राजस्थान में समान नागरिक संहिता विधेयक: जानिए क्या है पूरा प्रावधान और आदिवासी छूट

UCC: राजस्थान में समान नागरिक संहिता विधेयक के ड्राफ्ट को दी मंजूरी; विधानसभा में होगा पेश; आदिवासियों को छूट — concept mind map

राजस्थान में समान नागरिक संहिता विधेयक: जानिए क्या है पूरा प्रावधान और आदिवासी छूट

Map of Rajasthan highlighted on the map of India — राजस्थान समान नागरिक संहिता विधेयक 2026
मानचित्र व माइंड-मैप: राजस्थान में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक की मंजूरी

✎ समान नागरिक संहिता (UCC) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में वर्णित एक अवधारणा है, जिसका उद्देश्य भारत के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून स्थापित करना है, जो लैंगिक न्याय और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय  |  GS Paper I — भारतीय समाज
  • Prelims: समान नागरिक संहिता (UCC), अनुच्छेद 44, राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP), व्यक्तिगत कानून, लिव-इन रिलेशनशिप पंजीकरण, अनुसूचित जनजातियाँ (STs)
  • Essay: भारत में विविधता और एकरूपता: समान नागरिक संहिता की भूमिका, न्यायपालिका, विधायिका और व्यक्तिगत कानून: संतुलन की चुनौती

त्वरित पुनरावृत्ति: समान नागरिक संहिता (UCC) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में वर्णित एक अवधारणा है, जिसका उद्देश्य भारत के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून स्थापित करना है, जो लैंगिक न्याय और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है।

पूर्व में पूछा गया: Asked in UPSC Prelims 2020

यह खबर चर्चा में क्यों?

राजस्थान मंत्रिमंडल ने हाल ही में ‘द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल-2026’ के मसौदे को मंजूरी दी है, जिसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। इस विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था का प्रस्ताव है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को इसके दायरे से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है।

पृष्ठभूमि

  • समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy – DPSP) के तहत किया गया है, जो राज्य को भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने का निर्देश देता है।
  • वर्तमान में, भारत में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने वाले अलग-अलग व्यक्तिगत कानून (Personal Laws) हैं।
  • गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867 के रूप में एक समान नागरिक संहिता लागू है, जो सभी धार्मिक समुदायों पर लागू होती है।
  • उत्तराखंड विधानसभा ने हाल ही में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया है, जिसमें लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है और अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है।
  • उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने विभिन्न निर्णयों में समान नागरिक संहिता को लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया है, जिसमें शाह बानो मामला (1985) और सरला मुद्गल मामला (1995) प्रमुख हैं।
  • समान नागरिक संहिता का उद्देश्य लैंगिक न्याय, समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके कार्यान्वयन को लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के कारण लंबे समय से बहस चल रही है।

समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है?

  • समान नागरिक संहिता का अर्थ है भारत के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने वाला एक सामान्य कानून।
  • यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित है, जो राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों का हिस्सा है। ये सिद्धांत प्रकृति में गैर-न्यायसंगत (non-justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें न्यायालयों द्वारा लागू नहीं किया जा सकता है, लेकिन वे शासन के लिए मौलिक हैं।
  • वर्तमान में, विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए उनके व्यक्तिगत कानून हैं, जैसे हिंदू विवाह अधिनियम, मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरिया) अनुप्रयोग अधिनियम, ईसाई विवाह अधिनियम आदि।
  • UCC का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद विसंगतियों को दूर करके लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है।
  • यह राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने में भी सहायक माना जाता है, क्योंकि यह विभिन्न समुदायों के बीच कानूनी एकरूपता स्थापित करेगा।
  • राजस्थान विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों में पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है, जो ऐसे संबंधों को कानूनी मान्यता और सुरक्षा प्रदान करने का एक प्रयास है।
  • अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान अक्सर उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्रथाओं को संरक्षित करने की आवश्यकता से प्रेरित होता है।
  • UCC का कार्यान्वयन भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में एक जटिल मुद्दा है, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और सांस्कृतिक अधिकारों (अनुच्छेद 29) के साथ संतुलन बनाना आवश्यक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप इन सभी मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था का प्रस्ताव।
विवाह पंजीकरण नए विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप शुरुआत और समाप्ति की लिखित सूचना या पंजीकरण का प्रावधान।
आदिवासियों को छूट अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) पर यह कानून लागू नहीं होगा।
वृक्ष संरक्षण विधेयक खेजड़ी, रोहिड़ा सहित 29 महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण का प्रावधान।
वृक्ष कटाई पर दंड बिना अनुमति पेड़ काटने पर एक साल तक की सजा या एक लाख रुपये तक जुर्माना।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के तहत महिलाओं के अधिकारों में असमानताओं को दूर करने में सहायक हो सकती है।
  • यह समाज में एकरूपता और राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ़ कर सकती है, क्योंकि सभी नागरिकों पर समान कानून लागू होंगे।

प्रशासनिक महत्व

  • विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के जटिल जाल को सरल बनाने से न्यायिक प्रक्रिया में दक्षता आ सकती है और मुकदमों का निपटारा तेजी से हो सकता है।
  • यह कानून के शासन को मजबूत करेगा और सभी नागरिकों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करेगा, भले ही वे किसी भी धर्म या समुदाय से संबंधित हों।

पर्यावरणीय महत्व

  • वृक्ष संरक्षण विधेयक राज्य की जैव विविधता (Biodiversity) और पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • यह अवैध कटाई को रोकने और वनीकरण (Afforestation) को प्रोत्साहित करने में मदद करेगा, जिससे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम किया जा सकेगा।

चुनौतियाँ

1. धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता

  • भारत में विभिन्न धर्मों और समुदायों के अपने व्यक्तिगत कानून हैं, जो उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। UCC को लागू करने से इन पहचानों पर अतिक्रमण का आरोप लग सकता है।
  • कई समुदाय इसे अपनी धार्मिक स्वतंत्रता (Religious Freedom) पर हमले के रूप में देख सकते हैं, जिससे सामाजिक अशांति और विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।

2. आदिवासी पहचान का संरक्षण

  • आदिवासी समुदायों को UCC से छूट देने का प्रावधान उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक प्रथाओं और परंपराओं को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • हालांकि, यह छूट ‘समानता’ के सिद्धांत पर सवाल उठा सकती है और गैर-आदिवासी समुदायों द्वारा भेदभाव के आरोप लग सकते हैं।

3. कानूनी और कार्यान्वयन संबंधी जटिलताएँ

  • विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों को एक समान संहिता में एकीकृत करना एक जटिल कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें गहन शोध और परामर्श की आवश्यकता होगी।
  • कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए व्यापक जागरूकता और प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।

4. संघवाद पर प्रभाव

  • चूंकि व्यक्तिगत कानून समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, राज्य सरकारों को इस पर कानून बनाने का अधिकार है। हालांकि, केंद्र सरकार भी इस पर कानून बना सकती है।
  • राज्यों द्वारा UCC लागू करने से केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों में तनाव आ सकता है, खासकर यदि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग प्रावधान अपनाए जाते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
धार्मिक स्वतंत्रता UCC को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है।
सांस्कृतिक विविधता भारत की विविध सांस्कृतिक प्रथाओं और परंपराओं पर एकरूपता थोपने का आरोप।
आदिवासी छूट समानता के सिद्धांत पर सवाल और अन्य समुदायों द्वारा भेदभाव का आरोप।
कानूनी एकीकरण विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों को एक समान संहिता में एकीकृत करने की जटिलता।
सामाजिक स्वीकृति विभिन्न समुदायों से व्यापक स्वीकृति प्राप्त करने में कठिनाई।
राज्यों के अधिकार समवर्ती सूची के विषय पर राज्य द्वारा कानून बनाने से केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रभाव।

आगे की राह

  • सभी हितधारकों, विशेषकर धार्मिक और आदिवासी समुदायों के साथ व्यापक परामर्श और संवाद स्थापित किया जाए।
  • UCC के प्रावधानों को इस तरह से तैयार किया जाए जो धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करें, जबकि लैंगिक समानता और न्याय सुनिश्चित करें।
  • कानून के कार्यान्वयन से पहले व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं ताकि इसके उद्देश्यों और लाभों को स्पष्ट किया जा सके।
  • आदिवासी समुदायों की विशिष्ट प्रथाओं और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए, उनके लिए उचित छूट या विशेष प्रावधानों पर विचार किया जाए।
  • UCC को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर विचार किया जा सकता है, जिससे समाज को परिवर्तन के अनुकूल होने का समय मिल सके।
  • वृक्ष संरक्षण जैसे कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए स्थानीय निकायों और समुदायों को सशक्त किया जाए।
  • न्यायिक प्रणाली को नए कानूनों को समझने और लागू करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान किए जाएं।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

समान नागरिक संहिता · अनुच्छेद 44 · राज्य के नीति निदेशक तत्व · व्यक्तिगत कानून · धर्मनिरपेक्षता · आदिवासी छूट · संघवाद · न्यायिक समीक्षा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 44’, ‘note’: ‘समान नागरिक संहिता का प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 25’, ‘note’: ‘धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 26’, ‘note’: ‘धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 15’, ‘note’: ‘धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव का निषेध’}

अवधारणा प्रवाह

राज्य कैबिनेट द्वारा UCC विधेयक को मंजूरी  →  विधेयक का विधानसभा में पेश होना  →  विवाह, तलाक आदि पर समान कानून का प्रस्ताव  →  आदिवासी समुदायों को कानून से छूट  →  सामाजिक और कानूनी एकीकरण की चुनौतियाँ  →  लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समान नागरिक संहिता (UCC) का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है।
2. अनुच्छेद 44 राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का हिस्सा है।
3. भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने का उद्देश्य विभिन्न धार्मिक समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों को एकरूप करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। समान नागरिक संहिता का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 44 में है। कथन 2 सही है। अनुच्छेद 44 संविधान के भाग IV में राज्य के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत आता है। कथन 3 सही है। समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून बनाना है, जिससे विभिन्न धार्मिक समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता लाई जा सके।

Q2. समान नागरिक संहिता (UCC) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. यह भारतीय संविधान के भाग IV में शामिल है।
  2. यह विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों को नियंत्रित करता है।
  3. भारत में गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ समान नागरिक संहिता पहले से लागू है।
  4. यह कानून भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है।

उत्तर: यह कानून भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है। — विकल्प D सही नहीं है। समान नागरिक संहिता भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के अंतर्गत नहीं आती है, बल्कि यह राज्य के नीति निदेशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है। अन्य सभी कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) क्या है? इसके कार्यान्वयन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों और संभावित लाभों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** समान नागरिक संहिता (UCC) को परिभाषित करें और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 का संदर्भ दें।
2. **UCC का अर्थ:** स्पष्ट करें कि UCC का क्या अर्थ है और यह किन व्यक्तिगत मामलों (विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेना आदि) को कवर करेगा।
3. **कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियाँ:**
* **धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता:** भारत की बहुलतावादी प्रकृति और विभिन्न समुदायों की आपत्तियों का उल्लेख करें।
* **आदिवासी समुदायों की विशिष्टता:** आदिवासी समुदायों को छूट दिए जाने के प्रावधान और इसके निहितार्थों पर चर्चा करें।
* **संघवाद का मुद्दा:** राज्यों और केंद्र के बीच संभावित टकराव।
* **राजनीतिक इच्छाशक्ति और आम सहमति का अभाव:** विभिन्न राजनीतिक दलों के दृष्टिकोण।
* **कानूनी जटिलताएँ:** विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों को एकीकृत करने में आने वाली कानूनी और प्रक्रियात्मक चुनौतियाँ।
4. **संभावित लाभ:**
* **लैंगिक न्याय और समानता:** महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना।
* **राष्ट्रीय एकता और अखंडता:** ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की अवधारणा।
* **न्यायपालिका पर बोझ कम करना:** व्यक्तिगत कानूनों की जटिलता से उत्पन्न होने वाले मामलों को सरल बनाना।
* **धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा:** कानून के समक्ष सभी नागरिकों की समानता।
5. **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें, जिसमें चुनौतियों का समाधान करते हुए UCC के महत्व को रेखांकित किया जाए। विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श और चरणबद्ध कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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