आरबीआई ने सरकारी प्रतिभूतियों की ओएमओ बिक्री की घोषणा, जानिए पूरा विवरण

RBI announces OMO Sale of Government of India Securities — diagram

आरबीआई ने सरकारी प्रतिभूतियों की ओएमओ बिक्री की घोषणा, जानिए पूरा विवरण

आरबीआई ने सरकारी प्रतिभूतियों की ओएमओ बिक्री की घोषणा, जानिए पूरा विवरण — आरबीआई ओएमओ बिक्री में प्रस्तावित सरकारी प्रतिभूतियाँ
आरेख: आरबीआई ओएमओ बिक्री में प्रस्तावित सरकारी प्रतिभूतियाँ

✎ खुले बाज़ार परिचालन (OMO) भारतीय रिज़र्व बैंक का एक मौद्रिक नीति उपकरण है जिसके तहत वह सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद या बिक्री करके अर्थव्यवस्था में तरलता को नियंत्रित करता है, जिसका मुख्य उद्देश्य मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।  |  GS Paper III — सरकारी बजट के घटक तथा राजकोषीय नीति।
  • Prelims: खुले बाज़ार परिचालन (OMO), सरकारी प्रतिभूतियाँ (G-Secs), भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), मौद्रिक नीति, तरलता समायोजन सुविधा (LAF), मुद्रास्फीति नियंत्रण
  • Essay: भारतीय अर्थव्यवस्था में RBI की भूमिका: स्थिरता और विकास के बीच संतुलन, राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों का समन्वय: भारत के आर्थिक विकास की कुंजी

त्वरित पुनरावृत्ति: खुले बाज़ार परिचालन (OMO) भारतीय रिज़र्व बैंक का एक मौद्रिक नीति उपकरण है जिसके तहत वह सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद या बिक्री करके अर्थव्यवस्था में तरलता को नियंत्रित करता है, जिसका मुख्य उद्देश्य मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 28 सितंबर, 2026 को ₹25,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों की खुले बाज़ार परिचालन (OMO) बिक्री की घोषणा की है। यह घोषणा 11 सितंबर, 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दिए गए संकेत के अनुरूप है। इस कदम का उद्देश्य बाज़ार में तरलता (liquidity) को समायोजित करना और मुद्रास्फीति (Inflation) के दबावों को नियंत्रित करना है।

पृष्ठभूमि

  • खुले बाज़ार परिचालन (OMO) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अपनाए जाने वाले मौद्रिक नीति उपकरणों में से एक है।
  • RBI इन परिचालनों के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद या बिक्री करके अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति (money supply) और तरलता को नियंत्रित करता है।
  • जब RBI सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री करता है, तो वह बैंकिंग प्रणाली से तरलता को अवशोषित करता है, जिससे बैंकों के पास ऋण देने के लिए कम धन उपलब्ध होता है।
  • इसके विपरीत, जब RBI सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करता है, तो वह बैंकिंग प्रणाली में तरलता का संचार करता है, जिससे ऋण देने के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है।
  • OMO का उपयोग अक्सर मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, ब्याज दरों को स्थिर करने और विनिमय दर (exchange rate) को प्रभावित करने के लिए किया जाता है।
  • हाल के वर्षों में, वैश्विक और घरेलू कारकों के कारण मुद्रास्फीति के दबावों में वृद्धि देखी गई है, जिससे RBI को तरलता प्रबंधन के लिए सक्रिय कदम उठाने पड़े हैं।

खुले बाज़ार परिचालन (OMO) क्या हैं?

  • खुले बाज़ार परिचालन (Open Market Operations – OMO) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा मौद्रिक नीति के तहत उपयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
  • इसके अंतर्गत RBI सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities – G-Secs) को बाज़ार से खरीदता या बेचता है।
  • OMO का प्राथमिक उद्देश्य अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति और तरलता (liquidity) के स्तर को विनियमित करना है।
  • जब RBI सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री करता है, तो वह बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करता है, जिससे बैंकों के पास ऋण देने के लिए उपलब्ध धन कम हो जाता है। यह आमतौर पर मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
  • जब RBI सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करता है, तो वह बैंकिंग प्रणाली में तरलता का संचार करता है, जिससे बैंकों के पास ऋण देने के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है। यह आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
  • ये परिचालन दैनिक आधार पर किए जा सकते हैं और इनका उपयोग अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह की तरलता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है।
  • OMO, रेपो दर (Repo Rate) और रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate) के साथ मिलकर, RBI की मौद्रिक नीति का एक अभिन्न अंग हैं, जो मूल्य स्थिरता और आर्थिक विकास के उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद करते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
OMO बिक्री (OMO Sale) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) की बिक्री।
₹25,000 करोड़ की राशि यह तरलता (Liquidity) को अवशोषित करने और मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
सरकारी प्रतिभूतियाँ ये केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए ऋण साधन हैं, जो सरकार की उधार आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
E-Kuber प्रणाली यह RBI की कोर बैंकिंग समाधान प्रणाली है जिसके माध्यम से नीलामी में बोलियाँ (Bids) प्रस्तुत की जाती हैं।
निर्धारित परिपक्वता तिथियाँ विक्रय के लिए प्रस्तावित प्रतिभूतियों की परिपक्वता अवधि 2029 से 2032 तक है, जो दीर्घकालिक तरलता प्रबंधन को दर्शाती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह कदम प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को कम करके मुद्रास्फीति के दबावों को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
  • सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री से बाजार में ब्याज दरों पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे उधार लेने की लागत बढ़ सकती है।

मौद्रिक नीति का उपकरण

  • खुले बाजार परिचालन (Open Market Operations – OMO) RBI के मात्रात्मक मौद्रिक नीति उपकरणों में से एक है, जिसका उपयोग तरलता को विनियमित करने के लिए किया जाता है।
  • यह RBI को अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में सक्षम बनाता है।

राजकोषीय प्रबंधन

  • हालांकि यह एक मौद्रिक नीति उपकरण है, सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री सरकार के ऋण प्रबंधन को भी प्रभावित करती है, क्योंकि यह बाजार से धन जुटाने का एक तरीका है।
  • यह सरकार की उधार लेने की लागत और उसके राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकता है।

चुनौतियाँ

1. ब्याज दर पर प्रभाव

  • OMO बिक्री से बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की आपूर्ति बढ़ जाती है, जिससे उनकी कीमतें गिर सकती हैं और उनकी यील्ड (Yield) बढ़ सकती है।
  • बढ़ी हुई यील्ड का अर्थ है सरकार के लिए उच्च उधार लागत, जो राजकोषीय घाटे को प्रभावित कर सकती है।

2. तरलता प्रबंधन संतुलन

  • RBI को तरलता को अवशोषित करने और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाना होता है।
  • अत्यधिक तरलता अवशोषण आर्थिक गतिविधियों को धीमा कर सकता है।

3. बाजार की प्रतिक्रिया

  • बाजार की प्रतिक्रिया OMO बिक्री की सफलता को प्रभावित कर सकती है, खासकर यदि बाजार में तरलता की कमी हो।
  • अत्यधिक बिक्री से बाजार में घबराहट हो सकती है और वित्तीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड में वृद्धि सरकार के लिए उधार लेने की लागत में वृद्धि और निजी निवेश पर ‘क्राउडिंग आउट’ प्रभाव।
तरलता की कमी यदि प्रणाली में तरलता पहले से ही कम है, तो OMO बिक्री से ऋण उपलब्धता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
आर्थिक संवृद्धि पर प्रभाव उच्च ब्याज दरें निवेश और उपभोग को हतोत्साहित कर सकती हैं, जिससे आर्थिक संवृद्धि धीमी हो सकती है।
मुद्रास्फीति नियंत्रण की प्रभावशीलता OMO बिक्री मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में कितनी प्रभावी होगी, यह अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है, जैसे आपूर्ति-पक्ष के झटके।

आगे की राह

  • RBI को बाजार की तरलता स्थितियों और मुद्रास्फीति के रुझानों की निरंतर निगरानी करनी चाहिए।
  • मौद्रिक नीति को राजकोषीय नीति के साथ समन्वयित किया जाना चाहिए ताकि व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
  • सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में पारदर्शिता और दक्षता बनाए रखी जानी चाहिए।
  • दीर्घकालिक तरलता प्रबंधन के लिए अन्य उपकरणों, जैसे स्थायी जमा सुविधा (Standing Deposit Facility), का भी विवेकपूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए।
  • आर्थिक संवृद्धि को समर्थन देने के साथ-साथ मुद्रास्फीति को लक्षित सीमा के भीतर रखने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

खुले बाजार परिचालन · सरकारी प्रतिभूतियाँ · भारतीय रिज़र्व बैंक · मौद्रिक नीति · तरलता प्रबंधन · मुद्रास्फीति नियंत्रण · राजकोषीय घाटा · ब्याज दरें · सरकारी ऋण · अर्थव्यवस्था

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 293’, ‘note’: ‘राज्य सरकारों द्वारा उधार लेना’}

अवधारणा प्रवाह

RBI OMO बिक्री की घोषणा करता है।  →  सरकारी प्रतिभूतियों को बाजार में बेचा जाता है।  →  बैंकों और वित्तीय संस्थानों से तरलता अवशोषित होती है।  →  प्रणाली में मुद्रा आपूर्ति कम होती है।  →  ब्याज दरें बढ़ने की प्रवृत्ति होती है।  →  मुद्रास्फीति के दबाव कम होते हैं।  →  आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. खुले बाजार परिचालन (OMO) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक मात्रात्मक मौद्रिक नीति उपकरण है।
2. OMO के तहत, RBI केवल सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करता है, बिक्री नहीं।
3. सरकारी प्रतिभूतियों की OMO बिक्री से अर्थव्यवस्था में तरलता (liquidity) बढ़ती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। OMO RBI का एक मात्रात्मक उपकरण है। कथन 2 गलत है। RBI खरीद और बिक्री दोनों करता है। कथन 3 गलत है। OMO बिक्री से तरलता घटती है क्योंकि RBI बैंकों से पैसा लेता है।

Q2. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों की खुले बाजार परिचालन (OMO) बिक्री का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. सरकार के राजकोषीय घाटे को वित्तपोषित करना।
  2. अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए तरलता को कम करना।
  3. बैंकों को ऋण देने के लिए अधिक धन उपलब्ध कराना।
  4. विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना।

उत्तर: अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए तरलता को कम करना। — OMO बिक्री का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था से अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करना है, जिससे मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाया जा सके।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ खुले बाजार परिचालन (OMO) क्या हैं? भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों की OMO बिक्री के उद्देश्यों और अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: खुले बाजार परिचालन (OMO) की परिभाषा और कार्यप्रणाली का संक्षिप्त परिचय। RBI द्वारा OMO बिक्री के प्राथमिक उद्देश्यों की व्याख्या (जैसे तरलता प्रबंधन, मुद्रास्फीति नियंत्रण, ब्याज दरों का स्थिरीकरण)। अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण (जैसे ऋण उपलब्धता, निवेश, आर्थिक संवृद्धि पर प्रभाव)। आलोचनात्मक परीक्षण में इसके लाभों और संभावित सीमाओं या चुनौतियों पर भी चर्चा करें।

स्रोत: RBI


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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