16 Dec हिंद महासागर में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका (India leading role in the Indian Ocean)
सतत हिंद महासागर में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका (India leading role in the Indian Ocean)
पाठ्यक्रम : जीएस 3 – भारतीय अर्थव्यवस्था
परिचय :

- हिंद महासागर (Indian Ocean) विश्व का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है, जो एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया को जोड़ते हुए वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री जैव विविधता की रीढ़ है। आज वैश्विक व्यापार का लगभग 80% समुद्री मार्गों से होता है, जिसमें हिंद महासागर की केंद्रीय भूमिका है।
- नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) महासागरों और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग द्वारा आर्थिक विकास, आजीविका सृजन और पारिस्थितिक संरक्षण को बढ़ावा देने की अवधारणा है। इसमें मत्स्यन, अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा, समुद्री पर्यटन, जैव-प्रौद्योगिकी और हरित शिपिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
- भारत, हिंद महासागर के केंद्र में स्थित होने के कारण, इस क्षेत्र में स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। भारत का दृष्टिकोण “हिंद महासागर से, विश्व के लिए” है, जो प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग, समावेशन और सतत विकास पर आधारित है। यह प्रधानमंत्री के SAGAR (Security and Growth for All in the Region) विज़न और MAHASAGAR सिद्धांत से प्रेरित है।
हिंद महासागर क्षेत्र में उभरती प्रमुख चुनौतियाँ :

1. जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
महासागरों का तापमान बढ़ रहा है, जिससे समुद्र-स्तर वृद्धि, महासागरीय अम्लीकरण और चरम मौसमी घटनाएँ बढ़ रही हैं।
तीव्र चक्रवात एवं Storm Surges तटीय बुनियादी ढांचे और आजीविकाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
प्रवाल भित्तियों का क्षरण मत्स्य संसाधनों को कमजोर कर रहा है।
2. पारिस्थितिक क्षरण
IUU (Illegal, Unreported and Unregulated) Fishing से मछली स्टॉक्स में गिरावट।
जैव विविधता का ह्रास और समुद्री खाद्य श्रृंखला पर दबाव।
3. सामाजिक-आर्थिक अस्थिरता
तटीय और द्वीपीय देशों में आजीविका संकट और संभावित जलवायु-जनित विस्थापन।
छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के लिए अस्तित्व का संकट।
4. सुरक्षा संबंधी खतरे
समुद्री तस्करी, मानव दुर्व्यापार, समुद्री आतंकवाद, और WMD प्रसार।
2008 का मुंबई हमला समुद्री सुरक्षा की कमजोरी का उदाहरण है।
भारत की सतत ब्लू इकोनॉमी रणनीति
1. सहकारी समुद्री शासन (Cooperative Ocean Governance)
जैव विविधता संरक्षण, सतत मत्स्यन और साझा समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता।
MAHASAGAR सिद्धांत के तहत IORA, BIMSTEC, IONS जैसे मंचों को सक्रिय बनाना।
प्रतिस्पर्धी दोहन के बजाय साझा प्रबंधन का मॉडल।
2. जलवायु समुत्थानशीलता और नवाचार
क्षेत्रीय प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ और महासागर पर्यवेक्षण नेटवर्क को मजबूत करना।
एक क्षेत्रीय महासागर नवाचार एवं अनुकूलन केंद्र की स्थापना।
अंतरिक्ष तकनीक और उपग्रह डेटा (ISRO) का उपयोग।
3. समावेशी एवं हरित विकास
ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर
अपतटीय पवन और ज्वारीय ऊर्जा
संधारणीय जलीय कृषि
समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी और ब्लू स्टार्ट-अप्स
‘नीली क्रांति’ के माध्यम से मछुआरों की आय वृद्धि।
4. वित्तीय संसाधन जुटाना
Blue Economy and Finance Forum (BEFF) 2025
One Ocean Partnership (COP-30 में प्रारंभ) — 2030 तक 20 बिलियन डॉलर का लक्ष्य
क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के लिए Indian Ocean Blue Fund की स्थापना।
भारत के लिए हिंद महासागर का रणनीतिक महत्व
- भारत का 95% (मात्रा) और 68% (मूल्य) व्यापार हिंद महासागर से। और कच्चे तेल का लगभग 80% आयात समुद्री मार्गों से।
- संसाधन निर्भरता 2.02 मिलियन वर्ग किमी EEZ और 11,000 किमी तटरेखा।
- मध्य हिंद महासागर में पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स (Mn, Co, Ni, Cu) के अन्वेषण अधिकार
- सुरक्षा आयामसमुद्री संचार मार्गों (SLOCs) की सुरक्षा।
- नौसेना का Mission-Based Deployment और HADR भूमिका।
हिंद महासागर भारत की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण है:
आर्थिक महत्व: भारत का 95% मात्रा और 68% मूल्य व्यापार हिंद महासागर से होता है। 80% कच्चा तेल आयात समुद्री मार्ग से आता है, जो स्ट्रेट ऑफ मलक्का और होर्मुज जैसे चोक पॉइंट्स से गुजरता है।
संसाधन निर्भरता: 2.02 मिलियन वर्ग किमी EEZ और 11,000 किमी तटरेखा के साथ, भारत मत्स्यन पर निर्भर है। मध्य हिंद महासागर में मैंगनीज, कोबाल्ट, निकल और तांबे के खनन अधिकार भारत को प्राप्त हैं, जो ISA (International Seabed Authority) के तहत हैं।
सुरक्षा जोखिम: तस्करी, IUU मत्स्यन, मानव दुर्व्यापार और WMD प्रसार जैसे खतरे। 2008 का मुंबई हमला इसका उदाहरण है। भारत की नौसेना ‘मिशन-बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ से क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करती है। ये पहलू भारत को ‘क्वाड’ (QUAD) और IONS (Indian Ocean Naval Symposium) जैसे मंचों पर मजबूत बनाते हैं।
भारत की नीली अर्थव्यवस्था रणनीति और प्रमुख सरकारी योजनाएं :
भारत की नीली अर्थव्यवस्था रणनीति सहकारी प्रबंधन, जलवायु समुत्थानशीलता और समावेशी विकास पर केंद्रित है। सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं जो हिंद महासागर क्षेत्र में सतत नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं:
1. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY):
2020 में शुरू, ₹20,050 करोड़ की निवेश वाली यह योजना मत्स्य उत्पादन को 220 लाख टन तक बढ़ाने, निर्यात को दोगुना करने और 55 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य रखती है।
सतत मत्स्यन, जलीय कृषि (Aquaculture), कोल्ड चेन, हैचरी और मछुआरों के कल्याण पर फोकस।
हिंद महासागर में IUU मत्स्यन से निपटने और आजीविका मजबूत करने में महत्वपूर्ण। 2025 तक मछली उत्पादन दोगुना करने में योगदान।
2. सागरमाला परियोजना (Sagarmala Project):
बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, तटीय बुनियादी ढांचा विकास और पोर्ट-लेड इंडस्ट्रियलाइजेशन।
हरित पोत परिवहन (Green Shipping) और तटीय समुदाय विकास को बढ़ावा।
व्यापार दक्षता बढ़ाकर हिंद महासागर मार्गों को मजबूत करती है।
3. डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission):
₹4,077 करोड़ की योजना, गहन समुद्र खनिज (पॉलीमेटालिक नोड्यूल्स जैसे मैंगनीज, कोबाल्ट) अन्वेषण और प्रौद्योगिकी विकास।
समुद्रयान (Manned Submersible) और जैव विविधता संरक्षण।
नीली अर्थव्यवस्था में अपतटीय ऊर्जा और खनिजों का सतत उपयोग सुनिश्चित करती है।
4. फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF):
मत्स्यन बुनियादी ढांचे (हार्बर, कोल्ड स्टोरेज) के लिए ₹7,522 करोड़ का फंड, 2025-26 तक विस्तारित।
सतत मत्स्यन और मूल्य श्रृंखला मजबूती।
5. अन्य पहलें:
सीवीड मिशन: समुद्री शैवाल उत्पादन बढ़ाकर जैव प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन।
O-SMART योजना: महासागर सेवाएं, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी।
EEZ रूल्स 2025: अनन्य आर्थिक क्षेत्र में सतत मत्स्यन के लिए नियम।
निष्कर्ष :
भारत की नेतृत्वकारी भूमिका केवल शक्ति-प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि सहयोगी, समावेशी और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा देने में निहित है। “हिंद महासागर से, विश्व के लिए” का दृष्टिकोण वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को समुद्री शासन में लागू करता है। सतत नीली अर्थव्यवस्था के माध्यम से भारत न केवल क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है, बल्कि वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों (SDG-14) की प्राप्ति में भी निर्णायक योगदान दे सकता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.निम्नलिखित में से कौन-से तत्व भारत की ब्लू इकोनॉमी रणनीति का हिस्सा हैं?
1. सतत मत्स्यन और IUU मत्स्यन पर नियंत्रण
2. हरित पोत परिवहन और अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा
2. महासागरीय संसाधनों का अनियंत्रित दोहन
4. क्षेत्रीय पूर्व-चेतावनी प्रणालियों का विकास
सही उत्तर चुनिए:
(a) 1, 2 और 4
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (a)
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. “हिंद महासागर क्षेत्र में नीली अर्थव्यवस्था के सतत विकास हेतु भारत की भूमिका निर्णायक है।” इस कथन के आलोक में भारत की रणनीति, चुनौतियाँ और आगे की राह का विश्लेषण कीजिए। (150/250 शब्द)
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