैं। वोडाफोन केस में ऐसा ही संशोधन भारत को ₹8000 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय हर्जाना भुगतना पड़ा। पूर्व वित्तमंत्री जेटली ने इसे “कर आतंकवाद” की संज्ञा दी थी।
  2. GST परिषद द्वारा केवल अधिक से अधिक राजस्व एकत्र करने पर ज़ोर देना : GST परिषद द्वारा केवल अधिक से अधिक राजस्व एकत्र करने पर ज़ोर देने से कर मांगें मनमानी हो जाती हैं, जिससे व्यवसायिक वातावरण में अस्थिरता और निराशा फैलती है।
  3. इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से इनकार : रियल एस्टेट क्षेत्र में  विशेषकर ITC न मिलने से अंतिम उत्पाद की कीमतें बढ़ती हैं और प्रतिस्पर्धा बाधित होती है। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने Safari Retreats केस (2024) में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के पक्ष में ही फैसला दिया था।
  4. जटिल कर प्रणाली : देश में अनेक दरें, परिपत्र, अधिसूचनाएँ और छूटों की उलझनें ऐसी परिस्थितियाँ पैदा करती हैं, जहाँ व्यवसाय कम, कर सलाहकार अधिक लाभ में रहते हैं।
  5. प्रत्यक्ष कर संग्रह की कमी : कंपनियाँ विशेष रूप से MNCs, स्थानांतरण मूल्य निर्धारण के माध्यम से लाभ को कम-कर वाले क्षेत्रों में दिखा कर टैक्स बचाती हैं। इससे सरकार को अप्रत्यक्ष कर बढ़ाने पर विवश होना पड़ता है।

 

जटिल कर ढाँचे के नकारात्मक प्रभाव :

 

  1. घरेलू विनिर्माण पर असर : भारी टैक्स बोझ और जटिल नियमों के चलते घरेलू निर्माण कमजोर होता है, जिससे चीन जैसे देशों से आयात बढ़ता है। उदाहरण: चीन से आयात 2018-19 में $70 बिलियन से बढ़कर 2023-24 में $100 बिलियन हो गया।
  2. मुद्रा और व्यापार घाटा : उच्च लागत व कम प्रतिस्पर्धा के कारण रुपया का अवमूल्यन होता है और चालू खाता घाटा गहराता है।
  3. निवेश में गिरावट : अस्पष्ट कर नियम और पूर्वव्यापी संशोधन निवेशकों को असहज करते हैं, जिससे “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” पर असर पड़ता है।
  4. कम कर संग्रह : कठिन कर प्रणाली के कारण करदाताओं द्वारा कम आय दिखाना या टैक्स चोरी आम हो जाती है, जिससे सरकार को अधिक कर दरें लगानी पड़ती हैं, जो यह एक दुष्चक्र बन जाता है।

 

समाधान की दिशा में आगे की राह :

 

 

  1. GST को सरल बनाने की जरूरत : जैसे पॉपकॉर्न पर अलग-अलग दरें (5%, 12%, 18%) समाप्त कर, एक समान कर दर लागू की जानी चाहिए।
  2. स्थिर और स्पष्ट कर प्रणाली : बार-बार बदलाव या मनमाने आदेशों से बचकर विश्वसनीय और पूर्वानुमेय कर नियम बनाए जाएँ।
  3. डिजिटल निगरानी के माध्यम से कर चोरी की पहचान करने की जरूरत : कृत्रिम बुद्धिमता (AI) और डिजिटल टूल्स के माध्यम से कर चोरी की पहचान, रिपोर्टिंग की सटीकता, और कर संग्रह में सुधार किया जा सकता है।
  4. विकासोन्मुख कर नीति को प्राथमिकता देने की जरूरत : केवल अधिक टैक्स जुटाने की बजाय, दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिससे कर आधार स्वयं बढ़े।
  5. कॉर्पोरेट कर सुधार प्रोत्साहन योजनाओं को लागू करने की जरूरत : नियमित ऑडिट, स्वैच्छिक प्रकटीकरण पर छूट, और समय पर कर भुगतान को बढ़ावा देने वाली प्रोत्साहन योजनाएँ लागू की जानी चाहिए।

 

निष्कर्ष :

 

 

  • हाल ही में पारित नया आयकर विधेयक 2025 भारत की कर प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सुधार की दिशा में कदम है, जिसका उद्देश्य मौजूदा आयकर अधिनियम 1961 की जटिलताओं को दूर कर एक सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक ढाँचा तैयार करना है। 
  • इस विधेयक के माध्यम से डिजिटल अर्थव्यवस्था को संबोधित करते हुए, टैक्स रिफंड, शून्य कर कटौती प्रमाणपत्र और वैकल्पिक न्यूनतम कर जैसे प्रावधानों में लचीलापन और स्पष्टता लाने का प्रयास किया गया है।
  • भारत की कर व्यवस्था में व्याप्त जटिलता, पूर्वव्यापी कराधान और असंगत GST ढाँचे जैसी समस्याएँ निवेश और व्यापार के लिए गंभीर बाधाएँ रही हैं। इन चुनौतियों के कारण न केवल घरेलू विनिर्माण और प्रत्यक्ष कर संग्रह प्रभावित हुआ है, बल्कि विदेशी निवेशकों का विश्वास भी डगमगाया है।
  • इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने यह संकेत दिया है कि वह ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बेहतर बनाना चाहती है, लेकिन यह तभी संभव है जब इसके साथ-साथ GST का सरलीकरण, कर नीति की स्थिरता और डिजिटल निगरानी के माध्यम से पारदर्शिता को भी बढ़ावा दिया जाए।
  • अतः, आयकर विधेयक 2025 एक सकारात्मक पहल है, परंतु इसके प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक कर सुधारों के माध्यम से ही यह भारत को सरल, न्यायसंगत और विकासोन्मुख कर व्यवस्था की दिशा में ले जा सकेगा।

 

स्रोत –  पी. आई. बी एवं इंडियन एक्सप्रेस।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. आयकर विधेयक 2025 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। 

  1. यह मौजूदा आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा।
  2. इसमें केवल डिजिटल करदाताओं को लक्षित किया गया है।
  3. इसका उद्देश्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को पूरी तरह प्रतिबंधित करना है। 
  4. भारत में जटिल कर ढाँचे के कारण निवेश और कर संग्रह प्रभावित होता है, जबकि व्यापार घाटा बढ़ता है।

उपर्युक्त कथन/ कथनों में से कौन सा कथन सही है /हैं ?

A. केवल 1 और 4 

B. केवल 1, 2 और 3 

C. केवल 2 और 3 

D. 1, 2, 3 और 4 

उत्तर – A

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. आयकर विधेयक 2025 की प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित करते हुए, यह चर्चा कीजिए कि यह भारत की वर्तमान कर चुनौतियों का समाधान कैसे करता है, और क्या यह विधेयक देश की कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और विकासोन्मुख बनाने में प्रभावी सिद्ध हो सकता है? ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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