31 Jul पोषण ट्रैकर: आंगनवाड़ी सेवाओं की डिजिटल निगरानी से कुपोषण नियंत्रण में सहायता
✎ पोषण ट्रैकर एक ICT-आधारित डिजिटल एप्लिकेशन है जो 'मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0' के तहत आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी और कुपोषण की पहचान कर पोषण संबंधी परिणामों को बेहतर बनाने में मदद करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — स्वास्थ्य, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; गरीबी और भूख से संबंधित विषय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय
- Prelims: पोषण ट्रैकर, मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, पोषण माह, पोषण पखवाड़ा, गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM), पोषण वाटिका
- Essay: भारत में कुपोषण की चुनौती और समाधान, डिजिटल इंडिया: शासन और सामाजिक कल्याण में भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: पोषण ट्रैकर एक ICT-आधारित डिजिटल एप्लिकेशन है जो ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ के तहत आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी और कुपोषण की पहचान कर पोषण संबंधी परिणामों को बेहतर बनाने में मदद करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ के तहत एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित शासन उपकरण ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन लॉन्च किया है। यह एप्लिकेशन आंगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) में पंजीकृत लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य पोषण संबंधी परिणामों में सुधार लाना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में कुपोषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है, विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act, 2013) के तहत पूरक पोषण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसमें 6 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को गर्म पका हुआ भोजन और टेक-होम राशन (THR) प्रदान किया जाता है।
- गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों को अतिरिक्त पोषण सहायता भी प्रदान की जाती है।
- सरकार ने पोषण संबंधी परिणामों में सुधार के लिए ‘मिशन पोषण 2.0’ जैसी पहलें शुरू की हैं, जो पोषण सेवाओं के वितरण और निगरानी को मजबूत करने पर केंद्रित है।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग शासन और सामाजिक कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभरा है।
- सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन पोषण संबंधी हस्तक्षेपों की सफलता के लिए आवश्यक माने जाते हैं, जिसके लिए ‘पोषण माह’ और ‘पोषण पखवाड़ा’ जैसे अभियान चलाए जाते हैं।
पोषण ट्रैकर क्या है?
- ‘पोषण ट्रैकर’ एक डिजिटल एप्लिकेशन है जिसे ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ के तहत लॉन्च किया गया है।
- यह सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित एक शासन उपकरण है, जिसका मुख्य उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) में पंजीकृत लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सभी सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग करना है।
- यह एप्लिकेशन बच्चों में बौनापन (stunting), कुपोषण (malnutrition) और कम वजन (underweight) की व्यापकता की गतिशील पहचान के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों (0-3 वर्ष) को पोषण संबंधी परामर्श, देखभाल संबंधी मार्गदर्शन और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास को बढ़ावा देने के लिए गृह मुलाकातें करती हैं।
- यह अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं (frontline workers) को स्मार्टफोन और डेटा रिचार्ज की सुविधा प्रदान करके सशक्त बनाता है।
- प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में शिशुमापी (infantometer), स्टेडीमीटर (stadiometer), नवजात शिशु वजन मापने की मशीन और माता एवं शिशु वजन मापने की मशीन जैसे विकास निगरानी उपकरण (Growth Monitoring Devices – GMD) उपलब्ध कराए गए हैं, जिनकी जानकारी पोषण ट्रैकर पर दर्ज की जाती है।
- यह देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है, और राज्यों के पास कार्यक्रम की डिजिटल निगरानी के लिए लॉगिन क्रेडेंशियल उपलब्ध हैं।
- पोषण ट्रैकर डैशबोर्ड पर आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या, बच्चों और माताओं की संख्या जैसे आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन | आंगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) में पंजीकृत लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सभी सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित शासन उपकरण। |
| स्मार्टफोन और डेटा रिचार्ज | मिशन पोषण 2.0 के तहत अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं (आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं) को सशक्त बनाना। |
| विकास निगरानी उपकरण (GMD) | प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में शिशुमापी, स्टेडीमीटर आदि की उपलब्धता से पंजीकृत लाभार्थियों के नियमित विकास की निगरानी सुनिश्चित करना। |
| प्रौद्योगिकी का उपयोग | बच्चों में बौनापन, कुपोषण और कम वजन की व्यापकता की गतिशील पहचान में सहायक। |
| नियोजित गृह मुलाकातें | आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों को पोषण संबंधी परामर्श, देखभाल संबंधी मार्गदर्शन और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास को बढ़ावा देना। |
| पोषण वाटिकाएं/पोषक उद्यान | आहार में विविधता लाने और पौष्टिक स्थानीय उत्पादों के सेवन को प्रोत्साहित करने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में फलों और सब्जियों का उत्पादन। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- कुपोषण (Malnutrition) और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने में सहायता, विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए।
- डिजिटल निगरानी के माध्यम से सेवाओं की बेहतर डिलीवरी और लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच सुनिश्चित करना, जिससे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार हो।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना, जिससे उनकी कार्यकुशलता और प्रभावशीलता बढ़े।
प्रशासनिक महत्व
- सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का उपयोग करके कार्यक्रम के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना।
- डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता, जिससे नीतियों और हस्तक्षेपों को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार और कार्यान्वित किया जा सके।
- जिला और राज्य स्तर पर गठित पोषण समितियों के माध्यम से अंतर-विभागीय समन्वय और रणनीतिक निगरानी को सुदृढ़ करना।
आर्थिक महत्व
- कुपोषण के कारण होने वाली उत्पादकता हानि को कम करके दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में योगदान।
- स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले व्यय को कम करना, क्योंकि बेहतर पोषण से बीमारियों की घटनाओं में कमी आती है।
- स्थानीय कृषि उत्पादों और पोषण वाटिकाओं को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देना।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग के लिए पर्याप्त डिजिटल साक्षरता की कमी।
- दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती हो सकती है, जिससे पोषण ट्रैकर के उपयोग में बाधा आ सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन में ICT का अनुप्रयोग, ग्रामीण विकास
2. डेटा की सटीकता और सत्यापन
- दर्ज किए गए डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना, क्योंकि गलत डेटा गलत नीतिगत निर्णयों को जन्म दे सकता है।
- डेटा प्रविष्टि में मानवीय त्रुटियों और संभावित हेरफेर को रोकना।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस, डेटा शासन
3. संसाधनों की उपलब्धता
- आंगनवाड़ी केंद्रों में पर्याप्त विकास निगरानी उपकरण (GMD) और अन्य आवश्यक संसाधनों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- स्मार्टफोन और डेटा रिचार्ज के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन और उनका समय पर वितरण।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र की योजनाएं, संसाधन जुटाना
4. व्यवहारिक परिवर्तन
- समुदाय में पोषण संबंधी आदतों और व्यवहार में स्थायी परिवर्तन लाना, जिसके लिए निरंतर जागरूकता और शिक्षा की आवश्यकता है।
- स्थानीय सांस्कृतिक और आहार संबंधी प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए पोषण संबंधी परामर्श प्रदान करना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और पोषण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी अवसंरचना | दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँच और बिजली की कमी पोषण ट्रैकर के प्रभावी उपयोग में बाधा डाल सकती है। |
| डेटा गुणवत्ता | आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा दर्ज किए गए डेटा की सटीकता और पूर्णता सुनिश्चित करना एक चुनौती है। |
| मानव संसाधन | आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए डिजिटल उपकरणों के उपयोग हेतु निरंतर प्रशिक्षण और समर्थन की आवश्यकता। |
| सामुदायिक भागीदारी | पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन के लिए समुदाय को सक्रिय रूप से शामिल करना और जागरूकता बनाए रखना। |
| निगरानी और मूल्यांकन | कार्यक्रम की प्रगति और प्रभाव का नियमित, स्वतंत्र और कठोर मूल्यांकन सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013
आगे की राह
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए डिजिटल साक्षरता और पोषण ट्रैकर के उपयोग पर नियमित और व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- दूरदराज के और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की आपूर्ति में सुधार के लिए अवसंरचनात्मक निवेश को प्राथमिकता देना।
- डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए डेटा सत्यापन प्रोटोकॉल को मजबूत करना और ऑडिट तंत्र स्थापित करना।
- समुदाय में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए जन आंदोलन (Jan Andolan) और व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC) रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाना।
- पोषण वाटिकाओं के विकास और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय समुदायों को सक्रिय रूप से शामिल करना।
- राज्य और जिला स्तरीय पोषण समितियों को और अधिक सशक्त बनाना ताकि अंतर-विभागीय समन्वय और कार्यान्वयन की निगरानी प्रभावी ढंग से हो सके।
- गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों के लिए विशेष हस्तक्षेपों को मजबूत करना और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ समन्वय बढ़ाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पोषण ट्रैकर · मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 · सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) · पोषण संबंधी परिणाम · आंगनवाड़ी केंद्र (AWC) · पूरक पोषण कार्यक्रम · गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) · पोषण वाटिका
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(e)’, ‘note’: ‘नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
कुपोषण की उच्च दर → मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 का शुभारंभ → पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन का कार्यान्वयन → लाभार्थियों की सेवाओं और विकास की डिजिटल निगरानी → डेटा-आधारित हस्तक्षेप और नीतिगत सुधार → पोषण संबंधी परिणामों में सुधार और स्वस्थ समाज का निर्माण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन को केवल गुजरात राज्य में ही लागू किया गया है।
2. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत 6 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों को पूरक पोषण प्रदान किया जाता है।
3. पोषण माह और पोषण पखवाड़ा का उद्देश्य सामुदायिक लामबंदी और जागरूकता अभियान के माध्यम से पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि पोषण ट्रैकर को गुजरात सहित देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनाया है। कथन 2 सही है क्योंकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की अनुसूची-II में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण प्रदान करने का प्रावधान है। कथन 3 सही है क्योंकि पोषण माह और पोषण पखवाड़ा जन आंदोलन के तहत सामुदायिक लामबंदी और जागरूकता अभियान के प्रमुख घटक हैं।
Q2. अभिकथन (A): मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन लॉन्च किया गया है।
कारण (R): यह एप्लिकेशन आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सभी सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित शासन उपकरण है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है कि पोषण ट्रैकर मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत लॉन्च किया गया है। कारण (R) भी सही है कि यह एक ICT आधारित शासन उपकरण है जिसका उपयोग सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए किया जाता है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है क्योंकि पोषण ट्रैकर का लॉन्च इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत ‘पोषण ट्रैकर’ जैसे डिजिटल उपकरण भारत में पोषण संबंधी चुनौतियों का समाधान करने में किस प्रकार सहायक हो सकते हैं? इसके कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 तथा पोषण ट्रैकर का संक्षिप्त परिचय, भारत में पोषण संबंधी चुनौतियों के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता।
2. **डिजिटल उपकरण की सहायता:**
* **डेटा-आधारित निर्णय:** लाभार्थियों की वास्तविक समय की निगरानी, कुपोषण के मामलों की पहचान (बौनापन, कम वजन, कुपोषण)।
* **सेवा वितरण में सुधार:** पूरक पोषण (गर्म पका हुआ भोजन, टेक-होम राशन) और अन्य सेवाओं की ट्रैकिंग।
* **कार्यकर्ताओं का सशक्तिकरण:** आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन और डेटा रिचार्ज, विकास निगरानी उपकरणों (शिशुमापी, स्टेडीमीटर) का उपयोग।
* **जवाबदेही और पारदर्शिता:** सेवाओं के वितरण और परिणामों की डिजिटल निगरानी।
* **नीति निर्माण:** सटीक डेटा के आधार पर प्रभावी नीतियों का निर्माण।
3. **कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियाँ:**
* **डिजिटल साक्षरता:** आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों के बीच डिजिटल उपकरणों के उपयोग की समझ का अभाव।
* **बुनियादी ढाँचा:** ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की कमी।
* **डेटा गोपनीयता और सुरक्षा:** संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा के प्रबंधन से संबंधित चिंताएँ।
* **तकनीकी खराबी:** एप्लिकेशन में तकनीकी समस्याएँ या बग।
* **मानव संसाधन:** प्रशिक्षित कर्मियों की कमी, डेटा प्रविष्टि में त्रुटियाँ।
* **वित्तीय बाधाएँ:** उपकरणों के रखरखाव और उन्नयन के लिए पर्याप्त धन का अभाव।
4. **निष्कर्ष:** इन चुनौतियों का समाधान करते हुए पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल उपकरणों का प्रभावी उपयोग भारत में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments