30 Jun महाराष्ट्र में भारत का पहला ऑफशोर एयरपोर्ट बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के अंतर्गत :
- विमानन अवसंरचना
- ब्लू इकोनॉमी
- तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ)
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) खण्डों से संबंधित है।
मुख्य परीक्षा (Mains) के अंतर्गत :
- GS-1 : शहरीकरण एवं संसाधन भूगोल
- GS-2 : शासन, अवसंरचना एवं सार्वजनिक नीति
- GS-3 : अवसंरचना, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, ब्लू इकोनॉमी और आर्थिक विकास
- निबंध : ‘विकास बनाम पर्यावरण’, ‘सतत अवसंरचना’, ‘ब्लू इकोनॉमी’ खण्ड से संबंधित है।
खबरों में क्यों ?

- हाल ही में महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में भारत का पहला ऑफशोर (समुद्र में) एयरपोर्ट बनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए ‘विस्तृत परियोजना रिपोर्ट’ (DPR) बनाने का काम शुरू हो गया है।
- विशेषता : यह हवाई अड्डा समुद्र के भीतर कृत्रिम जमीन या एक बड़े समुद्री प्लेटफॉर्म पर बनाया जाएगा।
- महत्त्व : यह भारत के नागरिक उड्डयन के क्षेत्र के इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक कदम है। यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना, सागरमाला, ब्लू इकोनॉमी और सतत विकास जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों से जुड़ी हुई है।
ऑफशोर एयरपोर्ट क्या होता है और इसके उदाहरण :
- परिभाषा : जब किसी हवाई अड्डे का अधिकांश भाग समुद्र के ऊपर, कृत्रिम द्वीप पर या समुद्र से सूखी की गई जमीन पर बनाया जाता है, तो उसे ऑफशोर एयरपोर्ट कहते हैं।
- वैश्विक उदाहरण :
- कांसाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जापान)
- हांगकांग इंटरनेशनल एयरपोर्ट
- चुबू सेंट्रेयर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जापान)
भारत (मुंबई) को इसकी आवश्यकता क्यों है?
- मुंबई एयरपोर्ट पर दबाव : वर्तमान छत्रपति शिवाजी महाराज हवाई अड्डे पर विमानों का अत्यधिक दबाव है। घनी आबादी के कारण वहाँ रनवे बढ़ाने के लिए जमीन नहीं बची है।
- जमीन की भारी कमी : मुंबई में जमीन बहुत महंगी है। नए प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहित करना और लोगों का पुनर्वास करना बेहद कठिन है।
- भविष्य की मांग : साल 2047 तक भारत में हवाई यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी।
- वैश्विक केंद्र : मुंबई को दुनिया का बड़ा वित्तीय और व्यापारिक केंद्र बनाने के लिए एक भव्य और आधुनिक एयरपोर्ट की जरूरत है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ और उद्देश्य :
विशेषताएँ :
- समुद्र के भीतर आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण होगा।
- मेट्रो, बुलेट ट्रेन, एक्सप्रेसवे और बंदरगाहों के साथ मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी दी जाएगी।
- माल ढुलाई के लिए बड़ा कार्गो हब और विमानों की मरम्मत के लिए MRO सुविधाएँ होंगी।
- यह पूरी तरह हरित ऊर्जा (Green Energy) पर आधारित होगा।
उद्देश्य :
- आर्थिक : विदेशी निवेश को आकर्षित करना, पर्यटन बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स (माल परिवहन) की लागत को कम करना।
- सामाजिक : लाखों नए रोजगार पैदा करना और नए शहरी क्षेत्रों का विकास करना।
- रणनीतिक : देश की विमानन क्षमता को बढ़ाना और समुद्री क्षेत्र का सही उपयोग करना।
प्रमुख चुनौतियाँ और समस्याएँ :
पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियाँ :
- समुद्री पारिस्थितिकी को नुकसान : समुद्र में निर्माण से मैंग्रोव (Mangroves), प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs) और समुद्री घास नष्ट हो सकती हैं। मछलियों के प्रजनन पर असर पड़ेगा।
- मछुआरों की आजीविका : इस परियोजना से स्थानीय मछुआरे प्रभावित होंगे, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ सकता है।
- कानूनी अड़चनें : तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) से जुड़ी कड़े सरकारी नियमों की मंजूरियाँ लेना एक जटिल काम होगा।
तकनीकी और आर्थिक चुनौतियाँ :
- भारी लागत : समुद्र में एयरपोर्ट बनाना सामान्य एयरपोर्ट की तुलना में कई गुना महंगा होता है।
- जलवायु परिवर्तन का खतरा : भविष्य में समुद्र का जलस्तर बढ़ने, चक्रवात और ऊंची समुद्री लहरों से एयरपोर्ट को हमेशा खतरा रहेगा।
- रखरखाव : समुद्री पानी और हवा के कारण संरचनाओं में जंग लगने का खतरा ज्यादा रहता है, जिससे देखरेख का खर्च बढ़ेगा।
समाधान की राह / आगे की राह :

- वैज्ञानिक अध्ययन : निर्माण से पहले आधुनिक तकनीकों (जैसे हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग) द्वारा समुद्र का गहरा अध्ययन किया जाए।
- कठोर पर्यावरण समीक्षा : एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति द्वारा पर्यावरण पर पड़ने वाले असर (EIA) की निष्पक्ष जांच हो।
- प्रकृति का संरक्षण : नुकसान की भरपाई के लिए कृत्रिम रीफ बनाई जाएं और मैंग्रोव के नए पौधे लगाए जाएं।
- सुरक्षित डिजाइन : ऊंचे प्लेटफॉर्म और मजबूत समुद्री दीवारें (Sea Walls) बनाई जाएं, ताकि यह चक्रवात और लहरों को झेल सके।
- मछुआरों की मदद : प्रभावित समुदायों को उचित मुआवजा, आधुनिक जेट्टी और वैकल्पिक रोजगार के लिए कौशल विकास दिया जाए।
- वैश्विक सहयोग : जापान और सिंगापुर जैसे देशों के अनुभवों और उनकी समुद्री इंजीनियरिंग तकनीकों की मदद ली जाए।
निष्कर्ष :
- भारत का पहला ऑफशोर (समुद्री) एयरपोर्ट केवल एक बुनियादी ढाँचा परियोजना नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी के भारत की आधुनिक और ऊंची आकांक्षाओं का प्रतीक है। यह प्रोजेक्ट मुंबई महानगर क्षेत्र को दुनिया से जोड़ने, वैश्विक व्यापार-निवेश बढ़ाने और भारत को एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय एविएशन हब बनाने की अपार क्षमता रखता है। साथ ही, इससे देश की ‘ब्लू इकोनॉमी’ और ‘मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी’ के लक्ष्यों को भी नई रफ्तार मिलेगी।
- हालाँकि, इस प्रकार के विकास के साथ-साथ समुद्री पर्यावरण को नुकसान, मैंग्रोव और मछलियों का संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के खतरे और भारी निर्माण लागत जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं। यदि इन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आज का छोटा सा फायदा भविष्य में पर्यावरण और समाज के लिए बहुत बड़ा नुकसान बन सकता है।
- इसलिए, इस परियोजना की असली कामयाबी सिर्फ बेहतरीन इंजीनियरिंग में नहीं, बल्कि सही वैज्ञानिक योजना, कठोर पर्यावरण समीक्षा (EIA), स्थानीय लोगों की सहमति और हरित तकनीक (Green Technology) के इस्तेमाल में है।
- निष्कर्षतः यह हवाई अड्डा तभी वास्तव में सफल माना जाएगा जब यह ‘बेहतर कनेक्टिविटी’ के साथ-साथ ‘समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा’ और ‘स्थानीय समुदायों के समावेशी विकास’ के बीच एक मजबूत और आदर्श संतुलन स्थापित करे।
स्त्रोत – पी. आई. बी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में प्रस्तावित भारत के पहले ऑफशोर एयरपोर्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- यह हवाई अड्डा पूरी तरह से हरित ऊर्जा (Green Energy) पर आधारित होगा और इसमें विमानों की मरम्मत के लिए MRO सुविधाएँ शामिल होंगी।
- यह परियोजना राष्ट्रीय लक्ष्यों जैसे- सागरमाला, ब्लू इकोनॉमी और प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के साथ एकीकृत है।
- ऑफशोर एयरपोर्ट का तात्पर्य ऐसे हवाई अड्डे से है जिसका अधिकांश भाग समुद्र के ऊपर, कृत्रिम द्वीप पर या समुद्र से सूखी की गई जमीन पर बनाया जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर : (D) 1, 2 और 3
व्याख्या : दिए गए विकल्पों में से तीनों कथन सही हैं। यह भारत का पहला ऑफशोर एयरपोर्ट होगा जो कृत्रिम जमीन या समुद्री प्लेटफॉर्म पर बनेगा (कथन 3)। यह हरित ऊर्जा पर आधारित होगा व इसमें MRO सुविधाएँ होंगी (कथन 1)। साथ ही, यह गति शक्ति और सागरमाला जैसी राष्ट्रीय योजनाओं से जुड़ा है (कथन 2)।
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. 1. ऑफशोर (समुद्र तटीय/अपतटीय) हवाई अड्डे से आप क्या समझते हैं? मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में भारत के पहले ऑफशोर हवाई अड्डे के निर्माण की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए इससे जुड़ी तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियों का मूल्यांकन कीजिए तथा इसके समाधान के उपाय सुझाइए। ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )

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