ज्ञान भारतम मिशन: 1.19 करोड़ पांडुलिपियों का AI-सक्षम डिजिटलीकरण

ज्ञान भारतम मिशन: 1.19 करोड़ पांडुलिपियों का AI-सक्षम डिजिटलीकरण — Knowledge India Mission and Manuscript Digitization Process

ज्ञान भारतम मिशन: 1.19 करोड़ पांडुलिपियों का AI-सक्षम डिजिटलीकरण

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय संस्कृति और विरासत  |  GS Paper II — सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप  |  GS Paper III — विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; सूचना प्रौद्योगिकी
  • Prelims: ज्ञान भारतम मिशन, राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण, पांडुलिपि डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ज्ञान मित्रम, भारतीयजीपीटी, पांडुलिपि दर्पण, संस्कृति मंत्रालय
  • Essay: डिजिटल युग में सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: चुनौतियाँ और अवसर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारत की ज्ञान परंपराएँ: एक नया क्षितिज

त्वरित पुनरावृत्ति: ज्ञान भारतम मिशन और इसका AI-सक्षम वेब पोर्टल भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को डिजिटलीकरण, संरक्षण और सुलभ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके ज्ञान परंपराओं को विद्वानों और आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हाल ही में लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में ज्ञान भारतम मिशन और पांडुलिपि डिजिटलीकरण के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण आरंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य विभिन्न भाषाओं और लिपियों में पांडुलिपि संग्रहों, भंडारों और संरक्षकों की पहचान और दस्तावेजीकरण करना है। इस सर्वेक्षण के दौरान 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई है, और ज्ञान भारतम वेब पोर्टल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम तकनीकों का उपयोग करके भारत की पांडुलिपि विरासत तक बुद्धिमत्तापूर्ण पहुंच प्रदान कर रहा है।

पृष्ठभूमि

  • भारत एक समृद्ध सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा वाला देश है, जहाँ लाखों की संख्या में प्राचीन पांडुलिपियाँ विभिन्न भाषाओं और लिपियों में विद्यमान हैं।
  • इन पांडुलिपियों में धर्म, दर्शन, विज्ञान, कला, साहित्य और इतिहास सहित ज्ञान के विविध क्षेत्र समाहित हैं।
  • समय के साथ, इन पांडुलिपियों के संरक्षण और पहुंच को लेकर चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं, जिनमें भौतिक क्षय, भंडारण की समस्याएँ और शोधकर्ताओं तक सीमित पहुंच शामिल है।
  • इन चुनौतियों का समाधान करने और भारत की ज्ञान विरासत को संरक्षित तथा सुलभ बनाने के लिए डिजिटलीकरण और आधुनिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक हो गया है।
  • राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (National Mission for Manuscripts) की स्थापना 2003 में संस्कृति मंत्रालय के तहत भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को दस्तावेज़ीकृत, संरक्षित और सुलभ बनाने के उद्देश्य से की गई थी। ज्ञान भारतम मिशन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • डिजिटल इंडिया पहल के तहत, सरकार विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटलीकरण को बढ़ावा दे रही है, जिसमें सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी शामिल है।

ज्ञान भारतम मिशन और पांडुलिपि डिजिटलीकरण क्या है?

  • ज्ञान भारतम मिशन संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक पहल है जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की पांडुलिपि विरासत को संरक्षित, दस्तावेज़ीकृत और सुलभ बनाना है।
  • इस मिशन के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण किया गया है, जिसमें देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विभिन्न भाषाओं और लिपियों की 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की पहचान और जानकारी प्राप्त हुई है।
  • ज्ञान भारतम वेब पोर्टल इस मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो भारत की पांडुलिपि विरासत तक बुद्धिमत्तापूर्ण पहुंच प्रदान करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम तकनीकों का उपयोग करता है।
  • पोर्टल में लार्ज लैंग्वेज स्क्रिप्ट मॉडल (LLSM), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR), हैंडरिटेन टेक्स्ट रिकग्निशन (HTR), स्क्रिप्ट रिकग्निशन, सिमेंटिक सर्च और मशीन-सहायता प्राप्त अनुवाद जैसी उन्नत AI तकनीकें शामिल हैं।
  • ज्ञान मित्रम, ज्ञान भारतम वेब पोर्टल का AI-संचालित ज्ञान इंटरफेस है, जो पांडुलिपि छवियों, प्रतिलेखों और अनुवादों को एकीकृत करके उनकी बुद्धिमतापूर्ण व्याख्या, प्रासंगिककरण और अन्वेषण में मदद करता है।
  • भारतीयजीपीटी ने पोर्टल पर ‘पांडुलिपि से संवादात्मक AI’ सुविधा उपलब्ध कराई है, जो पांडुलिपि विरासत को AI-तैयार, मशीन-पठनीय ज्ञान में परिवर्तित करती है और ‘टॉक टू मैन्युस्क्रिप्ट’ सुविधा के माध्यम से पाठ, ऑडियो और आवाज-आधारित बातचीत सहित बहुभाषी और बहुआयामी पहुंच प्रदान करती है।
  • पांडुलिपि दर्पण एक AI-संचालित उपकरण है जो उपयोगकर्ताओं को डिजिटाइज्ड पांडुलिपि छवि अपलोड करने या चुनने और AI-सहायता प्राप्त लिपि पहचान, लिप्यंतरण और अनुवाद तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।
  • डिजिटल प्रतियों तक पहुंच लागू कानूनों और संरक्षकों एवं अधिकार धारकों के अधिकारों के अनुसार सुगम बनाई जाती है, जिससे संवेदनशील सामग्री के लिए उचित पहुंच शर्तें सुनिश्चित की जाती हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण देश भर में पांडुलिपि संग्रहों, भंडारों और संरक्षकों की पहचान तथा दस्तावेजीकरण।
ज्ञान भारतम वेब पोर्टल भारत की पांडुलिपि विरासत तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम पहुंच प्रदान करना।
ज्ञान मित्रम (AI-संचालित ज्ञान इंटरफ़ेस) पांडुलिपि छवियों, प्रतिलेखों और अनुवादों को एकीकृत करके बुद्धिमत्तापूर्ण व्याख्या, प्रासंगिककरण और अन्वेषण।
भारतीयजीपीटी द्वारा ‘पांडुलिपि से संवादात्मक AI’ पांडुलिपि विरासत को AI-तैयार, मशीन-पठनीय ज्ञान में परिवर्तित करना और ‘टॉक टू मैन्युस्क्रिप्ट’ सुविधा के माध्यम से बहुभाषी, बहुआयामी पहुंच।
पांडुलिपि दर्पण (AI-संचालित उपकरण) उपयोगकर्ताओं को डिजिटाइज्ड पांडुलिपि छवि अपलोड करने और AI-सहायता प्राप्त लिपि पहचान, लिप्यंतरण तथा अनुवाद तक पहुंचने में सक्षम बनाना।

महत्व

सांस्कृतिक महत्व

  • भारत की समृद्ध और विविध पांडुलिपि विरासत का संरक्षण तथा डिजिटलीकरण, जो देश की प्राचीन ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का मूल है।
  • विभिन्न भाषाओं और लिपियों में निहित ज्ञान तक पहुंच को सुगम बनाना, जिससे हमारी सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा मिलेगा।
  • लुप्त हो रही पांडुलिपियों की पहचान और उनके दस्तावेजीकरण से भविष्य की पीढ़ियों के लिए अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित करना।

शैक्षणिक एवं अनुसंधान महत्व

  • विद्वानों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए पांडुलिपियों तक आसान पहुंच प्रदान करना, जिससे भारतीय इतिहास, दर्शन, विज्ञान और साहित्य पर गहन शोध को बढ़ावा मिलेगा।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम उपकरणों के माध्यम से पांडुलिपियों की व्याख्या, प्रतिलेखन और अनुवाद में सहायता, जिससे शोध प्रक्रिया में तेजी आएगी और सटीकता बढ़ेगी।
  • ‘टॉक टू मैन्युस्क्रिप्ट’ जैसी संवादात्मक AI सुविधाओं से पांडुलिपियों के साथ एक नया जुड़ाव स्थापित होगा, जिससे ज्ञानार्जन अधिक आकर्षक बनेगा।

तकनीकी एवं नवाचार महत्व

  • लार्ज लैंग्वेज स्क्रिप्ट मॉडल (LLSM), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) और हैंड रिटन टेक्स्ट रिकॉग्निशन (HTR) जैसी अत्याधुनिक AI तकनीकों का उपयोग, जो डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप है।
  • ज्ञान भारतम वेब पोर्टल और ज्ञान मित्रम जैसे AI-संचालित इंटरफेस का विकास, जो भारत में तकनीकी नवाचार और डिजिटल साक्षरता को दर्शाता है।
  • ज्ञान विरासत को मशीन-पठनीय प्रारूप में परिवर्तित करना, जिससे भविष्य में AI-आधारित अनुप्रयोगों और विश्लेषणों के लिए एक विशाल डेटाबेस तैयार होगा।

चुनौतियाँ

1. पांडुलिपियों का संरक्षण और रखरखाव

  • पुरानी और नाजुक पांडुलिपियों को भौतिक क्षति, कीटों और पर्यावरणीय कारकों से बचाना एक बड़ी चुनौती है।
  • इन पांडुलिपियों के उचित भंडारण और संरक्षण के लिए विशेष सुविधाओं तथा प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता है।

2. तकनीकी क्षमता और बुनियादी ढाँचा

  • AI-सक्षम तकनीकों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उच्च-प्रदर्शन वाले कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता है, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • विभिन्न लिपियों और भाषाओं के लिए AI मॉडल को प्रशिक्षित करने में डेटा की कमी और जटिलता एक चुनौती हो सकती है।

3. डिजिटल पहुंच और साक्षरता

  • डिजिटलीकृत पांडुलिपियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सभी वर्गों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार आवश्यक है।
  • तकनीकी रूप से कम साक्षर व्यक्तियों के लिए इन AI-आधारित उपकरणों का उपयोग सरल और सहज बनाना एक चुनौती है।

4. कानूनी और नैतिक मुद्दे

  • पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और सार्वजनिक पहुंच के संबंध में कॉपीराइट, स्वामित्व और डेटा गोपनीयता जैसे कानूनी पहलुओं का सावधानीपूर्वक प्रबंधन आवश्यक है।
  • संवेदनशील या प्रतिबंधित सामग्री तक पहुंच को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नीतियां और तंत्र स्थापित करना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भौतिक संरक्षण पुरानी पांडुलिपियों की नाजुकता और पर्यावरणीय क्षरण का जोखिम।
तकनीकी विशेषज्ञता AI-आधारित उपकरणों के विकास और रखरखाव के लिए कुशल मानव संसाधन की कमी।
डेटा मानकीकरण विभिन्न स्रोतों से प्राप्त पांडुलिपि डेटा को एक समान प्रारूप में लाना।
पहुंच का लोकतंत्रीकरण डिजिटल डिवाइड के कारण सभी नागरिकों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना।
वित्तीय संसाधन मिशन के दीर्घकालिक संचालन और उन्नयन के लिए पर्याप्त धन की उपलब्धता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • ज्ञान भारतम मिशन
  • राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण

आगे की राह

  • पांडुलिपियों के भौतिक संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षित कर्मियों का उपयोग करते हुए संरक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत करना।
  • ज्ञान भारतम वेब पोर्टल और AI-आधारित उपकरणों के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे को उन्नत करना और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार करना और ग्रामीण तथा दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार करना ताकि सभी तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।
  • पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, पहुंच और उपयोग से संबंधित कानूनी तथा नैतिक दिशानिर्देशों को स्पष्ट करना और उनका प्रभावी ढंग से पालन करना।
  • विभिन्न भाषाओं और लिपियों के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए AI मॉडल के प्रशिक्षण और सत्यापन को मजबूत करना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देना ताकि पांडुलिपि संरक्षण और डिजिटलीकरण के प्रयासों में वित्तीय और तकनीकी सहायता मिल सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना ताकि पांडुलिपि संरक्षण और डिजिटलीकरण में सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रौद्योगिकियों का आदान-प्रदान किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(f)’, ‘note’: ‘हमारी समन्वित संस्कृति की समृद्ध विरासत का महत्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(j)’, ‘note’: ‘ज्ञान के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता का प्रयास’}

अवधारणा प्रवाह

राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण का आरंभ  →  1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त  →  ज्ञान भारतम वेब पोर्टल का विकास (AI-सक्षम)  →  ज्ञान मित्रम और भारतीयजीपीटी द्वारा संवादात्मक AI सुविधाएँ  →  पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और मशीन-पठनीय ज्ञान में परिवर्तन  →  विद्वानों, छात्रों और आम जनता के लिए ज्ञान तक पहुंच में वृद्धि  →  भारत की ज्ञान परंपराओं का संरक्षण और प्रचार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. ज्ञान भारतम मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका उद्देश्य देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पांडुलिपि संग्रहों की पहचान और दस्तावेजीकरण करना है।
2. मिशन के तहत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और पंजीकरण के लिए जिला-वार लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
3. ज्ञान भारतम वेब पोर्टल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम तकनीकों का उपयोग करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन का उद्देश्य विभिन्न भाषाओं और लिपियों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांडुलिपि संग्रहों, भंडारों और संरक्षकों की पहचान और दस्तावेजीकरण करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि मिशन के तहत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और वास्तविक पंजीकरण के लिए कोई जिला-वार लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया था। कथन 3 सही है क्योंकि ज्ञान भारतम वेब पोर्टल भारत की पांडुलिपि विरासत तक बुद्धिमत्तापूर्ण पहुंच प्रदान करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम तकनीकों का उपयोग करता है।

Q2. ज्ञान भारतम वेब पोर्टल पर उपलब्ध ‘ज्ञान मित्रम’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह एक AI-संचालित ज्ञान इंटरफेस है।
2. यह पांडुलिपि छवियों, प्रतिलेखों और अनुवादों को एकीकृत करता है।
3. यह केवल ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) तकनीक का उपयोग करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं क्योंकि ज्ञान मित्रम एक AI-संचालित ज्ञान इंटरफेस है जो पांडुलिपि छवियों, प्रतिलेखों और अनुवादों को एकीकृत करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह केवल OCR का उपयोग नहीं करता, बल्कि लार्ज लैंग्वेज स्क्रिप्ट मॉडल (LLSM), हैंड रिटन टेक्स्ट रिकॉग्निशन (HTR), स्क्रिप्ट रिकॉग्निशन, सिमेंटिक सर्च और मशीन-सहायता प्राप्त अनुवाद जैसी कई AI तकनीकों का उपयोग करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ज्ञान भारतम मिशन भारत की समृद्ध पांडुलिपि विरासत के संरक्षण और उसे सुलभ बनाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की क्षमता का किस प्रकार लाभ उठाता है? इस मिशन के प्रमुख घटकों और भारत की ज्ञान परंपराओं को बढ़ावा देने में इसके महत्व का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में ज्ञान भारतम मिशन के तहत AI तकनीकों (जैसे LLSM, OCR, HTR, ज्ञान मित्रम, भारतीयजीपीटी, पांडुलिपि दर्पण) का उपयोग करके पांडुलिपि संरक्षण और पहुंच को कैसे बढ़ाया जा रहा है, इसका वर्णन करें। दूसरे भाग में मिशन के प्रमुख घटकों (राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण, वेब पोर्टल, AI-संचालित उपकरण) पर प्रकाश डालें। अंत में, विद्वानों, छात्रों और आम जनता के लिए भारत की ज्ञान परंपराओं को सुलभ बनाने और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में इसके महत्व का विश्लेषण करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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