डीपफेक से निपटने के लिए सरकार ने सख्त किया नियामक ढांचा, जानिए क्या हैं नए नियम

सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित डीपफेक से निपटने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत किया — concept mind map

डीपफेक से निपटने के लिए सरकार ने सख्त किया नियामक ढांचा, जानिए क्या हैं नए नियम

✎ भारत सरकार ने डीपफेक से निपटने के लिए आईटी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और आईटी नियमों के तहत नियामक ढाँचे को मजबूत किया है, जिसमें AI-जनित सामग्री पर लेबल लगाना शामिल है, ताकि डिजिटल स्पेस में सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित की जा…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: डीपफेक, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता, 2023, आईटी नियम, 2021, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मध्यस्थ दायित्व, निजता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  • Essay: डिजिटल युग में निजता, सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अवसर और चुनौतियाँ, विशेष संदर्भ में डीपफेक

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार ने डीपफेक से निपटने के लिए आईटी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और आईटी नियमों के तहत नियामक ढाँचे को मजबूत किया है, जिसमें AI-जनित सामग्री पर लेबल लगाना शामिल है, ताकि डिजिटल स्पेस में सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित डीपफेक (Deepfake) से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए नियामक ढाँचे को मजबूत किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आईटी नियमों के अंतर्गत अब AI-जनित सामग्री पर लेबल लगाना अनिवार्य होगा। यह कदम उपयोगकर्ताओं के लिए एक खुला, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह साइबरस्पेस सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पृष्ठभूमि

  • डीपफेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके बनाई गई नकली ऑडियो, वीडियो या लिखित सामग्री होती है, जो वास्तविक प्रतीत होती है लेकिन वास्तव में मनगढ़ंत होती है।
  • इनका उपयोग दुष्प्रचार, गलत सूचना फैलाने, व्यक्तियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने, पहचान की चोरी करने और यहाँ तक कि वित्तीय धोखाधड़ी के लिए भी किया जा सकता है।
  • भारत में साइबर अपराधों और डिजिटल सामग्री के विनियमन के लिए प्राथमिक कानून सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021) ने मध्यस्थों (जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म) के दायित्वों को और स्पष्ट किया है।
  • हाल ही में अधिनियमित भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) ने धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और गलत सूचना फैलाने से संबंधित अपराधों के लिए नए प्रावधान जोड़े हैं, जो डीपफेक से निपटने में सहायक होंगे।
  • सरकार का लक्ष्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए नवाचार को बढ़ावा देना है, लेकिन साथ ही गलत सूचना और हानिकारक सामग्री के प्रसार को रोकना भी है।

डीपफेक और संबंधित नियामक ढाँचा

  • डीपफेक: यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विशेष रूप से डीप लर्निंग (Deep Learning) तकनीकों का उपयोग करके बनाई गई सिंथेटिक मीडिया सामग्री है, जिसमें किसी व्यक्ति के चेहरे या आवाज को किसी अन्य व्यक्ति के शरीर या आवाज पर इस तरह से आरोपित किया जाता है कि वह वास्तविक लगे।
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: यह अधिनियम कंप्यूटर, कंप्यूटर सिस्टम आदि को हुए नुकसान (धारा 43) और कंप्यूटर संबंधी अपराधों (धारा 66) के लिए दंड का प्रावधान करता है। इसमें पहचान की चोरी (धारा 66C), प्रतिरूपण (धारा 66D), निजता का उल्लंघन (धारा 66E) और अश्लील सामग्री के प्रकाशन (धारा 67, 67A) जैसे अपराध शामिल हैं। यह मध्यस्थों को गैरकानूनी सामग्री हटाने (धारा 79) और विशिष्ट जानकारी तक पहुँच को अवरुद्ध करने (धारा 69A) के आदेश जारी करने का भी प्रावधान करता है।
  • भारतीय न्याय संहिता, 2023: यह संहिता प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी (धारा 319), सामान्य धोखाधड़ी (धारा 336) और गलत या भ्रामक बयान, अफवाहें या रिपोर्ट बनाने (धारा 353) के लिए दंड निर्धारित करती है, जिनका उद्देश्य सार्वजनिक उपद्रव या भय उत्पन्न करना हो। डीपफेक से जुड़े संगठित साइबर अपराधों पर भी धारा 111 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
  • आईटी नियम, 2021: ये नियम मध्यस्थों पर उचित सावधानी बरतने का दायित्व डालते हैं और उन्हें उपयोगकर्ताओं को ऐसी जानकारी साझा न करने के लिए सूचित करना होता है जो किसी अन्य व्यक्ति से संबंधित हो, अश्लील हो, बच्चों को नुकसान पहुँचाए, स्वामित्व अधिकारों का उल्लंघन करे, गलत सूचना दे, जानबूझकर झूठी हो, या AI के माध्यम से अन्य लोगों का रूप धारण करे।
  • मध्यस्थों के दायित्व: मध्यस्थों को अपनी सेवा की शर्तों में गैरकानूनी सामग्री साझा करने के परिणामों (सामग्री हटाना, खाता निलंबित करना) के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित करना होगा। 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता आधार वाले सोशल मीडिया मध्यस्थों (SSMI) को अतिरिक्त दायित्वों का पालन करना होता है, जैसे गंभीर सामग्री के मूल रचनाकारों का पता लगाने में मदद करना, स्वचालित उपकरणों का उपयोग करना, अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करना और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना।
  • शिकायत निवारण तंत्र: मध्यस्थों के लिए शिकायत अधिकारी नियुक्त करना और निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायतों का समाधान करना अनिवार्य है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
AI कंटेंट पर लेबल लगाना अनिवार्य उपयोगकर्ताओं को डीपफेक सामग्री की पहचान करने में मदद करेगा, पारदर्शिता बढ़ाएगा।
गैरकानूनी सामग्री हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे गैरकानूनी और हानिकारक सामग्री के प्रसार को तेजी से रोकेगा, ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत दंड और मुआवजे का प्रावधान कंप्यूटर संबंधी अपराधों और पहचान की चोरी जैसे डीपफेक से जुड़े अपराधों के लिए कानूनी जवाबदेही तय करेगा।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 में डीपफेक से संबंधित अपराधों को शामिल करना प्रतिरूपण, धोखाधड़ी और गलत सूचना फैलाने जैसे डीपफेक कृत्यों के लिए मजबूत कानूनी ढाँचा प्रदान करेगा।
मध्यस्थों पर उचित सावधानी बरतने का विशेष दायित्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को रोकने और उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव प्रदान करने के लिए जवाबदेह बनाएगा।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • डीपफेक (Deepfake) सामग्री से व्यक्तियों की प्रतिष्ठा, निजता (Privacy) और मानसिक स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को कम करेगा।
  • गलत सूचना और दुष्प्रचार (Disinformation) के प्रसार पर अंकुश लगाकर सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में मदद करेगा।
  • महिलाओं और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों, विशेष रूप से अश्लील और यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन को नियंत्रित करेगा।

राजनीतिक महत्व

  • चुनावों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में डीपफेक के माध्यम से हेरफेर की संभावना को कम करेगा, जिससे चुनावी अखंडता बनी रहेगी।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को खतरा पैदा करने वाली डीपफेक सामग्री के प्रसार को रोकेगा, जो देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • नागरिकों में सरकार और संस्थानों के प्रति विश्वास बनाए रखने में मदद करेगा, क्योंकि गलत सूचना से सार्वजनिक विश्वास कमजोर हो सकता है।

आर्थिक महत्व

  • पहचान की चोरी और धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करेगा।
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था में विश्वास को बढ़ावा देगा, जिससे ऑनलाइन लेनदेन और सेवाओं का सुरक्षित उपयोग बढ़ेगा।
  • साइबर सुरक्षा उद्योग में नवाचार और निवेश को प्रोत्साहित करेगा, जिससे नई प्रौद्योगिकियों और समाधानों का विकास होगा।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी चुनौतियाँ

  • डीपफेक सामग्री का पता लगाने और उसे हटाने के लिए उन्नत AI-आधारित उपकरणों की आवश्यकता।
  • डीपफेक तकनीकों के तेजी से विकास के साथ नियामक ढांचे को अद्यतन रखना।

2. कार्यान्वयन चुनौतियाँ

  • मध्यस्थों द्वारा नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करना, विशेषकर छोटे प्लेटफॉर्म्स के लिए।
  • शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ और सुलभ बनाना।

3. कानूनी और नैतिक चुनौतियाँ

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) और सामग्री विनियमन के बीच संतुलन स्थापित करना।
  • डीपफेक सामग्री को ‘गलत सूचना’ या ‘भ्रामक’ के रूप में परिभाषित करने में व्यक्तिपरकता।

4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की कमी

  • डीपफेक सामग्री की सीमा-पार प्रकृति को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय और सहयोग का अभाव।
  • विभिन्न देशों के कानूनों और विनियमों में सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डीपफेक पहचान उन्नत AI एल्गोरिदम के कारण डीपफेक सामग्री को वास्तविक सामग्री से अलग करना कठिन होता जा रहा है।
सामग्री हटाने की समय सीमा 3 घंटे की समय सीमा का पालन करने के लिए मध्यस्थों को पर्याप्त संसाधन और तकनीकी क्षमताएँ विकसित करनी होंगी।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम विनियमन कठोर विनियमन से वैध भाषण और रचनात्मक सामग्री पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे सेंसरशिप का आरोप लग सकता है।
वैश्विक प्रसार डीपफेक सामग्री का स्रोत अक्सर देश के बाहर होता है, जिससे उसे नियंत्रित करना और अपराधियों को दंडित करना मुश्किल हो जाता है।
संसाधन और क्षमता छोटे सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिए नए नियमों का पालन करने के लिए आवश्यक तकनीकी और मानव संसाधनों का अभाव।

आगे की राह

  • डीपफेक का पता लगाने और उसे हटाने के लिए AI-आधारित तकनीकों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
  • डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) और मीडिया साक्षरता (Media Literacy) कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को डीपफेक सामग्री की पहचान करने के लिए सशक्त बनाना।
  • साइबर सुरक्षा एजेंसियों और कानून प्रवर्तन निकायों की क्षमता निर्माण करना ताकि वे डीपफेक से संबंधित अपराधों की प्रभावी ढंग से जांच कर सकें।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना ताकि डीपफेक के सीमा-पार प्रसार को नियंत्रित किया जा सके और अपराधियों पर मुकदमा चलाया जा सके।
  • नियमित रूप से नियामक ढांचे की समीक्षा करना और उसे अद्यतन करना ताकि वह AI प्रौद्योगिकियों के तेजी से विकास के साथ तालमेल बिठा सके।
  • मध्यस्थों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और मानक विकसित करना ताकि वे नियमों का पालन कर सकें और उपयोगकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा कर सकें।
  • डीपफेक के पीड़ितों के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र और कानूनी सहायता सुनिश्चित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

डीपफेक · कृत्रिम बुद्धिमत्ता · सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 · भारतीय न्याय संहिता, 2023 · आईटी नियम, 2021 · साइबर सुरक्षा · डिजिटल नागरिक अधिकार · मध्यस्थ दायित्व · शिकायत निवारण तंत्र · राष्ट्रीय सुरक्षा · सार्वजनिक व्यवस्था · निजता का अधिकार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}

अवधारणा प्रवाह

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का विकास  →  डीपफेक सामग्री का निर्माण और प्रसार  →  समाज, राजनीति और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव  →  सरकार द्वारा नियामक ढाँचे को मजबूत करना  →  आईटी अधिनियम और आईटी नियमों में संशोधन  →  साइबरस्पेस में सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 कंप्यूटर संबंधी अपराधों के लिए दंड निर्धारित करती है, जिसमें पहचान की चोरी और प्रतिरूपण शामिल हैं।
2. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 336 धोखाधड़ी के लिए दंड निर्धारित करती है, जिसमें झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना शामिल है।
3. सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत, मध्यस्थों को गैरकानूनी सामग्री को हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। आईटी अधिनियम की धारा 66 कंप्यूटर संबंधी अपराधों के लिए दंड निर्धारित करती है, जिसमें धारा 66सी (पहचान की चोरी) और 66डी (प्रतिरूपण) शामिल हैं। कथन 2 सही है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 336 धोखाधड़ी के लिए दंड निर्धारित करती है, जिसमें झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना शामिल है। कथन 3 सही है। नए नियमों के तहत गैरकानूनी सामग्री को हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है।

Q2. सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से दायित्व 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता आधार वाले सोशल मीडिया मध्यस्थों (SSMI) पर लागू होता/होते है/हैं?
1. संदेश सेवाएँ प्रदान करने वाले SSMI को कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गंभीर या संवेदनशील सामग्री के मूल रचनाकारों का पता लगाने में मदद करनी चाहिए।
2. गैरकानूनी सामग्री के प्रसार का पता लगाने और उसे सीमित करने के लिए स्वचालित उपकरणों का उपयोग करना।
3. अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करना और स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए तीनों कथन SSMI पर लागू अतिरिक्त दायित्वों का हिस्सा हैं। संदेश सेवाएँ प्रदान करने वाले SSMI को मूल रचनाकारों का पता लगाने में मदद करनी चाहिए, गैरकानूनी सामग्री का पता लगाने और उसे सीमित करने के लिए स्वचालित उपकरणों का उपयोग करना चाहिए, और अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित कर स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति करनी चाहिए।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ डीपफेक (Deepfake) से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत के नियामक ढांचे की जांच करें। इस संदर्भ में, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत मध्यस्थों के दायित्वों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: डीपफेक की संक्षिप्त परिभाषा और इसके बढ़ते खतरों का उल्लेख करें (कृत्रिम ऑडियो, वीडियो, लिखित सामग्री)।
2. भारत का नियामक ढाँचा: डीपफेक से निपटने के लिए बनाए गए प्रमुख कानूनों और नियमों का विवरण दें:
a. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: धारा 43, 66 (पहचान की चोरी, प्रतिरूपण), 69ए (अवरोधन आदेश), 79 (जानकारी हटाने के लिए नोटिस) का उल्लेख करें।
b. भारतीय न्याय संहिता, 2023: धारा 319 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी), 336 (धोखाधड़ी), 353 (गलत सूचना/दुष्प्रचार) और 111 (संगठित साइबर अपराध) का उल्लेख करें।
c. सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021: मध्यस्थों के सामान्य दायित्वों (गैरकानूनी सामग्री को होस्ट न करना, एआई के माध्यम से प्रतिरूपण पर रोक, राष्ट्रीय सुरक्षा/सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा) और 50 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं वाले सोशल मीडिया मध्यस्थों (SSMI) के अतिरिक्त दायित्वों (मूल रचनाकारों का पता लगाना, स्वचालित उपकरण, अनुपालन रिपोर्ट, शिकायत निवारण) का उल्लेख करें।
3. मध्यस्थों के दायित्वों का आलोचनात्मक विश्लेषण:
a. सकारात्मक पहलू: साइबरस्पेस को सुरक्षित बनाने में भूमिका, जवाबदेही बढ़ाना, गैरकानूनी सामग्री पर त्वरित कार्रवाई (36 घंटे से 3 घंटे की समय सीमा), उपयोगकर्ता सुरक्षा।
b. चुनौतियाँ/आलोचना: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संभावित प्रभाव, अत्यधिक विनियमन का आरोप, छोटे मध्यस्थों पर अनुपालन का बोझ, ‘मूल रचनाकार’ का पता लगाने की तकनीकी व्यवहार्यता, निजता संबंधी चिंताएँ।
4. निष्कर्ष: डीपफेक से निपटने के लिए नियामक ढांचे की आवश्यकता पर बल दें, साथ ही डिजिटल अधिकारों और नवाचार के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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