संसदीय पैनल ने उठाए एससी छात्रवृत्ति में देरी, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के कम उपयोग के मुद्दे

Parliament panel flags delays in Scheduled Caste scholarships, poor utilisation of OBC, minority welfare schemes — concept mind map

संसदीय पैनल ने उठाए एससी छात्रवृत्ति में देरी, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के कम उपयोग के मुद्दे

Scholarship & Coaching Scheme FailuresDelaysMonths to 1 yearLow Utilization6.4% to 61%Budget Underuse16.5% to 50.5%Repeated Failures2023-26
Scholarship & Coaching Scheme Failures

✎ संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में मौजूद संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक चुनौतियों को उजागर करती है, विशेष रूप से छात्रवृत्ति वितरण और मुफ्त कोचिंग कार्यक्रमों में।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ तथा इन योजनाओं का प्रदर्शन; इन कमजोर वर्गों की सुरक्षा एवं बेहतरी के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।  |  GS Paper II — शासन: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
  • Prelims: संसदीय स्थायी समिति, अनुसूचित जाति (SC) छात्रवृत्ति, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएँ, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय
  • Essay: भारत में सामाजिक-आर्थिक समानता प्राप्त करने में कल्याणकारी योजनाओं की भूमिका।, कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण में शिक्षा का महत्व और चुनौतियाँ।

त्वरित पुनरावृत्ति: संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में मौजूद संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक चुनौतियों को उजागर करती है, विशेष रूप से छात्रवृत्ति वितरण और मुफ्त कोचिंग कार्यक्रमों में।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति वितरण में लगातार देरी, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग योजना के खराब उपयोग तथा अल्पसंख्यक क्षेत्रों में शैक्षिक सुविधाओं के बुनियादी ढांचे और कामकाज में कमियों पर चिंता व्यक्त की है। समिति ने अत्याचारों से अनुसूचित जातियों की सुरक्षा के लिए तंत्र को लागू करने में धीमी गति और अल्पसंख्यक-विकास परियोजनाओं की निगरानी को मजबूत करने की भी बात कही है।

पृष्ठभूमि

  • संसदीय स्थायी समिति ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा अनुदान मांगों पर मार्च 2026 की रिपोर्ट में की गई सिफारिशों पर की गई कार्रवाई की अपनी रिपोर्ट में ये टिप्पणियाँ की हैं।
  • समिति ने इस बात पर निराशा व्यक्त की है कि छात्रवृत्ति लाभार्थियों को अभी भी देरी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कुछ राज्यों को सत्यापन और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में महीनों से लेकर एक साल तक का समय लग जाता है।
  • मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण को समिति ने अस्वीकार कर दिया कि राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) जून में खुलता है और केंद्र का हिस्सा जारी होने से पहले राज्यों को सत्यापन के लिए समय चाहिए होता है। समिति ने दोहराया कि छात्रवृत्तियाँ उसी शैक्षणिक वर्ष के भीतर वितरित की जानी चाहिए, जिस वर्ष वे देय होती हैं।
  • अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए मुफ्त कोचिंग योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से वंचित छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश पाने में मदद करना है।
  • इस योजना के तहत, 2023-24 में 3,500 लाभार्थियों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 223 छात्रों को कवर किया गया, जो लक्ष्य का केवल 6.4% था। 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 2,136 (61%) हो गई, लेकिन 2025-26 में यह तेजी से गिर गई।
  • योजना का वित्तीय उपयोग भी कमजोर रहा है। 2023-24 में ₹47 करोड़ के बजट अनुमान के मुकाबले वास्तविक व्यय ₹7.76 करोड़ (लगभग 16.5%) था। 2024-25 में ₹35 करोड़ के मुकाबले ₹17.68 करोड़ (50.5%) खर्च किए गए।

संसदीय स्थायी समिति क्या है?

  • संसदीय स्थायी समितियाँ (Parliamentary Standing Committees) भारतीय संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) द्वारा गठित स्थायी और निरंतर समितियाँ होती हैं।
  • इनका गठन संसद के कार्य को अधिक कुशल और प्रभावी बनाने के लिए किया जाता है, क्योंकि संसद के पास सभी विधेयकों और सरकारी कार्यों की विस्तृत जाँच करने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता है।
  • ये समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से संबंधित विधेयकों, बजट अनुमानों, नीतियों और योजनाओं की विस्तृत जाँच करती हैं।
  • इन समितियों की सिफारिशें आमतौर पर सरकार द्वारा गंभीरता से ली जाती हैं, हालांकि वे सरकार पर बाध्यकारी नहीं होती हैं।
  • संसदीय स्थायी समितियाँ सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा और विश्लेषण के लिए एक मंच प्रदान करती हैं, जिससे सरकार की जवाबदेही बढ़ती है।
  • ये समितियाँ विभिन्न हितधारकों, विशेषज्ञों और आम जनता से इनपुट प्राप्त कर सकती हैं, जिससे नीति निर्माण में व्यापक दृष्टिकोण शामिल होता है।
  • सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के कामकाज की निगरानी करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अनुसूचित जाति (SC) छात्रवृत्ति में देरी यह अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए शिक्षा तक पहुंच और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने में एक बड़ी बाधा है, जिससे उनकी शैक्षिक प्रगति प्रभावित होती है।
SC और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए मुफ्त कोचिंग योजना का कम उपयोग आर्थिक रूप से वंचित छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करने और प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश पाने के उद्देश्य को कमजोर करता है।
अल्पसंख्यक क्षेत्रों में शैक्षिक सुविधाओं के बुनियादी ढांचे और कामकाज में अंतराल अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक सशक्तिकरण के प्रयासों में कमी को दर्शाता है, जिससे समावेशी विकास बाधित होता है।
अत्याचारों से SCs की सुरक्षा के लिए तंत्र को लागू करने में धीमी गति अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रणालीगत अक्षमता को उजागर करता है।
अल्पसंख्यक-विकास परियोजनाओं की निगरानी में कमी सरकारी योजनाओं और निधियों के प्रभावी कार्यान्वयन और लक्षित लाभार्थियों तक उनके लाभों की पहुंच पर सवाल उठाता है।

महत्व

सामाजिक न्याय

  • यह रिपोर्ट सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन में मौजूदा कमियों को उजागर करती है, जो समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • छात्रवृत्ति और कोचिंग योजनाओं में देरी से अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफल होने के अवसरों से वंचित होना पड़ता है, जिससे सामाजिक असमानताएँ बनी रहती हैं।

शासन और जवाबदेही

  • संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee) की यह रिपोर्ट सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन, धन के उपयोग और लक्षित लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाने में मंत्रालयों की जवाबदेही पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है।
  • योजनाओं के खराब प्रदर्शन और धन के कम उपयोग से सार्वजनिक धन की बर्बादी होती है और सरकारी कार्यक्रमों की विश्वसनीयता कम होती है।

मानव पूंजी विकास

  • शिक्षा और कौशल विकास योजनाओं में बाधाएँ देश की मानव पूंजी के समग्र विकास को प्रभावित करती हैं, विशेषकर उन समुदायों के लिए जिन्हें मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता है।
  • अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कोचिंग से वंचित करना उनकी भविष्य की रोजगार क्षमता और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सीमित करता है।

चुनौतियाँ

1. योजनाओं के कार्यान्वयन में देरी

  • छात्रवृत्ति वितरण में राज्यों द्वारा सत्यापन और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में महीनों से लेकर एक वर्ष तक की देरी।
  • राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (National Scholarship Portal – NSP) के जून में खुलने के बावजूद, राज्यों को सत्यापन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जिससे केंद्र का हिस्सा जारी होने में विलंब होता है।

2. निःशुल्क कोचिंग योजना का कम उपयोग

  • SC और OBC के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना में लक्षित लाभार्थियों की संख्या के मुकाबले वास्तविक कवरेज बहुत कम है (उदाहरण के लिए, 2025-26 में लक्ष्य का केवल 12.3%)।
  • योजना के लिए आवंटित बजट का भी बहुत कम उपयोग हुआ है (उदाहरण के लिए, 2023-24 में बजट अनुमान का केवल 16.5% व्यय)।

3. अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में अंतराल

  • अल्पसंख्यक क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाओं के बुनियादी ढांचे और कामकाज में कमियाँ।
  • अल्पसंख्यक-विकास परियोजनाओं की निगरानी में कमी, जिससे उनके प्रभावी कार्यान्वयन पर संदेह होता है।

4. अत्याचारों से सुरक्षा तंत्र का धीमा क्रियान्वयन

  • अनुसूचित जातियों को अत्याचारों से बचाने के लिए तंत्रों को लागू करने में धीमी गति, जिससे उनके खिलाफ अपराधों की रोकथाम और न्याय सुनिश्चित करने में बाधा आती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
छात्रवृत्ति वितरण में देरी छात्रों की शैक्षिक निरंतरता और वित्तीय स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव।
निःशुल्क कोचिंग योजना का कम कवरेज आर्थिक रूप से वंचित छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर से वंचित करना।
बजटीय आवंटन का कम उपयोग सार्वजनिक धन की अक्षमता और लक्षित उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफलता।
अल्पसंख्यक शिक्षा सुविधाओं में बुनियादी ढांचागत कमियाँ अल्पसंख्यक समुदायों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच में बाधा।
अत्याचारों से सुरक्षा तंत्र के रोलआउट में देरी अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जवाबदेही की कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • अनुसूचित जाति के लिए छात्रवृत्ति (Scholarships for Scheduled Castes)
  • SC और OBC के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना (Free Coaching for SCs and OBCs scheme)

आगे की राह

  • छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, जिसमें समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो।
  • राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) को और अधिक कुशल बनाया जाए तथा सत्यापन प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाए।
  • निःशुल्क कोचिंग योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएँ और योजना को अधिक सुलभ बनाया जाए।
  • योजनाओं के बजटीय आवंटन का प्रभावी ढंग से उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालयों और कार्यान्वयन एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए।
  • अल्पसंख्यक क्षेत्रों में शैक्षिक सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और उनके कामकाज में सुधार के लिए विशेष प्रयास किए जाएँ।
  • अनुसूचित जातियों को अत्याचारों से बचाने के लिए तंत्रों के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली स्थापित की जाए।
  • अल्पसंख्यक-विकास परियोजनाओं की नियमित और कठोर निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि उनके लक्ष्यों की प्राप्ति हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

संसदीय स्थायी समिति · अनुसूचित जाति छात्रवृत्ति · अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण योजनाएँ · अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएँ · निःशुल्क कोचिंग योजना · योजना कार्यान्वयन में देरी · निधियों का कम उपयोग · सामाजिक न्याय · सशक्तिकरण · कल्याणकारी राज्य

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 15: भेदभाव का निषेध
  • अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का उन्मूलन
  • अनुच्छेद 46: कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा
  • अनुच्छेद 338: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
  • अनुच्छेद 340: पिछड़े वर्गों की दशाओं की जांच

अवधारणा प्रवाह

संसदीय समिति की रिपोर्ट  →  योजनाओं के कार्यान्वयन में कमियाँ  →  छात्रवृत्ति में देरी, कोचिंग का कम उपयोग  →  वंचित वर्गों को अवसरों से वंचित करना  →  सामाजिक असमानताओं का बढ़ना  →  मानव पूंजी विकास पर नकारात्मक प्रभाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. संसदीय स्थायी समिति सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अनुदान मांगों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
2. राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) छात्रवृत्ति के वितरण में राज्यों की भूमिका को पूरी तरह से समाप्त कर देता है।
3. निःशुल्क कोचिंग योजना का उद्देश्य केवल अनुसूचित जाति के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है क्योंकि संसदीय स्थायी समिति इन मंत्रालयों की रिपोर्टों की जांच करती है। कथन 2 गलत है क्योंकि NSP के बावजूद राज्यों की सत्यापन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिससे देरी होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि निःशुल्क कोचिंग योजना अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) दोनों के छात्रों के लिए है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन संसदीय समिति द्वारा अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना के संबंध में सही है?

  1. योजना का लक्ष्य केवल उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश दिलाना है।
  2. 2025-26 में लाभार्थियों का प्रतिशत लक्ष्य का 61% था।
  3. योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से वंचित छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना है।
  4. वित्तीय उपयोग हमेशा बजट अनुमान का 50% से अधिक रहा है।

उत्तर: योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से वंचित छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना है। — विकल्प C सही है क्योंकि रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से वंचित छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए तैयार करना है। विकल्प A गलत है क्योंकि इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी शामिल है। विकल्प B गलत है क्योंकि 2025-26 में यह 12.3% था, जबकि 2024-25 में 61% था। विकल्प D गलत है क्योंकि वित्तीय उपयोग काफी कम रहा है, जैसे 2023-24 में 16.5%।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ संसदीय स्थायी समितियों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए, विशेष रूप से सामाजिक न्याय और अधिकारिता के संदर्भ में। कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** संसदीय स्थायी समितियों, विशेषकर सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी समिति का संक्षिप्त परिचय और उनकी भूमिका का उल्लेख।
2. **संसदीय स्थायी समितियों की भूमिका:**
* मंत्रालयों की अनुदान मांगों की जांच।
* नीतियों और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी।
* कानूनों की समीक्षा और सुधारों की सिफारिश।
* सरकार को जवाबदेह ठहराना।
* विशेष रूप से सामाजिक न्याय के क्षेत्र में कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए सिफारिशें।
3. **कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में चुनौतियाँ (वर्तमान संदर्भ में):**
* छात्रवृत्ति वितरण में देरी (राज्यों द्वारा सत्यापन में लगने वाला समय)।
* निधियों का कम उपयोग (जैसे निःशुल्क कोचिंग योजना में)।
* लक्ष्य लाभार्थियों तक पहुँचने में विफलता।
* बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में कमी (अल्पसंख्यक क्षेत्रों में)।
* योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन में कमजोरी।
* अंतर-राज्यीय समन्वय का अभाव।
4. **चुनौतियों के समाधान हेतु उपाय:**
* **प्रशासनिक सुधार:** प्रक्रियाओं का सरलीकरण और डिजिटलीकरण (जैसे NSP का बेहतर उपयोग)।
* **निगरानी और मूल्यांकन:** मजबूत निगरानी तंत्र, नियमित ऑडिट और प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन।
* **जवाबदेही:** राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों की जवाबदेही तय करना।
* **क्षमता निर्माण:** योजना कार्यान्वयन में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण।
* **धन का समय पर वितरण:** केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय।
* **जन जागरूकता:** लाभार्थियों को योजनाओं के बारे में शिक्षित करना।
* **नागरिक समाज की भागीदारी:** योजनाओं की निगरानी और फीडबैक में उनकी भूमिका।
* **विधायी उपाय:** यदि आवश्यक हो तो कानूनी ढांचे को मजबूत करना।
5. **निष्कर्ष:** सामाजिक न्याय और अधिकारिता के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रभावी कार्यान्वयन और सतत निगरानी के महत्व पर बल।

स्रोत: Hindustan Times


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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