14 Aug विज्ञान टेक 2026: सरकारी पहल जो बदल सकती है भारत का भविष्य
Department of BiotechnologyScience Tech 2026BRICS-National Institute of ImmunoNational Technology DayTechnology transferSTIP 2020✎ विज्ञान टेक 2026 पहल भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक 'संपूर्ण सरकारी' दृष्टिकोण पर आधारित एक राष्ट्रीय मंच है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन, वाणिज्यीकरण और अनुसंधान एवं…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास। | GS Paper III — अर्थव्यवस्था: आर्थिक विकास और विकास के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका।
- Prelims: विज्ञान टेक 2026 पहल, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण, टेक-संग्रह, वाणिज्यीकरण और लाइसेंसिंग
- Essay: विकसित भारत 2047 के निर्माण में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की भूमिका।, सरकारी नीतियों और पहलों के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना।
त्वरित पुनरावृत्ति: विज्ञान टेक 2026 पहल भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक ‘संपूर्ण सरकारी’ दृष्टिकोण पर आधारित एक राष्ट्रीय मंच है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन, वाणिज्यीकरण और अनुसंधान एवं औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने हाल ही में राज्यसभा में ‘विज्ञान टेक 2026’ पहल के बारे में जानकारी दी। यह पहल जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, 11 मई 2026 को आयोजित की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (Science, Technology and Innovation) के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देना और विभिन्न मंत्रालयों तथा विभागों की तकनीकी क्षमताओं को एक मंच पर लाना था। इस पहल में 100 से अधिक स्वदेशी विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया और ‘टेक-संग्रह’ का विमोचन भी किया गया, जिसमें लगभग 300 प्रौद्योगिकियों का संकलन है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को देश के आर्थिक विकास और सामाजिक उत्थान का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानती है।
- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) प्रतिवर्ष 11 मई को मनाया जाता है, जो 1998 में पोखरण-II परमाणु परीक्षणों की सफलता और भारत की वैज्ञानिक क्षमता को याद दिलाता है।
- सरकार ‘संपूर्ण सरकारी’ (Whole-of-Government) दृष्टिकोण पर बल देती है, जिसका अर्थ है कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक साथ मिलकर राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए काम करना चाहिए।
- अनुसंधान एवं विकास (Research & Development) में निवेश और नवाचार को बढ़ावा देना भारत को ‘विकसित भारत 2047’ बनाने के लक्ष्य का एक अभिन्न अंग है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और वाणिज्यीकरण (Commercialization) प्रयोगशालाओं में विकसित प्रौद्योगिकियों को आम जनता तक पहुँचाने और उद्योगों के लिए उपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- भारत का लक्ष्य विभिन्न क्षेत्रों जैसे अंतरिक्ष, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और गहरे समुद्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है, जिसके लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास आवश्यक है।
विज्ञान टेक 2026 पहल क्या है?
- विज्ञान टेक 2026 जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।
- इसका आयोजन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, 11 मई 2026 को बीआरआईसी-राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (BRIC-NII), नई दिल्ली में किया गया था।
- इस पहल में भारत सरकार के 14 मंत्रालयों और विभागों की तकनीकी क्षमताओं को एक साथ लाया गया, जो अपने स्वायत्त संस्थानों और प्रयोगशालाओं के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास में लगे हुए हैं।
- प्रदर्शनी में 100 से अधिक स्वदेशी विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें अंतरिक्ष, जलवायु, जैव-औषधीय, हरित रसायन, इलेक्ट्रॉनिकी और गहरे समुद्र जैसी प्रमुख प्रौद्योगिकियां शामिल थीं।
- ‘टेक-संग्रह’ नामक एक संकलन का भी विमोचन किया गया, जिसमें प्रतिभागी संस्थानों द्वारा विकसित लगभग 300 प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, जिनमें से कई का पहले ही वाणिज्यीकरण या लाइसेंसिंग हो चुकी है।
- इस आयोजन में उद्योग जगत को कई प्रौद्योगिकी हस्तांतरण/प्रौद्योगिकियों के लाइसेंसिंग हुए, जिससे प्रयोगशाला अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटने में मदद मिली।
- इस पहल ने विभिन्न मंत्रालयों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, युवा शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों और स्टार्टअप संस्थापकों को एक साथ लाकर नवाचार परितंत्र (Innovation Ecosystem) में संबंधों को मजबूत किया।
- यह पहल संस्थागत बाधाओं को तोड़ने और 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| विज्ञान टेक 2026 पहल | विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (Science, Technology and Innovation) के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाली अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय पहल। |
| बहु-मंत्रालयी भागीदारी | भारत सरकार के 14 मंत्रालयों और विभागों की तकनीकी क्षमताओं को एक साथ लाना, जो अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) में लगे हुए हैं। |
| स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन | 100 से अधिक स्वदेशी रूप से विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है। |
| टेक-संग्रह का विमोचन | प्रतिभागी संस्थानों द्वारा विकसित लगभग 300 प्रौद्योगिकियों का संकलन, जिनमें से कई का पहले ही व्यावसायीकरण हो चुका है। |
| उद्योग के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण | कई प्रौद्योगिकियों का उद्योग जगत को हस्तांतरण/लाइसेंसिंग, जो प्रयोगशाला से बाजार तक की खाई को पाटता है। |
| प्रमुख प्रौद्योगिकी क्षेत्र | अंतरिक्ष, जलवायु, जैव-औषधीय, हरित रसायन, इलेक्ट्रॉनिकी, गहरे समुद्र आदि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन। |
महत्व
आर्थिक संवृद्धि
- स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण और लाइसेंसिंग से नए उद्योगों का विकास होगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
- नवाचार परितंत्र (Innovation Ecosystem) को मजबूत करने से स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए अवसर पैदा होंगे, जो रोजगार सृजन में सहायक होंगे।
सामरिक महत्व
- रक्षा, अंतरिक्ष और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास भारत की सामरिक स्वायत्तता को बढ़ाएगा।
- गहन तकनीकी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने से भारत वैश्विक प्रौद्योगिकी परिदृश्य में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरेगा।
सामाजिक प्रभाव
- कृषि-खाद्य, जैव-औषधीय और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में प्रगति से आम नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- जलवायु और हरित रसायन प्रौद्योगिकियां सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को प्राप्त करने में मदद करेंगी।
शासन और नीति
- यह पहल ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole of Government) दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है।
- नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत को एक साथ लाने से बेहतर नीति निर्माण और कार्यान्वयन में मदद मिलेगी।
चुनौतियाँ
1. अनुसंधान से व्यावसायीकरण की खाई
- यद्यपि कई प्रौद्योगिकियां विकसित की गई हैं, लेकिन प्रयोगशाला से बाजार तक उनके सफल हस्तांतरण और व्यावसायीकरण में अभी भी चुनौतियाँ हैं।
- उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान को ढालना और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए आवश्यक निवेश आकर्षित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ
2. मानव संसाधन और कौशल विकास
- उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास और तैनाती के लिए कुशल कार्यबल की आवश्यकता है।
- युवा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को आकर्षित करने तथा उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने में चुनौतियाँ हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास
3. वित्तपोषण और निवेश
- गहन तकनीकी अनुसंधान और विकास में पर्याप्त वित्तीय निवेश की आवश्यकता होती है।
- निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित करना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ावा देना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में निवेश
4. संस्थागत बाधाएँ और समन्वय
- विभिन्न मंत्रालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- प्रशासनिक और नियामक बाधाएँ नवाचार की गति को धीमा कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की जटिलता | विकसित प्रौद्योगिकियों को प्रयोगशाला से उद्योग तक सफलतापूर्वक ले जाने में प्रक्रियात्मक और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) संबंधी चुनौतियाँ। |
| बाजार स्वीकृति और स्केलिंग | नई प्रौद्योगिकियों के लिए बाजार स्वीकृति प्राप्त करना और उन्हें बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार करना। |
| अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा | वैश्विक स्तर पर तीव्र तकनीकी प्रतिस्पर्धा का सामना करना और अपनी प्रौद्योगिकियों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना। |
| बुनियादी ढाँचा और सुविधाएँ | उच्च-स्तरीय अनुसंधान और विकास के लिए आवश्यक अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचे और सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
आगे की राह
- अनुसंधान और विकास के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से निवेश को बढ़ावा देना, विशेष रूप से गहन तकनीकी क्षेत्रों में।
- उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना ताकि अनुसंधान को बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा सके।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट नीतियाँ बनाना।
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) शिक्षा में सुधार करके कुशल कार्यबल का विकास करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देना ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं और उन्नत प्रौद्योगिकियों का आदान-प्रदान किया जा सके।
- नवाचार के लिए एक अनुकूल नियामक और नीतिगत वातावरण बनाना, जिसमें स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहन मिले।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विज्ञान टेक 2026 पहल · राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस · संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण · अनुसंधान एवं विकास · प्रौद्योगिकी हस्तांतरण · नवाचार परितंत्र · विकसित भारत 2047 · जैव प्रौद्योगिकी विभाग · वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद · आत्मनिर्भर भारत
अवधारणा प्रवाह
सरकार का समग्र दृष्टिकोण → विज्ञान टेक 2026 पहल का आयोजन → बहु-मंत्रालयी सहयोग और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन → प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायीकरण → आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक विकास → विकसित भारत 2047 की दिशा में प्रगति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. विज्ञान टेक 2026 पहल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह पहल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, 11 मई 2026 को शुरू की गई थी।
2. इसका उद्देश्य केवल जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना था।
3. इस पहल में भारत सरकार के 14 मंत्रालयों और विभागों की तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि पहल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, 11 मई 2026 को शुरू की गई थी। कथन 2 गलत है क्योंकि इसका उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था, न कि केवल जैव प्रौद्योगिकी। कथन 3 सही है क्योंकि इसमें 14 मंत्रालयों और विभागों की तकनीकी क्षमताओं को एक साथ लाया गया था। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय/विभाग विज्ञान टेक 2026 पहल में प्रदर्शित प्रौद्योगिकियों और उत्पादों से संबंधित नहीं था?
- जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी)
- भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर)
- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ)
उत्तर: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) — विज्ञान टेक 2026 पहल में जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय जैसे 14 मंत्रालयों और विभागों ने भाग लिया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) का उल्लेख इस पहल के संदर्भ में नहीं किया गया था।
Q3. अभिकथन (A): विज्ञान टेक 2026 पहल ‘संपूर्ण सरकारी’ दृष्टिकोण पर आधारित थी।
कारण (R): इस पहल का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच संस्थागत बाधाओं को तोड़कर नवाचार परितंत्र में संबंधों को मजबूत करना था।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि पहल ‘संपूर्ण सरकारी’ दृष्टिकोण पर आधारित थी, जिसमें 14 मंत्रालयों और विभागों की तकनीकी क्षमताओं को एक साथ लाया गया था। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि इस दृष्टिकोण का मुख्य उद्देश्य ज्ञान के आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देकर संस्थागत बाधाओं को तोड़ना और नवाचार परितंत्र को मजबूत करना था।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विज्ञान टेक 2026 पहल के प्रमुख उद्देश्यों और ‘संपूर्ण सरकारी’ दृष्टिकोण को स्पष्ट करें। यह पहल भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक हो सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** विज्ञान टेक 2026 पहल का संक्षिप्त परिचय, इसकी शुरुआत की तिथि (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, 11 मई 2026) और आयोजक (जैव प्रौद्योगिकी विभाग) का उल्लेख।
2. **प्रमुख उद्देश्य:** पहल के मुख्य उद्देश्यों को विस्तार से बताएं, जैसे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देना, तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन, प्रयोगशाला अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटना, ज्ञान का आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देना।
3. **’संपूर्ण सरकारी’ दृष्टिकोण:** इस अवधारणा की व्याख्या करें कि कैसे 14 मंत्रालयों और विभागों को एक साथ लाकर विभिन्न क्षेत्रों (जैसे अंतरिक्ष, जलवायु, जैव-औषधीय, इलेक्ट्रॉनिकी) में प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया, और संस्थागत बाधाओं को तोड़ने पर जोर दिया गया।
4. **’विकसित भारत 2047′ में सहायता:** चर्चा करें कि यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में कैसे योगदान कर सकती है। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हो सकते हैं:
* **आत्मनिर्भरता:** स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रदर्शन के माध्यम से।
* **आर्थिक संवृद्धि:** प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वाणिज्यीकरण से उद्योगों को बढ़ावा।
* **नवाचार परितंत्र:** विभिन्न हितधारकों (वैज्ञानिकों, उद्योग, स्टार्टअप) के बीच सहयोग को मजबूत करना।
* **सामाजिक-आर्थिक विकास:** कृषि-खाद्य, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तकनीकी समाधानों की तैनाती।
* **अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन:** भविष्य के लिए रोडमैप (जैसे CSIR@100) तैयार करना।
5. **निष्कर्ष:** पहल के महत्व और भारत के तकनीकी भविष्य के लिए इसकी क्षमता को संक्षेप में दोहराएं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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