स्माइल योजना: सरकार ने भिक्षावृत्ति में लगे लोगों के पुनर्वास ढांचे को किया मजबूत

स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना के अंतर्गत भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास ढांचे को सरकार ने सुदृढ़ किया — concept mind map

स्माइल योजना: सरकार ने भिक्षावृत्ति में लगे लोगों के पुनर्वास ढांचे को किया मजबूत

Map of Tamil Nadu, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Maharashtra, Assa highlighted on the map of India — SMILE Beggary…
मानचित्र व माइंड-मैप: स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना: राज्यवार पुनर्वास आँकड़े

✎ स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है, जो भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन के माध्यम से उन्हें गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करने पर केंद्रित…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ, इन कमजोर वर्गों की सुरक्षा एवं बेहतरी के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थाएँ एवं निकाय।
  • Prelims: स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भिक्षावृत्ति, पुनर्वास, कौशल विकास, स्वयं सहायता समूह, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश, राष्ट्रीय परामर्श समिति
  • Essay: भारत में हाशिये पर स्थित समुदायों का सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान, सामाजिक समावेशन और मानव गरिमा: राज्य की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है, जो भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन के माध्यम से उन्हें गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करने पर केंद्रित है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने हाशिये पर स्थित व्यक्तियों की आजीविका एवं उद्यम के लिए सहायता (स्माइल) – भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के समग्र पुनर्वास (स्माइल-भिक्षावृत्ति) योजना के माध्यम से भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की देखभाल, पुनर्वास तथा सामाजिक पुनर्समावेशन को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक उपाय किए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, योजना के तहत अब तक 45.59 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं और 2,824 बच्चों सहित कुल 10,446 व्यक्तियों का पुनर्वास किया गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में भिक्षावृत्ति एक जटिल सामाजिक-आर्थिक समस्या है, जो गरीबी, बेघरता, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और सामाजिक बहिष्कार से जुड़ी है।
  • भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों को अक्सर समाज में भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका गरिमापूर्ण जीवन जीना कठिन हो जाता है।
  • सरकार ने इन व्यक्तियों के पुनर्वास और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए विभिन्न पहलें की हैं, जिनमें ‘स्माइल’ योजना एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने एम.एस. पैटर बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार मामले (सिविल अपील संख्या 12216/2025) में भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के मानवीय और अधिकार-आधारित पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे।
  • इन निर्देशों के अनुपालन में, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राष्ट्रीय परामर्श समिति तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के साथ व्यापक परामर्श के बाद भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों/आश्रय गृहों के लिए आदर्श दिशानिर्देश तैयार किए हैं, जिन्हें सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को भेजा गया है।
  • ये दिशानिर्देश भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करते हैं, जिसमें देखभाल, कौशल विकास, आजीविका सहायता और सामाजिक पुनर्समावेशन शामिल है।

स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना क्या है?

  • स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का समग्र पुनर्वास करना है।
  • यह योजना हाशिये पर स्थित व्यक्तियों की आजीविका एवं उद्यम के लिए सहायता (SMILE) नामक अम्ब्रेला योजना का एक उप-घटक है।
  • योजना के तहत भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की पहचान, बचाव, आश्रय, देखभाल, चिकित्सा सहायता, परामर्श और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
  • बच्चों के लिए उनकी आयु के अनुरूप देखभाल, शिक्षा, परामर्श और परिवार के साथ पुनर्समावेशन की सुविधा प्रदान की जाती है।
  • वयस्क लाभार्थियों को उनकी अभिरुचि, आयु, शारीरिक एवं मानसिक स्थिति तथा स्थानीय आजीविका के अवसरों के आधार पर व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें बढ़ईगीरी, सिलाई, पाक-कला, ई-रिक्शा संचालन आदि शामिल हैं।
  • लाभार्थियों को स्वयं सहायता समूहों के गठन में भी सहायता दी जाती है और उन्हें स्वरोजगार एवं आय सृजन गतिविधियों के लिए बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से जोड़ा जाता है।
  • योजना का लक्ष्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना, सम्मानजनक जीवन-स्थितियाँ सुनिश्चित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में एकीकृत करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
समग्र पुनर्वास दृष्टिकोण भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की देखभाल, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए व्यापक उपाय।
वित्तीय आवंटन योजना के तहत 45.59 करोड़ रुपये जारी किए गए, जो कार्यान्वयन और प्रशासनिक व्ययों में सहायता करते हैं।
लाभार्थी संख्या 2,824 बच्चों सहित कुल 10,446 व्यक्तियों का पुनर्वास किया गया, जो योजना की पहुँच को दर्शाता है।
व्यावसायिक प्रशिक्षण बढ़ईगीरी, सिलाई, स्वच्छता सेवाओं जैसे विविध क्षेत्रों में कौशल विकास, आजीविका के अवसर प्रदान करना।
सामुदायिक एकीकरण स्वयं सहायता समूहों के गठन और वित्तीय संस्थानों से जुड़ाव के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा।
मॉडल दिशानिर्देश सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मानवीय और अधिकार-आधारित पुनर्वास के लिए रूपरेखा।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में सहायता करता है, जिससे सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा मिलता है।
  • बच्चों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान, उन्हें शिक्षा और सुरक्षित वातावरण प्रदान करके उनके भविष्य को सुरक्षित करता है।
  • हाशिये पर स्थित समुदायों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।

मानवाधिकार दृष्टिकोण

  • भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों को मानवीय और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित करता है, जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों में भी रेखांकित किया गया है।
  • कौशल विकास और आजीविका सहायता के माध्यम से व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने का अवसर प्रदान करता है, जिससे उनकी गरिमा बहाल होती है।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सहित विभिन्न हितधारकों के परामर्श से तैयार किए गए दिशानिर्देश मानवाधिकारों के संरक्षण पर जोर देते हैं।

शासन और नीतिगत प्रभाव

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय के माध्यम से एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाकर भिक्षावृत्ति की समस्या का समाधान करता है।
  • योजना का कार्यान्वयन विभिन्न मंत्रालयों और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से होता है, जो बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
  • डेटा-आधारित प्रगति रिपोर्ट (जैसे पुनर्वासित व्यक्तियों की संख्या और जारी की गई धनराशि) नीति निर्माण और मूल्यांकन में पारदर्शिता लाती है।

चुनौतियाँ

1. पहचान और पहुँच

  • भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की सटीक पहचान और उन तक पहुँच बनाना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि वे अक्सर अस्थिर और छिपे हुए होते हैं।
  • इन व्यक्तियों में से कई मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं या नशे की लत से पीड़ित हो सकते हैं, जिससे उनका पुनर्वास जटिल हो जाता है।

2. सामाजिक कलंक और भेदभाव

  • पुनर्वास के बाद भी, समाज में भिक्षावृत्ति से जुड़े व्यक्तियों को अक्सर कलंक और भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका पूर्ण सामाजिक पुनर्समावेशन बाधित होता है।
  • समुदाय में स्वीकृति और रोजगार के अवसरों तक पहुँच सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

3. संसाधनों का प्रभावी उपयोग

  • योजना के लिए आवंटित धन का प्रभावी और कुशल उपयोग सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक लाभ पहुँच सके।
  • पुनर्वास केंद्रों की गुणवत्ता, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और सुविधाओं का रखरखाव भी एक चुनौती है।

4. दीर्घकालिक स्थिरता

  • पुनर्वासित व्यक्तियों के लिए दीर्घकालिक आजीविका और आवास की स्थिरता सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती है, ताकि वे फिर से भिक्षावृत्ति में न लौटें।
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण के बाद रोजगार के अवसरों की उपलब्धता और बाजार की मांगों के साथ प्रशिक्षण का तालमेल बिठाना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पुनर्वास के बाद की निगरानी पुनर्वासित व्यक्तियों की प्रगति की नियमित निगरानी और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करने की कमी।
मानसिक स्वास्थ्य सहायता भिक्षावृत्ति में संलग्न कई व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता की आवश्यकता होती है, जिसकी पर्याप्त उपलब्धता एक चुनौती है।
अंतर-राज्यीय समन्वय भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्ति अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते रहते हैं, जिससे उनके पुनर्वास के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है।
जागरूकता की कमी योजना के बारे में लाभार्थियों और आम जनता के बीच जागरूकता की कमी, जिससे योजना का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना (SMILE-Bhikshavriti Yojana)

आगे की राह

  • पुनर्वासित व्यक्तियों के लिए एक मजबूत अनुवर्ती तंत्र (follow-up mechanism) विकसित करना, जिसमें नियमित परामर्श और सहायता शामिल हो।
  • मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों और नशा मुक्ति विशेषज्ञों को पुनर्वास कार्यक्रमों में एकीकृत करना।
  • स्थानीय समुदायों और गैर-सरकारी संगठनों को पुनर्वास प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करना ताकि सामाजिक स्वीकृति और एकीकरण को बढ़ावा मिले।
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्थानीय बाजार की मांगों के अनुरूप अद्यतन करना और रोजगार मेलों का आयोजन करना।
  • भिक्षावृत्ति के मूल कारणों, जैसे गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक बहिष्कार को संबोधित करने के लिए व्यापक नीतियां बनाना।
  • योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए सार्वजनिक अभियान चलाना और हेल्पलाइन स्थापित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना · हाशिये पर स्थित व्यक्तियों का पुनर्वास · सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय · व्यावसायिक प्रशिक्षण · स्वरोजगार · राष्ट्रीय परामर्श समिति · आदर्श दिशानिर्देश · मानवीय पुनर्वास · अधिकार-आधारित दृष्टिकोण · सामाजिक पुनर्समावेशन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 21’: ‘गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार’}
  • {‘अनुच्छेद 38’: ‘राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देगा’}
  • {‘अनुच्छेद 39(क)’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार’}
  • {‘अनुच्छेद 41’: ‘कुछ दशाओं में काम, शिक्षा का अधिकार’}
  • {‘अनुच्छेद 46’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक, आर्थिक हितों को बढ़ावा’}

अवधारणा प्रवाह

भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की पहचान  →  देखभाल और आश्रय प्रदान करना  →  व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास  →  आजीविका सहायता और स्वरोजगार  →  सामाजिक पुनर्समावेशन और निगरानी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल वयस्क भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास पर केंद्रित है।
2. योजना के तहत बचाए गए बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान नहीं किया जाता है।
3. राष्ट्रीय परामर्श समिति में केवल केंद्र सरकार के मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है क्योंकि योजना बच्चों सहित भिक्षावृत्ति में संलग्न सभी व्यक्तियों के पुनर्वास पर केंद्रित है। कथन 2 सही है क्योंकि बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप देखभाल, शिक्षा, परामर्श और परिवार के साथ पुनर्समावेशन की सुविधा प्रदान की जाती है, उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण के अंतर्गत शामिल नहीं किया जाता। कथन 3 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय परामर्श समिति में केंद्र सरकार के मंत्रालयों के साथ-साथ राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना का नोडल मंत्रालय है?

  1. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
  2. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
  3. कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
  4. आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय

उत्तर: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय — स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) द्वारा कार्यान्वित की जाती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए ‘स्माइल-भिक्षावृत्ति’ योजना के उद्देश्यों और कार्यान्वयन तंत्र पर चर्चा कीजिए। यह योजना हाशिये पर स्थित समुदायों के सामाजिक पुनर्समावेशन में किस प्रकार सहायक है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘स्माइल-भिक्षावृत्ति’ योजना का संक्षिप्त परिचय, इसका पूरा नाम (हाशिये पर स्थित व्यक्तियों की आजीविका एवं उद्यम के लिए सहायता – भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के समग्र पुनर्वास) और नोडल मंत्रालय (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय) का उल्लेख।
2. योजना के मुख्य उद्देश्य: भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की देखभाल, पुनर्वास, कौशल विकास, आजीविका सहायता और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना। सम्मानजनक जीवन-स्थितियां सुनिश्चित करना।
3. कार्यान्वयन तंत्र और घटक:
क. वित्तीय प्रावधान: योजना के तहत जारी की गई राशि और उसके उपयोग का उल्लेख (जैसे 45.59 करोड़ रुपये जारी)।
ख. लक्षित लाभार्थी: बच्चों सहित भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का पुनर्वास (जैसे 10,446 व्यक्तियों का पुनर्वास, जिनमें 2,824 बच्चे शामिल)।
ग. बच्चों के लिए प्रावधान: आयु के अनुरूप देखभाल, शिक्षा, परामर्श और परिवार के साथ पुनर्समावेशन। व्यावसायिक प्रशिक्षण से छूट।
घ. वयस्कों के लिए प्रावधान: अभिरुचि, आयु, शारीरिक/मानसिक स्थिति और स्थानीय आजीविका के अवसरों के आधार पर व्यावसायिक प्रशिक्षण (जैसे बढ़ईगीरी, सिलाई, पाक-कला, ई-रिक्शा चलाना)।
ङ. स्वरोजगार और आय सृजन: स्वयं सहायता समूहों का गठन, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से वित्तीय सहायता प्राप्त करने में मदद। समूह आधारित उद्यमों के उदाहरण (टिफिन स्टॉल, सब्जी के ठेले)।
च. आदर्श दिशानिर्देश: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों (एम.एस. पैटर बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार) के अनुपालन में राष्ट्रीय परामर्श समिति द्वारा तैयार किए गए दिशानिर्देशों का उल्लेख। समिति की संरचना।
4. सामाजिक पुनर्समावेशन में सहायता:
क. गरिमापूर्ण जीवन: भिक्षावृत्ति से मुक्ति दिलाकर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर।
ख. आर्थिक आत्मनिर्भरता: कौशल विकास और स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना।
ग. शिक्षा और परामर्श: बच्चों को शिक्षा और वयस्कों को परामर्श के माध्यम से मुख्यधारा में लाना।
घ. संस्थागत सहायता: देखभाल गृहों और पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से सुरक्षित वातावरण प्रदान करना।
ङ. अधिकार-आधारित दृष्टिकोण: मानवीय और अधिकार-आधारित पुनर्वास सुनिश्चित करना।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह (संक्षिप्त): योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियाँ (जैसे जागरूकता की कमी, सामाजिक कलंक) और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव।
6. निष्कर्ष: योजना के महत्व और हाशिये पर स्थित व्यक्तियों के उत्थान में इसकी भूमिका पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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