08 Aug तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंध रिपोर्ट का अंग्रेजी संस्करण सार्वजनिक किया
✎ तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति की रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का आदेश दिया है, जो भारत में संघीय ढांचे के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने की…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
- Prelims: केंद्र-राज्य संबंध, उच्च-स्तरीय समिति, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति, अनुच्छेद 245, अनुच्छेद 246, सहकारी संघवाद, राजकोषीय संघवाद
- Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और संभावनाएँ, केंद्र-राज्य संबंधों में पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति की रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का आदेश दिया है, जो भारत में संघीय ढांचे के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee on Union-State Relations) को अपनी रिपोर्ट के भाग-I के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिपोर्ट को व्यापक पहुंच प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण के लिए विशेष कॉपीराइट (exclusive copyright) को भी रद्द करने का निर्देश दिया है।
पृष्ठभूमि
- तमिलनाडु सरकार ने 15 अप्रैल, 2025 को केंद्र-राज्य संबंधों पर एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था।
- इस समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने की थी।
- समिति में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी के. अशोक वर्धन शेट्टी और तमिलनाडु राज्य योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन सदस्य के रूप में शामिल थे।
- समिति ने अपनी रिपोर्ट का भाग-I 16 फरवरी, 2026 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को प्रस्तुत किया था।
- मुख्यमंत्री स्टालिन ने 18 फरवरी, 2026 को इस रिपोर्ट को विधानसभा में प्रस्तुत किया था।
- तमिलनाडु सरकार ने अब इस रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने का आदेश दिया है, जो पहले केवल तमिल में उपलब्ध था।
भारत में केंद्र-राज्य संबंध
- भारतीय संविधान भारत में केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति और उत्तरदायित्वों के वितरण के लिए एक संघीय ढाँचा प्रदान करता है।
- संविधान के भाग XI और XII में विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों का विस्तृत वर्णन किया गया है।
- विधायी संबंध (Legislative Relations) अनुच्छेद 245 से 255 तक वर्णित हैं, जो संसद और राज्य विधानमंडलों की कानून बनाने की शक्तियों का सीमांकन करते हैं।
- सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) में तीन सूचियाँ (संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची) हैं, जो केंद्र और राज्यों के बीच विषयों का वितरण करती हैं।
- प्रशासनिक संबंध (Administrative Relations) अनुच्छेद 256 से 263 तक वर्णित हैं, जो केंद्र और राज्यों के बीच प्रशासनिक समन्वय और सहयोग को नियंत्रित करते हैं।
- वित्तीय संबंध (Financial Relations) अनुच्छेद 268 से 293 तक वर्णित हैं, जो करों के वितरण, अनुदान सहायता और ऋण लेने की शक्तियों से संबंधित हैं।
- इन संबंधों की समीक्षा के लिए समय-समय पर विभिन्न आयोगों का गठन किया गया है, जैसे सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) और पुंछी आयोग (Punchhi Commission)।
- सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का सिद्धांत केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय पर जोर देता है ताकि राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च-स्तरीय समिति का गठन | केंद्र-राज्य संबंधों की गहन समीक्षा और सुधार हेतु सिफारिशें प्रदान करना। |
| रिपोर्ट के भाग I का प्रकाशन | केंद्र-राज्य संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर समिति के प्रारंभिक निष्कर्षों को सार्वजनिक करना। |
| रिपोर्ट का अंग्रेजी संस्करण सार्वजनिक करना | तमिलनाडु सरकार द्वारा पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिपोर्ट की व्यापक पहुंच बनाने का प्रयास। |
| कॉपीराइट रद्द करना | रिपोर्ट को स्वतंत्र रूप से साझा करने और उपयोग करने की अनुमति देना, जिससे ज्ञान का प्रसार हो। |
| न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता | समिति की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना, एक सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के अनुभव का लाभ उठाना। |
महत्व
शासन और पारदर्शिता
- रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में रखने से केंद्र-राज्य संबंधों पर चर्चा में पारदर्शिता आती है।
- यह नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को समिति के निष्कर्षों और सिफारिशों तक सीधी पहुंच प्रदान करता है।
संघवाद
- यह कदम भारत के संघीय ढांचे के भीतर राज्यों की स्वायत्तता और भूमिका पर बहस को बढ़ावा देता है।
- यह केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के लिए राज्यों की चिंताओं और दृष्टिकोणों को उजागर करने में मदद करता है।
नीति निर्माण
- समिति की सिफारिशें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के लिए भविष्य की नीतियों और कानूनों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
- यह सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करने के लिए संभावित सुधारों की पहचान करने में मदद करता है।
चुनौतियाँ
1. केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव
- राज्यों द्वारा अधिक वित्तीय स्वायत्तता और विधायी शक्तियों की मांग।
- राज्यपाल की भूमिका, अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन पर मतभेद।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
2. पारदर्शिता और जवाबदेही
- सरकारी रिपोर्टों और निर्णयों को समय पर सार्वजनिक करने में अक्सर देरी होती है।
- सूचना तक पहुंच सुनिश्चित करने और जनता की भागीदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
3. रिपोर्टों का कार्यान्वयन
- विभिन्न समितियों द्वारा दी गई सिफारिशों को लागू करने में राजनीतिक इच्छाशक्ति और आम सहमति की कमी।
- सिफारिशों को कानून और नीति में बदलने की प्रक्रिया में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वित्तीय संबंध | राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और अनुदानों पर अत्यधिक निर्भरता। |
| विधायी संबंध | समवर्ती सूची (Concurrent List) पर केंद्र के कानूनों का राज्यों के कानूनों पर हावी होना। |
| प्रशासनिक संबंध | राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों और अखिल भारतीय सेवाओं के नियंत्रण को लेकर विवाद। |
| अंतर-राज्यीय विवाद | नदी जल बंटवारे और सीमा विवादों का समाधान न होना। |
| आपातकालीन प्रावधान | अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग की संभावना और राज्यों की स्वायत्तता पर प्रभाव। |
आगे की राह
- केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित विभिन्न आयोगों (जैसे सरकारी आयोग, पुंछी आयोग) की सिफारिशों का सक्रिय कार्यान्वयन करना।
- सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने के लिए अंतर-राज्यीय परिषदों (Inter-State Councils) और अन्य मंचों का प्रभावी उपयोग करना।
- राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना और केंद्रीय करों में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाना।
- राज्यपाल के पद की निष्पक्षता और संवैधानिक भूमिका सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित करना।
- समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाते समय राज्यों के साथ अधिक परामर्श और सहमति बनाना।
- सूचना तक पहुंच को बढ़ावा देने और सरकारी रिपोर्टों को समय पर सार्वजनिक करने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
केंद्र-राज्य संबंध · सरकारी आयोग · पुंछी आयोग · राज्यों की स्वायत्तता · सहकारी संघवाद · संघवाद · अनुच्छेद 245 · अनुच्छेद 246 · न्यायिक समीक्षा · राजकोषीय संघवाद · विधायी संबंध · प्रशासनिक संबंध
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 245-255’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य विधायी संबंध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 256-263’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 268-281’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 356’, ‘note’: ‘राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 263’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय परिषद का गठन’}
अवधारणा प्रवाह
तमिलनाडु सरकार ने समिति का गठन किया। → समिति ने केंद्र-राज्य संबंधों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की। → सरकार ने रिपोर्ट का अंग्रेजी संस्करण सार्वजनिक किया। → रिपोर्ट की व्यापक पहुंच और पारदर्शिता बढ़ी। → केंद्र-राज्य संबंधों पर सार्वजनिक बहस और नीतिगत सुधारों को बढ़ावा मिला।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान में ‘संघवाद’ शब्द का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है।
2. केंद्र-राज्य संबंधों पर सरकारी आयोग की स्थापना 1983 में की गई थी।
3. अनुच्छेद 246 संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि भारत के संविधान में ‘संघवाद’ शब्द का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है, बल्कि यह ‘राज्यों का संघ’ वाक्यांश का उपयोग करता है। कथन 2 सही है, सरकारी आयोग की स्थापना 1983 में केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए की गई थी। कथन 3 सही है, अनुच्छेद 246 संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित है, जिसमें संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची शामिल हैं।
Q2. अभिकथन (A): तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर अपनी उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का निर्देश दिया है।
कारण (R): यह कदम केंद्र-राज्य संबंधों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, जैसा कि समाचार में बताया गया है। कारण (R) भी सही है और यह तमिलनाडु सरकार के इस कदम के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से बताता है, यानी पारदर्शिता सुनिश्चित करना। इसलिए, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में केंद्र-राज्य संबंधों के विकास में विभिन्न आयोगों और समितियों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या आपको लगता है कि हाल के वर्षों में राज्यों की स्वायत्तता में वृद्धि हुई है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत में केंद्र-राज्य संबंधों के संवैधानिक ढांचे का संक्षिप्त परिचय दें।
मुख्य भाग 1: केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए गठित प्रमुख आयोगों और समितियों (जैसे सरकारी आयोग, पुंछी आयोग, राजमन्नार समिति) का उल्लेख करें। उनकी प्रमुख सिफारिशों और उनके प्रभाव का समालोचनात्मक विश्लेषण करें।
मुख्य भाग 2: हाल के वर्षों में राज्यों की स्वायत्तता की स्थिति पर चर्चा करें। इसमें जीएसटी परिषद, नीति आयोग की भूमिका, वित्तीय हस्तांतरण में राज्यों की बढ़ती हिस्सेदारी, और विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों की भूमिका जैसे पहलुओं को शामिल करें। उन क्षेत्रों पर भी प्रकाश डालें जहां राज्यों को अभी भी केंद्रीय हस्तक्षेप का सामना करना पड़ता है।
निष्कर्ष: सहकारी संघवाद के महत्व पर जोर देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें और केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत करने के लिए आगे के उपायों का सुझाव दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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