02 Jan भारत का एआई (AI) मिशन 2047 : डिजिटल संप्रभुता और समावेशी विकास का आधार
भारत का एआई (AI) मिशन 2047 : डिजिटल संप्रभुता और समावेशी विकास का आधार
इस लेख में “भारत का एआई (AI) मिशन 2047 : डिजिटल संप्रभुता और समावेशी विकास का आधार पर केंद्रित है। जो कि दैनिक समसामयिक मामलों से संबंधित है।
पाठ्यक्रम : जीएस-3 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी
प्रारंभिक परीक्षा के लिए
एआईकोश क्या है? यह भारत के एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने में कैसे मदद करता है?
मुख्य परीक्षा के लिए
इंडिया एआई मिशन क्या है? इसके प्रमुख उद्देश्यों और भारत के तकनीकी विकास के लिए इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।
परिचय :
21वीं सदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आर्थिक विकास, सुशासन और सामाजिक परिवर्तन का एक प्रमुख चालक बनकर उभरी है। भारत, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, एआई को अपनी विकास यात्रा का अभिन्न अंग बना रहा है। इंडिया एआई मिशन, जो मार्च 2024 में ₹10,371.92 करोड़ के बजट के साथ स्वीकृत हुआ, भारत को एक एआई महाशक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मिशन डिजिटल संप्रभुता, समावेशी विकास और नैतिक नवाचार पर केंद्रित है। इस लेख में हम इंडिया एआई मिशन के उद्देश्यों और महत्व का विश्लेषण करेंगे तथा मूल्यांकन करेंगे कि यह विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में किस प्रकार योगदान देता है।
मुख्य बिंदु
- इंडिया एआई मिशन के लिए पांच वर्षों के दौरान में ₹10,300+ करोड़ आवंटित किए गए, जिसमें 38,000 जीपीयू लगाई गईं।
- प्रौद्योगिकी तथा एआई पारिस्थितिकी तंत्र में 6 मिलियन लोग कार्यरत हैं।
- इस वर्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्र का राजस्व 280 बिलियन डॉलर को पार कर जाने का अनुमान है।
- एआई 2035 तक भारत की अर्थव्यवस्था में 1.7 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकता है।

इंडिया एआई मिशन क्या है?
इंडिया एआई मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए डिजाइन की गई है। यह मिशन सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है: इंडिया एआई कंप्यूट, इंडिया एआई एप्लीकेशन डेवलपमेंट, एआईकोश (राष्ट्रीय एआई डेटासेट प्लेटफॉर्म), इंडिया एआई फाउंडेशन मॉडल, इंडिया एआई फ्यूचर स्किल्स, इंडिया एआई स्टार्टअप वित्तपोषण, तथा सुरक्षित और भरोसेमंद एआई।
यह मिशन बड़े पैमाने पर जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) अवसंरचना का निर्माण करता है, स्वदेशी डेटा क्षमताओं को बढ़ावा देता है और जिम्मेदार एआई नवाचार को प्रोत्साहित करता है। भाषिनी, भारतजेन और एआईकोश जैसी पहलें बहुभाषी, किफायती और नैतिक एआई को बढ़ावा देती हैं, जो शासन, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई का एकीकरण सुनिश्चित करती हैं। स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल 2025 के अनुसार, भारत एआई प्रतिस्पर्धा में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है, जो इसके मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, प्रतिभा आधार और प्रगतिशील शासन ढांचे का प्रमाण है।
इंडिया एआई मिशन के प्रमुख उद्देश्य :
इंडिया एआई मिशन के उद्देश्य बहुआयामी हैं, जो एआई को समावेशी और संप्रभु तरीके से विकसित करने पर केंद्रित हैं। मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करना: मिशन का उद्देश्य स्वदेशी बड़े बहुविध मॉडल (एलएमएम) विकसित करना है, जो भारतीय भाषाओं और डेटासेट पर आधारित हों। इससे विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम होगी और सांस्कृतिक संदर्भ को बनाए रखा जाएगा। उदाहरण के लिए, भारतजेन (आईआईटी बॉम्बे) और सर्वम एआई जैसे मॉडल डेटा संप्रभुता को मजबूत करते हैं।
समावेशी विकास को बढ़ावा देना: एआई को ऐसे क्षेत्रों में लागू करना जहां सामाजिक असमानताएं अधिक हैं, जैसे अनौपचारिक श्रमिकों (लगभग 490 मिलियन) के लिए आजीविका, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक समावेशन। नीति एंकर जैसे NITI Aayog की ‘समावेशी सामाजिक विकास के लिए एआई’ पहल वॉइस-फर्स्ट इंटरफेस, माइक्रो-क्रेडेंशियल्स और स्मार्ट अनुबंधों का उपयोग करती है।
नवाचार और इकोसिस्टम का विस्तार: एआईकोश प्लेटफॉर्म सरकारी और गैर-सरकारी डेटासेट को एकीकृत करता है, जो एआई डेवलपर्स के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करता है। साथ ही, 38,000 जीपीयू की तैनाती और ₹65 प्रति घंटा की रियायती दर पर सुविधा स्टार्टअप्स, अकादमिक संस्थानों और लघु उद्यमों को सशक्त बनाती है।
जिम्मेदार और सुरक्षित एआई: पूर्वाग्रह कम करने, व्याख्यात्मकता, गोपनीयता और एआई ऑडिटिंग पर जोर। इंडिया एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट की स्थापना नैतिक एआई को सुनिश्चित करती है।
कौशल विकास और रोजगार सृजन: 13,500 शोधार्थियों के लिए फैलोशिप, टियर 2/3 शहरों में एआई लैब और सैकड़ों प्रयोगशालाओं का नेटवर्क। एनईपी 2020 के तहत छठी कक्षा से एआई मॉड्यूल और दीक्षा, युवाई कार्यक्रम समावेशिता बढ़ाते हैं।
क्षेत्रीय अनुप्रयोगों का विकास: स्वास्थ्य (रोग निदान, टेलीमेडिसिन), कृषि (कीट निगरानी, मौसम पूर्वानुमान), शिक्षा, शासन (ई-कोर्ट में एआई उपयोग) और जलवायु प्रबंधन (Mausam GPT) जैसे क्षेत्रों में एआई समाधान।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वित्तपोषण: स्टेशन एफ और एचईसी पेरिस के साथ साझेदारी से स्टार्टअप्स का वैश्विक विस्तार।
इंडिया एआई मिशन का महत्व :
इंडिया एआई मिशन का महत्व भारत की तकनीकी और आर्थिक स्वतंत्रता में निहित है। यह न केवल एआई इकोसिस्टम को मजबूत करता है बल्कि सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम करने में भी योगदान देता है।
आर्थिक विकास: एआई विभिन्न क्षेत्रों जैसे बीएफएसआई (धोखाधड़ी पहचान), स्वास्थ्य (दवा खोज), औद्योगिक (स्वचालन) और खुदरा (मांग पूर्वानुमान) में उत्पादकता बढ़ाता है। इससे भारत की जीडीपी में एआई का योगदान 2030 तक 10% तक पहुंच सकता है।
डिजिटल शासन: एआई ई-कोर्ट, न्याय अनुवाद और पारदर्शिता बढ़ाता है। किसान ई-मित्र जैसे उपकरण किसानों की आय और जलवायु लचीलापन बढ़ाते हैं।
समावेशी विकास: प्रकृति मिशन जैसे कार्यक्रम अनौपचारिक क्षेत्र को डिजिटलीकरण करते हैं, ब्लॉकचेन और डिजिटल भुगतान से वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करते हैं।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारत की STEM प्रतिभा और अनुसंधान इकोसिस्टम से एआई में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है, जो मिशन के महत्व को रेखांकित करता है।हालांकि, चुनौतियां जैसे डेटा गोपनीयता, पूर्वाग्रह और डिजिटल विभाजन मौजूद हैं, लेकिन मिशन का नैतिक ढांचा इन्हें संबोधित करता है।
विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में योगदान :
विकसित भारत 2047 का दृष्टिकोण एक समृद्ध, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का है, जहां एआई एक आधारशिला की भूमिका निभाता है। इंडिया एआई मिशन इस दृष्टिकोण में निम्न प्रकार योगदान देता है:
आत्मनिर्भरता और संप्रभुता: स्वदेशी मॉडल और जीपीयू अवसंरचना से भारत विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करेगा, जो 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।
समावेशी विकास: 490 मिलियन अनौपचारिक श्रमिकों को सशक्त बनाकर, मिशन सामाजिक न्याय सुनिश्चित करता है। शिक्षा और कौशल विकास से युवा आबादी (65% से अधिक) को तैयार किया जाएगा, जो 2047 तक भारत को एक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाएगा।
पर्यावरण और जलवायु: Mausam GPT और एआई-आधारित आपदा प्रबंधन से जलवायु परिवर्तन का मुकाबला होगा, जो सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप है।
आर्थिक गुणक: एआई नवाचार से स्टार्टअप्स और रोजगार सृजन होगा, जो 2047 तक भारत को $30 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा।
कार्यान्वयन रोडमैप: 2025-26 में रूपरेखा, 2026-27 में शासन ढांचा, 2027-29 में पायलट और 2029 से राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन से मिशन 2047 के लक्ष्यों से जुड़ता है। मिशन एआई को विघटनकारी शक्ति के बजाय विकास के गुणक के रूप में उपयोग करता है, जो सुनिश्चित करता है कि कोई नागरिक पीछे न छूटे।
निष्कर्ष:
इंडिया एआई मिशन भारत की एआई यात्रा में एक मील का पत्थर है, जो नवाचार, समावेशन और शासन के संतुलन को दर्शाता है। इसके उद्देश्य डिजिटल संप्रभुता और समावेशी विकास पर केंद्रित हैं, जबकि महत्व आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन में निहित है। विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में यह योगदान देकर भारत को एक वैश्विक एआई नेता बनाता है। हालांकि, सफलता के लिए निरंतर निवेश, नैतिक दिशानिर्देश और सार्वजनिक-निजी साझेदारी आवश्यक है। एआई के माध्यम से भारत न केवल तकनीकी उन्नति करेगा बल्कि एक न्यायपूर्ण और समृद्ध समाज का निर्माण भी करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. इंडिया एआई मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1.इंडिया एआई मिशन का उद्देश्य भारतीय डेटासेट और भाषाओं पर प्रशिक्षित स्वदेशी बड़े मल्टीमॉडल मॉडल विकसित करना है।
2.एआईकोश एक राष्ट्रीय मंच है जो एआई नवाचार का समर्थन करने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी डेटासेट को एकीकृत करता है।
3.इंडिया एआई कंप्यूट पिलर के तहत, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों को बाजार द्वारा निर्धारित व्यावसायिक दरों पर हाई-एंड जीपीयू उपलब्ध कराए जाते हैं।
4. इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत सुरक्षित और विश्वसनीय एआई पूर्वाग्रह को कम करने, व्याख्यात्मकता और गोपनीयता बनाए रखने वाली मशीन लर्निंग जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है।ऊपर दिए गए कथनों में से कौन से कथन सही हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1, 2 और 4
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (B) केवल 1, 2 और 4
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. भारत में समावेशी विकास और डिजिटल शासन के प्रमुख प्रवर्तक के रूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता उभर रही है। इस संदर्भ में, इंडिया एआई मिशन के उद्देश्यों और महत्व का विश्लेषण करें और मूल्यांकन करें कि यह भारत के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में किस प्रकार योगदान देता है। ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )
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