01 Aug पीएम-वीबीआरवाई: पहली बार रोजगार वालों को ₹2 लाख तक सब्सिडी, 3.5 करोड़ रोजगार सृजन
✎ प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) का लक्ष्य पहली बार रोजगार प्राप्त करने वालों और नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करके औपचारिक रोजगार का विस्तार करना, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज, जनसंख्या एवं संबंधित मुद्दे | GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोजगार
- Prelims: प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), औपचारिक रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, जनसांख्यिकीय लाभांश, वित्तीय समावेशन, राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन
- Essay: विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में मानव पूंजी का महत्व, भारत में रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) का लक्ष्य पहली बार रोजगार प्राप्त करने वालों और नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करके औपचारिक रोजगार का विस्तार करना, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) 1 अगस्त 2026 को अपने कार्यान्वयन का एक वर्ष पूरा कर रही है। यह योजना भारत में औपचारिक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के दायरे के विस्तार के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसका लक्ष्य पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित करना और नियोक्ताओं को नए औपचारिक रोजगार सृजित करने हेतु प्रोत्साहन प्रदान करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत का युवा और गतिशील कार्यबल देश की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है, जो आर्थिक विकास को गति देने और विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने का अद्वितीय अवसर प्रदान करता है।
- प्रत्येक वर्ष लाखों युवा श्रम बाजार में प्रवेश करते हैं, और इस जनसांख्यिकीय लाभ को सतत् एवं समावेशी विकास में परिवर्तित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा सहित औपचारिक रोजगार का विस्तार अत्यंत आवश्यक है।
- अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार की व्यापकता भारत में सामाजिक सुरक्षा लाभों और वित्तीय स्थिरता की कमी का एक प्रमुख कारण रही है।
- सरकार ने रोजगार सृजन और कार्यबल के औपचारिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहलें की हैं, जिनमें यह योजना एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यह योजना राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (National Manufacturing Mission) जैसे अन्य सरकारी कार्यक्रमों का भी पूरक है, जिसका उद्देश्य विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) क्या है?
- यह योजना अगस्त 2025 में घोषित की गई थी और इसका कार्यान्वयन 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक, दो वर्षों की अवधि में ₹99,446 करोड़ के परिव्यय के साथ किया जा रहा है।
- योजना का उद्देश्य 3.5 करोड़ से अधिक लोगों के लिए रोजगार सृजित करना है, जिनमें 1.92 करोड़ पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारी शामिल हैं।
- यह योजना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से संबद्ध एक प्रौद्योगिकी-संचालित ढांचे के माध्यम से कार्यबल के औपचारिकीकरण को बढ़ावा देती है और सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार करती है।
- योजना का मूल आधार दो-भागीय प्रोत्साहन ढांचा है, जिसमें कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।
- भाग ए: पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन – ₹1,00,000 प्रति माह तक का वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों को एक माह के ईपीएफ वेतन के बराबर एकमुश्त प्रोत्साहन राशि (अधिकतम ₹15,000) प्रदान की जाती है।
- यह प्रोत्साहन राशि दो किश्तों में दी जाती है: पहली छह माह की सेवा पूर्ण होने पर और दूसरी वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा होने के उपरांत।
- यह योजना युवाओं को EPFO में पंजीकरण के माध्यम से संगठित कार्यबल में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है और श्रम-प्रधान विनिर्माण क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| लक्षित लाभार्थी | पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले व्यक्ति और नए औपचारिक रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ता। |
| प्रशासनिक निकाय | कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा प्रशासित, प्रौद्योगिकी-संचालित ढाँचा। |
| उद्देश्य | कार्यबल के औपचारिकीकरण को बढ़ावा देना, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करना और श्रमिकों की वित्तीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना। |
| वित्तीय परिव्यय | दो वर्षों (1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027) की अवधि में ₹99,446 करोड़। |
| रोजगार सृजन लक्ष्य | 3.5 करोड़ से अधिक लोगों के लिए रोजगार, जिनमें 1.92 करोड़ पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। |
| प्रोत्साहन ढाँचा | कर्मचारियों (₹15,000 तक एकमुश्त प्रोत्साहन) और नियोक्ताओं (प्रति पात्र कर्मचारी ₹3,000 तक मासिक प्रोत्साहन) दोनों के लिए दो-भागीय प्रोत्साहन। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना औपचारिक रोजगार सृजन को बढ़ावा देकर भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का लाभ उठाने में मदद करती है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलती है।
- कार्यबल के औपचारिकीकरण से सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में संगठित क्षेत्र का योगदान बढ़ता है, जिससे अर्थव्यवस्था की समग्र उत्पादकता और दक्षता में सुधार होता है।
- वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा मिलता है क्योंकि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में पंजीकरण के माध्यम से श्रमिक औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ते हैं, जिससे उनकी बचत और निवेश क्षमता बढ़ती है।
सामाजिक महत्व
- यह योजना श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे में लाती है, जिससे उन्हें भविष्य निधि (Provident Fund) और अन्य लाभों के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा मिलती है।
- पहली बार रोजगार प्राप्त करने वालों को प्रोत्साहन देकर, यह योजना युवाओं को संगठित क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे उन्हें बेहतर कार्य परिस्थितियाँ और लाभ मिलते हैं।
- यह श्रमिकों की वित्तीय सुरक्षा को सुदृढ़ करती है, जिससे गरीबी और असमानता कम होती है तथा समाज में समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
शासनिक महत्व
- यह योजना प्रौद्योगिकी-संचालित और पारदर्शी कार्यान्वयन ढाँचे के माध्यम से सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों को बढ़ावा देती है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।
- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जैसे मौजूदा संस्थागत तंत्रों का उपयोग करके, यह योजना प्रशासनिक दक्षता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करती है।
- यह सरकार की ‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना को साकार करने में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो समावेशी विकास और रोजगार सृजन पर केंद्रित है।
चुनौतियाँ
1. औपचारिक क्षेत्र में सीमित क्षमता
- भारत में अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) का आकार बहुत बड़ा है, और औपचारिक क्षेत्र में रोजगार सृजन की दर अभी भी अपेक्षाकृत धीमी है।
- योजना का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन क्या औपचारिक क्षेत्र इतनी बड़ी संख्या में नए रोजगार सृजित कर पाएगा, यह एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों का जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
2. योजना के लाभों की जागरूकता और पहुँच
- विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले व्यक्तियों और छोटे नियोक्ताओं के बीच योजना के बारे में जागरूकता की कमी हो सकती है।
- प्रौद्योगिकी-संचालित ढाँचा होने के बावजूद, डिजिटल साक्षरता की कमी कुछ लाभार्थियों के लिए चुनौती बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: विकास प्रक्रियाएँ और विकास उद्योग – गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानदाताओं, संस्थागत और अन्य हितधारकों की भूमिका।
3. नियोक्ताओं पर अनुपालन बोझ
- योजना के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए नियोक्ताओं को कुछ शर्तों का पालन करना होगा, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर अनुपालन बोझ बढ़ सकता है।
- नियोक्ताओं को कर्मचारियों को कम-से-कम छह महीने तक कार्यरत रखने और अन्य मानदंडों को पूरा करने की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव।
4. वित्तीय स्थिरता और दीर्घकालिक प्रभाव
- ₹99,446 करोड़ का बड़ा परिव्यय राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) पर दबाव डाल सकता है, खासकर यदि योजना के अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं।
- योजना के समाप्त होने के बाद रोजगार सृजन और औपचारिकीकरण की गति को बनाए रखना एक चुनौती होगी।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: सरकारी बजटिंग।
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व | भारत के कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अनौपचारिक क्षेत्र में है, जिसे औपचारिक क्षेत्र में लाना एक बड़ी चुनौती है। |
| कौशल अंतराल | औपचारिक रोजगार के लिए आवश्यक कौशल और उपलब्ध कार्यबल के कौशल के बीच का अंतर रोजगार सृजन में बाधा बन सकता है। |
| छोटे व्यवसायों की भागीदारी | छोटे और सूक्ष्म व्यवसायों को योजना में शामिल करना और उन्हें अनुपालन के लिए प्रोत्साहित करना मुश्किल हो सकता है। |
| योजना के बाद की स्थिरता | प्रोत्साहन अवधि समाप्त होने के बाद औपचारिक रोजगार की निरंतरता सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी। |
| जागरूकता और पहुँच | विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, संभावित लाभार्थियों तक योजना की जानकारी पहुँचाना और उन्हें लाभ उठाने में मदद करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (National Manufacturing Mission)
आगे की राह
- योजना के लाभों और प्रक्रिया के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, विशेषकर छोटे व्यवसायों और पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के लिए।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को इस योजना के साथ एकीकृत किया जाए ताकि औपचारिक क्षेत्र में प्रवेश करने वाले श्रमिकों को आवश्यक कौशल प्रदान किया जा सके।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त बोझ के योजना में भाग ले सकें।
- योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाए ताकि इसकी प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।
- प्रोत्साहन अवधि समाप्त होने के बाद भी औपचारिक रोजगार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियाँ विकसित की जाएँ।
- वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया जाए ताकि कर्मचारी अपने प्रोत्साहन राशि का प्रभावी ढंग से प्रबंधन कर सकें और बचत को बढ़ावा दे सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) · औपचारिक रोजगार · सामाजिक सुरक्षा · जनसांख्यिकीय लाभांश · कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) · रोजगार सृजन · वित्तीय समावेशन · श्रमिकों का कल्याण · विकसित भारत 2047 · राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोगों के कल्याण को बढ़ावा देगा।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम पाने के अधिकार का प्रावधान।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि।’}
अवधारणा प्रवाह
जनसांख्यिकीय लाभांश और युवा कार्यबल → औपचारिक रोजगार की आवश्यकता और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार → प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) का शुभारंभ → कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन → EPFO के माध्यम से औपचारिकीकरण और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार → रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन और आर्थिक संवृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
2. इसका कार्यान्वयन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा किया जा रहा है।
3. इस योजना का उद्देश्य 3.5 करोड़ से अधिक लोगों के लिए रोजगार सृजित करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है क्योंकि यह योजना पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ नियोक्ताओं को भी प्रोत्साहन प्रदान करती है। कथन 2 और 3 सही हैं। योजना का कार्यान्वयन ईपीएफओ द्वारा किया जा रहा है और इसका लक्ष्य 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करना है।
Q2. अभिकथन (A): प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) भारत में औपचारिक रोजगार के विस्तार में सहायक है।
कारण (R): यह योजना कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, तथा R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, तथा R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि पीएम-वीबीआरवाई औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देती है। कारण (R) भी सही है क्योंकि यह योजना कर्मचारियों को ईपीएफओ में पंजीकृत करके और नियोक्ताओं को अतिरिक्त कर्मचारी रखने के लिए प्रोत्साहित करके सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करती है। कारण (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को सतत् एवं समावेशी विकास में परिवर्तित करने में किस प्रकार सहायक है? इसके प्रमुख उद्देश्यों और प्रोत्साहन ढांचे का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: पीएम-वीबीआरवाई का संक्षिप्त परिचय, इसके लॉन्च का संदर्भ (विकसित भारत 2047) और मुख्य लक्ष्य (औपचारिक रोजगार, सामाजिक सुरक्षा)।
2. जनसांख्यिकीय लाभांश से संबंध: स्पष्ट करें कि भारत का युवा कार्यबल एक अवसर कैसे है और औपचारिक रोजगार का विस्तार इस लाभांश को कैसे भुना सकता है। पीएम-वीबीआरवाई इस प्रक्रिया में कैसे योगदान करती है, इसका उल्लेख करें।
3. प्रमुख उद्देश्य: योजना के मुख्य उद्देश्यों को विस्तार से बताएं, जैसे:
* 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजन (1.92 करोड़ पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले)।
* युवाओं को ईपीएफओ के माध्यम से संगठित कार्यबल में शामिल करना।
* श्रम-प्रधान विनिर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा का विस्तार।
* राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन का पूरक होना।
4. प्रोत्साहन ढांचा (दो-भागीय):
* भाग ए: पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन (पात्रता, ₹1 लाख तक वेतन, ₹15,000 तक एकमुश्त प्रोत्साहन, किस्तों में भुगतान, वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम, बचत साधन में निवेश)।
* भाग बी: नियोक्ताओं को सहायता (पात्रता, ₹1 लाख तक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए, ₹3,000 प्रति माह तक दो वर्षों के लिए)।
5. महत्व और प्रभाव: योजना के व्यापक प्रभावों पर चर्चा करें, जैसे:
* कार्यबल का औपचारिकीकरण।
* श्रमिकों की वित्तीय सुरक्षा में वृद्धि।
* वित्तीय समावेशन को बढ़ावा।
* दीर्घकालिक आर्थिक विकास में योगदान।
6. निष्कर्ष: योजना के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित निष्कर्ष, भारत के आर्थिक भविष्य और सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करने में इसकी भूमिका पर जोर दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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