09 Aug तमिलनाडु सरकार ने सुपर एल नीनो के प्रभाव से निपटने के लिए बनाए आकस्मिक योजनाएं

✎ अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि से जुड़ा एक जलवायु पैटर्न है जो भारत में मानसून को कमजोर कर कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, जिसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी आकस्मिक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल) | GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप (कृषि नीतियाँ) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन, कृषि (फसल पैटर्न, सिंचाई, कृषि सब्सिडी, न्यूनतम समर्थन मूल्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्य सुरक्षा)
- Prelims: अल नीनो, ला नीना, भारतीय मानसून, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), कृषि आकस्मिक योजनाएँ, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन
- Essay: जलवायु परिवर्तन और भारतीय कृषि: चुनौतियाँ और समाधान, भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में कृषि नीतियों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि से जुड़ा एक जलवायु पैटर्न है जो भारत में मानसून को कमजोर कर कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, जिसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी आकस्मिक योजनाएँ महत्वपूर्ण हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में अपना कृषि बजट प्रस्तुत किया, जिसमें सुपर अल नीनो के संभावित गंभीर प्रभावों से निपटने के लिए व्यापक आकस्मिक योजनाओं (Contingency Plans) पर विशेष जोर दिया गया। राज्य के कृषि मंत्री ने बताया कि तमिलनाडु के 12 जिले विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं, और इन प्रभावों का सामना करने के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजनाएँ तैयार की गई हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत शत-प्रतिशत कृषि क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य रखा है।
पृष्ठभूमि
- अल नीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) का एक गर्म चरण है, जो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि से जुड़ा है। यह वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है, विशेषकर भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून को कमजोर कर सकता है।
- सुपर अल नीनो एक विशेष रूप से तीव्र अल नीनो घटना है, जिसके प्रभाव अधिक गंभीर और व्यापक हो सकते हैं, जिससे सूखा, बाढ़ और कृषि उत्पादकता में कमी आ सकती है।
- भारत में कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, और अल नीनो जैसी घटनाएँ कृषि उत्पादन, ग्रामीण आय और खाद्य सुरक्षा पर सीधा नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) भारत सरकार द्वारा 2016 में शुरू की गई एक फसल बीमा योजना है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण फसल के नुकसान से किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
- जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के कारण, राज्यों के लिए कृषि क्षेत्र में लचीलापन (Resilience) बढ़ाना और आकस्मिक योजनाएँ तैयार करना अनिवार्य हो गया है ताकि किसानों को अप्रत्याशित मौसम की घटनाओं से बचाया जा सके।
- खाद्य सुरक्षा (Food Security) सुनिश्चित करना सरकारों की एक प्रमुख जिम्मेदारी है, जिसमें सभी लोगों के लिए हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।
अल नीनो और भारतीय कृषि पर इसका प्रभाव
- अल नीनो एक जटिल जलवायु पैटर्न है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के गर्म होने से उत्पन्न होता है। यह हर कुछ वर्षों में अनियमित रूप से होता है।
- यह घटना व्यापारिक पवनों (Trade Winds) को कमजोर करती है, जिससे गर्म पानी दक्षिण अमेरिका के तट की ओर बढ़ता है और गहरे, ठंडे पानी का ऊपर आना (Upwelling) रुक जाता है।
- भारत में, अल नीनो आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) को कमजोर करता है, जिससे वर्षा में कमी आती है और सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है।
- कम वर्षा से कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, विशेषकर खरीफ फसलों (जैसे धान, मक्का) पर, जो मानसून पर अत्यधिक निर्भर करती हैं।
- फसल उत्पादन में गिरावट से किसानों की आय कम होती है, ग्रामीण संकट बढ़ता है और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) पर दबाव पड़ता है।
- अल नीनो के प्रभाव से जल संसाधनों (नदियों, जलाशयों) में कमी आ सकती है, जिससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है।
- सरकारें अल नीनो के प्रभावों को कम करने के लिए विभिन्न उपाय करती हैं, जैसे फसल बीमा योजनाएँ, सूखा-प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और आकस्मिक फसल योजनाएँ।
- ला नीना (La Niña) अल नीनो का विपरीत चरण है, जिसमें पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक ठंडा होता है, और यह अक्सर भारत में मजबूत मानसून और अच्छी वर्षा से जुड़ा होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सुपर अल नीनो प्रभावों से निपटने की तैयारी | यह सुनिश्चित करना कि तमिलनाडु राज्य में कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों का सामना करने के लिए तैयार है, विशेष रूप से ‘कुरुवई’ मौसम में। |
| जिला कृषि आकस्मिक योजनाएँ | तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई ये योजनाएँ जिला कलेक्टरों को भेजी गई हैं, जो स्थानीय स्तर पर जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति प्रदान करती हैं। |
| प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का कार्यान्वयन | राज्य के सभी 37 जिलों को कवर करते हुए 14 क्लस्टरों में PMFBY को लागू करने से 36 लाख एकड़ कृषि भूमि और 15 लाख किसानों को बीमा कवरेज मिलेगा, जिससे फसल नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी। |
| खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य | अगले पाँच वर्षों में 131 लाख मीट्रिक टन और 2026-27 के लिए 125 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य राज्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। |
| दलहन, सब्जियों और फलों के उत्पादन में वृद्धि | इन फसलों के उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य न केवल आत्मनिर्भरता बल्कि पोषण सुरक्षा (Nutritional Security) प्राप्त करने में भी मदद करेगा, जिससे राज्य के नागरिकों के लिए संतुलित आहार सुनिश्चित होगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने के लिए आकस्मिक योजनाओं का कार्यान्वयन और फसल बीमा का विस्तार किसानों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करेगा और कृषि आय में गिरावट को रोकेगा।
- खाद्यान्न, दलहन, सब्जियों और फलों के उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने से राज्य की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और कृषि उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सामाजिक महत्व
- फसल बीमा और जलवायु अनुकूलन उपायों से किसानों की आजीविका सुरक्षित होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और असमानता कम होगी।
- खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने से राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार होगा, विशेष रूप से कमजोर वर्गों के लिए।
पर्यावरण महत्व
- सुपर अल नीनो जैसे चरम मौसमी घटनाओं के लिए तैयारी करना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशीलता को कम करने में मदद करेगा, जिससे कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता बनी रहेगी।
शासनिक महत्व
- जिला स्तर पर आकस्मिक योजनाओं का निर्माण और कार्यान्वयन आपदा प्रबंधन (Disaster Management) में विकेन्द्रीकरण और स्थानीय शासन की भूमिका को मजबूत करता है।
- राज्य सरकार की दूरदर्शिता और तैयारी यह दर्शाती है कि वह नागरिकों के कल्याण और कृषि क्षेत्र की स्थिरता के प्रति प्रतिबद्ध है।
चुनौतियाँ
1. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- सुपर अल नीनो जैसी चरम मौसमी घटनाएँ अप्रत्याशित और गंभीर होती हैं, जिससे कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- बदलते वर्षा पैटर्न, सूखे और बाढ़ की बढ़ती आवृत्ति कृषि पद्धतियों और फसल चक्रों को बाधित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन
2. फसल बीमा का प्रभावी कार्यान्वयन
- PMFBY के तहत सभी पात्र किसानों को नामांकित करना और उन्हें योजना के लाभों के बारे में जागरूक करना एक चुनौती हो सकती है।
- दावों के निपटान में देरी और पारदर्शिता की कमी किसानों के बीच योजना के प्रति विश्वास को कम कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: कृषि, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
3. खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा
- बढ़ती जनसंख्या और बदलती आहार संबंधी आदतों के साथ खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करना एक सतत चुनौती है।
- दलहन, सब्जियों और फलों के उत्पादन में वृद्धि के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचा और बाजार संपर्क सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: खाद्य सुरक्षा, कृषि
4. राज्य-केंद्र संबंध और वित्तपोषण
- केंद्र सरकार की योजनाओं (जैसे PMFBY) के कार्यान्वयन में राज्य और केंद्र के बीच समन्वय और वित्तपोषण का मुद्दा महत्वपूर्ण है।
- राज्य के बजट से ₹648.55 करोड़ का आवंटन एक महत्वपूर्ण व्यय है, और अन्य विकासात्मक आवश्यकताओं के साथ संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, सरकारी बजट
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जलवायु परिवर्तन के अप्रत्याशित प्रभाव | सुपर अल नीनो जैसी घटनाओं की तीव्रता और आवृत्ति में वृद्धि से कृषि उत्पादन और किसान की आय पर गंभीर खतरा। |
| फसल बीमा योजना का कवरेज और पहुँच | यह सुनिश्चित करना कि सभी पात्र किसान, विशेषकर छोटे और सीमांत किसान, PMFBY का लाभ उठा सकें और दावों का समय पर निपटान हो। |
| खाद्य और पोषण सुरक्षा लक्ष्य | बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खाद्यान्न, दलहन, सब्जियों और फलों के उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने में चुनौतियाँ। |
| संसाधन आवंटन और वित्तीय स्थिरता | कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का आवंटन और राज्य के बजट पर इसका प्रभाव। |
| कृषि पद्धतियों में अनुकूलन | किसानों को जलवायु-स्मार्ट कृषि (Climate-Smart Agriculture) पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY)
आगे की राह
- जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, जिसमें सूखे-प्रतिरोधी फसलें, कुशल जल प्रबंधन और फसल विविधीकरण शामिल हैं।
- फसल बीमा योजनाओं के तहत किसानों के नामांकन को बढ़ाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना और दावों के निपटान की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना।
- कृषि अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना ताकि नई किस्मों और प्रौद्योगिकियों का विकास किया जा सके जो जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक प्रतिरोधी हों।
- किसानों को मौसम संबंधी जानकारी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों तक पहुँच प्रदान करना ताकि वे समय पर निर्णय ले सकें।
- कृषि उपज के लिए बेहतर बाजार संपर्क और मूल्य श्रृंखला (Value Chain) विकसित करना ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देना ताकि फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम किया जा सके और किसानों की आय में वृद्धि हो।
- राज्य और केंद्र सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना ताकि कृषि क्षेत्र के विकास और जलवायु अनुकूलन के प्रयासों को सुदृढ़ किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अल नीनो · जलवायु परिवर्तन · कृषि आकस्मिक योजनाएँ · प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना · खाद्य सुरक्षा · पोषण सुरक्षा · कृषि बजट · राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष · जलवायु अनुकूल कृषि · सतत कृषि
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘राज्य सूची में कृषि का विषय’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों द्वारा अनुदान’}
अवधारणा प्रवाह
सुपर अल नीनो के कारण गंभीर जलवायु प्रभाव → कृषि उत्पादन और किसान की आजीविका पर खतरा → राज्य सरकार द्वारा जिला कृषि आकस्मिक योजनाएँ तैयार करना → प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का कार्यान्वयन → खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन लक्ष्य निर्धारित करना → किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित करना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल नीनो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से संबंधित एक मौसमी घटना है।
2. अल नीनो के कारण भारत में सामान्यतः मानसून की वर्षा कम होती है, जिससे सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
3. ‘सुपर अल नीनो’ अल नीनो का एक विशेष रूप से तीव्र संस्करण है जिसके वैश्विक जलवायु पर अधिक गंभीर प्रभाव होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। अल नीनो एक मौसमी घटना है जो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी है और यह भारत में कमजोर मानसून तथा सूखे का कारण बन सकती है। कथन 3 भी सही है; ‘सुपर अल नीनो’ अल नीनो का एक तीव्र रूप है जिसके प्रभाव अधिक गंभीर होते हैं।
Q2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल अधिसूचित खरीफ फसलों को कवर करती है।
2. इस योजना के तहत किसानों द्वारा देय प्रीमियम की दरें सभी फसलों के लिए समान हैं।
3. इस योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 3
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि PMFBY खरीफ, रबी और बागवानी फसलों सहित अधिसूचित सभी फसलों को कवर करती है। कथन 2 भी गलत है क्योंकि प्रीमियम की दरें फसलों और मौसमों के अनुसार भिन्न होती हैं। कथन 3 सही है; योजना का मुख्य उद्देश्य फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अल नीनो जैसी मौसमी घटनाओं के संदर्भ में कृषि आकस्मिक योजनाओं (Agricultural Contingency Plans) के महत्व का परीक्षण कीजिए। भारत में खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय पर ऐसी योजनाओं के संभावित प्रभावों की भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अल नीनो और इसके कृषि पर प्रभावों का संक्षिप्त परिचय। कृषि आकस्मिक योजनाओं की आवश्यकता पर प्रकाश डालना।
2. **कृषि आकस्मिक योजनाओं का महत्व:**
* फसल विविधीकरण और वैकल्पिक फसल पैटर्न।
* जल प्रबंधन रणनीतियाँ (जैसे सूक्ष्म सिंचाई, वर्षा जल संचयन)।
* पशुधन प्रबंधन और चारा उपलब्धता।
* किसानों को समय पर जानकारी और सलाह।
* बीज और उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
* राज्य और जिला स्तर पर तैयारियों का समन्वय।
3. **खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव:**
* फसल उत्पादन में स्थिरता बनाए रखना।
* अनाज, दालों और सब्जियों की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
* मूल्य स्थिरता और मुद्रास्फीति नियंत्रण।
* सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की भूमिका।
4. **किसानों की आय पर प्रभाव:**
* फसल नुकसान से बचाव या उसकी भरपाई।
* प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) जैसी योजनाओं की भूमिका।
* ऋणग्रस्तता से बचाव।
* कृषि में निवेश को प्रोत्साहन।
5. **निष्कर्ष:** जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के मद्देनजर कृषि आकस्मिक योजनाओं की निरंतर प्रासंगिकता और भविष्य की रणनीतियों पर बल देना।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- अमेरिकी रूस प्रतिबंध बिल: भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ा जोखिम, जानिए पूरा मामला - August 9, 2026
- US Senate Russia Sanctions Bill: Threat to India’s Energy Security Explained for UPSC 2026 - August 9, 2026
- महिला आरक्षण विधेयक: शिअद ने केंद्र से तुरंत लागू करने की मांग, जानें पूरा मामला - August 9, 2026

No Comments