19 Aug यूरोपीय संघ के सीबीएएम नियम: निर्यातकों के लिए क्या है तैयारी?
✎ CBAM यूरोपीय संघ द्वारा आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लगाने का एक तंत्र है, जिसका उद्देश्य कार्बन लीकेज को रोकना और वैश्विक जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देना है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए उत्सर्जन रिपोर्टिंग और अनुपालन…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर III — अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित मुद्दे। सरकारी बजटिंग। | GS पेपर III — पर्यावरण: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन। | GS पेपर II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।
- Prelims: कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM), कार्बन उत्सर्जन, कार्बन लीकेज, यूरोपीय संघ (EU), राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड फॉर सर्टिफिकेशन बॉडीज (NABCB), इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC), एम्बेडेड एमिशन, हरित व्यापार
- Essay: जलवायु परिवर्तन से निपटने में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीतियों की भूमिका।, भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए उभरती वैश्विक स्थिरता आवश्यकताओं के निहितार्थ।
त्वरित पुनरावृत्ति: CBAM यूरोपीय संघ द्वारा आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लगाने का एक तंत्र है, जिसका उद्देश्य कार्बन लीकेज को रोकना और वैश्विक जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देना है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए उत्सर्जन रिपोर्टिंग और अनुपालन महत्वपूर्ण हो गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
वाणिज्य विभाग ने नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर सर्टिफिकेशन बॉडीज (NABCB) और इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) के सहयोग से भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (EU CBAM) नियमों पर एक जागरूकता सत्र आयोजित किया। इस सत्र का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को CBAM के तहत बदलती नियामक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाना और उनकी तैयारी को मजबूत करना था, ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता से जुड़ी उभरती आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।
पृष्ठभूमि
- यूरोपीय संघ (EU) ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और अपने कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए CBAM को एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में पेश किया है।
- CBAM का मुख्य उद्देश्य ‘कार्बन लीकेज’ (carbon leakage) को रोकना है, जहाँ यूरोपीय संघ की कंपनियाँ सख्त घरेलू उत्सर्जन नियमों से बचने के लिए उत्पादन को उन देशों में स्थानांतरित कर सकती हैं जहाँ उत्सर्जन मानक कम सख्त हैं।
- यह तंत्र यूरोपीय संघ के बाहर से आयातित कुछ वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लगाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि आयातित उत्पादों का कार्बन मूल्य यूरोपीय संघ के भीतर उत्पादित वस्तुओं के समान हो।
- CBAM का कार्यान्वयन 1 अक्टूबर, 2023 से संक्रमणकालीन चरण (transitional phase) में शुरू हो गया है, जिसमें निर्यातकों को केवल एम्बेडेड एमिशन (embedded emissions) पर डेटा रिपोर्ट करना होगा। पूर्ण वित्तीय दायित्व 1 जनवरी, 2026 से लागू होगा।
- प्रारंभ में, CBAM लोहा, इस्पात, सीमेंट, एल्यूमीनियम, उर्वरक और बिजली जैसे कार्बन-गहन क्षेत्रों से आयात पर लागू होगा।
- भारत यूरोपीय संघ के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार है, और CBAM के तहत आने वाले कई उत्पादों का भारत से यूरोपीय संघ को निर्यात किया जाता है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए इसके अनुपालन की तैयारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) क्या है?
- CBAM यूरोपीय संघ द्वारा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए डिज़ाइन किया गया एक नीतिगत उपकरण है, जिसका उद्देश्य यूरोपीय संघ के बाहर से आयातित कुछ वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लगाना है।
- इसका प्राथमिक लक्ष्य यूरोपीय संघ के भीतर और बाहर उत्पादित वस्तुओं के कार्बन मूल्य निर्धारण के बीच समानता सुनिश्चित करना है, जिससे ‘कार्बन लीकेज’ को रोका जा सके।
- CBAM के तहत, यूरोपीय संघ को निर्यात करने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों के उत्पादन में उत्सर्जित कार्बन की मात्रा (एम्बेडेड एमिशन) की रिपोर्ट करनी होगी।
- इन रिपोर्ट किए गए उत्सर्जनों के आधार पर, आयातकों को CBAM प्रमाणपत्र खरीदने होंगे, जिनकी कीमत यूरोपीय संघ के उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (EU ETS) में कार्बन भत्ते की कीमत से जुड़ी होगी।
- यह तंत्र उन देशों को प्रोत्साहित करता है जो यूरोपीय संघ को निर्यात करते हैं, अपने स्वयं के कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र को लागू करने या अपने उत्सर्जन मानकों को बढ़ाने के लिए।
- CBAM का संक्रमणकालीन चरण 1 अक्टूबर, 2023 से शुरू हुआ, जिसमें केवल रिपोर्टिंग दायित्व शामिल हैं, जबकि वित्तीय समायोजन 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगा।
- यह तंत्र यूरोपीय संघ के ‘फिट फॉर 55’ पैकेज का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक शुद्ध ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 1990 के स्तर से कम से कम 55% तक कम करना है।
- भारतीय निर्यातकों के लिए, CBAM का अनुपालन करने के लिए अपने उत्पादन प्रक्रियाओं में कार्बन उत्सर्जन को मापना, रिपोर्ट करना और सत्यापित करना आवश्यक होगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) | यूरोपीय संघ (EU) द्वारा आयातित वस्तुओं पर कार्बन उत्सर्जन के आधार पर शुल्क लगाने की एक नीति, जिसका उद्देश्य ‘कार्बन लीकेज’ को रोकना है। |
| एम्बेडेड एमिशन (Embedded Emission) | किसी उत्पाद के उत्पादन और परिवहन में उत्सर्जित कुल ग्रीनहाउस गैसें, जो CBAM के तहत रिपोर्ट की जाती हैं। |
| डेटा रिपोर्टिंग और सत्यापन | निर्यातकों को अपने उत्पादों के एम्बेडेड एमिशन से संबंधित सटीक डेटा एकत्र करना और उसे सत्यापित करवाना अनिवार्य है। |
| जागरूकता सत्र | भारतीय निर्यातकों को CBAM नियमों, दायित्वों और अनुपालन प्रक्रियाओं के बारे में शिक्षित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम। |
| एनएबीसीबी (NABCB) और ईईपीसी (EEPC) का सहयोग | जागरूकता बढ़ाने और विश्वसनीय सत्यापन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- नए नियामक मानकों के अनुपालन से भारतीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
- कार्बन-गहन उत्पादों के निर्यात पर संभावित शुल्क से बचने के लिए उद्योगों को अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं को हरित बनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
पर्यावरणीय महत्व
- भारतीय उद्योगों को अपनी कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) कम करने और अधिक टिकाऊ (Sustainable) उत्पादन प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
- वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत के योगदान को बढ़ाएगा।
- उत्सर्जन डेटा की रिपोर्टिंग और सत्यापन से पारदर्शिता बढ़ेगी और पर्यावरणीय जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
सामरिक महत्व
- भारत को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में उभरते स्थिरता-संबंधी नियमों के अनुकूल होने में मदद मिलेगी, जिससे वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका मजबूत होगी।
- अन्य देशों द्वारा भविष्य में इसी तरह के तंत्र अपनाने की स्थिति में भारतीय उद्योग पहले से तैयार रहेंगे।
- यह सत्र भारत की ‘हरित अर्थव्यवस्था’ (Green Economy) की दिशा में प्रयासों को रेखांकित करता है।
चुनौतियाँ
1. डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग
- छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए एम्बेडेड एमिशन डेटा का सटीक संग्रह और रिपोर्टिंग एक जटिल कार्य हो सकता है।
- उत्पादन प्रक्रिया में विभिन्न चरणों से उत्सर्जन डेटा प्राप्त करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति, पर्यावरणीय प्रभाव
2. तकनीकी क्षमता का अभाव
- कुछ उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन को मापने और कम करने के लिए आवश्यक उन्नत तकनीकों और विशेषज्ञता की कमी।
- सत्यापन प्रक्रियाओं को समझने और लागू करने में तकनीकी बाधाएँ।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: औद्योगिक विकास, नवाचार
3. अनुपालन लागत
- नए नियमों का पालन करने के लिए उद्योगों को अपनी प्रक्रियाओं में बदलाव करने और नई प्रौद्योगिकियों में निवेश करने की आवश्यकता होगी, जिससे लागत बढ़ सकती है।
- सत्यापन और प्रमाणन (Certification) सेवाओं की लागत भी निर्यातकों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: व्यापार नीति, औद्योगिक लागत
4. जागरूकता और प्रशिक्षण
- सभी निर्यातकों, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, तक CBAM नियमों की पूरी जानकारी पहुंचाना एक चुनौती है।
- नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: शासन: सार्वजनिक नीति, क्षमता निर्माण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| एम्बेडेड एमिशन की गणना | जटिलता और मानकीकरण की कमी, जिससे गलत रिपोर्टिंग का जोखिम बढ़ सकता है। |
| सत्यापन तंत्र | भारत में विश्वसनीय और मान्यता प्राप्त सत्यापन एजेंसियों की पर्याप्त उपलब्धता और उनकी क्षमता। |
| छोटे निर्यातकों पर प्रभाव | बड़े उद्योगों की तुलना में छोटे निर्यातकों के लिए अनुपालन लागत और तकनीकी बाधाओं का अधिक होना। |
| अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंध | CBAM जैसे एकतरफा उपायों से वैश्विक व्यापार में संभावित तनाव और व्यापारिक विवादों का उदय। |
| प्रौद्योगिकी उन्नयन | कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए आवश्यक निवेश और तकनीकी हस्तांतरण की कमी। |
आगे की राह
- भारतीय निर्यातकों के लिए CBAM नियमों पर व्यापक और निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को डेटा संग्रह, रिपोर्टिंग और सत्यापन प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान करने के लिए विशेष तंत्र विकसित करना।
- कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए उद्योगों को वित्तीय प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- भारत में एक मजबूत और विश्वसनीय एक्रेडिटेशन (Accreditation) तथा सत्यापन (Verification) पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना।
- यूरोपीय संघ के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना ताकि भारतीय निर्यातकों की चिंताओं को दूर किया जा सके और अनुपालन को सुगम बनाया जा सके।
- उत्सर्जन डेटा के मानकीकरण और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक फ्रेमवर्क विकसित करना।
- अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना ताकि भारतीय उद्योग कम कार्बन वाली उत्पादन प्रक्रियाओं में नवाचार कर सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) · यूरोपीय संघ (EU) · निर्यात संवर्धन · कार्बन उत्सर्जन · जलवायु परिवर्तन · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार · स्थिरता नियामक · हरित अर्थव्यवस्था · भारतीय निर्यात · वाणिज्य विभाग
अवधारणा प्रवाह
यूरोपीय संघ द्वारा CBAM का कार्यान्वयन → भारतीय निर्यातकों के लिए नए नियामक दायित्व → उत्पादों के एम्बेडेड एमिशन की रिपोर्टिंग अनिवार्य → अनुपालन हेतु डेटा संग्रह और सत्यापन की आवश्यकता → जागरूकता सत्रों के माध्यम से निर्यातकों की तैयारी → वैश्विक स्थिरता मानकों के साथ भारतीय व्यापार का संरेखण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. CBAM का उद्देश्य यूरोपीय संघ में आयातित कुछ वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लगाना है, ताकि यूरोपीय संघ के भीतर उत्पादित वस्तुओं पर लागू कार्बन मूल्य के बराबर हो सके।
2. यह तंत्र केवल उन उत्पादों पर लागू होता है जिनका उत्पादन यूरोपीय संघ के बाहर होता है और जिनमें उच्च कार्बन उत्सर्जन होता है।
3. भारत के वाणिज्य विभाग ने भारतीय निर्यातकों को CBAM नियमों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किए हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि CBAM का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय संघ के बाहर से आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लगाकर ‘कार्बन लीकेज’ (carbon leakage) को रोकना और यूरोपीय संघ के उद्योगों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि CBAM उन उत्पादों पर केंद्रित है जिनमें उत्पादन प्रक्रिया के दौरान उच्च कार्बन उत्सर्जन होता है, जैसे लोहा, इस्पात, एल्यूमीनियम, सीमेंट, उर्वरक और बिजली। कथन 3 भी सही है, जैसा कि समाचार में बताया गया है कि वाणिज्य विभाग ने भारतीय निर्यातकों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किए हैं।
Q2. कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के संदर्भ में, ‘एम्बेडेड एमिशन’ (Embedded Emissions) शब्द का सबसे सटीक वर्णन क्या है?
- उत्पाद के परिवहन के दौरान होने वाला कार्बन उत्सर्जन।
- उत्पाद के निर्माण की पूरी प्रक्रिया में उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसें।
- उत्पाद के उपयोग के बाद उसके निपटान से होने वाला उत्सर्जन।
- उत्पाद के पैकेजिंग से संबंधित कार्बन उत्सर्जन।
उत्तर: उत्पाद के निर्माण की पूरी प्रक्रिया में उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसें। — एम्बेडेड एमिशन (Embedded Emissions) से तात्पर्य किसी उत्पाद के निर्माण की पूरी प्रक्रिया में, कच्चे माल के निष्कर्षण से लेकर अंतिम उत्पाद के उत्पादन तक, उत्सर्जित होने वाली ग्रीनहाउस गैसों से है। CBAM के तहत निर्यातकों को इन्हीं एम्बेडेड एमिशन की रिपोर्टिंग करनी होती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के प्रावधानों की व्याख्या कीजिए। भारतीय निर्यातकों पर इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए और भारत सरकार द्वारा इन प्रभावों को कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के प्रावधानों की विस्तृत व्याख्या करें, जिसमें इसका उद्देश्य, दायरे में आने वाले उत्पाद और अनुपालन आवश्यकताएं शामिल हों। भारतीय निर्यातकों, विशेषकर लोहा, इस्पात और एल्यूमीनियम जैसे क्षेत्रों पर इसके संभावित आर्थिक और नियामक प्रभावों का विश्लेषण करें। अंत में, भारत सरकार द्वारा जागरूकता सत्रों, क्षमता निर्माण और उद्योग के साथ जुड़ाव जैसे उपायों के माध्यम से इन प्रभावों को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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