आरबीआई पेमेंट्स विज़न 2028 : हर हाथ डिजिटल – हर भुगतान सुरक्षित

आरबीआई पेमेंट्स विज़न 2028 : हर हाथ डिजिटल – हर भुगतान सुरक्षित

  • UPSC मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पेपर में प्रासंगिकता :
  • मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 3 – भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास खण्ड से संबंधित।
  • निबंध (Essay) : भारत में होने वाले साइबर धोखाधड़ी, डेटा सुरक्षा और अंतर-संचालनीयता से निपटने के लिए, डिजिटल लोकतंत्र और व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) तथा ‘उपभोक्ता – केन्द्रित कैशलेस’ अर्थव्यवस्था के साथ – ही – साथ नवाचार और स्मार्ट बैंकिंग प्रणाली को आधुनिक और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने पर आधारित आँकड़ों का उपयोग सामाजिक – आर्थिक विकास से संबंधित निबंध को लिखने में किया जा सकता है।
  • प्रारंभिक परीक्षा के लिए – ‘पेमेंट्स विज़न 2028’, ‘कृत्रिम बुद्धिमता’, ‘ई-चेक’, ‘पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS)’, ‘म्यूल अकाउंट्स’, नो योर कस्टमर’ (KYC), ‘डिजिटल लोकतंत्र’ खण्ड से संबंधित है।  

  

ख़बरों में क्यों ?

 

 

  • भारत ने पिछले एक दशक में वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में जो प्रगति की है, वह विश्व के लिए एक केस स्टडी बन चुकी है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की सफलता ने न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण भारत की भुगतान आदतों को भी बदल दिया है। इसी सफलता को अगले स्तर पर ले जाने और भविष्य की चुनौतियों जैसे – साइबर धोखाधड़ी, डेटा सुरक्षा और अंतर-संचालनीयता से निपटने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने हाल ही में ‘पेमेंट्स विज़न 2028’ का अनावरण किया है।
  • पेमेंट्स विज़न 2028 डॉक्यूमेंट “ ई-पेमेंट सबके लिए, हर जगह और हर समय ” (E-payments for Everyone, Everywhere, Every time) के मूल मंत्र पर आधारित है।

 

पेमेंट्स विज़न 2028 के मुख्य स्तंभ और रणनीतिक लक्ष्य : 

 

 

  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस रोडमैप को केवल तकनीकी सुधारों तक सीमित न रखकर एक व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण प्रदान किया है। इसके प्रमुख लक्ष्य निम्नलिखित हैं – 
  • एआई-आधारित उन्नत सुरक्षा निगरानी तंत्र पर जोर देना : डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों का अटूट भरोसा बनाए रखने के लिए पेमेंट्स विज़न 2028 ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस / कृत्रिम बुद्धिमता ’ (AI) और उन्नत एन्क्रिप्शन पर आधारित निगरानी तंत्र पर जोर देता है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों को वास्तविक समय (Real-time) में पहचाना जा सके।
  • डिजिटल समावेशिता का विस्तार करने पर केन्द्रित होना : इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। इसमें उन दूरदराज के क्षेत्रों के लिए ‘ऑफलाइन भुगतान’ समाधान विकसित करना शामिल है जहाँ इंटरनेट की पहुँच सीमित है।
  • नवाचार और स्मार्ट बैंकिंग प्रणाली को आधुनिक और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने पर आधारित : इसका मुख्य लक्ष्य ‘ई-चेक’ और ‘पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस’ (PaSS) जैसी नवीन सेवाओं के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली को अधिक आधुनिक और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना है।
  • भारतीय भुगतान प्रणालियों का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने पर जोर देना : यूपीआई (UPI) और अन्य स्वदेशी भुगतान प्रणालियों को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ना, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रेषण की लागत कम हो सके और सीमा पार लेनदेन सुलभ हो।

 

सुरक्षा का ‘रिमोट कंट्रोल’ : बैंक कार्ड को स्विच ऑन – ऑफ की सुविधा : 

 

  • वर्तमान में बैंक कार्ड को ब्लॉक/अनब्लॉक करने की जो सुविधा देते हैं, विज़न 2028 उसका व्यापक विस्तार करेगा।
  • बहुआयामी नियंत्रण : अब ग्राहक न केवल कार्ड, बल्कि UPI लेनदेन, नेट बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट को भी अपनी आवश्यकतानुसार ‘ऑन’ या ‘ऑफ’ कर सकेंगे।
  • समय और स्थान आधारित सुरक्षा : यात्रा के दौरान या रात के समय यूपीआई को अस्थायी रूप से निष्क्रिय करने का विकल्प साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध एक अभेद्य कवच का कार्य करेगा।
  • व्यय सीमा निर्धारण : ग्राहक स्वयं यह निर्धारित कर सकेंगे कि बिना अतिरिक्त प्रमाणीकरण (Authentication) के उनके खाते से कितनी राशि का लेनदेन करना संभव है।

 

पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS) : बैंकिंग बाधाओं का अंत :

 

  • जिस प्रकार भारत में ‘मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी’ ने दूरसंचार क्षेत्र में क्रांति ला दी थी, ठीक उसी प्रकार अब बैंकिंग क्षेत्र में ‘पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS)’ वही भूमिका निभाएगा।
  • निर्बाध भुगतान स्थानांतरण : यदि कोई ग्राहक अपना बैंक खाता बदलता है, तो PaSS एक केंद्रीय हब के रूप में उसके सभी आवर्ती भुगतान जैसे कि – बिजली बिल, ईएमआई और सब्सक्रिप्शन को स्वचालित रूप से नए बैंक में स्थानांतरित कर देगा।
  • एकीकृत डैशबोर्ड : यह ग्राहकों को एक ही स्थान पर अपने सभी ‘ऑटो-डेबिट’ मैंडेट्स को देखने और प्रबंधित करने की स्वतंत्रता प्रदान करेगा।

 

वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में साझा जिम्मेदारी ढाँचा तंत्र को विकसित करना :

 

  • भारत में वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में धोखाधड़ी के मामलों में अब जवाबदेही का नया वितरण प्रस्तावित है, जिससे बैंकिंग तंत्र अधिक सतर्क होगा।
  • दोहरा उत्तरदायित्व : अब केवल पैसा भेजने वाला (Issuing Bank) बैंक ही नहीं, बल्कि वह लाभार्थी बैंक भी जवाबदेह होगा जहाँ धोखाधड़ी का पैसा पहुँचा है। यदि लाभार्थी बैंक ‘नो योर कस्टमर’ (KYC) नियमों या संदिग्ध खातों की निगरानी में विफल रहता है, तो उसे उत्तरदायी ठहराया जाएगा।
  • म्यूल अकाउंट्स पर लगाम : यह ढाँचा बैंकों को रीयल-टाइम डेटा साझा करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘म्यूल अकाउंट्स’ को तुरंत फ्रीज किया जा सकेगा।

 

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए वित्तीय सुगमता प्रदान करना : 

 

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के नकदी प्रवाह (Cash – Flow) को बेहतर बनाने के लिए व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली (TReDS) में महत्वपूर्ण सुधार किए जा रहे हैं।
  • इंटरऑपरेबिलिटी : विभिन्न व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली (TReDS) प्लेटफॉर्म्स को आपस में जोड़ा जाएगा ताकि खरीदार और विक्रेता अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर होने के बावजूद सुचारू रूप से लेनदेन कर सकें।
  • निर्यात लाभ : वैश्विक व्यापार को सुगम बनाने के लिए निर्यात से जुड़ी प्राप्तियों को भी इस तंत्र के दायरे में लाया जाएगा।

 

इलेक्ट्रॉनिक चेक (E – Cheques) : परंपरा का आधुनिकीकरण : 

 

  • कॉर्पोरेट क्षेत्र की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए कागजी चेक को डिजिटल स्वरूप दिया जा रहा है।
  • डिजिटल अवतार : ई-चेक भौतिक चेक का एक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड डिजिटल रूप होगा, जिसमें डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग किया जाएगा।
  • त्वरित समाशोधन : इसे भौतिक रूप से बैंक ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे ‘चेक ट्रंकेशन सिस्टम’ (CTS) की गति और सटीकता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

 

भविष्य की चुनौतियाँ और समाधान की राह :

 

 

  • पेमेंट्स विज़न 2028 अपनी प्रकृति में जितना महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी है, इसके सफल कार्यान्वयन के मार्ग में उतनी ही जटिल चुनौतियाँ भी विद्यमान हैं। इन चुनौतियों का समाधान ही इस रोडमैप की वास्तविक सफलता को निर्धारित करेगा। जो निम्नलिखित है – 
  • व्यापक साइबर और वित्तीय साक्षरता का प्रचार – प्रसार करने की आवश्यकता : तकनीकी रूप से उन्नत सुरक्षा फीचर्स (जैसे स्विच ऑन-ऑफ) तभी प्रभावी होंगे, जब ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के उपयोगकर्ता इनके प्रति जागरूक होंगे। इसके लिए जमीनी स्तर पर व्यापक वित्तीय साक्षरता अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि अंतिम छोर पर खड़ा व्यक्ति भी डिजिटल धोखाधड़ी से बच सके।
  • डिजिटल बुनियादी ढाँचे का सुदृढ़ीकरण करने की जरूरत : डिजिटल लेनदेन की संख्या में होने वाली निरंतर वृद्धि को संभालने के लिए वर्तमान बैंकिंग बुनियादी ढाँचे को और अधिक उन्नत बनाना अनिवार्य है। सर्वर की विफलता को न्यूनतम करने के लिए उच्च-क्षमता वाले स्केलेबल सर्वरों और निर्बाध नेटवर्क कनेक्टिविटी पर निवेश करना होगा।
  • डेटा संप्रभुता और निजता का संरक्षण के लिए अभेद्य सुरक्षा ढाँचा विकसित करने की आवश्यकता : करोड़ों दैनिक लेनदेन से उत्पन्न होने वाले विशाल डेटा भंडार की सुरक्षा करना एक बड़ी प्राथमिकता है। डेटा संप्रभुता के सिद्धांतों का पालन करते हुए, ग्राहकों की संवेदनशील जानकारी को अनधिकृत पहुँच और दुरुपयोग से बचाने के लिए एक अत्यंत सुरक्षित और अभेद्य सुरक्षा ढाँचा विकसित करना होगा।

 

निष्कर्ष : 

 

  • भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रस्तुत ‘पेमेंट्स विज़न 2028’ भारत को एक डिजिटल भुगतान प्रधान अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी रोडमैप है। यह दस्तावेज़ न केवल तकनीकी प्रगति पर केंद्रित है, बल्कि सुरक्षा, समावेशिता और वैश्विक विस्तार के बीच एक सुदृढ़ संतुलन स्थापित करता है।
  • RBI का ‘पेमेंट्स विज़न 2028’ केवल तकनीकी सुधारों का समूह नहीं है, बल्कि यह ‘डिजिटल लोकतंत्र’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। जहाँ एक तरफ ‘स्विच ऑन – ऑफ’ जैसी सुविधाएं सामान्य नागरिक को सुरक्षा का अहसास कराएंगी, वहीं पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS) और व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली (TReDS) जैसे सुधार व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ाएंगे।
  • आने वाले भविष्य में जब भारत 2028 में वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में इस विज़न को पूर्ण रूप से लागू कर लेगा, तब हमारा भुगतान तंत्र न केवल ‘कैशलेस’ होगा, बल्कि वह ‘कॉन्टैक्टलेस’, ‘फ्रॉड – प्रूफ’ और पूरी तरह से ‘उपभोक्ता केन्द्रित’ बन चुका होगा।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में जारी पेमेंट्स विज़न 2028 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस सुविधा ग्राहकों को एक बैंक से दूसरे बैंक में खाता बदलते समय अपने आवर्ती भुगतान निर्देशों (जैसे EMI, बिल भुगतान) को निर्बाध रूप से स्थानांतरित करने की अनुमति देती है।
  2. इस नए ढांचे के तहत डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में वित्तीय उत्तरदायित्व और जवाबदेही को केवल लाभार्थी बैंक पर केंद्रित किया गया है।
  3. कार्ड लेनदेन के लिए वर्तमान में उपलब्ध ‘स्विच ऑन/ऑफ’ सुरक्षा सुविधा को अब UPI, डिजिटल वॉलेट और अन्य सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों तक विस्तारित किया जाएगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A. केवल कथन 1 और 3

B. केवल कथन 2 और 3

C. केवल कथन 1 

D. उपरोक्त सभी कथन। 

उत्तर : A. केवल कथन 1 और 3

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q. 1. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा हाल ही में जारी ‘पेमेंट्स विज़न 2028’ के प्रमुख स्तंभों और इसके क्रांतिकारी उद्देश्यों की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए। चर्चा कीजिए कि यह विज़न भारत को एक सुरक्षित और समावेशी डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने में कैसे सहायक सिद्ध होगा? ( शब्द सीमा 250 अंक – 15 )

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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