स्माइल-योजना: भिक्षावृत्ति में लगे 10,446 लोगों का पुनर्वास, सरकार ने किया सुदृढ़

स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना के अंतर्गत भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास ढांचे को सरकार ने सुदृढ़ किया — concept mind map

स्माइल-योजना: भिक्षावृत्ति में लगे 10,446 लोगों का पुनर्वास, सरकार ने किया सुदृढ़

Map of Tamil Nadu, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Maharashtra, Assa highlighted on the map of India — स्माइल योजना…
मानचित्र व माइंड-मैप: स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना: राज्यवार पुनर्वास आँकड़े

✎ स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका लक्ष्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन सुनिश्चित करना…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, कमजोर वर्गों का उत्थान  |  GS Paper I — भारतीय समाज, गरीबी और विकासात्मक मुद्दे
  • Prelims: स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भिक्षावृत्ति, पुनर्वास, कौशल विकास, स्वरोजगार, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश, राष्ट्रीय परामर्श समिति
  • Essay: भारत में सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ और कल्याणकारी राज्य की भूमिका, हाशिये पर स्थित समुदायों का सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका लक्ष्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन सुनिश्चित करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने हाशिये पर स्थित व्यक्तियों की आजीविका एवं उद्यम के लिए सहायता (स्माइल) – भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के समग्र पुनर्वास (स्माइल-भिक्षावृत्ति) योजना के माध्यम से भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की देखभाल, पुनर्वास तथा सामाजिक पुनर्समावेशन को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक उपाय किए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, योजना के आरंभ से अब तक 45.59 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं और 2,824 बच्चों सहित कुल 10,446 व्यक्तियों का पुनर्वास किया गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में भिक्षावृत्ति एक जटिल सामाजिक-आर्थिक समस्या है, जिसमें गरीबी, बेघरता, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे और सामाजिक बहिष्कार जैसे कारक शामिल हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने एम.एस. पैटर बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (सिविल अपील संख्या 12216/2025) मामले में भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के मानवीय और अधिकार-आधारित पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे।
  • इन निर्देशों के अनुपालन में, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राष्ट्रीय परामर्श समिति तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों/आश्रय गृहों के लिए आदर्श दिशानिर्देश तैयार किए हैं।
  • ये आदर्श दिशानिर्देश 13 अप्रैल 2026 को सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को आवश्यक अनुपालन एवं प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्रेषित किए गए थे।

स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना क्या है?

  • स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास करना है।
  • यह योजना हाशिये पर स्थित व्यक्तियों की आजीविका एवं उद्यम के लिए सहायता (SMILE – Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) नामक अम्ब्रेला योजना का एक उप-घटक है।
  • योजना के तहत बचाए गए बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप देखभाल, शिक्षा, परामर्श तथा परिवार के साथ पुनर्समावेशन की सुविधा प्रदान की जाती है।
  • पात्र लाभार्थियों को उनकी अभिरुचि, आयु, शारीरिक एवं मानसिक स्थिति तथा स्थानीय आजीविका के अवसरों के आधार पर व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसमें बढ़ईगीरी, सिलाई, गृह व्यवस्था, स्वच्छता सेवाएं, केश कर्तन, सुरक्षा सेवाएं, पाक-कला, बागवानी, ई-रिक्शा चलाना/संचालन आदि शामिल हैं।
  • लाभार्थियों को सामुदायिक/समूह आधारित स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) के गठन में भी सहयोग प्रदान किया जाता है।
  • स्वरोजगार एवं आय सृजन गतिविधियां शुरू करने के लिए लाभार्थियों को बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से वित्तीय सहायता प्राप्त कराने हेतु जोड़ा जाता है।
  • योजना का उद्देश्य देखभाल, पुनर्वास, कौशल विकास, आजीविका सहायता तथा सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना है।
  • इसका लक्ष्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों/आश्रय गृहों का प्रभावी पर्यवेक्षण तथा सम्मानजनक जीवन-स्थितियां सुनिश्चित करना भी है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
समग्र पुनर्वास दृष्टिकोण भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की देखभाल, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है।
वित्तीय आवंटन योजना के कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त धनराशि जारी की गई है, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है।
लक्ष्य समूह बच्चों सहित भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के विविध समूह को लक्षित करता है, उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करता है।
व्यावसायिक प्रशिक्षण व्यक्तियों को उनकी रुचि और स्थानीय अवसरों के आधार पर कौशल प्रदान करता है, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है।
सामुदायिक एकीकरण स्वयं सहायता समूहों के गठन और वित्तीय संस्थानों से जुड़ाव के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक एकीकरण को प्रोत्साहित करता है।
आदर्श दिशानिर्देश सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मानवाधिकार-आधारित पुनर्वास के लिए एक मानकीकृत रूपरेखा स्थापित करता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह योजना भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के मानवाधिकारों की रक्षा करती है और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है।
  • यह समाज के सबसे हाशिए पर पड़े वर्गों में से एक के सामाजिक पुनर्समावेशन (Social Reintegration) को बढ़ावा देती है, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ती है।
  • बच्चों को भिक्षावृत्ति से बचाकर उन्हें शिक्षा और सुरक्षित वातावरण प्रदान करती है, जिससे उनके भविष्य की नींव मजबूत होती है।

आर्थिक महत्व

  • व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास के माध्यम से, यह योजना लाभार्थियों को उत्पादक नागरिक बनने में सक्षम बनाती है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उनका योगदान बढ़ता है।
  • स्वरोजगार और आय सृजन गतिविधियों को बढ़ावा देकर, यह व्यक्तियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाती है और गरीबी को कम करने में मदद करती है।
  • सामुदायिक/समूह आधारित स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) का गठन छोटे पैमाने के उद्यमों को बढ़ावा देता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

शासन और नीति महत्व

  • यह योजना सरकार की सामाजिक न्याय और अधिकारिता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
  • सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में आदर्श दिशानिर्देशों का निर्माण सुशासन और मानवाधिकारों के प्रति जवाबदेही को मजबूत करता है।
  • विभिन्न मंत्रालयों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय एक समग्र और बहु-आयामी नीति दृष्टिकोण का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

चुनौतियाँ

1. पहचान और संपर्क

  • भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की पहचान करना और उन तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि वे अक्सर अस्थिर और छिपे हुए होते हैं।
  • इन व्यक्तियों में विश्वास स्थापित करना और उन्हें पुनर्वास कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए प्रेरित करना कठिन हो सकता है।

2. संस्थागत क्षमता

  • पुनर्वास गृहों और देखभाल केंद्रों की अपर्याप्त संख्या या खराब गुणवत्ता प्रभावी पुनर्वास में बाधा डाल सकती है।
  • कर्मचारियों के प्रशिक्षण और संवेदीकरण की कमी लाभार्थियों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में समस्याएँ पैदा कर सकती है।

3. सामाजिक कलंक और एकीकरण

  • भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों को अक्सर समाज में कलंक और भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका पुनर्समावेशन मुश्किल हो जाता है।
  • प्रशिक्षण के बाद भी उन्हें रोजगार के अवसर खोजने में कठिनाई हो सकती है, जिससे वे फिर से भिक्षावृत्ति की ओर लौट सकते हैं।

4. वित्तीय स्थिरता और निगरानी

  • योजना के लिए निरंतर और पर्याप्त वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, विशेषकर दीर्घकालिक पुनर्वास प्रयासों के लिए।
  • धन के उचित उपयोग और लाभार्थियों तक लाभ पहुंचने की प्रभावी निगरानी एक चुनौती बनी हुई है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भिक्षावृत्ति के मूल कारण गरीबी, बेरोजगारी, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, नशाखोरी और पारिवारिक विघटन जैसे अंतर्निहित कारणों को संबोधित करना।
डेटा की कमी भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की सटीक संख्या और जनसांख्यिकी पर विश्वसनीय डेटा की अनुपलब्धता प्रभावी नीति निर्माण में बाधा डालती है।
अंतर-राज्यीय समन्वय भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की आवाजाही को देखते हुए, विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय की कमी पुनर्वास प्रयासों को बाधित कर सकती है।
कानूनी ढाँचा भिक्षावृत्ति विरोधी कानूनों की प्रभावशीलता और मानवाधिकारों के साथ उनके सामंजस्य पर बहस।
दीर्घकालिक स्थिरता पुनर्वासित व्यक्तियों के लिए दीर्घकालिक आवास, आजीविका और सामाजिक समर्थन सुनिश्चित करना।
बच्चों का संरक्षण भिक्षावृत्ति में संलग्न बच्चों को तस्करी और शोषण से बचाना तथा उनकी शिक्षा और विकास सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना (SMILE-Bhikshavriti Yojana)

आगे की राह

  • भिक्षावृत्ति के मूल कारणों जैसे गरीबी, बेरोजगारी, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और नशाखोरी को संबोधित करने के लिए व्यापक नीतियां तैयार करना।
  • भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की पहचान और संपर्क के लिए समुदाय-आधारित दृष्टिकोणों को मजबूत करना तथा गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी बढ़ाना।
  • पुनर्वास गृहों की क्षमता और गुणवत्ता में सुधार करना, साथ ही कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • पुनर्वासित व्यक्तियों के लिए सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देने हेतु जागरूकता अभियान चलाना और समाज में उनके प्रति कलंक को कम करना।
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्थानीय बाजार की मांगों के अनुरूप बनाना और लाभार्थियों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करना।
  • योजना के कार्यान्वयन की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली स्थापित करना ताकि धन के उचित उपयोग और परिणामों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
  • भिक्षावृत्ति में संलग्न बच्चों के लिए विशेष देखभाल, शिक्षा और संरक्षण सेवाओं को प्राथमिकता देना, जिससे उन्हें सुरक्षित बचपन मिल सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना · हाशिये पर स्थित व्यक्तियों का पुनर्वास · सामाजिक पुनर्समावेशन · कौशल विकास · आजीविका सहायता · मानवीय पुनर्वास · सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश · राष्ट्रीय परामर्श समिति

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि करेगा’}

अवधारणा प्रवाह

भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्ति  →  स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना का कार्यान्वयन  →  देखभाल, पुनर्वास और कौशल प्रशिक्षण  →  आजीविका सहायता और वित्तीय जुड़ाव  →  सामाजिक पुनर्समावेशन और सम्मानजनक जीवन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल वयस्क भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास पर केंद्रित है।
2. इस योजना के तहत बचाए गए बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान नहीं किया जाता है।
3. योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को स्वरोजगार हेतु स्वयं सहायता समूहों के गठन में सहायता दी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि यह योजना बच्चों सहित भिक्षावृत्ति में संलग्न सभी व्यक्तियों के पुनर्वास पर केंद्रित है। कथन 2 सही है क्योंकि बचाए गए बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप देखभाल, शिक्षा, परामर्श और परिवार के साथ पुनर्समावेशन की सुविधा दी जाती है, व्यावसायिक प्रशिक्षण नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि लाभार्थियों को स्वरोजगार और आय सृजन गतिविधियों के लिए स्वयं सहायता समूहों के गठन में सहायता दी जाती है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना का कार्यान्वयन करता है?

  1. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
  2. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
  3. कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
  4. आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय

उत्तर: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय — स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना के उद्देश्यों और प्रमुख प्रावधानों का विस्तार से वर्णन कीजिए। भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के मानवीय और अधिकार-आधारित पुनर्वास को सुनिश्चित करने में यह योजना कितनी प्रभावी सिद्ध हुई है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना का संक्षिप्त परिचय, इसका पूरा नाम (हाशिये पर स्थित व्यक्तियों की आजीविका एवं उद्यम के लिए सहायता – भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के समग्र पुनर्वास) और किस मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है, इसका उल्लेख करें।
2. **उद्देश्य:** योजना के मुख्य उद्देश्यों को रेखांकित करें, जैसे भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की देखभाल, पुनर्वास, सामाजिक पुनर्समावेशन, कौशल विकास और आजीविका सहायता।
3. **प्रमुख प्रावधान:** योजना के अंतर्गत किए गए विभिन्न उपायों का विस्तृत वर्णन करें:
* बच्चों और वयस्कों के लिए अलग-अलग पुनर्वास दृष्टिकोण (बच्चों के लिए शिक्षा, परामर्श; वयस्कों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण)।
* प्रदान किए जाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रकार (बढ़ईगीरी, सिलाई, स्वच्छता सेवाएं, ई-रिक्शा आदि)।
* स्वरोजगार और आय सृजन गतिविधियों के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन और वित्तीय सहायता से जुड़ाव।
* आश्रय गृहों का पर्यवेक्षण और सम्मानजनक जीवन-स्थितियां सुनिश्चित करना।
* आदर्श दिशानिर्देशों का विकास और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को प्रेषण।
* राष्ट्रीय परामर्श समिति की भूमिका।
4. **प्रभावशीलता का मूल्यांकन:** योजना की अब तक की सफलता का विश्लेषण करें:
* जारी की गई धनराशि (45.59 करोड़ रुपये) और पुनर्वासित व्यक्तियों की संख्या (10,446) जैसे आंकड़ों का उल्लेख करें।
* सर्वाधिक लाभार्थियों वाले राज्यों (तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश) का जिक्र करें।
* सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों (एम.एस. पैटर बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार) के अनुपालन में आदर्श दिशानिर्देशों के महत्व पर प्रकाश डालें।
* मानवीय और अधिकार-आधारित पुनर्वास की दिशा में योजना के योगदान का विश्लेषण करें।
* चुनौतियों और आगे की राह पर संक्षिप्त टिप्पणी (यदि संभव हो, हालांकि प्रश्न में सीधा नहीं पूछा गया है, फिर भी एक संतुलित उत्तर के लिए आवश्यक)।
5. **निष्कर्ष:** योजना के महत्व और हाशिये पर स्थित व्यक्तियों के सशक्तिकरण में इसकी भूमिका को संक्षेप में दोहराएं।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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