07 Aug तेलंगाना में किसानों के लिए पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान: केंद्र सरकार

✎ भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) किसानों को 'पंचायत मौसम सेवा पोर्टल' और जमीनी नेटवर्क के माध्यम से पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि-मौसम सलाह प्रदान करके कृषि उत्पादकता बढ़ाने और मौसम संबंधी जोखिमों को कम करने में…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भौतिक भूगोल, भारत का भूगोल) | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता), आपदा प्रबंधन, कृषि
- Prelims: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पंचायत मौसम सेवा पोर्टल, कृषि-मौसम सलाह, संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल, राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS), केंद्रीय जल आयोग (CWC)
- Essay: कृषि में प्रौद्योगिकी का महत्व, जलवायु परिवर्तन और भारतीय कृषि, आपदा प्रबंधन में अग्रिम चेतावनी प्रणालियों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) किसानों को ‘पंचायत मौसम सेवा पोर्टल’ और जमीनी नेटवर्क के माध्यम से पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि-मौसम सलाह प्रदान करके कृषि उत्पादकता बढ़ाने और मौसम संबंधी जोखिमों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, केंद्र सरकार ने राज्यसभा को सूचित किया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) तेलंगाना में किसानों को पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान प्रदान कर रहा है। ये पूर्वानुमान डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे ‘पंचायत मौसम सेवा पोर्टल’ के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं और कृषि-मौसम सलाह (agro-meteorological advisories) WhatsApp तथा जमीनी स्तर के नेटवर्क, जैसे कृषि सखी और पशु सखी, के माध्यम से प्रसारित की जा रही हैं। यह पहल किसानों को कृषि संबंधी निर्णय लेने में मदद करने और मौसम संबंधी जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से की गई है।
पृष्ठभूमि
- भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है।
- मौसम संबंधी अनिश्चितताएँ, जैसे अत्यधिक वर्षा, सूखा, ओलावृष्टि और तापमान में बदलाव, भारतीय कृषि के लिए एक बड़ी चुनौती रही हैं।
- किसानों को समय पर और सटीक मौसम जानकारी प्रदान करना फसल योजना, बुवाई, सिंचाई, उर्वरक उपयोग और कटाई जैसे महत्वपूर्ण कृषि कार्यों के लिए आवश्यक है।
- तकनीकी प्रगति, विशेषकर संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (Numerical Weather Prediction) मॉडल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) का उपयोग, मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और पहुंच में सुधार कर रहा है।
- भारत सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें मौसम संबंधी सलाह सेवाओं का विस्तार भी शामिल है।
- आपदा प्रबंधन के तहत बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी और पूर्वानुमान भी महत्वपूर्ण है, जिसमें IMD और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology – NCS) जैसी संस्थाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और इसकी सेवाएँ
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के अधीन एक प्रमुख एजेंसी है, जो मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिए जिम्मेदार है।
- IMD देश भर में मौसम संबंधी डेटा एकत्र करता है और विभिन्न मौसम प्रणालियों का विश्लेषण करता है ताकि सटीक पूर्वानुमान जारी किए जा सकें।
- यह संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल और हाल ही में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मॉडल का उपयोग करके अपने पूर्वानुमानों की सटीकता में सुधार कर रहा है।
- IMD 25 बाढ़ मौसम विज्ञान कार्यालय (Flood Meteorological Offices) संचालित करता है, जो 220 उप-बेसिनों को कवर करते हुए सात दिनों तक के लिए उप-बेसिन-वार मात्रात्मक वर्षा पूर्वानुमान (Quantitative Precipitation Forecasts – QPFs) जारी करते हैं।
- किसानों के लिए, IMD कृषि-मौसम सलाह जारी करता है, जिसमें ब्लॉक और पंचायत-स्तर के मौसम पूर्वानुमान शामिल होते हैं, जो ‘पंचायत मौसम सेवा पोर्टल’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध हैं।
- इन सलाहों का उद्देश्य किसानों को मौसम के पैटर्न के आधार पर कृषि संबंधी निर्णय लेने में मदद करना है, जिससे फसल हानि को कम किया जा सके और उत्पादकता बढ़ाई जा सके।
- राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS), जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आता है, देश भर में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी करता है और 3.0 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंपों का पता लगाने में सक्षम है।
- केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission – CWC) राज्य सरकारों को पहचान किए गए स्थानों पर बाढ़ पूर्वानुमान जारी करने के लिए अधिकृत है, जो IMD के वर्षा पूर्वानुमानों का उपयोग करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान | किसानों को स्थानीय और सटीक मौसम जानकारी प्रदान करता है, जिससे कृषि संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलती है। |
| संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल (Numerical Weather Prediction Models) | मौसम की भविष्यवाणी के लिए वैज्ञानिक और डेटा-आधारित दृष्टिकोण, जिससे पूर्वानुमानों की सटीकता बढ़ती है। |
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मॉडल | जटिल मौसम पैटर्न का विश्लेषण करने और पूर्वानुमानों की दक्षता बढ़ाने में सहायक। |
| कृषि-मौसम संबंधी सलाह (Agro-meteorological Advisories) | किसानों को फसल चक्र, बुवाई, कटाई और कीट प्रबंधन के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करता है। |
| पंचायत मौसम सेवा पोर्टल | डिजिटल माध्यम से मौसम संबंधी जानकारी और सलाह तक आसान पहुँच सुनिश्चित करता है। |
| राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान नेटवर्क (National Seismological Network – NSN) | पूरे देश में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी करता है, जिससे आपदा प्रबंधन में सहायता मिलती है। |
महत्व
कृषि एवं ग्रामीण विकास
- पंचायत-स्तरीय पूर्वानुमान किसानों को अपनी फसलों की बुवाई, सिंचाई और कटाई के बारे में सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं, जिससे कृषि उत्पादकता और आय में वृद्धि होती है।
- कृषि-मौसम संबंधी सलाह (Agro-meteorological Advisories) किसानों को मौसम के बदलते पैटर्न के अनुसार अपनी कृषि पद्धतियों को अनुकूलित करने में मदद करती है, जिससे फसल के नुकसान को कम किया जा सके।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म और जमीनी स्तर के नेटवर्क (जैसे कृषि सखी और पशु सखी) के माध्यम से जानकारी का प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना तक पहुँच में सुधार करता है, जिससे किसानों का सशक्तिकरण होता है।
आपदा प्रबंधन
- बाढ़ मौसम विज्ञान कार्यालयों द्वारा जारी मात्रात्मक वर्षा पूर्वानुमान (Quantitative Precipitation Forecasts – QPFs) बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करते हैं, जिससे समय पर निकासी और राहत कार्यों में सहायता मिलती है।
- राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology – NCS) द्वारा भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी भूकंप के जोखिम वाले क्षेत्रों में आपदा तैयारियों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण है।
शासन एवं प्रौद्योगिकी
- संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल और AI-आधारित मॉडल का उपयोग मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और विश्वसनीयता को बढ़ाता है, जिससे सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होता है।
- सरकार द्वारा पंचायत-स्तर पर सेवाएं प्रदान करने का प्रयास विकेंद्रीकृत शासन और स्थानीय आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायित्व को दर्शाता है।
चुनौतियाँ
1. डेटा की सटीकता और कवरेज
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में मौसम संबंधी डेटा संग्रह के लिए पर्याप्त सेंसर और अवलोकन स्टेशनों की कमी।
- विभिन्न मॉडलों से प्राप्त डेटा को एकीकृत करने और उसकी सटीकता बनाए रखने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन
2. प्रौद्योगिकी तक पहुँच और साक्षरता
- ग्रामीण किसानों के बीच डिजिटल साक्षरता और स्मार्टफोन/इंटरनेट तक पहुँच की कमी, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग सीमित हो सकता है।
- मौसम संबंधी जटिल जानकारी को सरल और समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत करने की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: शासन, सामान्य अध्ययन-III: प्रौद्योगिकी
3. संसाधन और क्षमता निर्माण
- मौसम विज्ञान कार्यालयों और भूकंपीय वेधशालाओं के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता।
- स्थानीय स्तर पर कृषि सखी और पशु सखी जैसे कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने और उनकी क्षमता बढ़ाने की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: शासन, सामान्य अध्ययन-III: आपदा प्रबंधन
4. जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
- जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में अप्रत्याशित बदलाव, जिससे पूर्वानुमानों की सटीकता बनाए रखना कठिन हो जाता है।
- चरम मौसमी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता के लिए अनुकूलन की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ग्रामीण कनेक्टिविटी | दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की सीमित पहुँच। |
| किसानों की जागरूकता | मौसम सलाह और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग के बारे में किसानों के बीच जागरूकता की कमी। |
| डेटा व्याख्या | किसानों के लिए जटिल मौसम डेटा और तकनीकी सलाह को समझना। |
| बुनियादी ढाँचा | मौसम अवलोकन स्टेशनों और भूकंपीय निगरानी केंद्रों के विस्तार के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे की कमी। |
| तकनीकी एकीकरण | विभिन्न मौसम मॉडलों और AI प्रणालियों के बीच निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित करना। |
आगे की राह
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढाँचे (इंटरनेट कनेक्टिविटी) का विस्तार करना और किसानों के लिए डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम चलाना।
- कृषि-मौसम सलाह को स्थानीय भाषाओं में और सरल, समझने योग्य प्रारूप में उपलब्ध कराना, जिसमें दृश्य सहायता भी शामिल हो।
- स्थानीय स्तर पर ‘कृषि सखी’ और ‘पशु सखी’ जैसे जमीनी कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करना और उन्हें नियमित प्रशिक्षण प्रदान करना।
- मौसम पूर्वानुमान और भूकंपीय निगरानी के लिए उन्नत सेंसर, रडार और डेटा संग्रह प्रणालियों की स्थापना करके बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना।
- संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान और AI-आधारित मॉडलों में निरंतर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना ताकि पूर्वानुमानों की सटीकता और समयबद्धता में सुधार हो सके।
- किसानों को मौसम-संवेदनशील बीमा उत्पादों और फसल विविधीकरण जैसी अनुकूलन रणनीतियों के बारे में शिक्षित करना।
- विभिन्न सरकारी एजेंसियों (जैसे IMD, CWC, कृषि मंत्रालय) के बीच समन्वय और डेटा साझाकरण को बढ़ाना ताकि एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान · कृषि-मौसम सलाह · भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) · राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) · संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · बाढ़ प्रबंधन · आपदा न्यूनीकरण · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन · डिजिटल प्लेटफॉर्म · ग्रामीण विकास · किसान कल्याण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकारों और उत्तरदायित्वों’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियों, प्राधिकारों और उत्तरदायित्वों’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (राज्य सूची)’, ‘note’: ‘कृषि और जल प्रबंधन राज्य का विषय’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची)’, ‘note’: ‘आपदा प्रबंधन और आर्थिक नियोजन’}
अवधारणा प्रवाह
IMD द्वारा संख्यात्मक मौसम और AI मॉडल का उपयोग → पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान और QPFs का सृजन → पंचायत मौसम सेवा पोर्टल और जमीनी नेटवर्क के माध्यम से प्रसार → किसानों को कृषि-मौसम संबंधी सलाह और बाढ़ पूर्वानुमान → कृषि उत्पादकता में वृद्धि और आपदा जोखिम में कमी → ग्रामीण आजीविका में सुधार और सतत विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. IMD देश भर में 25 बाढ़ मौसम विज्ञान कार्यालय संचालित करता है।
3. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) केवल उन भूकंपों का पता लगा सकता है जिनकी तीव्रता 3.0 से अधिक हो।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि IMD पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक प्रमुख एजेंसी है। कथन 2 भी सही है, IMD देश भर में 25 बाढ़ मौसम विज्ञान कार्यालय संचालित करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि NCS 3.0 और उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंपों का पता लगाने और उनका स्थान निर्धारित करने में सक्षम है, यह केवल 3.0 से अधिक नहीं है।
Q2. कथन (A): भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) तेलंगाना में किसानों को पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान प्रदान कर रहा है।
कारण (R): ये पूर्वानुमान संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (Numerical Weather Prediction) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित मॉडल का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन A सही है क्योंकि IMD तेलंगाना में किसानों को पंचायत-स्तरीय पूर्वानुमान प्रदान कर रहा है, जैसा कि समाचार में बताया गया है। कथन R भी सही है, क्योंकि ये पूर्वानुमान संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान और AI-आधारित मॉडल का उपयोग करके उत्पन्न किए जाते हैं। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि ये उन्नत मॉडल ही IMD को सटीक और स्थानीयकृत पूर्वानुमान प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में कृषि क्षेत्र के लिए मौसम पूर्वानुमान और संबंधित सलाहों के महत्व का परीक्षण करें। पंचायत-स्तरीय पूर्वानुमानों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की भूमिका पर भी चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारतीय कृषि में मौसम की भूमिका और मौसम पूर्वानुमानों के महत्व को संक्षेप में बताएं।
2. **कृषि क्षेत्र के लिए मौसम पूर्वानुमान का महत्व:**
* फसल योजना और बुवाई का समय।
* सिंचाई प्रबंधन।
* कीट और रोग नियंत्रण।
* कटाई और कटाई के बाद के संचालन।
* जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का शमन और अनुकूलन।
* किसानों की आय स्थिरता और खाद्य सुरक्षा।
3. **IMD की भूमिका और पहलें:**
* **पंचायत-स्तरीय पूर्वानुमान:** ‘पंचायत मौसम सेवा पोर्टल’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ब्लॉक और पंचायत स्तर पर सटीक मौसम जानकारी प्रदान करना।
* **कृषि-मौसम सलाह:** WhatsApp और ‘कृषि सखी’, ‘पशु सखी’ जैसे जमीनी नेटवर्क के माध्यम से विशिष्ट कृषि सलाहों का प्रसार।
* **तकनीकी नवाचार:** संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके पूर्वानुमानों की सटीकता बढ़ाना।
* **बाढ़ प्रबंधन:** 25 बाढ़ मौसम विज्ञान कार्यालयों के माध्यम से उप-बेसिन-वार मात्रात्मक वर्षा पूर्वानुमान (QPFs) जारी करना।
* **राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS):** भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी और आपदा न्यूनीकरण में योगदान (हालांकि सीधे कृषि से संबंधित नहीं, यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण घटक है)।
4. **चुनौतियाँ और आगे का रास्ता:** डेटा की पहुंच, जागरूकता, स्थानीय भाषाओं में जानकारी का प्रसार, अंतिम-मील कनेक्टिविटी।
5. **निष्कर्ष:** कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय सुरक्षित करने और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बनाने में IMD की भूमिका का महत्व दोहराएं।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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