04 Aug सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सभी आर्द्रभूमि आरक्षित क्षेत्रों पर लागू होगा खनन पर 10 किमी प्रतिबंध
✎ सर्वोच्च न्यायालय ने आसन वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन प्रतिबंध को देश के सभी वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व पर लागू करने का निर्देश दिया है, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, संरक्षण और आपदा प्रबंधन | GS Paper II — भारतीय संविधान और न्यायपालिका
- Prelims: वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व, रामसर स्थल, आसन वेटलैंड, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, खनन प्रतिबंध, पर्यावरण प्रभाव आकलन, न्यायिक सक्रियता
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन, न्यायपालिका की भूमिका: पर्यावरण शासन और सतत विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: सर्वोच्च न्यायालय ने आसन वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन प्रतिबंध को देश के सभी वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व पर लागू करने का निर्देश दिया है, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि आसन वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व (Asan Wetland Conservation Reserve) के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध का उसका निर्देश देश के अन्य सभी वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व पर भी समान रूप से लागू होगा। यह निर्णय हिमाचल प्रदेश द्वारा दायर एक आवेदन की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें तर्क दिया गया था कि उत्तराखंड के लिए लगाए गए 10 किलोमीटर के प्रतिबंध को उस पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। न्यायालय ने समानता के सिद्धांत को बनाए रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि वेटलैंड एक अलग श्रेणी में आते हैं और उनके संरक्षण के लिए एक समान दृष्टिकोण आवश्यक है।
पृष्ठभूमि
- सर्वोच्च न्यायालय ने 14 फरवरी, 2014 को एक अंतरिम आदेश पारित किया था, जिसमें आसन वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जब तक कि परियोजना प्रस्तावक राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Board of Wildlife) की स्थायी समिति और/या पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forests and Climate Change – MoEF&CC) से अनुमति प्राप्त न कर ले।
- आसन वेटलैंड उत्तराखंड में स्थित एक रामसर स्थल (Ramsar site) है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- हिमाचल प्रदेश ने तर्क दिया था कि आसन रिज़र्व उसके क्षेत्र में नहीं आता है और राष्ट्रीय उद्यानों तथा अभयारण्यों के विपरीत, रिज़र्व क्षेत्र के बाहर बफर ज़ोन (buffer zone) की कोई आवश्यकता नहीं है।
- हिमाचल प्रदेश की याचिका का कारण राज्य उच्च न्यायालय में लंबित एक याचिका थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि चूंकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश पड़ोसी राज्य हैं, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय का 14 फरवरी, 2014 का निर्देश बाद वाले पर भी लागू होगा।
- सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि यदि वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व हिमाचल प्रदेश में पाया जाता है, तो उत्तराखंड में खनन पर 14 फरवरी, 2014 का प्रतिबंध हिमाचल प्रदेश पर भी लागू होगा।
- न्यायालय ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति या पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को यह निर्धारित करने का निर्देश दिया कि आसन रिज़र्व वास्तव में हिमाचल प्रदेश में स्थित है या नहीं।
- न्यायालय ने यह भी कहा कि संपूर्ण हिमालयी भूभाग को निर्देशों के एक ही सेट द्वारा शासित किया जाना चाहिए, सिवाय इसके कि यदि कोई विशेषज्ञ समिति यह कहती है कि वेटलैंड रिज़र्व किसी विशेष राज्य में नहीं है।
वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व क्या हैं?
- वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व (Wetland Conservation Reserves) ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें उनके पारिस्थितिक महत्व के कारण संरक्षित किया जाता है, विशेष रूप से जल-आधारित पारिस्थितिक तंत्रों के रूप में।
- ये रिज़र्व आर्द्रभूमि (wetlands) के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें अक्सर ‘पृथ्वी की किडनी’ कहा जाता है क्योंकि वे जल शोधन, बाढ़ नियंत्रण और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- भारत में, आर्द्रभूमि के संरक्षण को आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 (Wetlands (Conservation and Management) Rules, 2017) के तहत विनियमित किया जाता है, जो आर्द्रभूमि के उपयोग और प्रबंधन के लिए एक नियामक ढाँचा प्रदान करते हैं।
- रामसर स्थल (Ramsar Sites) अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियाँ हैं जिन्हें रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) के तहत नामित किया गया है, जो आर्द्रभूमि के संरक्षण और उनके संसाधनों के सतत उपयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है।
- आसन वेटलैंड संरक्षण रिज़र्व उत्तराखंड में यमुना नदी के तट पर स्थित है और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास है। इसे 2020 में रामसर स्थल घोषित किया गया था।
- राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) एक वैधानिक निकाय है जो वन्यजीवों और उनके आवासों के संरक्षण से संबंधित मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देता है। इसकी स्थायी समिति (Standing Committee) वन्यजीव संरक्षण से संबंधित परियोजनाओं की मंजूरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) एक प्रक्रिया है जिसके तहत किसी प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरणीय परिणामों का मूल्यांकन किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विकास पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुँचाए।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 10 किमी बफर ज़ोन | खनन गतिविधियों को विनियमित करके आर्द्रभूमि संरक्षण को सुनिश्चित करता है। |
| आसन आर्द्रभूमि संरक्षण रिज़र्व | उत्तराखंड में स्थित एक रामसर स्थल, जिसके लिए यह निर्देश मूल रूप से जारी किया गया था। |
| समानता का सिद्धांत | सर्वोच्च न्यायालय ने इस सिद्धांत के आधार पर आसन के निर्देशों को अन्य आर्द्रभूमि संरक्षण रिज़र्वों पर भी लागू किया। |
| राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति/पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय | खनन गतिविधियों के लिए अनुमति देने और आर्द्रभूमि की स्थिति निर्धारित करने वाली प्रमुख नियामक संस्थाएँ। |
| हिमालयी क्षेत्र | सर्वोच्च न्यायालय ने इस पूरे क्षेत्र के लिए समान निर्देशों की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि यह कई राज्यों से होकर गुजरता है। |
महत्व
पर्यावरण संरक्षण
- यह निर्णय आर्द्रभूमि (Wetlands) के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो जैव विविधता (Biodiversity) के लिए महत्वपूर्ण आवास हैं और पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करते हैं।
- खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाकर, यह आर्द्रभूमि के जल विज्ञान (Hydrology) और भू-आकृति विज्ञान (Geomorphology) को बनाए रखने में मदद करेगा, जिससे उनके ‘पृथ्वी के गुर्दे’ (Kidneys of the Earth) के रूप में कार्य करने की क्षमता बनी रहेगी।
न्यायिक सक्रियता और शासन
- सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) को दर्शाता है।
- यह विभिन्न राज्यों में पर्यावरण नियमों में एकरूपता (Uniformity) और समानता (Parity) सुनिश्चित करता है, जिससे अंतर-राज्यीय पर्यावरणीय मुद्दों से निपटने में मदद मिलती है।
सतत विकास
- यह निर्णय आर्थिक गतिविधियों (जैसे खनन) और पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability) के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
- यह राज्यों को अपनी विकास नीतियों में पर्यावरणीय विचारों को एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
चुनौतियाँ
1. राज्यों के लिए आर्थिक प्रभाव
- खनन पर प्रतिबंध से उन राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है जो खनन राजस्व पर निर्भर हैं।
- इससे रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, पर्यावरण
2. सीमांकन और कार्यान्वयन
- आर्द्रभूमि संरक्षण रिज़र्वों की सटीक सीमाओं और 10 किमी बफर ज़ोन का सीमांकन (Demarcation) एक जटिल कार्य हो सकता है।
- विभिन्न राज्यों में इन निर्देशों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना एक चुनौती होगी, जिसके लिए मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: शासन, पर्यावरण
3. केंद्र-राज्य संबंध
- यह निर्णय केंद्र और राज्यों के बीच पर्यावरण संबंधी मामलों में अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) और समन्वय (Coordination) के मुद्दों को उठा सकता है।
- राज्यों को अपने विशिष्ट भू-भाग और आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपवादों की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: राजव्यवस्था, संघवाद
4. स्थानीय समुदायों पर प्रभाव
- खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध से उन स्थानीय समुदायों पर असर पड़ सकता है जो पारंपरिक रूप से इन क्षेत्रों में खनन या उससे संबंधित गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
- उनके लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसरों की पहचान करना और उन्हें प्रदान करना महत्वपूर्ण होगा।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, पर्यावरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| आर्थिक राजस्व हानि | खनन पर प्रतिबंध से राज्यों के राजस्व में कमी आ सकती है और स्थानीय रोजगार प्रभावित हो सकता है। |
| सीमांकन की जटिलता | आर्द्रभूमि और बफर ज़ोन की सटीक सीमाओं का निर्धारण और मानचित्रण एक तकनीकी चुनौती है। |
| कार्यान्वयन में एकरूपता | विभिन्न राज्यों में निर्देशों का समान और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है। |
| स्थानीय आजीविका पर प्रभाव | खनन पर निर्भर समुदायों के लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसरों की आवश्यकता। |
| पर्यावरण बनाम विकास | पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास की आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना। |
आगे की राह
- राज्यों और केंद्र सरकार के बीच समन्वय स्थापित कर आर्द्रभूमि और बफर ज़ोन का स्पष्ट सीमांकन किया जाए।
- खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों के लिए वैकल्पिक और सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा दिया जाए।
- पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) प्रक्रियाओं को मजबूत किया जाए ताकि खनन परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों का सटीक मूल्यांकन हो सके।
- राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि वे अनुमति देने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित कर सकें।
- आर्द्रभूमि संरक्षण के महत्व के बारे में जन जागरूकता (Public Awareness) बढ़ाई जाए और स्थानीय हितधारकों को संरक्षण प्रयासों में शामिल किया जाए।
- पर्यावरण नियमों के अनुपालन की निगरानी के लिए मजबूत तंत्र विकसित किए जाएं और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पर्यावरण संरक्षण · आर्द्रभूमि संरक्षण · रामसर स्थल · खनन गतिविधियाँ · बफर जोन · न्यायिक सक्रियता · राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड · पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय · संघवाद · सतत विकास · पारिस्थितिक संतुलन · न्यायिक समीक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘राज्य द्वारा पर्यावरण का संरक्षण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(g)’, ‘note’: ‘नागरिकों का पर्यावरण संरक्षण कर्तव्य’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘वन, वन्यजीव और पर्यावरण समवर्ती सूची’}
अवधारणा प्रवाह
सर्वोच्च न्यायालय का आसन आर्द्रभूमि पर निर्देश → हिमाचल प्रदेश द्वारा निर्देशों की प्रयोज्यता पर प्रश्न → सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समानता के सिद्धांत का अनुप्रयोग → 10 किमी बफर ज़ोन का सभी आर्द्रभूमि रिज़र्वों पर विस्तार → राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड/MoEF&CC से अनुमति की आवश्यकता → हिमालयी क्षेत्र में समान निर्देशों पर जोर → आर्द्रभूमि संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में रामसर स्थलों को ‘आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व’ के रूप में भी जाना जाता है।
2. राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की स्थायी समिति खनन गतिविधियों के लिए अनुमति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
3. सुप्रीम कोर्ट ने आसन आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही नहीं है। रामसर स्थल अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियाँ हैं, जबकि आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व भारत में एक विशिष्ट श्रेणी है। सभी रामसर स्थल आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व नहीं होते, हालांकि कुछ हो सकते हैं। कथन 2 सही है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) खनन गतिविधियों के लिए अनुमति देने में शामिल होते हैं। कथन 3 सही है। सुप्रीम कोर्ट ने आसन आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है, जब तक कि संबंधित अधिकारियों से अनुमति न मिल जाए।
Q2. अभिकथन (A): सुप्रीम कोर्ट ने आसन आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व के संबंध में अपने निर्देश को देश के अन्य आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्वों पर भी लागू करने का फैसला किया है।
कारण (R): सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि पूरे हिमालयी क्षेत्र को एक ही तरह के निर्देशों द्वारा शासित किया जाना चाहिए, जब तक कि कोई विशेषज्ञ समिति अन्यथा न कहे।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आसन आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व पर दिए गए 10 किमी बफर जोन के निर्देश को देश के अन्य आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्वों पर भी समानता के सिद्धांत (parity) के लिए लागू करने का फैसला किया है। कारण (R) भी सही है क्योंकि न्यायालय ने विशेष रूप से उल्लेख किया है कि पूरे हिमालयी क्षेत्र को एक ही तरह के निर्देशों द्वारा शासित किया जाना चाहिए, जो उसके निर्णय का एक महत्वपूर्ण आधार है। इस प्रकार, R, A का सही स्पष्टीकरण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में, भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्वों के महत्व और उनके समक्ष आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय, जिसमें खनन गतिविधियों के लिए 10 किलोमीटर का बफर जोन शामिल है, के निहितार्थों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** आर्द्रभूमि (Wetlands) की संक्षिप्त परिभाषा और उनके पारिस्थितिक महत्व (जैसे ‘पृथ्वी की किडनी’) का उल्लेख।
2. **आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्वों का महत्व:**
* जैव विविधता का संरक्षण (Conservation of Biodiversity)।
* जल शुद्धिकरण और भूजल पुनर्भरण (Water Purification and Groundwater Recharge)।
* बाढ़ नियंत्रण (Flood Control) और जलवायु परिवर्तन शमन (Climate Change Mitigation)।
* आर्थिक और सामाजिक लाभ (मत्स्य पालन, पर्यटन)।
3. **आर्द्रभूमि के समक्ष चुनौतियाँ:**
* शहरीकरण और अतिक्रमण (Urbanization and Encroachment)।
* प्रदूषण (Pollution) (औद्योगिक, कृषि)।
* अवैध खनन और रेत खनन (Illegal Mining and Sand Mining)।
* जलवायु परिवर्तन के प्रभाव (Effects of Climate Change)।
* प्रबंधन और प्रवर्तन में कमी (Lack of Management and Enforcement)।
4. **सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के निहितार्थ:**
* **निर्णय का सार:** आसन आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व के 10 किमी दायरे में खनन पर प्रतिबंध का अन्य आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्वों पर भी लागू होना।
* **सकारात्मक निहितार्थ:**
* पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा (Promotion of Environmental Protection)।
* पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा (Protection of Ecologically Sensitive Areas)।
* न्यायिक सक्रियता का उदाहरण (Example of Judicial Activism)।
* समानता और एकरूपता (Parity and Uniformity) सुनिश्चित करना।
* **संभावित चुनौतियाँ/चिंताएँ:**
* विकास परियोजनाओं पर प्रभाव (Impact on Development Projects)।
* राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता (Need for Inter-State Coordination)।
* स्थानीय आजीविका पर प्रभाव (Impact on Local Livelihoods)।
* कार्यान्वयन और निगरानी की चुनौती (Challenge of Implementation and Monitoring)।
5. **निष्कर्ष:** सतत विकास (Sustainable Development) और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप और सरकारी नीतियों का समन्वय महत्वपूर्ण है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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