एनआईआरएफ रैंकिंग में एचईआई की प्रगति: उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

एनआईआरएफ रैंकिंग में एचईआई की प्रगति — concept mind map

एनआईआरएफ रैंकिंग में एचईआई की प्रगति: उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

उच्च शिक्षा सुधार ढांचाNEP 2020 लक्ष्यबहु-विषयक शिक्षा, अनुसंधानNIRF रैंकिंग5 मापदंडों पर आधारितसंस्थानों की भागीदारी2021: 6,272 → 2025: 14,163वैश्विक रैंकिंगQS: 11 → 52 संस्थाननए संस्थानों का निर्माण43 नए प्रमुख संस्थान
उच्च शिक्षा सुधार ढांचा

✎ भारत सरकार की पहलें, जैसे NIRF और NEP 2020, देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, पहुँच और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने पर केंद्रित हैं, जिससे संस्थानों की रैंकिंग और अनुसंधान क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शिक्षा, मानव संसाधन  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना
  • Prelims: राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF), राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA), विश्व स्तरीय संस्थान योजना, QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT)
  • Essay: भारत में उच्च शिक्षा का भविष्य: चुनौतियाँ और अवसर, ज्ञान अर्थव्यवस्था के निर्माण में शिक्षा की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार की पहलें, जैसे NIRF और NEP 2020, देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, पहुँच और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने पर केंद्रित हैं, जिससे संस्थानों की रैंकिंग और अनुसंधान क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) की प्रगति पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। यह प्रगति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसमें बहु-विषयक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने तथा बुनियादी ढांचे में सुधार पर जोर दिया गया है। विज्ञप्ति में NIRF में बढ़ती भागीदारी और QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की संख्या में वृद्धि को रेखांकित किया गया है, जो देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उद्देश्य उच्च शिक्षा की समग्र गुणवत्ता में सुधार करना है, जिसमें बहु-विषयक शिक्षा, महत्वपूर्ण सोच, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है।
  • राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) को 2015 में देश में उच्च शिक्षा संस्थानों/विश्वविद्यालयों की वार्षिक रैंकिंग (इंडिया रैंकिंग) के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया था।
  • NIRF रैंकिंग की कार्यप्रणाली पाँच व्यापक मापदंडों पर आधारित है: अध्यापन, शिक्षण और संसाधन; अनुसंधान और व्यावसायिक प्रणालियाँ; स्नातक परिणाम; आउटरीच और समावेशिता; और भरोसेमंद अवधारणा।
  • NIRF में भाग लेने वाले संस्थानों की संख्या 2021 में 6,272 से बढ़कर 2025 में 14,163 हो गई है, जो इसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
  • QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में प्रदर्शित होने वाले भारतीय संस्थानों की संख्या 2015 में 11 से बढ़कर 2027 में 52 हो गई है।
  • भारत सरकार ने 2014 से 43 नए प्रमुख संस्थान स्थापित किए हैं, जिनमें सात IIT, आठ केंद्रीय विश्वविद्यालय और नौ IIM शामिल हैं, जो उच्च शिक्षा के विस्तार पर जोर देता है।

उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF): यह देश में उच्च शिक्षा संस्थानों की वार्षिक रैंकिंग करता है, जिससे संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है और गुणवत्ता सुधार के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: यह नीति उच्च शिक्षा में समग्र सुधारों पर केंद्रित है, जिसमें बहु-विषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और प्रभावी शिक्षक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना शामिल है।
  • प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA): यह योजना राज्य सरकारों को उच्च शिक्षा में सुधार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसमें राज्य विश्वविद्यालयों में गुणवत्ता और उत्कृष्टता बढ़ाना, बुनियादी ढाँचा अनुदान और बहु-विषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय (MERU) स्थापित करना शामिल है।
  • विश्व स्तरीय संस्थान योजना (Institutions of Eminence – IoE): 2017 में शुरू की गई, यह योजना शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता के साथ संस्थानों की एक अलग श्रेणी बनाती है ताकि वे विश्व स्तरीय शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के रूप में उभर सकें।
  • नए संस्थानों की स्थापना: भारत सरकार ने 2014 से कई नए IIT, केंद्रीय विश्वविद्यालय और IIM स्थापित किए हैं, जिससे उच्च शिक्षा तक पहुँच और गुणवत्ता में वृद्धि हुई है।
  • अनुसंधान पार्कों का विस्तार: सरकार ने नए IITs में अनुसंधान पार्कों के निर्माण सहित शैक्षणिक और बुनियादी ढाँचे की क्षमता के विस्तार को मंजूरी दी है, जो अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देगा।
  • कौशल-एकीकृत शिक्षा: शिक्षा मंत्रालय स्कूलों और कॉलेजों में उद्योग की आवश्यकताओं के साथ कौशल-एकीकृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पहल कर रहा है, जिसमें कम्प्यूटेशनल सोच और AI पाठ्यक्रम का विकास शामिल है।
  • शिक्षक क्षमता निर्माण: शिक्षकों को प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने और AI उपकरणों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे शिक्षण, सीखने और मूल्यांकन की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को प्रोत्साहित करता है।
बहु-विषयक शिक्षा छात्रों में महत्वपूर्ण सोच और विश्लेषणात्मक क्षमताओं का विकास करती है, जिससे उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में समस्याओं को हल करने में मदद मिलती है।
अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देश के समग्र विकास और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए आवश्यक नए ज्ञान और प्रौद्योगिकियों का सृजन करता है।
बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता में सुधार छात्रों और शिक्षकों के लिए बेहतर शिक्षण-अधिगम वातावरण प्रदान करता है, जिससे अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलता है।
शिक्षक प्रशिक्षण शिक्षकों की क्षमताओं को बढ़ाता है, जिससे वे छात्रों को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें और उन्हें आधुनिक आवश्यकताओं के लिए तैयार कर सकें।
विश्व स्तरीय संस्थान योजना (Institutions of Eminence – IoE) संस्थानों को शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करती है ताकि वे वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक और अनुसंधान केंद्र बन सकें।

महत्व

शैक्षणिक महत्व

  • NIRF रैंकिंग उच्च शिक्षा संस्थानों को अपनी गुणवत्ता में सुधार करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।
  • बहु-विषयक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार पर जोर छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है और उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाता है।
  • शिक्षक प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

सामाजिक महत्व

  • गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ने से समाज के सभी वर्गों के लिए अवसर पैदा होते हैं, जिससे सामाजिक गतिशीलता और समावेशिता बढ़ती है।
  • कौशल-एकीकृत शिक्षा उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करती है, जिससे युवाओं के लिए बेहतर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और बेरोजगारी कम होती है।
  • उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार से सामाजिक समस्याओं का समाधान होता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

आर्थिक महत्व

  • उच्च शिक्षा में निवेश से मानव पूंजी का विकास होता है, जो आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • अनुसंधान पार्क और नए IIT जैसे संस्थानों की स्थापना से नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलता है, जिससे नए उद्योग और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
  • वैश्विक रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की बढ़ती उपस्थिति देश की बौद्धिक क्षमता को दर्शाती है, जिससे विदेशी निवेश और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आकर्षित होता है।

चुनौतियाँ

1. गुणवत्ता और पहुंच में असमानता

  • देश के विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक पहुंच में अभी भी असमानताएं मौजूद हैं।
  • कुछ संस्थानों में बुनियादी ढांचे, संकाय और संसाधनों की कमी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में बाधा डालती है।

2. अनुसंधान और नवाचार का सीमित प्रभाव

  • भारतीय संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार का स्तर अभी भी वैश्विक मानकों से पीछे है, और उद्योग के साथ इसका जुड़ाव कम है।
  • पेटेंट, प्रकाशन और स्टार्टअप के मामले में प्रगति धीमी है, जिससे नवाचार का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव सीमित होता है।

3. शिक्षक क्षमता और विकास

  • उच्च शिक्षा में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती है, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों और नए स्थापित संस्थानों में।
  • शिक्षकों के लिए निरंतर व्यावसायिक विकास और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों में प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

4. उद्योग-अकादमिक अंतराल

  • उद्योग की बदलती आवश्यकताओं और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा प्रदान किए जाने वाले पाठ्यक्रम के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है।
  • स्नातकों में उद्योग-विशिष्ट कौशल की कमी अक्सर उनकी रोजगार क्षमता को प्रभावित करती है।

5. वित्तपोषण और स्वायत्तता

  • उच्च शिक्षा संस्थानों को पर्याप्त वित्तपोषण सुनिश्चित करना और उन्हें अकादमिक और प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान करना एक चुनौती है।
  • सार्वजनिक और निजी संस्थानों के बीच वित्तपोषण और नियामक ढांचे में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना।
संकाय की कमी और प्रशिक्षण योग्य शिक्षकों की भर्ती और उन्हें आधुनिक शिक्षण पद्धतियों में प्रशिक्षित करना।
अनुसंधान और नवाचार का निम्न स्तर वैश्विक मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देना और उसे उद्योग से जोड़ना।
पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता उद्योग की बदलती मांगों के अनुरूप पाठ्यक्रम को अद्यतन करना और कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना।
बुनियादी ढांचे का विकास नए और मौजूदा संस्थानों में पर्याप्त और आधुनिक बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना।
अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार अधिक भारतीय संस्थानों को वैश्विक स्तर पर शीर्ष रैंकिंग में लाना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020
  • राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF)
  • राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA)/प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA)
  • विश्व स्तरीय संस्थान योजना (Institutions of Eminence – IoE)

आगे की राह

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में नए संस्थानों की स्थापना और मौजूदा संस्थानों का उन्नयन करना।
  • शिक्षकों के प्रशिक्षण और व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना, जिसमें आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और प्रौद्योगिकी का उपयोग शामिल हो।
  • अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त वित्तपोषण, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और उद्योग-अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित करना।
  • पाठ्यक्रम को उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन करना और कौशल-आधारित तथा बहु-विषयक शिक्षा पर अधिक जोर देना।
  • संस्थानों को अधिक अकादमिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना ताकि वे नवाचार कर सकें और अपनी विशिष्ट पहचान बना सकें।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और छात्र-शिक्षक विनिमय कार्यक्रमों को बढ़ावा देना ताकि भारतीय संस्थान वैश्विक मानकों के साथ तालमेल बिठा सकें।
  • शिक्षा के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना और ऑनलाइन शिक्षण संसाधनों तक पहुंच बढ़ाना, विशेष रूप से महामारी जैसी स्थितियों में।
  • उच्च शिक्षा के वित्तपोषण के लिए सार्वजनिक और निजी स्रोतों से निवेश आकर्षित करना तथा संस्थानों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) · राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 · उच्च शिक्षा संस्थान (HEIs) · बहु-विषयक शिक्षा · अनुसंधान और नवाचार · विश्व स्तरीय संस्थान योजना (IoE) · राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA)/प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) · शैक्षणिक गुणवत्ता · कौशल-एकीकृत शिक्षा · केंद्रीय वित्त पोषित संस्थान · QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग · बुनियादी ढांचा विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 45’, ‘note’: ‘बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक हितों को बढ़ावा’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची)’, ‘note’: ‘शिक्षा का विषय’}

अवधारणा प्रवाह

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन  →  NIRF रैंकिंग और अन्य पहलों का शुभारंभ  →  उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता सुधार  →  बहु-विषयक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा  →  वैश्विक रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की बेहतर स्थिति  →  मानव पूंजी का विकास और आर्थिक संवृद्धि  →  सामाजिक समावेशिता और रोजगार के अवसरों में वृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसे भारत सरकार द्वारा 2015 में देश में उच्च शिक्षा संस्थानों/विश्वविद्यालयों की वार्षिक रैंकिंग के लिए शुरू किया गया था।
2. इसकी कार्यप्रणाली ‘अध्यापन, शिक्षण और संसाधन’ तथा ‘अनुसंधान और व्यावसायिक प्रणालियां’ जैसे पांच व्यापक मापदंडों पर आधारित है।
3. NIRF के लॉन्च के बाद से, QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में प्रदर्शित होने वाले भारतीय संस्थानों की संख्या में कमी आई है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। NIRF को 2015 में लॉन्च किया गया था और यह पांच व्यापक मापदंडों पर आधारित है। कथन 3 गलत है क्योंकि NIRF के लॉन्च के बाद से QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में प्रदर्शित होने वाले भारतीय संस्थानों की संख्या में वृद्धि हुई है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कार्यक्रम उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और बुनियादी ढांचा विकास से संबंधित है/हैं?
1. राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA)
2. प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA)
3. विश्व स्तरीय संस्थान योजना (IoE)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA)/प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) योजना तथा विश्व स्तरीय संस्थान योजना (IoE) दोनों ही उच्च शिक्षा में सुधार और बुनियादी ढांचा विकास से संबंधित हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार के लिए राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। साथ ही, इस दिशा में सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहलों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: NIRF का संक्षिप्त परिचय (कब और क्यों शुरू किया गया)।
2. NIRF की भूमिका का मूल्यांकन:
– प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और गुणवत्ता में सुधार।
– पारदर्शिता और जवाबदेही।
– छात्रों और अभिभावकों के लिए सूचना का स्रोत।
– अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की उपस्थिति में वृद्धि (QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग का संदर्भ)।
– चुनौतियों और सीमाओं पर संक्षिप्त चर्चा (यदि कोई हो)।
3. सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहलें:
– राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत पहलें (बहु-विषयक शिक्षा, अनुसंधान, शिक्षक प्रशिक्षण)।
– राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA)/प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) योजना (राज्य विश्वविद्यालयों को वित्तीय सहायता, बुनियादी ढांचा अनुदान)।
– विश्व स्तरीय संस्थान योजना (IoE) (स्वायत्तता, विश्व स्तरीय संस्थान बनाने का लक्ष्य)।
– नए प्रमुख संस्थानों की स्थापना (IITs, केंद्रीय विश्वविद्यालय, IIMs)।
– कौशल-एकीकृत शिक्षा को बढ़ावा देना (NCERT, CBSE द्वारा AI और कम्प्यूटेशनल सोच पाठ्यक्रम)।
– अनुसंधान पार्कों का विकास।
4. निष्कर्ष: उच्च शिक्षा के समग्र विकास में इन पहलों और NIRF के समन्वित प्रयासों का महत्व।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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