05 Dec 23वाँ भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन 2025
पाठ्यक्रम – GS – 2 अंतर्राष्ट्रीय संबंध GS paper 2 study plan
सुर्ख़ियों में क्यों?

- आजकल के इंटरनेशनल रिश्तों में भारत और रूस के बीच सबसे ज़्यादा समय से परखी हुई, मज़बूत और जियोपॉलिटिकली अहम पार्टनरशिप है।
- कोल्ड वॉर के समय से ही आपसी भरोसे और डिप्लोमैटिक मेलजोल पर आधारित यह रिश्ता अब पॉलिटिकल, डिफेंस, इकोनॉमिक, न्यूक्लियर, एनर्जी, कल्चरल और लोगों के बीच सहयोग को कवर करते हुए एक बड़े और मल्टीडाइमेंशनल जुड़ाव में बदल गया है। पिछले दो दशकों में, यह पार्टनरशिप एक स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप (2000) से एक स्पेशल और प्रिविलेज्ड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप (2010) में बदल गई है, जो इसकी बहुत गहरी और स्ट्रेटेजिक वैल्यू को दिखाती है।
- इस घोषणा-पत्र पर वर्ष 2000 में हस्ताक्षर किए गए थे। 22 वार्षिक शिखर सम्मेलनों, नियमित शासनाध्यक्ष-स्तरीय बैठकों, मंत्रिस्तरीय वार्ताओं और विभिन्न क्षेत्रकों के कार्य समूहों ने साझेदारी को संस्थागत रूप दिया है, जिससे निरंतरता और गंभीरता सुनिश्चित हुई है।
- इस घोषणा-पत्र के तहत एक पूर्ण रूप से नया फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिसने राजनीति, सुरक्षा, आर्थिक, रक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रकों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा दिया है।
भारत-रूस साझेदारी के प्रमुख स्तंभ:
- राजनीतिक और राजनयिक तालमेल: वार्षिक शिखर सम्मेलन इसका एक महत्वपूर्ण घटक है। शिखर सम्मेलनों के अलावा, दोनों देश मंत्रिस्तरीय आदान-प्रदान, 2+2 वार्ताओं और UN, G-20, BRICS, SCO जैसे साझा मंचों के माध्यम से भी घनिष्ठ रूप से समन्वय करते हैं।रूस भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करता है।
रक्षा और संरक्षा: रूस, भारत का सबसे बड़ा सैन्य उपकरण आपूर्तिकर्ता है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, 2020-24 के दौरान भारत के कुल रक्षा आयात का 36% हिस्सा रूस से आयात किया गया था। - इसमें S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, MiG-29K नेवल फाइटर एयरक्राफ्ट,जैसे उपकरण शामिल हैं।
दोनों देशों के रक्षा संबंध खरीदार-विक्रेता मॉडल से आगे बढ़कर उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के संयुक्त अनुसंधान, विकास और उत्पादन तक पहुंच गए हैं। जैसे– ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों का संयुक्त विकास।
दोनों देश संयुक्त रूप से सैन्य अभ्यास इंद्र (INDRA) और एवियाइंद्रा’ (Aviaindra) आयोजित करते हैं।
ऊर्जा सुरक्षा:
वर्तमान में, रूस भारत को सबसे अधिक कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला देश बन गया है। यह भारत को रियायती दरों पर तेल निर्यात करता है, जिससे मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिली है।
भारत की कुछ सबसे बड़ी सरकारी और निजी कंपनियों ने रूस के सुदूर पूर्व (RFE) क्षेत्र में स्थित तेल क्षेत्रों में निवेश किया है। इसमें ONGC द्वारा तेल और गैस परियोजना में किया गया निवेश भी शामिल है।
रूस भारत में, परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के विकास में सहयोग कर रहा है। जैसे- कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र, तमिलनाडु।
व्यापार और अर्थव्यवस्था: दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर 68.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है।
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
भारत से निर्यात की जाने वाली मुख्य वस्तुओं में औषधियां, कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन, लोहा और इस्पात आदि शामिल हैं।
रूस और भारत के बीच 90% व्यापार स्थानीय मुद्रा अर्थात रूबल और रुपये में होता है।
संपर्क: रूस अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC), उत्तरी समुद्री मार्ग और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक पूर्वी समुद्री गलियारा जैसी परियोजनाओं के माध्यम से मध्य एशिया और विस्तृत यूरेशिया के साथ भारत के संपर्क को बढ़ा सकता है।
तकनीकी क्षमता में वृद्धि करना: उदाहरण के लिए- अंतरिक्ष क्षेत्रक में, यह भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान में सहयोग कर रहा है।
सांस्कृतिक संबंध और लोगों के बीच जुड़ाव: भारतीय सिनेमा ने एक समय सोवियत संघ के दर्शकों को मोहित कर लिया था। रूसी बैले आज भी भारत में प्रशंसनीय है, वहीं योग पूरे रूस में बहुत अधिक लोकप्रिय है। इस प्रकार दोनों देशों के मध्य दीर्घकालिक सद्भावपूर्ण संबंध बने हुए हैं।
भारत-रूस संबंधों के समक्ष उपस्थित चुनौतियां :
व्यापार असंतुलन: व्यापार संतुलन रूस के पक्ष में बना हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रूस से आयात लगभग 63.84 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि निर्यात 4.88 बिलियन अमेरिकी डॉलर का हुआ।
रुपये के अधिशेष की समस्या: व्यापार असंतुलन की वजह से वित्तीय चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं, क्योंकि भारतीय बैंकों में स्पेशल रुपी वोस्ट्रो अकाउंट्स (SRVAs) में अरबों भारतीय रुपये संचित हो गए हैं।
रूसी विदेश मंत्री ने इस अधिशेष को एक “समस्या” बताया, क्योंकि रूस पश्चिमी वित्तीय प्रणाली के बाहर अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन के लिए इन निधियों का उपयोग नहीं कर सकता है।
रक्षा आयात में गिरावट: यह मुख्य रूप से भारत के हथियारों के आयात में आई विविधता के कारण हुआ है। अब भारत इजराइल, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से हथियार खरीद रहा है। साथ ही, भारत हथियारों के स्वदेशीकरण के लिए भी प्रयास कर रहा है।
23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के मुख्य परिणाम क्या हैं ?
आर्थिक कार्यक्रम 2030: दोनों देशों ने ऊर्जा और रक्षा से आगे व्यापार में विविधता लाने के लिए “2030 तक भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास के लिए कार्यक्रम” अपनाया।
व्यापार लक्ष्य: दोनों पक्षों ने 2030 तक $100 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य निर्धारित किया। 2024-25 में यह व्यापार $68.7 बिलियन था।
वस्तुओं एवं सेवाओं के प्रवाह को सुगम बनाने के लिए भारत और यूरेशियाई आर्थिक संघ (EAEU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता को तीव्र किया गया।
भुगतान तंत्र: पश्चिमी देशों की भुगतान प्रणालियों पर निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं में द्विपक्षीय लेन-देन निपटान का विस्तार करने तथा भुगतान प्रणालियों और सेंट्रल बैंक डिजिटल कर्रेंसीज़ (CBDCs) की अंतर-संचालनीयता (interoperability) पर सहमति बनी।
ऊर्जा: रूस ने बाधारहित तेल एवं गैस आपूर्ति और भारत के असैन्य परमाणु कार्यक्रम (कुडनकुलम, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर आदि) के लिए निरंतर समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई।
रक्षा और सुरक्षा: संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D), सह-उत्पादन (मेक इन इंडिया का समर्थन), सैन्य अभ्यास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स: INSTC (अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा), चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर और उत्तरी समुद्री मार्ग पर सहयोग बढ़ाया गया।
आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ध्रुवीय जल (Polar Waters) में संचालित होने वाले जहाजों हेतु विशेषज्ञों के प्रशिक्षण पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
अंतर्राष्ट्रीय मंचों में सहयोग: रूस औपचारिक रूप से भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (IBCA) में शामिल हुआ।
लोगों के बीच संबंध: कुशल भारतीय कामगारों के लिए प्रवासन और आवागमन पर समझौता ज्ञापन, रूसी नागरिकों के लिए 30-दिवसीय वीजा-मुक्त ई-पर्यटक प्रवेश, आदि।
भू-राजनीतिक प्राथमिकताएँ:
भारत-अमेरिका के बीच तालमेल: भारत तेजी से पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के साथ जुड़ाव बढ़ा रहा है। उदाहरण के लिए, क्वाड जैसा सुरक्षा संबंध।
रूस-चीन के बढ़ते संबंध: 2022 में, रूस और चीन ने “नो लिमिट्स” पार्टनरशिप की घोषणा की। इसके अंतर्गत घनिष्ठ राजनीतिक, सुरक्षात्मक और आर्थिक जुड़ाव की रूपरेखा तैयार की गई है।
पाकिस्तान के साथ रूस के बेहतर होते संबंध: उदाहरण के लिए, पाकिस्तान और रूस के बीच हालिया सहयोग में संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास और नौसैनिक अभ्यास जैसी रक्षा पहल शामिल हैं।
अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध: S-400 सौदे के बाद से भारत ने रूस के साथ कोई बड़ा सैन्य समझौता नहीं किया है, ताकि अमेरिका द्वारा अपने प्रतिद्वंदियों का विरोध हेतु बनाए गए दंडात्मक अधिनियम (CAATSA), 2017 के तहत लगाए जाने वाले प्रतिबंध से बचा जा सके।CAATSA तीन देशों, नामतः रूस, ईरान और उत्तर कोरिया के साथ सौदा करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।
भारत रूस और अमेरिका के साथ अपने संबंधों को कैसे संतुलित कर रहा है?
भारत कभी-कभी स्वयं को अमेरिका और रूस के हितों के बीच फंसा हुआ पाता है।
हाल ही में अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर प्रशुल्क (टैरिफ) लगाया है। वह भारत पर यूक्रेन में चल रहे रूस के युद्ध को वित्तपोषित करने का आरोप लगाता है।
ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए भारत का दृष्टिकोण
रणनीतिक स्वायत्तता का पालन करना: भारत एक लचीली विदेश नीति अपनाता है। इसके अंतर्गत वह अमेरिका और रूस दोनों के साथ संबंधों में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। यह दृष्टिकोण रणनीतिक स्वायत्तता और व्यावहारिक नीतियों पर आधारित है।
उदाहरण , यूक्रेन-रूस संघर्ष के मामले में, भारत ने UNSC के एक प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जिसमें यूक्रेन के विरुद्ध रूसी सैन्य कार्रवाई की निंदा की गई थी।
राष्ट्रीय हितों पर आधारित संबंध: अतिरिक्त प्रशुल्क लगाने के बावजूद, भारत ने रूस के साथ गहरे संबंध बनाए रखे हैं।
इसके साथ ही, BRICS, SCO और G-20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत की मूक कूटनीति ने उसे ग्लोबल साउथ और प्रतिस्पर्धी शक्ति समूहों के बीच एक सेतु बने रहने में मदद की है।
रुपये का अंतर्राष्ट्रीयकरण: रूस पर लगे प्रतिबंधों से निपटने के लिए, भारत रुपये या रूबल में व्यापार जैसे वैकल्पिक भुगतान माध्यमों को अपना रहा है।
भारत–रूस संबंधों की समयरेखा (1947–2025) —
| वर्ष | प्रमुख घटना / समझौता | महत्व |
|---|---|---|
| 1947 | भारत–सोवियत संघ के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना | द्विपक्षीय संबंधों की शुरुआत |
| 1975 | भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट सोवियत सोयूज़ द्वारा प्रक्षेपित | स्पेस सहयोग की शुरुआत |
| 1988 | कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र समझौता | न्यूक्लियर एनर्जी पार्टनरशिप की नींव |
| 1993 | मैत्री और सहयोग संधि | पोस्ट–सोवियत युग में संबंधों का पुनर्निर्माण |
| 2000 | स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा | संबंधों को औपचारिक रणनीतिक स्तर |
| 2010 | विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी (SPSP) | भारत के सबसे ऊँचे स्तर की साझेदारी |
| 2014 | “दिशा-निर्देश और रोडमैप 2020” | रक्षा, ऊर्जा व व्यापार में लक्ष्य निर्धारण |
| 2016 | S-400 मिसाइल डील की घोषणा | प्रमुख रक्षा सहयोग |
| 2018 | भारत–रूस ऊर्जा ब्रिज और फार ईस्ट निवेश | एक्ट फ़ार-ईस्ट पॉलिसी में रूस की भूमिका |
| 2021 | पहली 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता | विदेश + रक्षा मंत्रियों की संयुक्त बैठक |
| 2022 | रूस–यूक्रेन युद्ध के बीच भारत का संतुलित रुख, तेल आयात में वृद्धि | ऊर्जा सुरक्षा और हित संरक्षण |
| 2023 | ब्रिक्स में विस्तार का समर्थन; रूस के साथ आर्थिक सहयोग निरंतर | मल्टी-पोलर विश्व में तालमेल |
| 2024 | चंद्रयान और गगनयान सहयोग वार्ताएँ पुनर्जीवित; अपतटीय ऊर्जा चर्चा | विज्ञान–तकनीक सहयोग |
| 2025 | भारत-रूस व्यापार लक्ष्य 50 बिलियन USD के करीब, डिफेंस को-प्रोडक्शन पर प्रगति | आर्थिक + रक्षा संबंधों की मजबूती |
आगे की राह :
आपसी विश्वास बढ़ाना: रूस-चीन और भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच दोनों देशों को आपसी विश्वास को मजबूत करने की आवश्यकता है।
टियर II कूटनीति को मजबूत करना: नई पीढ़ी और शैक्षणिक समुदाय के साथ भी संपर्क मजबूत करना और रूस में भारतीय पत्रकारों को भेजना।
व्यापार में विविधता लाना: भारत-रूस व्यापार में तेल से आगे बढ़कर सूचना प्रौद्योगिकी, कपड़ा, कृषि जैसे पारंपरिक क्षेत्रक के उत्पादों को भी शामिल करना चाहिए। इससे रूस में भारत का निर्यात बढ़ेगा।
संयुक्त अनुसंधान और सह-विकास को बढ़ावा देना: ब्रह्मोस मिसाइल और AK-203 राइफल्स जैसी पिछली सफलताओं के आधार पर, भविष्य में अगली पीढ़ी की रक्षा टेक्नोलॉजी पर केंद्रित सहयोग बढ़ाना चाहिए।
यूरेशियाई आर्थिक संघ (EAEU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देना: रूस EAEU का एक अहम सदस्य है।
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना: रूस, भारत को स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) विकसित करने में मदद कर सकता है।
अन्य: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना।
निष्कर्ष :
भारत-रूस संबंधों का भविष्य दोनों देशों की अपनी साझेदारी को उभरती हुई वैश्विक वास्तविकताओं के अनुसार ढालने की क्षमता पर निर्भर करता है। अतः रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रकों से आगे बढ़कर तकनीकी, नवाचार और लोगों के बीच संबंधों तक साझेदारी का विस्तार करना चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. नीचे दिए गए जोड़ों पर विचार कीजिए:
भारत-रूस सहयोग क्षेत्र — संबंधित पहल / व्यवस्था
1. ऊर्जा सुरक्षा — व्लादिवोस्तोक–चेननई मैरीटाइम कॉरिडोर
2. रक्षा क्षेत्र — ब्रह्मोस मिसाइल जॉइंट वेंचर
3. स्पेस कूटनीति — रूस द्वारा इसरो को GLONASS नेविगेशन एक्सेस
4. साइबर सुरक्षा — इंडिया-रूस इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी समझौता (2021)
सही मैच किए हुए जोड़े कौन-से हैं?
(a) 1 और 2 ही
(b) 2, 3 और 4 ही
(c) 1, 2 और 4 ही
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (d)
व्याख्या:
चारों ही सहयोग क्षेत्र वास्तविक और आधिकारिक भारत-रूस साझेदारी से जुड़े हैं—ऊर्जा, रक्षा, स्पेस और साइबर सुरक्षा सभी सहयोग के मान्य क्षेत्र हैं।
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. बदलती वैश्विक शक्ति-संतुलन, पश्चिम-रूस तनाव, चीन-रूस निकटता और भारत के बहुध्रुवीय विदेश नीति दृष्टिकोण के संदर्भ में भारत-रूस ‘विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ के बदलते महत्व का आकलन कीजिए। प्रमुख सहयोग क्षेत्रों, उभरती चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालिए। ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )
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