भारत बनाम साइबर अपराध : साइबर सुरक्षा की रणनीतियाँ और भविष्य का नवाचार

भारत बनाम साइबर अपराध : साइबर सुरक्षा की रणनीतियाँ और भविष्य का नवाचार

मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आतंरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा के अंतर्गत – साइबर युद्ध, संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ, भारत में साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रमुख सरकारी पहल, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप

प्रारंभिक परीक्षा के लिए – गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, भारत साइबर स्वच्छता केंद्र, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023

 

खबरों में क्यों?

 

  • हाल ही में गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट में यह बताया  गया है कि भारत आज बढ़ते साइबर खतरों के दौर से गुजर रहा है। 
  • भारत में इंटरनेट की सार्वजानिक पहुँच और डिजिटल लेन-देन की व्यापकता ने भारत को न केवल एक वैश्विक डिजिटल शक्ति बनाया है, बल्कि उसे विभिन्न प्रकार के साइबर हमलों के प्रति भी बेहद संवेदनशील बना दिया है।
  • देश में बढ़ते रैनसमवेयर हमले, डेटा लीक, पहचान की चोरी और डीपफेक जैसे नवीनतम साइबर खतरे न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता और लोकतांत्रिक संस्थानों के लिये भी गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

 

भारत के समक्ष प्रमुख साइबर खतरे :

 

  1. साइबर-सक्षम वित्तीय धोखाधड़ी : भारत में यूपीआई और डिजिटल भुगतान प्रणालियों का उपयोग तो बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही फिशिंग, OTP धोखाधड़ी और पहचान चोरी जैसे अपराध भी तेज़ी से बढ़े हैं। वर्ष 2024 में 1.91 मिलियन से अधिक साइबर अपराध शिकायतें दर्ज की गईं – यह संख्या डिजिटल भेद्यता की गंभीरता को दर्शाती है।
  2. रैनसमवेयर और मैलवेयर हमले : अस्पताल, सरकारी डेटाबेस और निजी कंपनियाँ लगातार रैनसमवेयर के निशाने पर हैं। AIIMS दिल्ली पर 2022 में हुए साइबर हमले ने देश की स्वास्थ्य प्रणाली की साइबर सुरक्षा को कटघरे में खड़ा कर दिया।
  3. महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की भेद्यता : पावर ग्रिड, दूरसंचार नेटवर्क, परमाणु संयंत्र और बंदरगाह जैसे रणनीतिक परिसंपत्तियाँ साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील हैं। वर्ष 2019 में कुडनकुलम परमाणु संयंत्र पर हमला इस खतरे की वास्तविकता को उजागर करता है।
  4. डेटा उल्लंघन और गोपनीयता का संकट : भारत में सरकारी और निजी संस्थानों के डेटा में सेंधमारी अब आम बात हो गई है। एयर इंडिया डेटा ब्रीच (2021) में करीब 4.5 मिलियन यात्रियों की व्यक्तिगत जानकारी लीक हो गई थी।
  5. डीपफेक और गलत एवं भ्रामक सूचना की भरमार होना : AI आधारित डीपफेक टेक्नोलॉजी का उपयोग कर सामाजिक वैमनस्य, राजनीतिक भ्रम और चुनावी हेरफेर के प्रयास हो रहे हैं।
    2024 के लोकसभा चुनावों में कई राजनीतिक नेताओं के डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
  6. डार्क वेब के माध्यम से और संगठित साइबर अपराध और उग्रवाद को बढ़ावा देना : डार्क वेब के माध्यम से आतंकवाद, ड्रग्स, अवैध हथियारों और बिटकॉइन आधारित वित्तपोषण को बढ़ावा मिल रहा है। इस छद्म नेटवर्क का दायरा भारत में संगठित साइबर अपराध और उग्रवाद के लिये एक मंच बनता जा रहा है।

 

भारत के साइबर सुरक्षा ढाँचे की प्रमुख कमज़ोरियाँ :  

 

  1. अपर्याप्त कानूनी और नियामक ढाँचा का होना : भारत का आईटी अधिनियम, 2000 अब वर्तमान तकनीकी खतरों (AI, डीपफेक, रैनसमवेयर) के अनुरूप नहीं है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसका प्रभावी कार्यान्वयन अभी चुनौतीपूर्ण है।
  2. देश में कुशल साइबर पेशेवरों की भारी कमी का होना : नैसकॉम के अनुसार भारत को कम-से-कम 10 लाख साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान संख्या पचास प्रतिशत से भी कम है।
  3. भारतीय नागरिकों में साइबर जागरूकता / साक्षरता की कमी का होना : भारत के अधिकांश नागरिक अभी तक फिशिंग मेल, नकली वेबसाइट और कॉल फ्रॉड को पहचानने में सक्षम नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता का अभाव और कमजोर साइबर हाइजीन नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाता है।
  4. पुराने और असुरक्षित अवसंरचना प्रोटोकॉल का होना : बिजली, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी सेवाओं में अभी भी पुराने सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं। कई SMEs (लघु और मध्यम उद्योग) अपनी IT सुरक्षा में निवेश नहीं करते, जिससे वे आसानी से लक्षित हो सकते हैं।
  5. विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का होना : भारत में CERT-In, NCIIPC, I4C जैसी कई संस्थाएँ काम करती हैं, लेकिन उनके बीच अक्सर जानकारी साझा करने और कार्रवाई में समन्वय का अभाव रहता है। इससे समय रहते खतरे की पहचान करना और उससे संबंधित प्रतिक्रिया में देर होती है। फलतः समय पर खतरे की पहचान और प्रतिकार असंभव हो जाता है।

 

साइबर सुरक्षा को मज़बूत करने हेतु उठाए गए प्रमुख कदम : 

 

भारत सरकार ने हाल के वर्षों में साइबर सुरक्षा को मज़बूत करने हेतु कई महत्वपूर्ण पहल की हैं – 

 

विधायी पहल :  

 

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 – डिजिटल लेन-देन और साइबर अपराध से संबंधित मूल कानून।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 – व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा के लिए नवीन कानून।

 

संस्थागत ढाँचा : 

 

  • CERT-In (भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल)
  • NCIIPC (राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र)
  • I4C (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र)
  • साइबर स्वच्छता केंद्र
  • नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग प्रणाली (1930)

 

रणनीतिक योजनाएँ : 

 

  • राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, 2013
  • राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अभ्यास 2024
  • चक्षु और डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म – खतरों का वास्तविक समय में विश्लेषण।

 

समाधान की राह :

 

  1. कानूनी ढांचे का सशक्तीकरण करने की जरूरत : आईटी अधिनियम को आधुनिक तकनीकों जैसे कि AI, मशीन लर्निंग आधारित साइबर हमलों, डीपफेक और रैनसमवेयर के अनुसार अद्यतन करना चाहिए। डिजिटल डेटा संरक्षण कानून को केवल कागज पर नहीं, बल्कि कठोर अनुपालन और दंडात्मक प्रावधानों के साथ लागू किया जाए।
  2. संस्थागत और प्रशासनिक स्तर पर सुधार करने की आवश्यकता :  सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साइबर ऑडिट अनिवार्य किया जाए। ज़िला स्तर पर साइबर सुरक्षा इकाइयाँ बनाई जाएँ जो CERT-In के साथ समन्वय में कार्य करें। निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ PPP मॉडल के तहत साइबर सुरक्षा बढ़ाई जाए।
  3. महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा करने की जरूरत : बैंकों, रेलवे, ऊर्जा ग्रिड आदि में 2FA, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, और रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए। ज़ीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर को बढ़ावा देकर उसे अपनाया जाए जिसमें हर इंटरैक्शन को सत्यापित किया जाता है और हर उपयोगकर्ता और डिवाइस की बार-बार पुष्टि की जाती है।
  4. स्थानीय साइबर सुरक्षा में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की जरूरत : मेक इन इंडिया के तहत घरेलू साइबर सुरक्षा स्टार्टअप्स को फंडिंग और अनुसंधान सहायता दी जाए। भारतीय कंपनियाँ AI आधारित खतरे की पहचान प्रणाली विकसित करें, जिससे विदेशी सॉफ़्टवेयर पर निर्भरता घटे।
  5. साइबर साक्षरता जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत : राष्ट्रीय साइबर जागरूकता अभियान शुरू किया जाए जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को लक्षित करे। प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक साइबर सुरक्षा को शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। स्थानीय भाषाओं में जागरूकता सामग्री, प्रशिक्षण और साइबर हेल्पलाइन उपलब्ध कराई जाए।

 

निष्कर्ष :

 

  • भारत के लिए साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का एक अनिवार्य आधार बन चुका है। 
  • भारत जैसे-जैसे  डिजिटल शक्ति के रूप में वैश्विक मंच पर अग्रसर हो रहा है, वैसे-वैसे उसकी जिम्मेदारियाँ भी व्यापक होती जा रही हैं। देश की जनता की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैश्विक साइबर स्थिरता में सक्रिय योगदान देना भी अनिवार्य हो गया है।
  • इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारत को एक समग्र और बहु-आयामी रणनीति अपनानी होगी, जिसमें प्रभावी कानूनी ढांचा, संस्थागत दक्षता, व्यापक जन-जागरूकता, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का समावेश हो। 
  • भारत की डिजिटल प्रगति तभी सार्थक होगी जब उसकी साइबर सुरक्षा संरचना सुदृढ़ और सतत विकसित होती रहे।
  • आज साइबर खतरे केवल आर्थिक हानि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय संप्रभुता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक समरसता पर भी गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। अतः यह समय की मांग है कि भारत साइबर सुरक्षा को अपने राष्ट्रीय एजेंडे में सर्वोच्च प्राथमिकता दे और इसे नवाचार, नीतिगत संकल्प और जनसहभागिता के माध्यम से सशक्त बनाए।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. निम्नलिखित पर विचार कीजिए : 

  1. इंटरनेट की सार्वजानिक पहुँच का विस्तार
  2. डिजिटल भुगतान प्रणालियों का अत्यधिक प्रचलन होना 
  3. देश में सैन्य बजट में कमी होना 
  4. साइबर खतरों के प्रति आम जनमानस में जागरूकता का अभाव होना

उपर्युक्त में से भारत में साइबर हमलों की संवेदनशीलता बढ़ने के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हैं?

A. केवल 1, 2 और 3 

B. केवल 1, 2 और 4 

C. इनमें से कोई नहीं। 

D. उपरोक्त सभी। 

उत्तर – B

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. चर्चा कीजिए कि भारत में हालिया संसदीय रिपोर्ट के आलोक में बढ़ते साइबर खतरों और मौजूदा साइबर सुरक्षा ढांचे की कमियों को देखते हुए, साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए भारत को किन प्रमुख क्षेत्रों में नीति, बुनियादी ढांचे और क्षमताओं के स्तर पर सुधार करने की आवश्यकता है? ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 ) 

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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