बुद्ध से बुलेट ट्रेन तक : 21वीं सदी में भारत – जापान द्विपक्षीय संबंध

बुद्ध से बुलेट ट्रेन तक : 21वीं सदी में भारत – जापान द्विपक्षीय संबंध

  • मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 – के ‘ अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत – जापान द्विपक्षीय संबंध, अंतर्राष्ट्रीय संगठन ’ खण्ड से संबंधित।  
  • प्रारंभिक परीक्षा के लिए – ‘ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, 2+2 संवाद, इसरो और JAXA का चंद्र मिशन परियोजना, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, QUAD, G20, इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) ’ खण्ड से संबंधित।

 

खबरों में क्यों ? 

 

  • हाल ही में भारत और जापान ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाते हुए ‘यूनिकॉर्न मास्ट्स’ नौसैनिक प्रौद्योगिकी के सह-निर्माण की शुरुआत की है। 
  • यह दोनों देशों के बीच पहला संयुक्त रक्षा विनिर्माण उपक्रम है, जो जापान की सुरक्षा नीति में आ रहे लचीलेपन और बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है। 
  • यह पहल केवल एक रक्षा सहयोग नहीं, बल्कि पनडुब्बियों, फाइटर जेट्स और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2025 में हुई जापान यात्रा के दौरान रक्षा, तकनीकी और आर्थिक सहयोग को और प्रगाढ़ किया गया है। 
  • जापान पहले से ही भारतीय बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश कर रहा है, और दोनों देश क्वाड और संयुक्त सैन्य अभ्यासों के माध्यम से आपस में जुड़े हुए हैं, हालाँकि, उच्च तकनीक और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग अभी तक उतना आगे नहीं बढ़ पाया था। 
  • व्यापार में संतुलन की कमी, परियोजनाओं में देरी और लोगों के बीच सीमित संपर्क जैसी कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। फिर भी, नवीनतम रक्षा सहयोग एक स्थिर, स्वतंत्र और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की दिशा में दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता और परिपक्व होती साझेदारी का प्रतीक है।

 

भारत और जापान के संबंधों का विकास : 

 

 

भारत – जापान बहुआयामी साझेदारी सहयोग :

 

  1. रक्षा एवं सामरिक सहयोग : दोनों देश मिलकर सैन्य अभ्यास करते हैं (जैसे JIMEX, धर्मा गार्जियन, MILAN), उच्च स्तर पर बातचीत करते हैं (2+2 संवाद), एक-दूसरे की सेनाओं को सहायता प्रदान करने के लिए समझौते किए हैं (ACSA), और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाए रखने के लिए एक जैसी सोच रखते हैं।
  2. आर्थिक संबंध और व्यापारिक भागीदारी : भारत और जापान दोनों देश मिलकर संयुक्त रूप से एक व्यापार समझौता (CEPA, 2011) पर हस्ताक्षर किया है, जापान भारत में खूब निवेश कर रहा है, दोनों देश मिलकर उद्योगों को और प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं, और नए व्यवसायों (स्टार्टअप) को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
  3. अवसंरचनात्मक विकास : बुलेट ट्रेन (मुंबई-अहमदाबाद) और दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर जैसी मेगा परियोजनाएँ जापानी वित्त और तकनीकी सहयोग से साकार हो रही हैं, जो भारत के आधारभूत ढांचे को नई दिशा दे रही हैं।
  4. विज्ञान एवं उच्च तकनीक के क्षेत्र में सहयोग : भारत और जापान दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में जैसे इसरो और JAXA का चंद्र मिशन जैसी परियोजना पर मिलकर काम कर रहे हैं।
  5. हरित ऊर्जा एवं पर्यावरणीय सहयोग : भारत और जापान दोनों मिलकर संयुक्त रूप से हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ई-मोबिलिटी और शून्य-कार्बन लक्ष्य प्राप्ति में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। वे मिलकर ग्रीन हाइड्रोजन, सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों को बढ़ावा दे रहे हैं, इलेक्ट्रिक वाहनों पर काम कर रहे हैं, और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्यों को साथ मिलकर प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।
  6. कौशल विकास एवं मानव संसाधन विनिमय : भारत और जापान मिलकर लोगों को प्रशिक्षण दे रहे हैं (TITP और SSW कार्यक्रम), भाषा सिखा रहे हैं, और एक-दूसरे के देशों में काम करने के अवसरों को बढ़ा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवा भारतीयों को जापान में कार्य और प्रशिक्षण के अवसर मिल रहे हैं, जिसमें भाषा प्रशिक्षण भी सम्मिलित है।
  7. सांस्कृतिक संबंध और जनसंपर्क : भारत और जापान दोनों देशों की बौद्ध धर्म जैसी पुरानी संस्कृति है। दोनों देशों के बीच के इस साझा बौद्ध विरासत के आधार पर सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती मिल रही है। शिक्षा, अकादमिक विनिमय और युवाओं की सहभागिता में वृद्धि हो रही है।
  8. क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय विकास में आपसी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी : दोनों देश मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता लाने, पड़ोसी देशों में विकास करने और क्वाड जैसे संगठनों के माध्यम से मिलकर काम कर रहे हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, संपर्क और बहुपक्षीय ढांचों (जैसे क्वाड) के तहत साझेदारी को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

 

भारत – जापान द्विपक्षीय संबंध : बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक : 

 

  1. रणनीतिक सहयोग : जापान, भारत के साथ एक स्वतंत्र और समावेशी इंडो-पैसिफिक की रचना में समान सोच वाला भागीदार है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
  2. रक्षा क्षेत्र में विश्वसनीयता : संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा संवाद और तकनीकी सहयोग जैसे माध्यमों से जापान भारत की रक्षा क्षमताओं को सशक्त बना रहा है।
  3. आर्थिक और अवसंरचनात्मक साझेदारी : जेआईसीए के सहयोग से जापान भारत में बुलेट ट्रेन, मेट्रो, औद्योगिक गलियारे जैसी परियोजनाओं को गति दे रहा है, जिससे भारत के अवसंरचना परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है।
  4. प्रौद्योगिकी एवं नवाचार : जापान भारत के साथ उन्नत तकनीकी क्षेत्रों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और ग्रीन टेक्नोलॉजी में सहयोग को सशक्त कर रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।
  5. मानव संसाधन विकास : TITP और SSW जैसे कार्यक्रम भारतीय युवाओं को कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय अवसर प्रदान कर भारत-जापान संबंधों को मानव-केंद्रित आधार देते हैं।
  6. सांस्कृतिक सामीप्य : बौद्ध और आध्यात्मिक विरासत दोनों देशों के मध्य गहरे सांस्कृतिक संबंधों को पोषित करती है, जो सॉफ्ट पावर और आपसी समझ का आधार बनती है।
  7. वैश्विक मंचों पर समन्वय : G4, QUAD और G20 जैसे मंचों पर भारत-जापान की साझी दृष्टि एक न्यायपूर्ण, बहुध्रुवीय और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था के लिए एकजुट प्रयासों को दर्शाती है।

 

भारत – जापान द्विपक्षीय साझेदारी से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ : 

 

  1. रक्षा सहयोग में असंतुलन : साझा सुरक्षा हितों और ‘यूनिकॉर्न मास्ट’ जैसे समझौतों के बावजूद, रक्षा उपकरणों का वास्तविक व्यापार और जटिल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभी भी उम्मीद से कम है।
  2. उन्नत तकनीक में सीमित प्रगति : सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग अभी भी प्रारंभिक और प्रायोगिक स्तर पर ही है।
  3. व्यापार असंतुलन और बढ़ता व्यापार घाटा : भारत का जापान के साथ व्यापार असंतुलन एक गंभीर मुद्दा है। जापानी बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए कड़े मानकों के कारण पहुँच सीमित बनी हुई है।
  4. व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) की अप्रभाविता : 2011 के ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (CEPA) का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाया है। गैर-टैरिफ बाधाएं (Non-tariff barriers) और जटिल नियामक प्रक्रियाएँ व्यापारिक सुगमता में बाधक हैं।
  5. परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विलंब : जापानी निवेश वाली बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (जैसे बुलेट ट्रेन) में भूमि अधिग्रहण, नौकरशाही की सुस्ती और पर्यावरण संबंधी मंजूरियों के कारण लागत और समय दोनों में वृद्धि होती है।
  6. सीमित जन-संपर्क : पर्यटन की कमी, जटिल वीजा प्रक्रिया और जापान में भारतीय पेशेवरों की सीमित संख्या के कारण दोनों देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव में गहराई की कमी है।
  7. भाषाई और सांस्कृतिक अंतराल : भाषा की बाधा न केवल व्यवसाय और शिक्षा में, बल्कि कौशल विनिमय कार्यक्रमों (Skill Exchange) की सफलता में भी एक बड़ा अवरोध है।
  8. नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का अभाव : दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी स्टार्टअप्स के बीच संस्थागत सहयोग और संयुक्त R&D (अनुसंधान एवं विकास) के पर्याप्त मंच उपलब्ध नहीं हैं।

 

साझेदारी को सुदृढ़ करने हेतु रणनीतिक सुझाव : 

 

  1. रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों का विस्तार : रक्षा क्षेत्र में केवल खरीद-बिक्री से आगे बढ़कर ‘संयुक्त उत्पादन’ पर ध्यान देना चाहिए। इसमें मानव रहित विमान और ड्रोन, पनडुब्बी तकनीक और साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
  2. CEPA का आधुनिकीकरण : व्यापार घाटे को कम करने के लिए CEPA की समीक्षा अनिवार्य है। भारतीय फार्मा और कृषि निर्यात के लिए जापानी मानकों को सरल बनाने हेतु ‘पारस्परिक मान्यता समझौतों’ पर जोर देना चाहिए।
  3. तकनीकी गलियारे की स्थापना : ‘इंडिया-जापान डिजिटल पार्टनरशिप’ को धरातल पर उतारने के लिए AI, ग्रीन हाइड्रोजन और रोबोटिक्स में संयुक्त ‘एक्सीलेंस सेंटर’ (CoE) और स्टार्टअप ब्रिज बनाए जाएं।
  4. परियोजना निगरानी तंत्र : जापानी वित्त पोषित परियोजनाओं के लिए एक उच्च स्तरीय ‘संयुक्त टास्क फोर्स’ या ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ व्यवस्था बनाई जाए, जो भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक बाधाओं का समयबद्ध समाधान कर सके।
  5. कौशल विकास और भाषा प्रशिक्षण : ‘निर्दिष्ट कुशल श्रमिक’ (SSW) और ‘तकनीकी प्रशिक्षु प्रशिक्षण कार्यक्रम’ (TITP) का विस्तार करें। भारत में जापानी भाषा केंद्रों की संख्या बढ़ाकर युवाओं को जापानी कार्य-संस्कृति के अनुरूप तैयार किया जाए।
  6. पर्यटन और शैक्षणिक विनिमय : छात्रवृत्ति कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने और वीजा नियमों को और अधिक उदार बनाने से युवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। ‘सहोदर शहर’ (Sister Cities) की अवधारणा को और सक्रिय किया जाए।
  7. वैश्विक मंचों पर तालमेल : QUAD, G20 और G4 जैसे समूहों में समन्वय मजबूत कर ‘मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत’ (FOIP) के संकल्प को साझा रूप से आगे बढ़ाना चाहिए।
  8. सॉफ्ट पावर का प्रभावी उपयोग : बौद्ध धर्म की साझा विरासत के साथ-साथ सिनेमा, योग, एनीमे और खान-पान के माध्यम से सांस्कृतिक कूटनीति को जन-आंदोलन का रूप दिया जाए।

 

निष्कर्ष : 

 

 

  • भारत और जापान के बीच की रणनीतिक साझेदारी न केवल द्विपक्षीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • भारत और जापान के बीच साझेदारी आपसी सम्मान, लोकतांत्रिक मूल्यों और एक स्वतंत्र, खुली एवं नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक की साझा दृष्टि पर आधारित है। यह संबंध समय की कसौटी पर खरा उतरा है और रक्षा, बुनियादी ढांचे तथा आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति भी हुई है। हालांकि, उच्च प्रौद्योगिकी और जन-से-जन संपर्क जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संभावनाएं अभी भी पूर्ण रूप से साकार नहीं हो सकी हैं। रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन में हालिया उपलब्धियां इस संबंध को एक नए रणनीतिक स्तर पर ले जाने की दिशा में संकेत करती हैं।
  • इस साझेदारी की समग्र क्षमता को साकार करने हेतु दोनों देशों को व्यापारिक बाधाओं को हटाने, संयुक्त परियोजनाओं में तेजी लाने तथा सांस्कृतिक एवं तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस प्रयास करने होंगे। यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति और परस्पर प्रतिबद्धता बनी रहती है, तो भारत और जापान न केवल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति, स्थिरता और समृद्धि के सशक्त आधार स्तंभ बन सकते हैं। 
  • वस्तुतः, जापान और भारत के संबंध केवल पारंपरिक मित्रता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक जीवंत, बहुआयामी और भविष्योन्मुखी सहभागिता का प्रतीक हैं, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, समृद्धि और संतुलन सुनिश्चित करने के साझा लक्ष्य पर केंद्रित है। भारत और जापान का यह आपसी द्विपक्षीय संबंध और सहयोग आने वाले समय में क्षेत्रीय संतुलन और विकास को सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

 

स्त्रोत – पी.आई. बी एवं द हिन्दू।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. भारत – जापान संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें :
1. भारत और जापान ने 2014 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर किए।
2. दोनों देशों के बीच अधिग्रहण और क्रॉस-सर्विसिंग समझौता (एसीएसए) उनके सशस्त्र बलों के बीच आपसी रसद समर्थन की सुविधा प्रदान करता है।
3. जापान क्वाड का सदस्य है और फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफओआईपी) पहल पर भारत के साथ सहयोग करता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D.  1, 2 और 3

उत्तर –  B

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q. 1. “ भारत – जापान द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती केवल साझा मूल्यों तक सीमित न रहकर ठोस धरातलीय परिणामों पर आधारित होनी चाहिए। ” इस कथन के आलोक में, उन द्विपक्षीय क्षेत्रों का विश्लेषण कीजिए जहाँ सहयोग की संभावनाएँ अभी भी पूरी तरह से साकार नहीं हुई हैं और चर्चा कीजिए कि इन बाधाओं को कैसे दूर किया जा सकता है? (शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

 

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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