तेलंगाना में किसानों को मिल रहा पंचायत स्तरीय मौसम पूर्वानुमान: केंद्र

IMD providing panchayat-level forecasts to farmers in Telangana: Centre — diagram

तेलंगाना में किसानों को मिल रहा पंचायत स्तरीय मौसम पूर्वानुमान: केंद्र

Map of Telangana highlighted on the map of India — तेलंगाना पंचायत स्तरीय मौसम पूर्वानुमान
मानचित्र व माइंड-मैप: आईएमडी द्वारा तेलंगाना के किसानों को पंचायत स्तरीय मौसम पूर्वानुमान

✎ भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा पंचायत-स्तर पर जारी किए गए मौसम पूर्वानुमान और कृषि-मौसम सलाह, डिजिटल प्लेटफॉर्म और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के माध्यम से, भारतीय किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने और…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भौतिक भूगोल)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन, कृषि
  • Prelims: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS), केंद्रीय जल आयोग (CWC), संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल, कृषि-मौसम सलाह, पंचायती राज संस्थाएं, पंचाट मौसम सेवा पोर्टल, कृषि सखी, पशु सखी
  • Essay: जलवायु परिवर्तन और भारतीय कृषि: चुनौतियाँ और समाधान, ग्रामीण विकास में प्रौद्योगिकी की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा पंचायत-स्तर पर जारी किए गए मौसम पूर्वानुमान और कृषि-मौसम सलाह, डिजिटल प्लेटफॉर्म और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के माध्यम से, भारतीय किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करते हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, केंद्र सरकार ने राज्यसभा को सूचित किया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) तेलंगाना के किसानों को पंचायत-स्तर पर मौसम पूर्वानुमान और कृषि-मौसम सलाह प्रदान कर रहा है। यह पहल डिजिटल प्लेटफॉर्म और जमीनी स्तर के नेटवर्क, जैसे ‘कृषि सखियों’ और ‘पशु सखियों’ के माध्यम से की जा रही है, जो किसानों को समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराकर उनकी सहायता कर रही है।

पृष्ठभूमि

  • भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ कृषि उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर करता है। मौसम संबंधी अनिश्चितताएँ, जैसे अत्यधिक वर्षा, सूखा, ओलावृष्टि आदि, किसानों के लिए गंभीर चुनौतियाँ पेश करती हैं।
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के तहत एक प्रमुख एजेंसी है, जो मौसम संबंधी अवलोकन, पूर्वानुमान और भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार है।
  • IMD देश भर में 25 बाढ़ मौसम विज्ञान कार्यालय (Flood Meteorological Offices) संचालित करता है, जो 220 उप-बेसिनों के लिए सात दिनों तक के मात्रात्मक वर्षा पूर्वानुमान (Quantitative Precipitation Forecasts – QPFs) जारी करते हैं।
  • केंद्रीय जल आयोग (CWC) को राज्य सरकारों को चिह्नित स्थानों पर बाढ़ पूर्वानुमान जारी करने का अधिकार है।
  • कृषि-मौसम सलाह (Agro-meteorological advisories) किसानों को मौसम की स्थिति के आधार पर फसल प्रबंधन, बुवाई, कटाई और कीट नियंत्रण के बारे में जानकारी प्रदान करती हैं, जिससे वे बेहतर निर्णय ले सकें।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता, जैसे कृषि सखी और पशु सखी, ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम संबंधी जानकारी और सलाह के प्रभावी प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में मौसम पूर्वानुमान और कृषि-मौसम सलाह

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) देश में मौसम संबंधी सभी गतिविधियों के लिए प्राथमिक एजेंसी है। यह संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल (Numerical Weather Prediction models) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आधारित मॉडलों के संयोजन का उपयोग करके पूर्वानुमान तैयार करता है।
  • IMD द्वारा जारी किए गए पूर्वानुमानों में वर्षा, तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और दिशा जैसी जानकारी शामिल होती है, जो विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशिष्ट होती है।
  • कृषि-मौसम सलाह किसानों को मौसम की संभावित स्थितियों के आधार पर कृषि कार्यों की योजना बनाने में मदद करती है। इसमें फसल की किस्मों का चयन, सिंचाई का समय, उर्वरकों का उपयोग और कीट व रोग प्रबंधन शामिल है।
  • ये सलाहें ब्लॉक और पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे स्थानीय किसानों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार जानकारी मिल सके।
  • कृषि सखी और पशु सखी जैसी जमीनी स्तर की कार्यकर्ताएँ ग्रामीण समुदायों में मौसम संबंधी जानकारी और सलाह के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे किसानों को इन सलाहों को समझने और उन्हें अपने कृषि कार्यों में लागू करने में मदद करती हैं।
  • राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Seismological Centre – NCS), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत, देश भर में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी करता है। यह राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क (National Seismological Network – NSN) के माध्यम से भूकंपों का पता लगाता है और उनका स्थान निर्धारित करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान किसानों को स्थानीय स्तर पर सटीक और प्रासंगिक मौसम जानकारी प्रदान करता है, जिससे कृषि संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलती है।
कृषि-मौसम संबंधी सलाह (Agro-meteorological Advisories) फसलों की बुवाई, कटाई, सिंचाई और कीट प्रबंधन के लिए विशिष्ट मार्गदर्शन, जिससे कृषि उत्पादकता और आय में वृद्धि होती है।
संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल (Numerical Weather Prediction Models) मौसम की घटनाओं, विशेषकर वर्षा और बाढ़, का अधिक सटीकता से अनुमान लगाने में सहायक।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मॉडल जटिल मौसम पैटर्न का विश्लेषण करने और पूर्वानुमानों की सटीकता में सुधार करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग।
पंचाट मौसम सेवा पोर्टल (Panchayat Mausam Seva Portal) डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों तक मौसम संबंधी जानकारी की आसान पहुंच सुनिश्चित करता है।
व्हाट्सएप और जमीनी नेटवर्क (Krishi Sakhis, Pashu Sakhis) दूरदराज के क्षेत्रों में भी किसानों तक सलाह पहुंचाने के लिए प्रभावी संचार माध्यम।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • बेहतर कृषि-मौसम संबंधी सलाह के माध्यम से फसल उत्पादन में वृद्धि और कृषि आय में स्थिरीकरण।
  • मौसम संबंधी आपदाओं, जैसे बाढ़ या सूखे, से होने वाले फसल नुकसान को कम करके किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना।

सामाजिक महत्व

  • किसानों को सशक्त बनाना और उन्हें सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना।
  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान, विशेषकर संवेदनशील ग्रामीण आबादी के लिए।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना।

प्रशासनिक एवं नीतिगत महत्व

  • सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सहायता।
  • आपदा प्रबंधन और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना।
  • संघीय ढांचे में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग का एक उदाहरण।

पर्यावरणीय महत्व

  • मौसम के पैटर्न में बदलाव और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने में मदद करना।
  • संसाधनों, जैसे पानी और उर्वरक, के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना।

चुनौतियाँ

1. डेटा की उपलब्धता और गुणवत्ता

  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से पर्याप्त और विश्वसनीय मौसम संबंधी डेटा एकत्र करना।
  • विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा की सटीकता और एकरूपता सुनिश्चित करना।

2. प्रौद्योगिकी तक पहुंच और जागरूकता

  • सभी किसानों, विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों, तक डिजिटल प्लेटफॉर्म और सलाह की पहुंच सुनिश्चित करना।
  • किसानों के बीच इन सेवाओं के उपयोग और महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना।

3. मानव संसाधन और क्षमता निर्माण

  • कृषि सखियों और पशु सखियों जैसे जमीनी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना।
  • मौसम विज्ञान और कृषि विज्ञान के विशेषज्ञों की कमी को पूरा करना।

4. वित्तीय संसाधन

  • मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के उन्नयन और विस्तार के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का आवंटन।
  • इन सेवाओं के दीर्घकालिक रखरखाव और संचालन के लिए स्थायी वित्तपोषण मॉडल विकसित करना।

5. स्थानीय विशिष्टता का अभाव

  • विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप सलाह को अनुकूलित करना।
  • स्थानीय फसलों, मिट्टी के प्रकार और कृषि पद्धतियों को ध्यान में रखना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
मौसम डेटा का स्थानीयकरण पंचायत स्तर पर अत्यधिक सटीक और प्रासंगिक पूर्वानुमान प्रदान करने की चुनौती।
डिजिटल डिवाइड सभी किसानों, विशेषकर कम साक्षरता वाले क्षेत्रों में, तक डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहुंच सुनिश्चित करना।
सूचना का प्रसार सलाह को समय पर और समझ में आने वाली भाषा में किसानों तक पहुंचाना।
प्रौद्योगिकी का एकीकरण संख्यात्मक मॉडल, AI और जमीनी नेटवर्क को प्रभावी ढंग से एकीकृत करना।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव बदलते और अप्रत्याशित मौसम पैटर्न के कारण पूर्वानुमानों की जटिलता।
संसाधनों की कमी बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षित कर्मियों और वित्तीय सहायता की आवश्यकता।

आगे की राह

  • मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों में नवीनतम संख्यात्मक मॉडल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीकों का निरंतर उन्नयन और एकीकरण।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे, विशेषकर इंटरनेट कनेक्टिविटी, का विस्तार ताकि सभी किसानों तक डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
  • कृषि सखियों और पशु सखियों जैसे जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना ताकि वे किसानों को प्रभावी ढंग से सलाह दे सकें।
  • किसानों के बीच मौसम पूर्वानुमान और कृषि-मौसम संबंधी सलाह के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाना।
  • स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों और फसलों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप सलाह को और अधिक अनुकूलित करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय और सहयोग को मजबूत करना।
  • मौसम डेटा संग्रह और विश्लेषण के लिए सेंसर नेटवर्क और रिमोट सेंसिंग तकनीकों का विस्तार करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) · कृषि-मौसम सलाह · पंचायती राज · आपदा प्रबंधन · संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन · ग्रामीण विकास · सूक्ष्म-स्तरीय पूर्वानुमान · राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) · केंद्रीय जल आयोग (CWC) · सतत कृषि

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियों और जिम्मेदारियों’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (राज्य सूची)’, ‘note’: ‘कृषि राज्य का विषय है’}

अवधारणा प्रवाह

IMD द्वारा संख्यात्मक और AI मॉडल का उपयोग  →  पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमानों का सृजन  →  पंचाट मौसम सेवा पोर्टल पर जानकारी का प्रकाशन  →  कृषि-मौसम संबंधी सलाह का निर्माण और प्रसार  →  किसानों द्वारा सूचित कृषि निर्णय लेना  →  कृषि उत्पादकता और आय में वृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा किसानों को प्रदान की जाने वाली कृषि-मौसम सलाह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. IMD ब्लॉक और पंचायत-स्तर पर मौसम पूर्वानुमान प्रदान करता है।
2. यह सलाह केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे पंचायत मौसम सेवा पोर्टल के माध्यम से प्रसारित की जाती है।
3. IMD बाढ़ पूर्वानुमान के लिए संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल और AI-आधारित मॉडल का उपयोग करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि IMD ब्लॉक और पंचायत-स्तर पर मौसम पूर्वानुमान प्रदान करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि सलाह डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ-साथ व्हाट्सएप और जमीनी स्तर के नेटवर्क जैसे कृषि सखी और पशु सखी के माध्यम से भी प्रसारित की जाती है। कथन 3 सही है क्योंकि IMD बाढ़ पूर्वानुमान के लिए संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल और AI-आधारित मॉडल का उपयोग करता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा संगठन भारत में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार है?

  1. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI)
  2. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)
  3. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS)
  4. केंद्रीय जल आयोग (CWC)

उत्तर: राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) — राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत, पूरे देश में अपनी राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क (NSN) के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी करता है।

Q3. कथन (A): भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) तेलंगाना में किसानों को पंचायत-स्तर पर मौसम पूर्वानुमान प्रदान कर रहा है।
कारण (R): ये पूर्वानुमान केवल बाढ़ प्रबंधन के लिए जारी किए जाते हैं और कृषि गतिविधियों से संबंधित नहीं हैं।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A सही है, लेकिन R गलत है। — कथन (A) सही है क्योंकि IMD तेलंगाना में किसानों को पंचायत-स्तर पर मौसम पूर्वानुमान प्रदान कर रहा है। कारण (R) गलत है क्योंकि ये पूर्वानुमान कृषि-मौसम सलाह के रूप में किसानों को उनकी कृषि गतिविधियों में सहायता के लिए जारी किए जाते हैं, न कि केवल बाढ़ प्रबंधन के लिए।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में कृषि क्षेत्र के लिए मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की भूमिका का परीक्षण करें। साथ ही, ग्रामीण स्तर पर इसकी पहुँच को बढ़ाने में डिजिटल प्लेटफॉर्म और जमीनी स्तर के नेटवर्क के महत्व पर भी चर्चा करें। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** IMD का संक्षिप्त परिचय और कृषि तथा आपदा प्रबंधन में इसकी समग्र भूमिका।
2. **IMD की भूमिका (कृषि क्षेत्र):**
* कृषि-मौसम सलाह (Agro-meteorological advisories) का महत्व।
* ब्लॉक और पंचायत-स्तर पर पूर्वानुमान।
* फसल योजना, बुवाई, कटाई और कीट नियंत्रण में सहायता।
* किसानों की आय स्थिरता और खाद्य सुरक्षा में योगदान।
3. **IMD की भूमिका (आपदा प्रबंधन):**
* बाढ़ पूर्वानुमान (Flood forecasting) और चेतावनी प्रणाली।
* संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (Numerical Weather Prediction) और AI-आधारित मॉडल का उपयोग।
* चक्रवात, भारी वर्षा, लू आदि जैसी चरम मौसम घटनाओं की निगरानी और चेतावनी।
* राज्य सरकारों और केंद्रीय जल आयोग (CWC) के साथ समन्वय।
4. **ग्रामीण स्तर पर पहुँच बढ़ाने में डिजिटल प्लेटफॉर्म और जमीनी स्तर के नेटवर्क का महत्व:**
* **डिजिटल प्लेटफॉर्म:** पंचायत मौसम सेवा पोर्टल, व्हाट्सएप जैसे माध्यमों से त्वरित और व्यापक प्रसार।
* **जमीनी स्तर के नेटवर्क:** कृषि सखी और पशु सखी जैसी पहलें जो अंतिम मील तक जानकारी पहुँचाती हैं।
* सूचना की सटीकता और समयबद्धता सुनिश्चित करना।
* किसानों को सशक्त बनाना और सूचित निर्णय लेने में मदद करना।
* जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशीलता कम करना।
5. **निष्कर्ष:** IMD की सेवाओं का महत्व और भविष्य की चुनौतियाँ/सुधार के सुझाव (जैसे डेटा एकीकरण, क्षमता निर्माण)।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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