मानव-हाथी संघर्ष: केंद्र सरकार ने बनाया राज्यवार मास्टर प्लान, जानिए कैसे बचेंगे गाँव और गजराज

Wildlife Conflict: गजराज होंगे सुरक्षित, गांव भी बचेंगे; क्या इंसान-हाथियों के टकराव को रोक पाएगी ये योजना? — concept mind map

मानव-हाथी संघर्ष: केंद्र सरकार ने बनाया राज्यवार मास्टर प्लान, जानिए कैसे बचेंगे गाँव और गजराज

✎ मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा पहली बार राज्यवार मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जो टकराव के बाद मुआवजे के बजाय पूर्व-सक्रिय निवारण पर केंद्रित है।

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Human-Elephant Conflict Master Plan

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन  |  GS Paper I — भूगोल (मानव भूगोल, वन्यजीव)
  • Prelims: मानव-हाथी संघर्ष, भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, प्रोजेक्ट एलिफेंट, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, हाथी गलियारे, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
  • Essay: मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व की चुनौतियाँ और समाधान, सतत विकास और वन्यजीव संरक्षण: एक संतुलनकारी कार्य

त्वरित पुनरावृत्ति: मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा पहली बार राज्यवार मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जो टकराव के बाद मुआवजे के बजाय पूर्व-सक्रिय निवारण पर केंद्रित है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

देश में मानव और हाथियों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए केंद्र सरकार की पहल पर पहली बार राज्यवार मास्टर प्लान तैयार किया गया है। यह योजना भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India – WII), देहरादून द्वारा दो वर्षों के गहन अध्ययन के बाद बनाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य हर साल होने वाली सैकड़ों मौतों को रोकना और इंसान व हाथी दोनों के लिए सुरक्षित सह-अस्तित्व का मार्ग प्रशस्त करना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में हर साल मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) में औसतन 600 लोग और 120 हाथियों की जान चली जाती है।
  • जंगल से निकलकर हाथियों के झुंड अक्सर गांवों और खेतों तक पहुँच जाते हैं, जिससे फसलों को नुकसान होता है, संपत्ति नष्ट होती है और जान-माल का खतरा बढ़ जाता है।
  • यह संघर्ष मुख्य रूप से आवास के नुकसान, वन क्षेत्रों के विखंडन, हाथियों के पारंपरिक गलियारों (Elephant Corridors) में बाधा और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण होता है।
  • पहले इस समस्या का समाधान मुख्य रूप से घटनाओं के बाद मुआवजा देने तक सीमित था, लेकिन नई योजना में टकराव को रोकने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल को मानव-हाथी संघर्ष के सबसे संवेदनशील राज्य के रूप में चिह्नित किया गया है, जहाँ 100 हॉटस्पॉट हैं।
  • देश में लगभग 25,000 हाथी हैं।

मानव-हाथी संघर्ष निवारण मास्टर प्लान

  • यह योजना केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) की पहल पर भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा तैयार की गई है।
  • योजना का मुख्य लक्ष्य मानव और हाथियों दोनों की वार्षिक मौतों को शून्य के करीब लाना है।
  • यह पहली बार है जब प्रत्येक राज्य की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग कार्ययोजनाएँ बनाई गई हैं।
  • योजना का फोकस टकराव होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय, संघर्ष को पहले ही रोकने के लिए पूर्व-सक्रिय उपाय (Proactive Measures) करना है।
  • इसमें हाथियों के आवासों का संरक्षण, उनके पारंपरिक गलियारों को सुरक्षित करना, मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों के पास निवारक उपाय लागू करना शामिल है।
  • योजना में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और जागरूकता कार्यक्रमों पर भी जोर दिया गया है, ताकि वे हाथियों के व्यवहार को समझ सकें और सुरक्षित दूरी बनाए रख सकें।
  • यह योजना 20 से 25 वर्षों के आंकड़ों के गहन विश्लेषण पर आधारित है और 12 अगस्त के आसपास जारी होने की उम्मीद है।
  • इसका उद्देश्य मानव और हाथी के बीच सह-अस्तित्व (Co-existence) के स्थायी मॉडल को विकसित करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
राज्यवार मास्टर प्लान मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए पहली बार राज्य-विशिष्ट रणनीतियाँ।
भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा अध्ययन 20-25 वर्षों के आंकड़ों पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट, वैज्ञानिक दृष्टिकोण।
मौतों को शून्य के करीब लाना प्रति वर्ष औसतन 600 मानव और 120 हाथियों की मौतों को रोकना।
निवारक उपाय हादसों के बाद मुआवजे के बजाय संघर्ष को पहले ही रोकने पर जोर।
हॉटस्पॉट की पहचान झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 100 संवेदनशील क्षेत्रों का चिह्नांकन।
भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार रणनीति प्रत्येक राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं और भौगोलिक स्थिति के अनुरूप कार्ययोजना।

महत्व

पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण

  • हाथियों की आबादी और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • जैव विविधता (Biodiversity) के संरक्षण में योगदान, जो पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण होने वाली हाथियों की अकाल मृत्यु को कम करना।

सामाजिक और मानवीय सुरक्षा

  • ग्रामीण समुदायों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ हाथी अक्सर आते हैं।
  • किसानों की फसलों को हाथियों द्वारा होने वाले नुकसान को कम करके उनकी आजीविका की रक्षा करना।
  • मानव-हाथी सह-अस्तित्व (Co-existence) को बढ़ावा देना और संघर्ष के बजाय सामंजस्य स्थापित करना।

शासन और नीति निर्माण

  • केंद्र सरकार की पहल पर भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा तैयार की गई एक व्यापक और वैज्ञानिक रिपोर्ट।
  • राज्य-विशिष्ट रणनीतियों के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील और प्रभावी नीति निर्माण।
  • मुआवजा-आधारित दृष्टिकोण से निवारक-आधारित दृष्टिकोण की ओर नीतिगत बदलाव।

आर्थिक प्रभाव

  • फसल क्षति और संपत्ति के नुकसान को कम करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देना।
  • संघर्ष के कारण होने वाले आर्थिक बोझ (जैसे मुआवजा, पुनर्वास) को कम करना।

चुनौतियाँ

1. पर्यावास का नुकसान और विखंडन

  • शहरीकरण, कृषि विस्तार और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवासों का सिकुड़ना।
  • हाथी गलियारों (Elephant Corridors) का अवरुद्ध होना, जिससे हाथियों को भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों में प्रवेश करना पड़ता है।

2. मानव आबादी का विस्तार

  • वन क्षेत्रों के निकट मानव बस्तियों का बढ़ता घनत्व, जिससे मानव-हाथी संपर्क की संभावना बढ़ जाती है।
  • वन संसाधनों पर बढ़ती मानवीय निर्भरता, जिससे हाथियों के साथ प्रतिस्पर्धा होती है।

3. प्रभावी कार्यान्वयन और समन्वय

  • राज्यवार मास्टर प्लान को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने में चुनौतियाँ।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय की कमी।

4. जागरूकता और क्षमता निर्माण

  • स्थानीय समुदायों में हाथियों के व्यवहार और संघर्ष को रोकने के तरीकों के बारे में जागरूकता की कमी।
  • वन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के लिए संघर्ष प्रबंधन में क्षमता निर्माण की आवश्यकता।

5. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

  • जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा पैटर्न में बदलाव और जल स्रोतों की कमी, जिससे हाथी नए क्षेत्रों की ओर पलायन करते हैं।
  • खाद्य उपलब्धता में कमी, जिससे हाथियों को मानव बस्तियों में भोजन की तलाश करनी पड़ती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पर्यावास का नुकसान शहरीकरण और कृषि के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवासों का सिकुड़ना।
हाथी गलियारों का अवरुद्ध होना हाथियों के आवागमन में बाधा, जिससे वे मानव बस्तियों में प्रवेश करते हैं।
मानव आबादी का विस्तार वन क्षेत्रों के निकट बढ़ती मानव बस्तियाँ, संघर्ष की संभावना बढ़ाती हैं।
फसल क्षति हाथियों द्वारा फसलों को नुकसान, किसानों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव।
प्रभावी कार्यान्वयन राज्यवार योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में चुनौतियाँ और समन्वय की कमी।
जागरूकता की कमी स्थानीय समुदायों में हाथी व्यवहार और संघर्ष प्रबंधन के बारे में जानकारी का अभाव।

आगे की राह

  • हाथी गलियारों की पहचान, संरक्षण और पुनर्स्थापन को प्राथमिकता देना।
  • वन क्षेत्रों के किनारे रहने वाले समुदायों के लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसर विकसित करना।
  • सौर ऊर्जा से चलने वाली बाड़ (Solar Fencing) और अन्य गैर-घातक बाधाओं का उपयोग करके मानव बस्तियों की सुरक्षा करना।
  • स्थानीय समुदायों, वन विभाग और गैर-सरकारी संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना।
  • हाथी व्यवहार और संघर्ष शमन तकनीकों पर जागरूकता कार्यक्रम और क्षमता निर्माण प्रशिक्षण आयोजित करना।
  • फसल क्षति को रोकने के लिए हाथी-प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देना और क्षतिपूर्ति तंत्र को सुदृढ़ करना।
  • हाथियों के लिए जल स्रोतों और खाद्य उपलब्धता में सुधार हेतु वन क्षेत्रों में प्रबंधन करना।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) का विकास और उपयोग, जैसे SMS अलर्ट या मोबाइल ऐप।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मानव-हाथी संघर्ष · वन्यजीव संरक्षण · सह-अस्तित्व · राज्यवार मास्टर प्लान · पर्यावरण मंत्रालय · भारतीय वन्यजीव संस्थान · जैव विविधता · संवेदनशील राज्य

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों के प्रति दया का भाव’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों का संरक्षण’}

अवधारणा प्रवाह

पर्यावास का नुकसान और विखंडन  →  हाथी गलियारों का अवरुद्ध होना  →  हाथियों का मानव बस्तियों में प्रवेश  →  मानव-हाथी संघर्ष में वृद्धि  →  जान-माल का नुकसान  →  राज्यवार मास्टर प्लान का विकास  →  संघर्ष को कम करना और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में मानव-हाथी संघर्ष के सबसे संवेदनशील राज्य झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल हैं।
2. देश में हाथियों की कुल संख्या लगभग 25 हजार है, जिनमें से अधिकांश दक्षिण भारत में पाए जाते हैं।
3. केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की पहल पर भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून ने मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए एक राज्यवार मास्टर प्लान तैयार किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 3 सही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सबसे संवेदनशील राज्य हैं, और भारतीय वन्यजीव संस्थान ने मंत्रालय की पहल पर मास्टर प्लान तैयार किया है। कथन 2 गलत है क्योंकि हाथियों की संख्या 25 हजार के करीब है, और अधिकांश दक्षिण भारत में हैं, लेकिन 60 प्रतिशत से अधिक संघर्ष पूर्वी भारत में होता है, न कि दक्षिण भारत में।

Q2. मानव-हाथी संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. यह संघर्ष केवल हाथियों के फसल नष्ट करने तक ही सीमित है।
  2. इस समस्या को कम करने के लिए पूरे देश में एक समान योजना लागू की गई है।
  3. कोयंबटूर स्थित मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्टता केंद्र भी इस दिशा में काम कर रहा है।
  4. उत्तर भारत में जंगलों में भोजन की कमी के कारण ऐसे मामले सबसे अधिक सामने आते हैं।

उत्तर: कोयंबटूर स्थित मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्टता केंद्र भी इस दिशा में काम कर रहा है। — विकल्प C सही है। कोयंबटूर स्थित मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्टता केंद्र इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। विकल्प A गलत है क्योंकि संघर्ष में जान-माल का नुकसान भी शामिल है। विकल्प B गलत है क्योंकि रिपोर्ट में हर राज्य की जरूरत के अनुसार अलग कार्ययोजना तैयार की गई है। विकल्प D गलत है क्योंकि उत्तर भारत में पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध होने के कारण ऐसे मामले सबसे कम सामने आते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में मानव-हाथी संघर्ष के कारणों का विश्लेषण कीजिए और इस समस्या के समाधान हेतु हाल ही में तैयार किए गए राज्यवार मास्टर प्लान की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मानव-हाथी संघर्ष की वर्तमान स्थिति और इसके गंभीर परिणामों का संक्षिप्त विवरण। (लगभग 20 शब्द)
2. संघर्ष के कारण: निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करें:
a. आवास का नुकसान और विखंडन (वनोन्मूलन, अतिक्रमण)।
b. मानव बस्तियों का विस्तार और कृषि भूमि का अतिक्रमण।
c. हाथियों के पारंपरिक गलियारों (कॉरिडोर) में बाधा।
d. भोजन और पानी के स्रोतों की कमी।
e. जलवायु परिवर्तन और मौसमी बदलाव।
f. अवैध शिकार और मानव-जनित बाधाएँ। (लगभग 80-90 शब्द)
3. राज्यवार मास्टर प्लान की प्रमुख विशेषताएँ:
a. केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की पहल।
b. 20-25 वर्षों के आंकड़ों पर आधारित विस्तृत अध्ययन।
c. राज्य-विशिष्ट कार्ययोजनाएँ (पूरे देश के लिए एक जैसी योजना के बजाय)।
d. हॉटस्पॉट की पहचान (जैसे झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल में 100 हॉटस्पॉट)।
e. टकराव के बाद मुआवजे के बजाय पूर्व-निवारक उपायों पर जोर।
f. सह-अस्तित्व की रणनीति का विकास।
g. मौतों को शून्य के करीब लाने का लक्ष्य।
h. कोयंबटूर स्थित मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्टता केंद्र की भूमिका। (लगभग 100-110 शब्द)
4. निष्कर्ष: इस योजना के संभावित सकारात्मक प्रभाव और दीर्घकालिक समाधानों के लिए आगे की राह पर संक्षिप्त टिप्पणी। (लगभग 20 शब्द)

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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