खुले समुद्र पर संयुक्त राष्ट्र संधि (High Seas Treaty / BBNJ Agreement)

खुले समुद्र पर संयुक्त राष्ट्र संधि (High Seas Treaty / BBNJ Agreement)

खुले समुद्र पर संयुक्त राष्ट्र संधि (High Seas Treaty / BBNJ Agreement)

पाठ्यक्रम : सामान्य अध्ययन-III भारतीय अर्थव्यवस्था 

पृष्ठभूमि : 

राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों (Areas Beyond National Jurisdiction – ABNJ) की समुद्री जैव विविधता के संरक्षण हेतु संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 में एक ऐतिहासिक संधि को अपनाया, जिसे सामान्यतः High Seas Treaty या BBNJ Agreement कहा जाता है। यह संधि उन समुद्री क्षेत्रों पर लागू होती है जो किसी भी देश की राष्ट्रीय समुद्री सीमा से बाहर हैं, अर्थात खुला समुद्र (High Seas) और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नितल क्षेत्र (International Seabed Area)।

हाई सीज (High Seas) क्या हैं?

वे समुद्री क्षेत्र जो किसी भी देश के राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र में नहीं आते।
यह महासागर की सतह के दो-तिहाई से अधिक भाग को कवर करते हैं।
इन्हें वैश्विक साझा क्षेत्र (Global Commons) माना जाता है।
सभी देशों को नौवहन, हवाई उड़ान, पनडुब्बी केबल व पाइपलाइन बिछाने जैसे वैध अंतर्राष्ट्रीय उपयोगों की स्वतंत्रता प्राप्त है।

BBNJ समझौते का परिचय : 

इसका आधिकारिक नाम है:

  • “राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों की समुद्री जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग पर समझौता” यह एक कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) संयुक्त राष्ट्र संधि है।
  • इसे संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) के अंतर्गत तीसरा कार्यान्वयन समझौता माना जाता है।
    UNCLOS के तीन कार्यान्वयन समझौते
  • 1994 समझौता – UNCLOS के भाग-11 (अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नितल क्षेत्र) के कार्यान्वयन से संबंधित
  • 1995 संयुक्त राष्ट्र मत्स्य भंडार समझौता
  • 2023 BBNJ समझौता (High Seas Treaty)

उद्देश्य : 

राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र से परे समुद्री क्षेत्रों में समुद्री जैव विविधता का संरक्षण
समुद्री संसाधनों का सतत और न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित करना

BBNJ समझौते के चार प्रमुख स्तंभ 

  • समुद्री आनुवंशिक संसाधन (Marine Genetic Resources – MGRs)
  • इनसे प्राप्त लाभों का न्यायसंगत और समान वितरण
  • क्षेत्र-आधारित प्रबंधन उपकरण (Area-Based Management Tools – ABMTs)
  • विशेष रूप से समुद्री संरक्षित क्षेत्र (Marine Protected Areas – MPAs)
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA)
  • किसी भी प्रस्तावित गतिविधि से पहले पर्यावरणीय प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन
  • क्षमता-निर्माण एवं समुद्री प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण
  • विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए

संस्थागत और वित्तीय व्यवस्था

  • पक्षकारों का सम्मेलन (Conference of Parties – COP)
  • समाशोधन गृह तंत्र (Clearing House Mechanism)
  • सचिवालय (Secretariat)
  • एक समर्पित वित्त-पोषण तंत्र, जिससे विकासशील देशों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके
  • सदस्यता की स्थिति अब तक 83 देशों ने इस संधि की अभिपुष्टि (Ratification) कर दी है।
    भारत ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, किंतु अभी तक अभिपुष्टि नहीं की है।

भारत के लिए महत्त्व

समुद्री जैव विविधता संरक्षण में भारत की वैश्विक भूमिका को सुदृढ़ करता है।
ब्लू इकोनॉमी और सतत समुद्री शासन के लक्ष्यों के अनुरूप।
भविष्य में गहरे समुद्र में जैव संसाधनों के उपयोग में न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित करने का अवसर।

निष्कर्ष :

  • राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे जैव विविधता (बीबीएनजे) समझौता एक संयुक्त राष्ट्र संधि है जिसे 2023 में राष्ट्रीय जलक्षेत्रों से परे वैश्विक साझा महासागरों में समुद्री जैव विविधता के संरक्षण के लिए अपनाया गया था।
  • इसमें समुद्री आनुवंशिक संसाधनों, क्षेत्र-आधारित प्रबंधन उपकरणों, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और क्षमता निर्माण, वित्तपोषण तंत्र की स्थापना और संस्थागत व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।
  • देशों ने बीबीएनजे समझौते की पुष्टि की है, जो यूएनसीएलओएस के तीसरे कार्यान्वयन समझौते के रूप में कार्य करता है, जिसका उद्देश्य एबीएनजे का संरक्षण और सतत उपयोग करना है।

  प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.BBNJ समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.यह UNCLOS के अंतर्गत तीसरा कार्यान्वयन समझौता है।
2.यह केवल राष्ट्रीय समुद्री सीमाओं के भीतर के क्षेत्रों पर लागू होता है।
3.इसमें समुद्री संरक्षित क्षेत्रों और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन का प्रावधान है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 1
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a) केवल 1 और 3

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.“BBNJ (High Seas Treaty) समझौता वैश्विक साझा महासागरों के सतत शासन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।” इस कथन के आलोक में BBNJ समझौते की प्रमुख विशेषताओं, उद्देश्यों तथा भारत के लिए इसके निहितार्थों की चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

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