आईआईएसआर और किसान समूह के बीच मसाला उत्पादन तकनीकों के प्रसार हेतु समझौता

IISR signs MoU with farmers’ group to promote improved spice production technologies — labelled illustration

आईआईएसआर और किसान समूह के बीच मसाला उत्पादन तकनीकों के प्रसार हेतु समझौता

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3D cutaway: IISR signs MoU with farmers’ group to promote improved spice production technologies

✎ भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR) ने किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ मिलकर उन्नत मसाला उत्पादन तकनीकों के प्रसार और कृषि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे किसानों की…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास
  • Prelims: भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR), किसान उत्पादक संगठन (FPO), समझौता ज्ञापन (MoU), मसाला उत्पादन प्रौद्योगिकियाँ, कृषि अनुसंधान, Lecanicillium psalliotae, AI-सक्षम नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) टूलकिट
  • Essay: कृषि में प्रौद्योगिकी का महत्व और किसानों की आय दोगुनी करने में इसकी भूमिका, भारत में कृषि अनुसंधान और विकास: चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ

त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR) ने किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ मिलकर उन्नत मसाला उत्पादन तकनीकों के प्रसार और कृषि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे किसानों की उत्पादकता और आजीविका में सुधार होगा।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Spices Research – IISR), कोझिकोड ने किसानों के बीच उन्नत मसाला उत्पादन तकनीकों के प्रसार और अपनाने को बढ़ावा देने के लिए बायो माउंटेन फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, कन्नूर के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सहयोग संस्थान और किसान उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organisations – FPOs) के बीच संबंधों को मजबूत करने तथा उत्पादकता, स्थायी मसाला उत्पादन एवं आजीविका के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को क्षेत्र स्तर तक पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत विश्व में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। भारतीय मसाले अपनी गुणवत्ता और विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।
  • मसाला क्षेत्र देश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है और बड़ी संख्या में किसानों को आजीविका प्रदान करता है।
  • किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए उन्नत कृषि तकनीकों का उपयोग आवश्यक है।
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO) छोटे और सीमांत किसानों को एक साथ लाकर उन्हें बेहतर सौदेबाजी शक्ति, इनपुट तक पहुँच और बाजार संपर्क प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • कृषि अनुसंधान संस्थान नई प्रौद्योगिकियों और किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन इन नवाचारों को किसानों तक पहुँचाना एक चुनौती बनी हुई है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) कृषि विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो अनुसंधान प्रयोगशालाओं में विकसित ज्ञान और उपकरणों को किसानों के खेतों तक पहुँचाता है।

भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR) और इसके कार्य

  • भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research – ICAR) के तहत एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है, जो मसालों पर केंद्रित है।
  • संस्थान का मुख्य उद्देश्य काली मिर्च, इलायची, अदरक, हल्दी और अन्य मसालों पर अनुसंधान करना है ताकि उनकी उत्पादकता, गुणवत्ता और स्थिरता में सुधार किया जा सके।
  • IISR उन्नत किस्मों, फसल प्रबंधन प्रथाओं, कीट और रोग नियंत्रण रणनीतियों तथा कटाई के बाद की तकनीकों का विकास करता है।
  • यह किसानों, उद्योग और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम करता है ताकि विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रभावी ढंग से प्रसार किया जा सके।
  • संस्थान ने हाल ही में AI-सक्षम नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) टूलकिट लॉन्च किया है, जो शोधकर्ताओं के लिए उच्च-थ्रूपुट सीक्वेंसिंग डेटा विश्लेषण को सरल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • IISR ने इलायची थ्रिप्स के प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले कवक Lecanicillium psalliotae के दानेदार फॉर्मूलेशन के वाणिज्यिक उत्पादन और विपणन के लिए बोटाग्निक्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक लाइसेंसिंग समझौता भी किया है।
  • संस्थान ने अपनी विकसित काली मिर्च की उन्नत किस्म ‘IISR चंद्र’ के वाणिज्यिक उपयोग के लिए दो नए लाइसेंस भी जारी किए हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
IISR और किसान उत्पादक कंपनी (FPC) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) मसाला उत्पादन प्रौद्योगिकियों के प्रसार और अपनाने को बढ़ावा देगा, संस्थान और किसान संगठनों के बीच संबंध मजबूत करेगा।
AI-सक्षम नेक्स्ट-जनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) टूलकिट का शुभारंभ सीमित प्रोग्रामिंग या बायोइन्फॉर्मेटिक्स विशेषज्ञता वाले शोधकर्ताओं के लिए उच्च-थ्रूपुट अनुक्रमण डेटा विश्लेषण को सरल बनाएगा, अनुसंधान को गति देगा।
लेकैनिसिलियम सैलिओटे (Lecanicillium psalliotae) के दानेदार सूत्रीकरण के लिए लाइसेंस समझौता इलायची थ्रिप्स (cardamom thrips) के प्रबंधन में उपयोगी कवक का वाणिज्यिक उत्पादन और विपणन सुनिश्चित करेगा, कीट नियंत्रण में मदद करेगा।
काली मिर्च की उन्नत किस्म ‘IISR चंद्र’ के लिए नए लाइसेंस किसानों के लिए बेहतर उपज और गुणवत्ता वाली काली मिर्च की उपलब्धता बढ़ाएगा, उनकी आय में वृद्धि करेगा।
अनुसंधान सलाहकार समिति (RAC) की बैठक संस्थान के अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आउटरीच गतिविधियों की समीक्षा की, भविष्य की दिशा निर्धारित की।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • मसाला उत्पादन प्रौद्योगिकियों के बेहतर उपयोग से किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
  • नई किस्मों और कीट नियंत्रण समाधानों के वाणिज्यिक उत्पादन से कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • मसालों के निर्यात में वृद्धि की संभावना है, जिससे विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि होगी और व्यापार संतुलन सुधरेगा।

कृषि और प्रौद्योगिकी महत्व

  • उन्नत मसाला उत्पादन प्रौद्योगिकियों का प्रसार टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देगा, जिससे मिट्टी के स्वास्थ्य और जैव विविधता का संरक्षण होगा।
  • AI-सक्षम NGS टूलकिट जैसे डिजिटल नवाचार कृषि अनुसंधान को गति देंगे और वैज्ञानिकों को अधिक कुशल तरीके से काम करने में सक्षम बनाएंगे।
  • संस्थानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के बीच सहयोग से अनुसंधान परिणामों को खेत स्तर पर लागू करना आसान होगा, जिससे ‘लैब टू लैंड’ (Lab to Land) का लक्ष्य प्राप्त होगा।

सामाजिक महत्व

  • किसानों को बेहतर तकनीकें और बाजार से जुड़ाव मिलने से उनकी आजीविका के अवसर बढ़ेंगे और जीवन स्तर में सुधार होगा।
  • महिला किसानों और छोटे भूस्वामियों को विशेष रूप से लाभ हो सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र में समावेशिता बढ़ेगी।
  • खाद्य सुरक्षा और पोषण में सुधार होगा क्योंकि बेहतर गुणवत्ता वाले मसालों की उपलब्धता बढ़ेगी, जो भारतीय व्यंजनों का एक अभिन्न अंग हैं।

चुनौतियाँ

1. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में बाधाएँ

  • किसानों के बीच नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने में जागरूकता की कमी, वित्तीय बाधाएँ और पारंपरिक कृषि पद्धतियों से जुड़ाव एक चुनौती हो सकता है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों तक प्रौद्योगिकी को प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए मजबूत विस्तार सेवाओं और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है।

2. बाजार तक पहुँच और मूल्य निर्धारण

  • किसानों को अपनी उपज के लिए उचित मूल्य प्राप्त करने में बिचौलियों की भूमिका, बाजार की अस्थिरता और अपर्याप्त भंडारण सुविधाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • गुणवत्ता मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं को पूरा करना छोटे किसानों के लिए मुश्किल हो सकता है।

3. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

  • बदलते मौसम पैटर्न, अप्रत्याशित वर्षा और बढ़ती कीटों की समस्या मसाला उत्पादन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।
  • जलवायु-लचीली किस्मों और कृषि पद्धतियों को विकसित करना और अपनाना आवश्यक है।

4. अनुसंधान और विकास का वित्तपोषण

  • कृषि अनुसंधान और विकास के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तपोषण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि नई प्रौद्योगिकियों का विकास जारी रह सके।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
प्रौद्योगिकी अपनाने की दर किसानों द्वारा नई तकनीकों को अपनाने में संकोच या वित्तीय अक्षमता।
ज्ञान का प्रसार अनुसंधान संस्थानों से अंतिम उपयोगकर्ता (किसान) तक जानकारी का प्रभावी प्रवाह सुनिश्चित करना।
गुणवत्ता नियंत्रण उन्नत किस्मों और उत्पादों की गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना और उनका प्रमाणीकरण।
बाजार संपर्क किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने हेतु मजबूत बाजार संपर्क का अभाव।
संसाधन की कमी छोटे और सीमांत किसानों के पास उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए पर्याप्त संसाधनों (पानी, उर्वरक, पूंजी) की कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
  • कृषि अवसंरचना कोष (AIF)
  • किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का संवर्धन

आगे की राह

  • IISR और अन्य कृषि अनुसंधान संस्थानों को किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) तथा कृषि-उद्योगों के साथ मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करनी चाहिए।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके किसानों तक प्रौद्योगिकी और जानकारी का प्रभावी ढंग से प्रसार किया जाना चाहिए, जिसमें स्थानीय भाषाओं का प्रयोग हो।
  • किसानों को नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए वित्तीय सहायता, सब्सिडी और आसान ऋण तक पहुँच प्रदान की जानी चाहिए।
  • कृषि विस्तार सेवाओं को मजबूत किया जाना चाहिए, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) और ग्रामीण कृषि कार्यकर्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
  • गुणवत्ता नियंत्रण, प्रमाणन और ब्रांडिंग पर ध्यान केंद्रित करके मसाला उत्पादों के लिए मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाना चाहिए।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए जलवायु-लचीली मसाला किस्मों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • किसानों को बाजार से सीधे जोड़ने के लिए ई-नाम (e-NAM) जैसे प्लेटफॉर्म का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए और कृषि निर्यात को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कृषि प्रौद्योगिकी · मसाला उत्पादन · किसान उत्पादक संगठन (FPO) · प्रौद्योगिकी हस्तांतरण · सतत कृषि · भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR) · कृषि अनुसंधान · ग्रामीण आजीविका · फसल विविधीकरण · कृषि नवाचार · कृषि-उद्योग संबंध · मूल्य संवर्धन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48’, ‘note’: ‘कृषि और पशुपालन का संगठन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}

अवधारणा प्रवाह

IISR और FPC के बीच MoU  →  उन्नत मसाला उत्पादन तकनीकों का हस्तांतरण  →  किसानों द्वारा तकनीकों को अपनाना  →  उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि  →  किसानों की आय और आजीविका में सुधार  →  मसाला क्षेत्र का समग्र विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत एक स्वायत्त संस्थान है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य मसालों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में अनुसंधान करना है।
3. IISR ने हाल ही में किसानों के लिए AI-सक्षम नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) टूलकिट लॉन्च किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि IISR भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत कार्य करता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि IISR का प्राथमिक कार्य मसालों से संबंधित अनुसंधान और विकास है। कथन 3 भी सही है, जैसा कि समाचार में बताया गया है कि IISR ने AI-सक्षम नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) टूलकिट लॉन्च किया है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन किसान उत्पादक संगठन (FPO) का सबसे अच्छा वर्णन करता है?

  1. यह एक सरकारी निकाय है जो किसानों को ऋण प्रदान करता है।
  2. यह किसानों का एक समूह है जो कृषि इनपुट खरीदने और अपने उत्पादों को बेचने के लिए एक साथ आते हैं।
  3. यह एक निजी कंपनी है जो कृषि उत्पादों का निर्यात करती है।
  4. यह एक गैर-सरकारी संगठन है जो किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करता है।

उत्तर: यह किसानों का एक समूह है जो कृषि इनपुट खरीदने और अपने उत्पादों को बेचने के लिए एक साथ आते हैं। — किसान उत्पादक संगठन (FPO) किसानों का एक समूह होता है जो सामूहिक रूप से कृषि इनपुट खरीदते हैं, अपनी उपज का विपणन करते हैं और मूल्य संवर्धन गतिविधियों में संलग्न होते हैं, जिससे उनकी सौदेबाजी की शक्ति और आय में वृद्धि होती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में अनुसंधान संस्थानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के बीच सहयोग के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: यह प्रश्न भारत में कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार के लिए अनुसंधान संस्थानों और FPO के बीच सहयोग के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण करने के लिए कहता है।

1. **परिचय:** कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के महत्व और अनुसंधान संस्थानों (जैसे IISR) तथा FPO की भूमिका का संक्षिप्त परिचय दें।
2. **सहयोग का महत्व:**
* **प्रौद्योगिकी प्रसार:** उन्नत कृषि तकनीकों (जैसे उन्नत बीज, कीट प्रबंधन, AI-सक्षम उपकरण) को किसानों तक पहुँचाने में FPO की भूमिका।
* **उत्पादकता वृद्धि:** नई तकनीकों के माध्यम से फसल की पैदावार और गुणवत्ता में सुधार।
* **लागत में कमी:** सामूहिक खरीद और कुशल प्रबंधन से इनपुट लागत में कमी।
* **बाजार तक पहुँच:** FPO के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार लिंकेज और मूल्य संवर्धन के अवसर।
* **सतत कृषि:** पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं और संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना।
* **आजीविका में सुधार:** किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण।
* **नीतिगत समर्थन:** सरकारी योजनाओं (जैसे FPO संवर्धन योजना) का उल्लेख।
3. **चुनौतियाँ और सीमाएँ (समालोचनात्मक पक्ष):**
* **जागरूकता का अभाव:** नई तकनीकों और FPO के लाभों के बारे में किसानों के बीच जागरूकता की कमी।
* **वित्तीय बाधाएँ:** प्रौद्योगिकी अपनाने और FPO के संचालन के लिए पर्याप्त वित्तपोषण की कमी।
* **तकनीकी ज्ञान की कमी:** किसानों और FPO सदस्यों में नई तकनीकों को समझने और लागू करने की क्षमता का अभाव।
* **बुनियादी ढाँचा:** ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी ढाँचे (भंडारण, परिवहन) की कमी।
* **संस्थागत समर्थन:** अनुसंधान संस्थानों और FPO के बीच प्रभावी समन्वय और निरंतर समर्थन की आवश्यकता।
* **बाजार की अस्थिरता:** कृषि उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव।
4. **आगे की राह/सुझाव:**
* क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम।
* सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देना।
* डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग।
* नीतिगत हस्तक्षेप और वित्तीय सहायता।
5. **निष्कर्ष:** अनुसंधान संस्थानों और FPO के बीच मजबूत सहयोग भारत में कृषि क्षेत्र के समग्र विकास और किसानों के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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