भारतीय रेलवे: 142 करोड़ में सावल्यापुरम-गुंटूर खंड का विद्युत उन्नयन, जानिए पूरी डिटेल्स

भारतीय रेलवे ने 73 आरकेएम सावल्यापुरम-गुंटूर खंड पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को 2x25 केवी में अपग्रेड करने के लिए 142 — diagram

भारतीय रेलवे: 142 करोड़ में सावल्यापुरम-गुंटूर खंड का विद्युत उन्नयन, जानिए पूरी डिटेल्स

रेलवे ट्रैक्शन अपग्रेड1×25 kV प्रणालीपुरानी बिजली आपूर्तिसीमित क्षमता2×25 kV प्रणालीनई बिजली आपूर्तिउच्च क्षमताट्रैक्शन क्षमताकर्षण शक्ति वृद्धिभारी ट्रेनें संभवपरिचालन दक्षतागति व समयबद्धता सुधारलॉजिस्टिक लागत कमआर्थिक प्रभावस्थानीय रोजगार वृद्धिव्यापार बढ़ावा
रेलवे ट्रैक्शन अपग्रेड

✎ भारतीय रेलवे द्वारा सावल्यापुरम-गुंटूर खंड पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को 1×25 kV से 2×25 kV में उन्नत करने का निर्णय रेलवे नेटवर्क की क्षमता और परिचालन दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अवसंरचना (रेलवे)  |  GS Paper III — आर्थिक विकास
  • Prelims: भारतीय रेलवे, इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम, 2×25 kV, दक्षिण तट रेलवे, रेलवे अवसंरचना, क्षमता वृद्धि
  • Essay: भारत के आर्थिक विकास में अवसंरचना का महत्व, आधुनिक रेलवे नेटवर्क: राष्ट्र निर्माण का आधार

त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय रेलवे द्वारा सावल्यापुरम-गुंटूर खंड पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को 1×25 kV से 2×25 kV में उन्नत करने का निर्णय रेलवे नेटवर्क की क्षमता और परिचालन दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय रेलवे ने दक्षिण तट रेलवे के 73 किलोमीटर लंबे सावल्यापुरम-गुंटूर खंड पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को 1×25 kV से 2×25 kV तक उन्नत करने के लिए 142 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। इस उन्नयन का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण खंड पर कर्षण क्षमता (Traction Capacity) को सुदृढ़ करना और परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) को बढ़ाना है, जिससे बढ़ती रेलवे गतिविधियों को अधिक कुशलता से संभाला जा सके।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा है, जो परिवहन के सबसे बड़े साधनों में से एक है और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
  • रेलवे अवसंरचना का आधुनिकीकरण और क्षमता विस्तार, विशेषकर विद्युतीकरण (Electrification) के माध्यम से, सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक रहा है।
  • इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम ट्रेनों को चलाने के लिए आवश्यक विद्युत ऊर्जा प्रदान करता है, और इसकी क्षमता सीधे रेलवे नेटवर्क की वहन क्षमता (Carrying Capacity) और गति को प्रभावित करती है।
  • 1×25 kV से 2×25 kV प्रणाली में उन्नयन का अर्थ है, अधिक बिजली आपूर्ति क्षमता और बेहतर वोल्टेज विनियमन, जिससे भारी और लंबी ट्रेनों का संचालन संभव हो पाता है।
  • सावल्यापुरम-गुंटूर खंड, HUN रूट 8 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो वास्को-गडग-गुंटकल-नंद्याल-सावल्यापुरम-गुंटूर-विजयवाड़ा मार्ग को जोड़ता है, अतः इस पर उन्नयन से पूरे मार्ग को लाभ होगा।
  • यह परियोजना ‘भविष्य के लिए रेलवे प्रणाली को तैयार करने’ के भारतीय रेलवे के निरंतर प्रयासों का एक हिस्सा है, ताकि बढ़ती यातायात आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
  • दक्षिण तट रेलवे (South Coast Railway) भारतीय रेलवे के 18 रेलवे ज़ोनों में से एक है, जिसका मुख्यालय विशाखापत्तनम में है।

इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम और 2×25 kV उन्नयन

  • इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम वह प्रणाली है जो इलेक्ट्रिक ट्रेनों को चलाने के लिए ओवरहेड लाइनों (Overhead Lines) या तीसरी रेल के माध्यम से विद्युत ऊर्जा प्रदान करती है।
  • भारत में, रेलवे विद्युतीकरण के लिए मुख्य रूप से 25 kV AC (अल्टरनेटिंग करंट) प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
  • 1×25 kV प्रणाली में, एक एकल फीडर (Feeder) से 25 kV की आपूर्ति की जाती है, जो एक निश्चित दूरी तक ही प्रभावी होती है और वोल्टेज ड्रॉप (Voltage Drop) की समस्या का सामना कर सकती है।
  • 2×25 kV प्रणाली एक उन्नत तकनीक है जिसमें दो फीडरों का उपयोग किया जाता है, जिससे प्रभावी वोल्टेज दोगुना हो जाता है और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता तथा क्षमता बढ़ जाती है।
  • यह प्रणाली विशेष रूप से उच्च घनत्व वाले मार्गों (High Density Routes) और भारी मालगाड़ियों (Heavy Freight Trains) के संचालन के लिए उपयुक्त है, जहाँ अधिक शक्ति और स्थिर वोल्टेज की आवश्यकता होती है।
  • 2×25 kV उन्नयन से कर्षण उप-स्टेशनों (Traction Sub-stations) के बीच की दूरी बढ़ाई जा सकती है, जिससे अवसंरचना लागत कम होती है और रखरखाव आसान होता है।
  • यह प्रणाली ऊर्जा दक्षता में सुधार करती है और कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) को कम करने में भी सहायक है, जो पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देती है।
  • उन्नत ट्रैक्शन सिस्टम से ट्रेनों की गति, भार वहन क्षमता और समय की पाबंदी में सुधार होता है, जिससे परिचालन लागत में कमी आती है और रेलवे की समग्र दक्षता बढ़ती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सावल्यापुरम-गुंटूर खंड का उन्नयन दक्षिण तट रेलवे के 73 किलोमीटर लंबे खंड पर विद्युत कर्षण प्रणाली (Electric Traction System) को 1×25 kV से 2×25 kV में अपग्रेड किया जाएगा।
परियोजना लागत इस उन्नयन परियोजना पर कुल 142 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
ट्रैक कवरेज यह परियोजना 146 किलोमीटर ट्रैक को कवर करेगी, जो बढ़ती रेलवे गतिविधियों को संभालने की क्षमता बढ़ाएगी।
HUN रूट 8 का हिस्सा यह उन्नयन HUN रूट 8 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो वास्को-गडग-गुंटकल-नंद्याल-सवल्यापुरम-गुंटूर-विजयवाड़ा मार्ग को जोड़ता है।
कर्षण क्षमता में वृद्धि उन्नत प्रणाली से इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन के लिए बिजली आपूर्ति अवसंरचना सुदृढ़ होगी, जिससे कर्षण क्षमता बढ़ेगी।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • रेलवे अवसंरचना में निवेश से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार सृजन और व्यापार में वृद्धि हो सकती है।
  • माल ढुलाई की दक्षता बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, जिससे उद्योगों और कृषि उत्पादों की बाजार तक पहुंच बेहतर होगी।

परिचालन दक्षता और क्षमता

  • 2×25 kV प्रणाली के उन्नयन से अधिक बिजली आपूर्ति उपलब्ध होगी, जिससे भारी और लंबी ट्रेनों का संचालन सुचारू और तेज गति से हो सकेगा।
  • यह उन्नयन बढ़ती यातायात आवश्यकताओं को अधिक कुशलता से पूरा करने में मदद करेगा, जिससे ट्रेनों की समयबद्धता और विश्वसनीयता में सुधार होगा।

रणनीतिक महत्व

  • HUN रूट 8 जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर क्षमता वृद्धि से देश के विभिन्न हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जो राष्ट्रीय एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
  • आधुनिक कर्षण अवसंरचना भविष्य की यातायात वृद्धि के लिए रेलवे प्रणाली को तैयार करती है, जिससे दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित होता है।

पर्यावरणीय लाभ

  • इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन के उपयोग से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिलता है।

चुनौतियाँ

1. परियोजना कार्यान्वयन और समय-सीमा

  • बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में अक्सर भूमि अधिग्रहण, नियामक अनुमतियों और निर्माण संबंधी चुनौतियों के कारण देरी होती है।
  • चल रहे रेल यातायात को बाधित किए बिना उन्नयन कार्य को पूरा करना एक जटिल कार्य है।

2. वित्तीय प्रबंधन

  • 142 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए समय पर और पर्याप्त धन की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • लागत में वृद्धि (Cost Overruns) और बजट प्रबंधन एक चुनौती हो सकती है।

3. तकनीकी एकीकरण

  • मौजूदा 1×25 kV प्रणाली से 2×25 kV प्रणाली में सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता और समन्वय की आवश्यकता होगी।
  • नई प्रणाली को मौजूदा रेलवे नेटवर्क और सिग्नलिंग सिस्टम के साथ एकीकृत करना एक चुनौती हो सकती है।

4. मानव संसाधन और प्रशिक्षण

  • नई और उन्नत कर्षण प्रणाली के संचालन और रखरखाव के लिए रेलवे कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान करना आवश्यक होगा।
  • तकनीकी रूप से कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
परियोजना में देरी भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और स्थानीय विरोध के कारण परियोजना के पूरा होने में विलंब हो सकता है।
लागत में वृद्धि निर्माण सामग्री की कीमतों में उतार-चढ़ाव या अप्रत्याशित तकनीकी समस्याओं के कारण परियोजना की अनुमानित लागत बढ़ सकती है।
तकनीकी जटिलताएँ पुरानी और नई प्रणालियों के बीच संगतता (Compatibility) सुनिश्चित करना और तकनीकी खराबी को रोकना एक चुनौती है।
पर्यावरणीय प्रभाव निर्माण गतिविधियों से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर अस्थायी प्रभाव पड़ सकता है, जिसके लिए उचित शमन उपायों की आवश्यकता होगी।
सुरक्षा मानक उन्नत कर्षण प्रणाली के संचालन में उच्च सुरक्षा मानकों को बनाए रखना और दुर्घटनाओं को रोकना महत्वपूर्ण है।

आगे की राह

  • परियोजना के समयबद्ध निष्पादन के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए, जिसमें नियमित प्रगति समीक्षा और बाधाओं को दूर करने के लिए त्वरित कार्रवाई शामिल हो।
  • भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया जाए ताकि परियोजना में अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
  • परियोजना के लिए पर्याप्त और समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, साथ ही लागत प्रभावी उपायों को अपनाया जाए।
  • उन्नत कर्षण प्रणाली के संचालन और रखरखाव के लिए रेलवे कर्मचारियों के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ।
  • तकनीकी एकीकरण को सुचारु बनाने के लिए विशेषज्ञ परामर्श और आधुनिक परियोजना प्रबंधन तकनीकों का उपयोग किया जाए।
  • सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और निर्माण तथा संचालन दोनों चरणों में कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाए।
  • परियोजना के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किया जाए और नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए उचित शमन रणनीतियाँ लागू की जाएँ।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

रेलवे अवसंरचना · विद्युत कर्षण प्रणाली · क्षमता संवर्धन · परिचालन दक्षता · आधुनिकीकरण · आर्थिक विकास · राष्ट्रीय विकास · बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ · परिवहन नेटवर्क · ऊर्जा दक्षता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ द्वारा अनुदान के प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’}

अवधारणा प्रवाह

भारतीय रेलवे ने सावल्यापुरम-गुंटूर खंड पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को 1×25 kV से 2×25 kV में अपग्रेड करने की मंजूरी दी।  →  इस उन्नयन से बिजली आपूर्ति अवसंरचना सुदृढ़ होगी और कर्षण क्षमता में वृद्धि होगी।  →  बढ़ी हुई क्षमता से इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन अधिक कुशल और विश्वसनीय होगा।  →  परिचालन दक्षता में सुधार से माल ढुलाई और यात्री सेवाओं की गति व समयबद्धता बढ़ेगी।  →  यह क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा और समग्र रेल नेटवर्क को मजबूत करेगा।  →  दीर्घकालिक रूप से, यह भारतीय रेलवे को भविष्य की यातायात वृद्धि के लिए तैयार करेगा और कार्बन उत्सर्जन कम करेगा।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारतीय रेलवे द्वारा सावल्यापुरम-गुंटूर खंड पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के उन्नयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस परियोजना का उद्देश्य 1×25 kV सिस्टम को 2×25 kV सिस्टम में अपग्रेड करना है।
2. यह खंड दक्षिण तट रेलवे का हिस्सा है।
3. यह उन्नयन केवल मालगाड़ियों के संचालन के लिए है, न कि यात्री ट्रेनों के लिए।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि परियोजना 1×25 kV से 2×25 kV में अपग्रेड करने की है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह खंड दक्षिण तट रेलवे के अंतर्गत आता है। कथन 3 गलत है क्योंकि उन्नयन से सभी इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन के लिए बिजली आपूर्ति सुदृढ़ होगी, जिसमें यात्री और मालगाड़ियाँ दोनों शामिल हैं।

Q2. अभिकथन (A): भारतीय रेलवे द्वारा सावल्यापुरम-गुंटूर खंड पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम का उन्नयन परिचालन दक्षता और नेटवर्क क्षमता को बढ़ाएगा।
कारण (R): यह उन्नयन एचयूएन रूट 8 का हिस्सा है, जो वास्को-गडग-गुंटकल-नंद्याल-सवल्यापुरम-गुंटूर-विजयवाड़ा मार्ग को कवर करता है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि उन्नत ट्रैक्शन सिस्टम से परिचालन दक्षता और नेटवर्क क्षमता में वृद्धि होगी। कारण (R) भी सही है क्योंकि यह उन्नयन एचयूएन रूट 8 का हिस्सा है। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि इस महत्वपूर्ण मार्ग पर क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ने से समग्र परिचालन दक्षता में सुधार होगा।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में विद्युत कर्षण प्रणाली के उन्नयन के महत्व का परीक्षण कीजिए। इस संबंध में सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहलों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारतीय रेलवे के महत्व और आधुनिकीकरण की आवश्यकता का संक्षिप्त उल्लेख।
2. विद्युत कर्षण प्रणाली के उन्नयन का महत्व:
– परिचालन दक्षता में वृद्धि (कम यात्रा समय, उच्च गति)।
– क्षमता संवर्धन (अधिक ट्रेनों का संचालन, भारी माल ढुलाई)।
– ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय लाभ (जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी, कार्बन उत्सर्जन में कमी)।
– विश्वसनीयता और सुरक्षा में सुधार।
– भविष्य की यातायात वृद्धि के लिए तैयारी।
– आर्थिक संवृद्धि पर प्रभाव (उद्योगों को बढ़ावा, कनेक्टिविटी)।
3. सरकार की प्रमुख पहलें:
– राष्ट्रीय रेल योजना (National Rail Plan) 2030: क्षमता वृद्धि और आधुनिकीकरण के लक्ष्य।
– रेलवे विद्युतीकरण लक्ष्य: 100% विद्युतीकरण की ओर अग्रसर।
– डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridors): माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि।
– मेक इन इंडिया पहल के तहत स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा।
– उच्च गति और सेमी-हाई स्पीड रेल परियोजनाएँ (जैसे वंदे भारत ट्रेनें)।
– सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) मॉडल का उपयोग।
4. निष्कर्ष: भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के समग्र लाभों और राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: आंध्र प्रदेश के किस रेल खंड पर भारतीय रेलवे द्वारा 2×25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम स्थापित करने के लिए 142 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है?

  1. A. गुंटूर-रेपल्ले खंड
  2. B. सावल्यापुरम-गुंटूर खंड
  3. C. विजयवाड़ा-गुंटूर खंड
  4. D. तेनाली-रेपल्ले खंड

उत्तर: B. सावल्यापुरम-गुंटूर खंड — इस परियोजना के तहत आंध्र प्रदेश के सावल्यापुरम-गुंटूर रेल खंड (73 आरकेएम) पर 2×25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम स्थापित किया जाएगा।

Mains: आंध्र प्रदेश में रेलवे अवसंरचना के विकास में ‘2×25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम’ की भूमिका एवं इसके आर्थिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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