नशा मुक्त भारत अभियान : एक राष्ट्रव्यापी प्रयास की पाँच वर्षों की समीक्षा

नशा मुक्त भारत अभियान : एक राष्ट्रव्यापी प्रयास की पाँच वर्षों की समीक्षा

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2  – भारतीय राजनीति एवं शासन व्यवस्था, भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप

 

ख़बरों में क्यों ?

 

  • हाल के दिनों में भारत विभिन्न सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, जिनमें सबसे गंभीर और चिंताजनक समस्या है – नशीली दवाओं का बढ़ता दुरुपयोग। युवाओं का नशीली दवाओं के प्रति बढ़ती भागीदारी, सीमावर्ती इलाकों से होती तस्करी, और डिजिटल माध्यमों से फैलता नशे का नेटवर्क, देश की सामाजिक संरचना को अंदर से खोखला कर रहा है। 
  • इस संकट की भयावहता को समझते हुए भारत सरकार ने 15 अगस्त 2020 को “नशा मुक्त भारत अभियान” की शुरुआत की थी। पाँच वर्षों के इस अभियान के क्रियान्वयन ने देशभर में व्यापक प्रभाव डाला है, जिसे अब समेकित रूप से मूल्यांकित करना समय की मांग है।

 

अभियान का मूल उद्देश्य और रणनीति :

 

“नशा मुक्त भारत अभियान” का लक्ष्य केवल नशीली दवाओं की आपूर्ति को रोकना नहीं है, बल्कि इसके तीन प्रमुख आयामों—आपूर्ति नियंत्रण, मांग में कमी, और चिकित्सकीय पुनर्वास—पर समग्र ध्यान देना है।

  • लॉन्च तिथि : 15 अगस्त 2020
  • अधीन मंत्रालय : सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
  • प्रारंभिक फोकस : 272 संवेदनशील ज़िले
  • वर्तमान स्थिति: भारत के सभी ज़िलों तक विस्तार
  • लक्ष्य समूह : छात्र, युवा, ग्रामीण समुदाय, शहरी झुग्गियाँ, झुग्गी-मुक्त क्षेत्र, संवेदनशील सीमावर्ती इलाके
  • यह अभियान समुदाय आधारित भागीदारी, डिजिटल संचार, और नीतिगत सहयोग पर आधारित है।

 

प्रमुख उपलब्धियाँ (पाँच वर्षों की प्रगति) :

 

  1. जन जागरूकता में अभूतपूर्व वृद्धि :

  • 18.10 करोड़ से अधिक लोगों तक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष पहुँच
  • 4.85 लाख संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम
  • सोशल मीडिया, दूरदर्शन, रेडियो, डिजिटल पोस्टर, नाटकों और गीतों के माध्यम से व्यापक प्रचार
  1. युवाओं की सक्रिय सहभागिता :

  • 1.67 करोड़ से अधिक छात्रों ने प्रतिज्ञा ली
  • प्रतियोगिताओं, खेल आयोजनों, और यूनिवर्सिटी अभियान में सक्रिय भागीदारी
  • युवा प्रेरकों और “नशा मुक्त स्वयंसेवकों” का निर्माण
  1. डिजिटल तकनीक का समावेश :

  • नशा मुक्त भारत ऐप, वेबसाइट, और जियो-टैग्ड गतिविधियाँ
  • रियल-टाइम मॉनिटरिंग
  • ई-लर्निंग मॉड्यूल और डिजिटल टूलकिट
  1. स्वयंसेवकों का राष्ट्रव्यापी नेटवर्क :

  • 20,000+ नशा मुक्त स्वयंसेवक
  • हर ज़िले में प्रशिक्षित समुदाय सहयोगी
  • स्थानीय भाषा और संस्कृति अनुसार कार्यक्रमों का अनुकूलन
  1. सामुदायिक एवं आध्यात्मिक सहयोग :

  • ब्रह्माकुमारीज़, आर्ट ऑफ लिविंग, ISKCON, रामचंद्र मिशन, संत निरंकारी मिशन आदि के साथ साझेदारी
  • इन संगठनों की पहुँच का उपयोग करते हुए दूरदराज क्षेत्रों तक संदेश पहुँचाना

भारत में नशीली दवाओं की स्थिति :

 

  1. नशीली दवाओं की लत :

  • 10 करोड़ से अधिक लोग नशीली दवाओं से प्रभावित (NCB डेटा)
  • उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब जैसे राज्यों में NDPS अधिनियम के तहत सबसे अधिक मामले दर्ज
  • मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक ताना-बाना पर प्रतिकूल प्रभाव
  1. सबसे अधिक सेवन किए जाने वाले पदार्थ :

  • शराब: 16 करोड़ उपभोक्ता (14.6%)
  • भांग: 3.1 करोड़ (2.8%)
  • ओपिओइड्स (हेरोइन, अफीम आदि): लगभग 77 लाख
  • इनहेलेंट्स: विशेषकर किशोरों में तेज़ी से बढ़ता प्रयोग
  1. वैश्विक ड्रग आपूर्ति की दो धुरी – भारत के लिए चुनौती :

गोल्डन क्रीसेंट :

  • देश: अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान
  • प्रभावित भारतीय राज्य: पंजाब, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान
  • प्रमुख उत्पाद: अफीम

गोल्डन ट्राइएंगल :

  • देश: म्याँमार, लाओस, थाईलैंड
  • प्रमुख उत्पाद: हेरोइन (म्याँमार वैश्विक आपूर्ति का ~80%)
  • भारत एक महत्वपूर्ण पारगमन और उपभोग केंद्र बन चुका है

 

नशीली दवाओं के नियंत्रण में प्रमुख बाधाएँ और उससे संबंधित मुख्य चुनौतियाँ: 

 

स्मरणीय शब्द – DOPE

 

  1. D – डार्क नेट और नई दवाएं :
    • क्रिप्टोकरेंसी और डार्क वेब के माध्यम से ड्रग्स की ऑनलाइन बिक्री
    • न्यू साइकोएक्टिव सब्स्टेंस (NPS) का तेजी से बढ़ता चलन
  2. O – संगठनात्मक एवं अवसंरचनात्मक कमियाँ :
    • पुनर्वास केंद्रों की अपर्याप्त संख्या
    • प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की कमी
    • फोरेंसिक और ड्रग टेस्टिंग लैब्स की सीमित संख्या
  3. P – जागरूकता की कमी :
    • ग्रामीण इलाकों में ड्रग्स के दुष्प्रभाव की सीमित जानकारी
    • स्कूल-कॉलेजों में व्यसन-रोधी शिक्षा का अभाव
    • सामुदायिक स्तर पर पूर्वाग्रह और उदासीनता
  4. E – बहिष्कार एवं सामाजिक कलंक :
    • व्यसनों से पीड़ित व्यक्तियों को सामाजिक तिरस्कार का सामना
    • पुनर्वास की जगह दंडात्मक रवैया
    • मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की ओर कम झुकाव

 

समाधान की राह : 

 

स्मरणीय शब्द – SAFE

 

  1. S – कानून प्रवर्तन को सुदृढ़ बनाना :

     

     

    • NDPS अधिनियम (1985) और PITNDPS अधिनियम (1988) का प्रभावी क्रियान्वयन
    • सीमा सुरक्षा बलों को उन्नत तकनीक जैसे AI, ड्रोन, सैटेलाइट से लैस करना
    • सीमा प्रबंधन में अंतर-एजेंसी समन्वय
    • ड्रग-ट्रैफिकिंग की जड़ों पर प्रहार
  2. A – जागरूकता और रोकथाम :

     

     

    • राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) के तहत जन-जागरूकता कार्यक्रम
    • परामर्श केंद्रों, डि-एडिक्शन क्लिनिक्स और हेल्पलाइन सेवाओं का विस्तार
    • स्कूलों में अनिवार्य नशा-रोधी पाठ्यक्रम
      युवाओं के लिये सकारात्मक विकल्प जैसे खेल, संगीत, कौशल प्रशिक्षण
  3. F – आपूर्ति में कमी :

     

    • सीमा चौकसी में तकनीकी समावेशन
    • ड्रग्स के वैकल्पिक कृषि कार्यक्रम (जैसे – झारखंड में अफीम प्रतिस्थापन योजना)
    • अवैध आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अंकुश
    • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की निगरानी और कार्रवाई
  4. E – अंतर्राष्ट्रीय सहयोग :

     

    • UNODC, इंटरपोल, SAARC देशों के साथ इंटेलिजेंस साझा करना
    • सीमा पार नेटवर्क का भंडाफोड़
    • एक्स्ट्राडीशन संधियों और संयुक्त कार्यबल का गठन

 

भविष्य की राह :

 

नशा मुक्त भारत अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह एक जन-आंदोलन बन चुका है। इसके अगले चरण में निम्नलिखित पहलों पर ज़ोर दिया जाना चाहिए:

  • डेटा-संचालित नीति निर्माण : नियमित राष्ट्रीय सर्वेक्षण, जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करना।
  • सामाजिक पुनर्वास : नशा पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा में लाने की नीति बनाना।
  • शहरी झुग्गियों और आदिवासी क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाना।
  • नारी शक्ति की भागीदारी : महिला स्वयंसेवकों, शिक्षकों और माता-पिता की भूमिका को बढ़ाना।

 

निष्कर्ष :

 

  • भारत में नशीली दवाओं का संकट केवल एक स्वास्थ्य या सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि यह राष्ट्र की युवा शक्ति, सामाजिक समरसता और आर्थिक विकास के लिए एक गंभीर खतरा है। 
  • “नशा मुक्त भारत अभियान” ने पाँच वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है, किंतु चुनौतियाँ अभी शेष हैं। एक प्रभावी, समावेशी और सतत नीति ही इस संकट को जड़ से समाप्त कर सकती है।
  • देश को एक “नशा मुक्त, स्वस्थ, और सशक्त भारत” की दिशा में आगे ले जाने के लिये सरकार, समाज और हर नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। यह केवल एक प्रशासनिक प्रयास नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार, प्रत्येक विद्यालय, और प्रत्येक समुदाय की जिम्मेदारी है।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. “नशा मुक्त भारत अभियान” के प्रमुख उद्देश्य में निम्नलिखित में से कौन विकल्प शामिल है?

  1. केवल नशीली दवाओं की आपूर्ति को रोकना
  2. इसके मांग में कमी लाना
  3. चिकित्सकीय पुनर्वास की व्यवस्था करना
  4. आपूर्ति को नियंत्रित करना

कूट के माध्यम से सही उत्तर का चयन कीजिए।

A. केवल 1, 2 और 3 

B. केवल 2, 3 और 4 

C. इनमें से कोई नहीं।

D. उपरोक्त सभी।

 

उत्तर – B 

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. भारत में नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग की पृष्ठभूमि में “नशा मुक्त भारत अभियान” के प्रमुख उद्देश्यों, उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ (DOPE), समाधान (SAFE) और भविष्य की दिशा पर चर्चा कीजिए।  ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 ) 

 

 

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
No Comments

Post A Comment