G-20 शिखर सम्मेलन, 2025 जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका)

G-20 शिखर सम्मेलन, 2025 जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका)

यह लेख जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में G20 शिखर सम्मेलन, 2025 नेताओं के घोषणा-पत्र के साथ संपन्न हुआ पर आधारित है।  जो कि दैनिक समसामयिक मामलों से संबंधित है।

 

2025 के जोहान्सबर्ग G20 शिखर सम्मेलन ने Solidarity, Equality, Sustainability की थीम के अनुरूप वैश्विक दक्षिण की चिंताओं, जलवायु संक्रमण, आपदा प्रतिरोध तथा बहुपक्षीय संस्थागत सुधारों पर विशेष बल दिया। यह घोषणा-पत्र ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु आपदा-जोखिम, विकास वित्त की कमी और असमानता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। अतः इसके प्रावधान वैश्विक शासन को अधिक समावेशी, लचीला एवं भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

 

 

 

G20 के बारे में :

स्थापना :  G20 की स्थापना 1997-98 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद 1999 में की गई थी।
सदस्य : अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ।
उद्देश्य : सभी प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मुद्दों पर वैश्विक संरचना और गवर्नेंस को आकार देने एवं मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना।
वार्षिक शिखर सम्मेलन: G20 शिखर सम्मेलन का आयोजन वार्षिक रूप से होता है। इसकी अध्यक्षता चक्रीय रूप से हस्तांतरित की जाती है। सम्मेलन का नेतृत्व तत्कालीन G20 अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
इसके अध्यक्ष को ‘ट्रोइका’ द्वारा समर्थन प्रदान किया जाता है। ट्रोइका में शामिल हैं: G-20 का पिछला, वर्तमान और आगामी अध्यक्ष।
दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता के दौरान, G20 ट्रोइका के सदस्य ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं।

यह अफ्रीका में आयोजित होने वाला पहला G20 शिखर सम्मेलन था। इसकी थीम थी: एकजुटता, समानता, संधारणीयता  (Solidarity, Equality, Sustainability)।
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया था। इसके बावजूद भी G20 के नेताओं ने G20 घोषणा-पत्र को अपनाया।

घोषणा-पत्र के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर 

आपदा प्रतिरोध और ऋण वहनीयता : जन-केंद्रित आपदा प्रतिक्रिया; ऋणग्रस्त देशों के लिए समर्थन; सतत औद्योगीकरण और रोजगार पर बल।
जलवायु और ऊर्जा संक्रमण : नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार पर जोर, G20 महत्वपूर्ण खनिज फ्रेमवर्क (स्वैच्छिक) का समर्थन, और पेरिस समझौते के 1.5°C लक्ष्य एवं वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों की पुष्टि।
संस्थागत सुधार : UNSC (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) में सुधार और ‘उबंटू’ (Ubuntu) की भावना में निहित मजबूत बहुपक्षीय सहयोग का आह्वान।
उबंटू : पारस्परिक जुड़ाव एवं साझी मानवता पर बल।
अन्य : महिलाओं और लड़कियों के सशक्तीकरण पर प्रतिबद्धता को दोहराया गया, तथा आतंकवाद की सभी रूपों एवं अभिव्यक्तियों की निंदा की गई।

शिखर सम्मेलन में भारत द्वारा प्रस्तावित प्रमुख विचार

वैश्विक पारंपरिक ज्ञान रिपॉजिटरी : सामूहिक मानव बुद्धिमत्ता का उपयोग करना।
अफ्रीका स्किल्स मल्टीप्लायर : अफ्रीका में युवाओं के कौशल को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख प्रमाणित प्रशिक्षक तैयार करना।
वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल प्रतिक्रिया दल : वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से निपटने के लिए G20 स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम बनाना।
मुक्त उपग्रह डेटा भागीदारी : कृषि, मत्स्य पालन, आपदा प्रबंधन आदि के लिए उपग्रहों से डेटा साझा करना।
महत्वपूर्ण खनिज चक्रीयता पहल : पुनर्चक्रण, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा को बढ़ावा देना।
मादक पदार्थ-आतंकवाद गठजोड़ से निपटना : मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद से निपटने की पहल।
G20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर, भारत और इटली ने आतंकवाद के वित्त-पोषण से निपटने के लिए एक संयुक्त पहल को अपनाया।

G20 शिखर सम्मेलन का महत्व

1. आपदा-प्रतिरोध (Disaster Resilience) के महत्व
जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम घटनाएँ (Extreme Events) बढ़ रही हैं—जैसे बाढ़, सूखा, चक्रवात।
ग्लोबल साउथ के देश सीमित अवसंरचना क्षमता और वित्तीय संसाधनों के कारण अधिक संवेदनशील हैं।
घोषणा-पत्र में Early Warning Systems, Build Back Better, तथा Resilient Infrastructure Financing पर जोर दिया गया जिससे मानवीय और आर्थिक हानि कम करने का वैश्विक ढांचा मजबूत होता है।
यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग व तकनीक-साझेदारी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
2. जलवायु संक्रमण (Climate Transition) की प्राथमिकता
तापमान वृद्धि को 1.5°C सीमा में रखने के लिये नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, कार्बन बाजार और Just Energy Transition अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
G20 विश्व के कुल उत्सर्जन का लगभग 80% प्रतिनिधित्व करता है—अतः इसके निर्णय वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की पूर्ति के लिए निर्णायक हैं।
Johannesburg Declaration में ग्रीन फाइनेंस, टेक्नोलॉजी एक्सेस, और सस्टेनेबल सप्लाई-चेन के विस्तार पर बल दिया गया है, जो विकासशील देशों की जलवायु कार्रवाई क्षमता बढ़ाता है।
3. बहुपक्षीय संस्थागत सुधार (Institutional Reforms) का महत्व
वर्तमान वैश्विक संस्थाएँ—IMF, World Bank, WTO—वैश्विक दक्षिण की प्रतिनिधित्वात्मक जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही हैं।
घोषणा-पत्र में MDBs के पुनर्पूंजीकरण, Debt Restructuring Framework तथा Global Financial Safety Net की मजबूती पर सहमति बनी।
यह वैश्विक शासन को अधिक लोकतांत्रिक, पारदर्शी और विकासशील देशों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है।
4. वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं का उभार
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सुरक्षा, खाद्य-ऊर्जा-जल सुरक्षा जैसे मुद्दों को मुख्यधारा में लाया गया।
विकासशील देशों की आवाज़ को संस्थागत रूप से मान्यता देना और ‘South-South Cooperation’ को प्रोत्साहन मिलना वैश्विक शक्ति-संतुलन को अधिक न्यायसंगत बनाता है।
5. भारत की पहलों का योगदान (India’s Contribution)
(a) ग्लोबल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल
UPI, Aadhaar, CoWIN जैसी प्रणालियाँ वैश्विक स्तर पर inclusive digital governance का मॉडल प्रस्तुत करती हैं।
कई देशों में भारत की मदद से DPI सहयोगी मंच का विस्तार हो रहा है, जिससे वित्तीय समावेशन एवं सेवा वितरण में क्रांति आई है।
(b) आपदा जोखिम न्यूनीकरण
भारत द्वारा स्थापित Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI) एक वैश्विक मंच बन चुका है।
इसके माध्यम से अफ्रीकी व छोटे द्वीपीय देशों में क्षमता-निर्माण, resilient infrastructure planning और मानक तैयार किए जा रहे हैं।
(c) जलवायु संक्रमण में नेतृत्व
International Solar Alliance (ISA) तथा Global Biofuels Alliance को भारत ने आगे बढ़ाया—ये जलवायु वित्त और सस्ती स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं।भारत के Mission LiFE (Lifestyle for Environment) ने वैकल्पिक उपभोग मॉडल को वैश्विक एजेंडा बनाया।
(d) ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मंच देना
Voice of Global South Summit के माध्यम से भारत ने 125+ देशों की प्राथमिकताओं को G20 एजेंडा में शामिल कराया।
यह वैश्विक शासन को अधिक समावेशी बनाता है और बहुपक्षीय सुधारों की वैधता को बढ़ाता है।
(e) विकास वित्त एवं ऋण सुधारों में भूमिका
भारत ने USD 200 बिलियन अतिरिक्त MDB वित्त जुटाने, डिजिटल-फ्रेंडली फंडिंग मॉडल, तथा ऋण-पारदर्शिता सुधारों के समर्थन में अहम योगदान दिया।

निष्कर्ष :

2025 का जोहान्सबर्ग G20 शिखर सम्मेलन वैश्विक शासन को अधिक समावेशी, लचीला और भविष्य-उन्मुख दिशा में मोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ। आपदा-प्रतिरोध, जलवायु संक्रमण, संस्थागत सुधार और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर दिया गया बल वर्तमान वैश्विक असमानताओं और जलवायु संकट के बीच नई आशा प्रदान करता है। भारत की पहलों—DPI मॉडल, CDRI, ISA, LiFE एवं ग्लोबल साउथ सहयोग ने न केवल इस एजेंडा को समृद्ध किया बल्कि विश्व-स्तर पर विकास एवं शासन चुनौतियों के समाधान में ‘जिम्मेदार नेतृत्व’ का उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. 2025 जोहान्सबर्ग G20 शिखर सम्मेलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1.यह अफ्रीकी महाद्वीप में आयोजित होने वाला पहला G20 शिखर सम्मेलन था।
2.सम्मेलन की थीम Solidarity, Equality, Sustainability थी।
3.संयुक्त राज्य अमेरिका ने सम्मेलन का बहिष्कार किया, इसलिए G20 घोषणा-पत्र पारित नहीं हो सका।
4. भारत ने “अफ्रीका स्किल्स मल्टीप्लायर” पहल प्रस्तुत की, जिसका लक्ष्य 10 लाख प्रमाणित प्रशिक्षकों की तैयारी है।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 2 और 4
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (b)

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. 2025 जोहान्सबर्ग G20 शिखर सम्मेलन द्वारा अपनाई गई नेताओं की घोषणा-पत्र में आपदा प्रतिरोध, जलवायु संक्रमण, संस्थागत सुधार एवं वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को मजबूत किया गया है। हाल के संदर्भ में इन बिंदुओं के महत्व का विश्लेषण कीजिए तथा बताइए कि भारत द्वारा प्रस्तुत पहलें वैश्विक शासन एवं विकास चुनौतियों को संबोधित करने में किस प्रकार योगदान करती हैं। ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )

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