‘समुद्र मंथन’ योजना: 84,084 करोड़ रुपये की अपतटीय ऊर्जा क्रांति, जानिए UPSC-PCS दृष्टिकोण

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 84,084 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली ‘समुद्र मंथन’ (राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना) को मंजूरी दी — concept mind map

‘समुद्र मंथन’ योजना: 84,084 करोड़ रुपये की अपतटीय ऊर्जा क्रांति, जानिए UPSC-PCS दृष्टिकोण

✎ ‘समुद्र मंथन’ – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन को बढ़ावा देने और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक परिवर्तनकारी राष्ट्रीय पहल है।

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समुद्र मंथन योजना

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy)  |  GS Paper III — आधारभूत संरचना (Infrastructure)  |  GS Paper III — ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security)
  • Prelims: समुद्र मंथन योजना, राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, केन्द्रीय क्षेत्र की योजना, ऊर्जा सुरक्षा, अपतटीय अन्वेषण (Offshore Exploration), मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत
  • Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में ऊर्जा क्षेत्र की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: ‘समुद्र मंथन’ – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन को बढ़ावा देने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक परिवर्तनकारी राष्ट्रीय पहल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में 84,084 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली ‘समुद्र मंथन’ – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक कार्यान्वयन हेतु मंजूरी दी है। यह योजना भारत की विशाल अपतटीय ऊर्जा क्षमता का लाभ उठाने और देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जो घरेलू स्तर पर अन्वेषण एवं उत्पादन को तेज करने तथा तकनीकी नेतृत्व को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

पृष्ठभूमि

  • भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई है।
  • प्रधानमंत्री ने 2025 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से आधुनिक ‘समुद्र मंथन’ के रूप में भारत की अपतटीय ऊर्जा क्षमता का लाभ उठाने के विजन को प्रस्तुत किया था।
  • पिछले दशक में, सरकार ने अपस्ट्रीम सेक्टर (Upstream Sector) में व्यापक परिवर्तनकारी सुधार किए हैं, जिनमें अन्वेषण (Exploration) हेतु लगभग पूरे अपतटीय इलाके को खोलना और विधायी एवं अनुबंध से संबंधित ढांचे को आधुनिक बनाना शामिल है।
  • घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन में वृद्धि से आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
  • भारत का लक्ष्य ‘विकसित भारत’ बनना है, जिसके लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर ऊर्जा क्षेत्र का होना अपरिहार्य है।

‘समुद्र मंथन’ – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना क्या है?

  • यह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे वित्त वर्ष 2030-31 तक कार्यान्वयन के लिए 84,084 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है।
  • योजना का मुख्य उद्देश्य भारत की विशाल अपतटीय ऊर्जा क्षमता का लाभ उठाना, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना और घरेलू स्तर पर अन्वेषण एवं उत्पादन को तेज करना है।
  • इसमें उच्च गुणवत्ता वाले भूकंपीय (Seismic) डेटा को बड़े पैमाने पर एकत्रित करना, उसका विश्लेषण एवं व्याख्या करना शामिल है।
  • योजना के तहत गहरे पानी व बहुत गहरे पानी में तेजी से अन्वेषण करने वाली ड्रिलिंग (Drilling) और नए एवं कम खोजे गए बेसिन (Basin) में वैज्ञानिक ड्रिलिंग की जाएगी।
  • अपतटीय उत्पादन एवं निकासी हेतु साझा बुनियादी ढांचा विकसित करना और एक एकीकृत तेल एवं गैस मैन्यूफैक्चरिंग तथा सेवा परिक्षेत्र की स्थापना करना भी इसके प्रमुख घटकों में से एक है।
  • इसमें डिजिटल कार्यक्रम प्रबंधन, क्षमता विकास, तकनीक को अपनाने, हितधारकों को शामिल करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क बढ़ाने के विशेष प्रावधान शामिल हैं।
  • इस योजना से 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) से अधिक का भंडार जमा होने की प्रक्रिया में तेजी आने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद है।
  • यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को सुदृढ़ करेगी तथा अपतटीय प्रौद्योगिकी एवं सेवाओं का एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम (Ecosystem) बनाएगी।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
परिव्यय 84,084 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2030-31 तक)
योजना का प्रकार केन्द्रीय क्षेत्र की योजना (पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय)
लक्ष्य भारत की विशाल अपतटीय ऊर्जा क्षमता का लाभ उठाना और ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ करना
प्रमुख गतिविधियाँ उच्च गुणवत्ता वाले भूकंपीय डेटा का संग्रहण, गहरे पानी में अन्वेषण ड्रिलिंग, नए बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, साझा बुनियादी ढांचा विकास
अपेक्षित परिणाम 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) से अधिक भंडार की खोज में तेजी, घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन में वृद्धि
रोजगार एवं विनिर्माण बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत घरेलू विनिर्माण को सुदृढ़ करना

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत करेगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन में वृद्धि से आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा और उद्योगों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
  • अपतटीय अन्वेषण (Offshore Exploration) गतिविधियों में व्यापक निवेश से उद्योग, नवाचार और आर्थिक विकास के दीर्घकालिक अवसर पैदा होंगे।

सामरिक महत्व

  • भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता (Energy Independence) की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भू-राजनीतिक दबावों का सामना करने की क्षमता बढ़ेगी।
  • यह ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने में सहायक होगा, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी विकसित राष्ट्र की आधारशिला होती है।
  • घरेलू विनिर्माण और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर अपतटीय प्रौद्योगिकी एवं सेवाओं में प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।

पर्यावरणीय महत्व

  • हालांकि यह जीवाश्म ईंधन से संबंधित है, लेकिन घरेलू उत्पादन में वृद्धि से परिवहन लागत और संबंधित उत्सर्जन में कमी आ सकती है, यदि आयातित स्रोतों की तुलना में अधिक कुशल निष्कर्षण विधियों का उपयोग किया जाता है।
  • योजना में डिजिटल कार्यक्रम प्रबंधन और तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया है, जो अन्वेषण प्रक्रियाओं को अधिक कुशल और संभवतः कम पर्यावरणीय प्रभाव वाला बना सकता है।

सामाजिक महत्व

  • बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा, जिससे विभिन्न कौशल स्तरों के व्यक्तियों को अवसर मिलेंगे।
  • यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को सुदृढ़ करेगा, जिससे देश के भीतर ही क्षमताओं का विकास होगा और बाहरी निर्भरता कम होगी।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी चुनौतियाँ

  • गहरे पानी और बहुत गहरे पानी में अन्वेषण एवं ड्रिलिंग के लिए अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जो महंगी और जटिल प्रक्रिया है।
  • भूकंपीय डेटा के संग्रहण, विश्लेषण और व्याख्या में उच्च तकनीकी दक्षता और उन्नत सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।

2. पर्यावरणीय चिंताएँ

  • अपतटीय अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem) पर संभावित नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जैसे तेल रिसाव (Oil Spill) का खतरा।
  • समुद्री जीवन और तटीय समुदायों पर इन गतिविधियों के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन और प्रबंधन एक चुनौती है।

3. उच्च पूंजीगत लागत

  • अपतटीय अन्वेषण और उत्पादन में भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, जैसा कि 84,084 करोड़ रुपये के परिव्यय से स्पष्ट है।
  • परियोजनाओं की उच्च लागत और लंबी परिपक्वता अवधि (Maturity Period) वित्तीय जोखिमों को बढ़ा सकती है।

4. भू-वैज्ञानिक अनिश्चितताएँ

  • नए और कम खोजे गए बेसिन में अन्वेषण में भू-वैज्ञानिक अनिश्चितताएँ अधिक होती हैं, जिससे सफल खोज की संभावना कम हो सकती है।
  • भंडार की मात्रा और गुणवत्ता का सटीक अनुमान लगाना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
तकनीकी जटिलता गहरे पानी में अन्वेषण और ड्रिलिंग के लिए विशेषज्ञता और उन्नत उपकरणों की आवश्यकता।
पर्यावरणीय जोखिम समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर संभावित तेल रिसाव और अन्य प्रदूषण का खतरा।
उच्च निवेश परियोजना की भारी पूंजीगत लागत और वित्तीय व्यवहार्यता (Financial Viability) का प्रबंधन।
भू-वैज्ञानिक जोखिम नए बेसिन में तेल एवं गैस भंडार की खोज में अनिश्चितता।
नियामक ढाँचा तेजी से अन्वेषण के लिए एक कुशल और पारदर्शी नियामक वातावरण सुनिश्चित करना।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अत्याधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञता के लिए अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी की आवश्यकता।

आगे की राह

  • पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) और प्रबंधन योजनाओं को मजबूत करना ताकि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।
  • अत्याधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञता के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देना, विशेषकर गहरे पानी के अन्वेषण में।
  • घरेलू अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) को प्रोत्साहित करना और भारतीय कंपनियों को अपतटीय अन्वेषण एवं उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्षमता निर्माण करना।
  • एक स्थिर और पारदर्शी नियामक ढाँचा (Regulatory Framework) सुनिश्चित करना जो निवेश को आकर्षित करे और परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन को सुगम बनाए।
  • कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना ताकि इस क्षेत्र में आवश्यक मानव संसाधन (Human Resources) उपलब्ध हो सकें।
  • अन्वेषण जोखिमों को कम करने के लिए उन्नत भू-वैज्ञानिक मॉडलिंग और डेटा विश्लेषण तकनीकों का उपयोग करना।
  • नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) स्रोतों के साथ तालमेल बिठाना ताकि भारत की ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) को संतुलित किया जा सके और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 297’, ‘note’: ‘भारत के प्रादेशिक जल में मूल्यवान वस्तुएँ’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस’}

अवधारणा प्रवाह

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ को मंजूरी दी  →  अपतटीय अन्वेषण गतिविधियों में वृद्धि  →  घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन में तेजी  →  भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़  →  आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन  →  ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘समुद्र मंथन’ योजना पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है।
2. इस योजना का उद्देश्य भारत की अपतटीय ऊर्जा क्षमता का लाभ उठाना और ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
3. इसके तहत केवल गहरे पानी में तेल एवं गैस अन्वेषण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, उथले पानी को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ‘समुद्र मंथन’ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य भारत की अपतटीय ऊर्जा क्षमता का लाभ उठाना और ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। कथन 3 गलत है क्योंकि योजना में गहरे पानी के साथ-साथ नए एवं कम खोजे गए बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग और अपतटीय अन्वेषण की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला शामिल है, जो केवल गहरे पानी तक सीमित नहीं है।

Q2. अभिकथन (A): ‘समुद्र मंथन’ योजना घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन को बढ़ावा देने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने में सहायक होगी।
कारण (R): यह योजना अपतटीय अन्वेषण की गतिविधियों में काफी वृद्धि करेगी और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को सुदृढ़ करेगी।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं। ‘समुद्र मंथन’ योजना अपतटीय अन्वेषण को बढ़ावा देकर घरेलू उत्पादन बढ़ाएगी, जिससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही, यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को भी सुदृढ़ करेगी, जो घरेलू उत्पादन और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है। इस प्रकार, कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में ‘समुद्र मंथन’ – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना की भूमिका का परीक्षण कीजिए। यह योजना ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक होगी? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘समुद्र मंथन’ योजना का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और परिव्यय (84,084 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2030-31 तक) का उल्लेख।
2. ऊर्जा सुरक्षा में भूमिका:
* घरेलू अन्वेषण एवं उत्पादन में वृद्धि: 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) से अधिक भंडार की उम्मीद।
* आयात निर्भरता में कमी: कच्चे तेल और गैस के आयात पर निर्भरता कम करना।
* रणनीतिक स्वायत्तता: वैश्विक ऊर्जा बाजारों की अस्थिरता से बचाव।
* तकनीकी नेतृत्व: उच्च गुणवत्ता वाले भूकंपीय डेटा संग्रह, गहरे पानी में ड्रिलिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग।
3. ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में सहायता:
* आर्थिक संवृद्धि: अन्वेषण एवं उत्पादन मूल्य श्रृंखला में व्यापक निवेश, उद्योग और नवाचार को बढ़ावा।
* रोजगार सृजन: बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर।
* ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’: घरेलू विनिर्माण और अपतटीय प्रौद्योगिकी एवं सेवाओं के पारिस्थितिकी तंत्र का विकास।
* बुनियादी ढांचा विकास: अपतटीय उत्पादन एवं निकासी हेतु साझा बुनियादी ढांचे का निर्माण।
* क्षमता विकास: डिजिटल कार्यक्रम प्रबंधन और हितधारक जुड़ाव के माध्यम से मानव संसाधन का विकास।
4. चुनौतियाँ और आगे की राह: पर्यावरणीय चिंताएँ, तकनीकी जटिलताएँ, वैश्विक तेल कीमतों का प्रभाव। सतत अन्वेषण और उत्पादन के लिए नियामक ढाँचे की भूमिका।
5. निष्कर्ष: योजना का समग्र महत्व और भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा भविष्य के लिए इसकी क्षमता।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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