03 Aug लोकसभा ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पारित किया
✎ सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करता है, जिसका उद्देश्य लंबित मामलों के बोझ को कम करना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली | GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे
- Prelims: सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या, भारत के मुख्य न्यायाधीश, संसद की विधायी शक्ति, अनुच्छेद 124, न्यायिक अतिदेय (Judicial Arrears)
- Essay: न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही, भारत में न्यायिक सुधारों की आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करता है, जिसका उद्देश्य लंबित मामलों के बोझ को कम करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, संसद के मानसून सत्र 2026 के दौरान लोकसभा ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रावधान करता है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत, संसद को कानून द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने का अधिकार है।
- मूल रूप से, 1950 में सर्वोच्च न्यायालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित 8 न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित की गई थी।
- समय-समय पर संसद ने कानून बनाकर न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि की है, ताकि न्यायिक कार्यभार को संभाला जा सके।
- इससे पहले, 2019 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम के माध्यम से न्यायाधीशों की संख्या को 31 से बढ़ाकर 34 (CJI सहित) किया गया था।
- न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि का मुख्य कारण देश में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना है।
सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?
- यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि करना है।
- विधेयक के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।
- यह वृद्धि लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से पीठों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी, जिससे अधिक मामलों की सुनवाई संभव हो पाएगी।
- यह न्यायिक दक्षता में सुधार और नागरिकों को समय पर न्याय प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 | यह विधेयक उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को मुख्य न्यायाधीश सहित 34 से बढ़ाकर 38 करता है। |
| अध्यादेश का स्थान | यह विधेयक मई में प्रख्यापित एक अध्यादेश का स्थान लेता है, जो न्यायिक प्रक्रिया की निरंतरता सुनिश्चित करता है। |
| मामलों का बैकलॉग | न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि का उद्देश्य उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों के बढ़ते बैकलॉग को संबोधित करना है। |
| लोकसभा द्वारा पारित | विधेयक को बिना किसी बहस के लोकसभा द्वारा ध्वनि मत से पारित किया गया, जो इसकी त्वरित आवश्यकता को दर्शाता है। |
| MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 | यह विधेयक MSME विकास अधिनियम, 2006 में संशोधन करता है और अदालतों को MSME आपूर्तिकर्ताओं को कम से कम 50% राशि का भुगतान करने का निर्देश देने का अधिकार देता है यदि चुनौती छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहती है। |
महत्व
न्यायिक प्रशासन पर प्रभाव
- उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से न्यायिक दक्षता में सुधार और मामलों के निपटान में तेजी आने की उम्मीद है।
- यह कदम न्याय तक पहुंच में सुधार और नागरिकों के लिए त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
MSME क्षेत्र पर प्रभाव
- MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए वित्तीय सुरक्षा और समय पर भुगतान सुनिश्चित करता है।
- यह MSME क्षेत्र को बढ़ावा देगा, जो भारत की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है, और उनकी तरलता की समस्याओं को कम करेगा।
विधायी प्रक्रिया
- संसदीय व्यवधानों के बावजूद महत्वपूर्ण विधेयकों का पारित होना विधायी प्रक्रिया की निरंतरता और सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
- अध्यादेश को विधेयक से बदलना लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संसदीय संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
चुनौतियाँ
1. न्यायिक बैकलॉग
- न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि के बावजूद, न्यायिक बैकलॉग एक जटिल मुद्दा है जिसके लिए केवल संख्यात्मक वृद्धि से अधिक की आवश्यकता है।
- प्रक्रियात्मक सुधार, प्रौद्योगिकी का उपयोग और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र भी आवश्यक हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, न्यायपालिका
2. संसदीय व्यवधान
- संसदीय सत्रों के दौरान लगातार व्यवधान महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक बहस को बाधित करते हैं।
- यह विधायी गुणवत्ता को प्रभावित करता है और जनता के धन का अपव्यय करता है, जिससे लोकतंत्र के कामकाज पर सवाल उठते हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान, संसद
3. MSME के लिए प्रवर्तन
- MSME के लिए समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका प्रभावी प्रवर्तन एक चुनौती बना हुआ है।
- न्यायिक प्रक्रिया में देरी और जागरूकता की कमी MSME को उनके अधिकारों का पूरी तरह से लाभ उठाने से रोक सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था, MSME
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि | केवल संख्या बढ़ाने से न्यायिक बैकलॉग का पूरी तरह से समाधान नहीं हो सकता है; संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक सुधार भी आवश्यक हैं। |
| संसदीय कार्यवाही में व्यवधान | विधेयकों पर उचित बहस की कमी कानून की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर सकती है। |
| MSME भुगतान विवाद | कानून के बावजूद, MSME आपूर्तिकर्ताओं को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रवर्तन और जागरूकता महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं। |
| न्यायिक रिक्तियां | न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ रिक्तियों को समय पर भरना भी महत्वपूर्ण है ताकि न्यायिक कार्यप्रणाली बाधित न हो। |
आगे की राह
- न्यायिक बैकलॉग को कम करने के लिए न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया में सुधार और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना।
- संसदीय कार्यवाही में व्यवधानों को कम करने और महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक बहस सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक सहमति और नियमों का पालन।
- MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रभावी प्रवर्तन के लिए तंत्र को मजबूत करना और MSME को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करना।
- न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना ताकि स्वीकृत पदों पर रिक्तियां कम से कम हों।
- वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्रों जैसे मध्यस्थता और सुलह को बढ़ावा देना ताकि न्यायपालिका पर बोझ कम हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 124: उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन से संबंधित है।
- अनुच्छेद 124(1): संसद को कानून द्वारा उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने का अधिकार देता है।
- अनुच्छेद 246: संसद को संघ सूची में शामिल विषयों पर कानून बनाने की शक्ति देता है, जिसमें न्यायपालिका भी शामिल है।
अवधारणा प्रवाह
न्यायिक बैकलॉग में वृद्धि → उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता → उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 का परिचय → लोकसभा द्वारा विधेयक का पारित होना → न्यायिक दक्षता में संभावित सुधार और मामलों के निपटान में तेजी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 कर दिया है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं।
2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 सर्वोच्च न्यायालय के गठन और न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित है।
3. संसद के पास कानून द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने या घटाने की शक्ति है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक ने न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी है। कथन 2 सही है क्योंकि अनुच्छेद 124 सर्वोच्च न्यायालय के गठन से संबंधित है। कथन 3 भी सही है क्योंकि संसद के पास कानून द्वारा न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने की शक्ति है।
Q2. अभिकथन (A): सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि का उद्देश्य लंबित मामलों के बढ़ते बैकलॉग को संबोधित करना है।
कारण (R): न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से मामलों के शीघ्र निपटान में मदद मिलेगी और न्यायिक प्रणाली की दक्षता बढ़ेगी।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि विधेयक का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों को कम करना है। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि अधिक न्यायाधीशों से मामलों के निपटान में तेजी आने की उम्मीद है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि के निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह कदम न्यायिक विलंब की समस्या का स्थायी समाधान प्रदान करता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 का संक्षिप्त परिचय और इसके द्वारा न्यायाधीशों की संख्या में की गई वृद्धि का उल्लेख।
2. वृद्धि के निहितार्थ (सकारात्मक): मामलों के बैकलॉग को कम करने में संभावित सहायता, न्यायिक दक्षता में सुधार, त्वरित न्याय सुनिश्चित करना, नागरिकों के मौलिक अधिकारों की बेहतर सुरक्षा।
3. वृद्धि के निहितार्थ (नकारात्मक/सीमाएं): केवल संख्या वृद्धि से समस्या का स्थायी समाधान न होना, बुनियादी ढाँचे और सहायक कर्मचारियों की कमी, न्यायाधीशों की गुणवत्ता पर संभावित प्रभाव, न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता, न्यायिक सक्रियता और आत्म-संयम के बीच संतुलन।
4. न्यायिक विलंब के स्थायी समाधान के लिए अन्य उपाय: वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र का सुदृढ़ीकरण, प्रौद्योगिकी का उपयोग (ई-कोर्ट), न्यायिक प्रक्रिया का सरलीकरण, रिक्तियों को समय पर भरना, निचली अदालतों को मजबूत करना, न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात में सुधार।
5. निष्कर्ष: न्यायिक विलंब एक बहुआयामी समस्या है जिसके लिए केवल न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के बजाय एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है। विधेयक एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे अन्य संरचनात्मक सुधारों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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