वैश्विक नायक के रूप में भारत की भूमिका : रायसीना डायलॉग 2026

वैश्विक नायक के रूप में भारत की भूमिका : रायसीना डायलॉग 2026

( यह लेख यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 2 के अंतर्गत ‘अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत की विदेश नीति, भारत के हितों पर देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव, नए युग में वैश्विक नायक के रूप में भारत की भूमिका ’ खण्ड से और यूपीएससी के प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत ‘ रायसीना डायलॉग 2026, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC), हिंद महासागर क्षेत्र (IOR), BRICS, G -20 समूह ’ खण्ड से संबंधित है। )

 

खबरों में क्यों ? 

 

 

  • हाल ही में नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग / संवाद 2026 के 11वें संस्करण का सफल समापन हुआ। यह आयोजन वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती धमक और कूटनीतिक कौशल का परिचायक रहा। इस वर्ष का संवाद विशेष रूप से निम्नलिखित कारणों से चर्चा में रहा है – 
  • रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल (SDI) का शुभारंभ : इस संस्करण में पहली बार ‘विज्ञान कूटनीति’ को मुख्यधारा की विदेश नीति के साथ एकीकृत करने के उद्देश्य से SDI की शुरुआत की गई।
  • सभ्यतागत थीम : रायसीना डायलॉग के वर्ष 2026 की मुख्य थीम ‘संस्कार – अस्मिता, अनुकूलन, उन्नति’ (Samskara –  Assertion, Accommodation, Advancement) रखी गई, जो वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक पहचान और प्रगति के समन्वय को रेखांकित करती है।
  • व्यापक वैश्विक भागीदारी : इस सम्मेलन में 110 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, सैन्य कमांडर और प्रख्यात शिक्षाविद शामिल थे।
  • G-20 की निरंतरता : संवाद के दौरान वर्ष 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता की सफलता और उसके दूरगामी प्रभावों का बार-बार उल्लेख किया गया, जिसने भारत को ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज और एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

 

रायसीना डायलॉग का परिचय : 

 

 

  • रायसीना डायलॉग भारत का प्रमुख वार्षिक सम्मेलन है जो ‘भू-राजनीति’ और ‘भू-अर्थशास्त्र’ पर केंद्रित है।
  • नामकरण : इसका नाम नई दिल्ली में स्थित ‘रायसीना पहाड़ी’ के नाम पर रखा गया है, जहाँ भारत के विदेश मंत्रालय का मुख्यालय (साउथ ब्लॉक) स्थित है।
  • उत्पत्ति और आयोजन : इसकी शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। यह सम्मेलन भारत के विदेश मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है।
  • स्वरूप : यह एक ‘बहु-हितधारक’ और ‘क्रॉस-सेक्टरल’ मंच है। इसमें केवल सरकारें ही नहीं, बल्कि उद्योग जगत, मीडिया, थिंक टैंक और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भी एक मेज पर बैठते हैं।
  • ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेश (ORF) की भूमिका : सन 1990 ई. में स्थापित ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, एक स्वतंत्र थिंक टैंक है, जो नीतिगत अंतर्दृष्टि प्रदान करता है और भारत की विदेश नीति को वैचारिक दिशा देने में मदद करता है।

 

रायसीना डायलॉग 2026 के प्रमुख निष्कर्ष : 

 

  • रायसीना डायलॉग 2026 के इस संस्करण से कई महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु उभरकर सामने आए हैं, जो निम्नलिखित है – 
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी का कूटनीतिकरण : रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल के माध्यम से AI शासन, सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला और भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) को विकासशील देशों तक पहुँचाने पर सहमति बनी।
  • बहुध्रुवीय विश्व का उदय : इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विश्व अब एकध्रुवीय नहीं रहा है। बहुध्रुवीय विश्व का उदय के तहत ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) अब वैश्विक व्यवस्था का मूक दर्शक भर नहीं है, बल्कि वह एक सक्रिय निर्माता भी है।
  • रणनीतिक साझेदारियाँ : ब्रिक्स (BRICS), भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) और भारत-फ्रांस-UAE त्रिपक्षीय समूह जैसे मंचों को भविष्य की वैश्विक स्थिरता के लिए अनिवार्य माना गया।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग इस बार और भी प्रखर रही, जिसमें भारत की स्थायी सदस्यता के लिए वैश्विक स्तर पर भारत के पक्ष में समर्थन में वृद्धि देखी गई है।
  • समुद्री सुरक्षा : लाल सागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए समुद्री मार्गों और समुद्र के नीचे बिछी ‘संचार केबलों’ की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

 

रायसीना डायलॉग 2026 का महत्त्व : 

 

 

  • इस संवाद का महत्त्व वैश्विक और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर अद्वितीय है। जो निम्नलिखित है – 
  • वैश्विक शक्ति के रूप में भारत का उदय : यह मंच भारत को केवल एक सहभागी के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘एजेंडा सेट करने वाली’ शक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है।
  • सहयोग के नए आयाम : यह व्यापार, रक्षा, जलवायु और डिजिटल प्रशासन जैसे जटिल मुद्दों पर विभिन्न देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौतों के लिए एक अनौपचारिक लेकिन प्रभावी जमीन तैयार करता है।
  • नवाचार और युवा नेतृत्व : यह सम्मेलन युवा विचारकों और वैश्विक थिंक टैंकों को एक मंच प्रदान करता है, जिससे नीति-निर्माण में नए और आधुनिक विचारों का समावेश होता है।

 

रायसीना डायलॉग का मुख्य उद्देश्य : 

 

  • रायसीना डायलॉग के प्राथमिक उद्देश्य निम्नलिखित हैं – 
  • एशियाई एकीकरण को सुदृढ़ बनाना : इसका उद्देश्य एशिया के भीतर आपसी समन्वय बढ़ाना और शेष विश्व के साथ एशिया के संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।
  • चुनौतियों का सामूहिक समाधान खोजना : इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक असमानता जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सामूहिक समाधान खोजना है ।
  • न्यायसंगत समाज के लिए साझा भविष्य और समावेशी संवाद स्थापित करना : विश्व भर के नेताओं और नागरिक समाज को एक साथ लाकर एक ऐसे साझा भविष्य की कल्पना करना जो सभी के लिए न्यायसंगत हो।

 

रायसीना डायलॉग से भारत को प्राप्त होने वाले मुख्य लाभ : 

 

  • भारत के लिए यह संवाद कई मायनों में लाभकारी सिद्ध होता है – 
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक स्पष्टता को रखना : इसके माध्यम से भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न विवादित या जटिल मुद्दों पर अपनी स्थिति को दुनिया के सामने स्पष्टता से रख पाता है।
  • सॉफ्ट पावर में वृद्धि : इतने बड़े स्तर के आयोजन की सफल मेजबानी भारत की कूटनीतिक और संगठनात्मक क्षमता को प्रदर्शित करती है, जिससे भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ बढ़ती है।
  • रणनीतिक स्वायत्तता : विभिन्न देशों के साथ सीधे संवाद से भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने में मदद मिलती है।

 

समाधान और आगे की राह : 

 

 

  • वैश्विक सहयोग के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता देना अनिवार्य होना : साझा वैश्विक चुनौतियों के लिए विवादों को पीछे छोड़कर सहयोग को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
  • पर्यावरण अनुकूल सतत विकास पर केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाने की जरूरत : ‘संस्कार’ की थीम के अनुरूप, प्रगति ऐसी होनी चाहिए जो पर्यावरण के अनुकूल हो। नवीकरणीय ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना होगा।
  • साइबर युद्ध के खतरों को कम करने के लिए डिजिटल और साइबर सुरक्षा को सुनिश्चित करने की आवश्यकता : उभरती हुई तकनीकों (AI, क्वांटम कंप्यूटिंग) के लिए वैश्विक मानक और नैतिक नियम बनाना अब अनिवार्य है, ताकि साइबर युद्ध के खतरों को कम किया जा सके।
  • संस्थागत स्तर पर सुधार की आवश्यकता : ‘वैश्विक शासन 2.0’ की आवश्यकता है, जहाँ संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं आज की वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करें।
  • सामाजिक न्याय के मुद्दों और समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता : वैश्विक समूहों को केवल सुरक्षा तक सीमित न रहकर गरीबी उन्मूलन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच जैसे सामाजिक न्याय के मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

 

रायसीना डायलॉग 2026 का निष्कर्ष : 

 

 

  • रायसीना डायलॉग / संवाद 2026 के सफल समापन ने वैश्विक पटल पर इस तथ्य को निर्विवाद रूप से स्थापित कर दिया है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय विमर्श का मात्र एक प्रतिभागी नहीं, बल्कि वैश्विक एजेंडा निर्धारित करने वाली एक ‘विश्व-मित्र’ शक्ति बन चुका है। 
  • ‘संस्कार’ की मूल भावना और ‘विज्ञान कूटनीति’ (SDI) जैसी दूरदर्शी पहलों के माध्यम से भारत ने यह सिद्ध किया है कि वह समकालीन विश्व की जटिल भू-राजनीतिक और तकनीकी चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने वाला एक प्रमुख वैश्विक केंद्र है। यह मंच न केवल भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाता है, बल्कि एक न्यायसंगत, बहुध्रुवीय और समावेशी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में भारत की अपरिहार्य भूमिका को भी रेखांकित करता है।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. रायसीना डायलॉग 2026 के 11वें संस्करण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 

  1. इस वर्ष की मुख्य थीम ‘संस्कार – अस्मिता, अनुकूलन, उन्नति’ है।
  2. पहली बार ‘रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल’ (SDI) का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य विज्ञान को विदेश नीति के साथ एकीकृत करना है।
  3. इसमें केवल G-20 देशों के विदेश मंत्रियों ने ही भाग लिया।
  4. सम्मेलन के दौरान भारत के ‘डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर’ (DPI) को विकासशील देशों तक पहुँचाने पर सहमति बनी।

सही कूट का चयन करें: 

A. केवल कथन 1 और 2 

B. केवल कथन 2, 3 और 4 

C. केवल कथन 1, 2 और 4 

D. उपर्युक्त सभी कथन। 

  • उत्तर – C. केवल 1, 2 और 4 
  • व्याख्या : कथन 3 गलत है क्योंकि इसमें 110 से अधिक देशों के विविध प्रतिनिधियों जैसे – विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, शिक्षाविद आदि ने भाग लिया था, न कि केवल G-20 देशों ने। अतः विकल्प C सही है। 

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. रायसीना डायलॉग के ग्यारहवें संस्करण के मुख्य विषय को रेखांकित करते हुए यह चर्चा कीजिए कि वैश्विक स्तर पर बदलते भू – कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में रायसीना डायलॉग किस प्रकार प्रासंगिक है? ( शब्द – सीमा – 250 अंक – 15 )

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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