27 Sep भारतीय नौसेना ने फिलीपींस में एडीएमएम-प्लस समुद्री सुरक्षा अभ्यास में लिया भाग
✎ भारतीय नौसेना की ADMM-प्लस समुद्री सुरक्षा संयुक्त सहयोग गतिविधि में भागीदारी भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' और 'सागर' दृष्टिकोण के अनुरूप क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS पेपर III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: ADMM-प्लस, आसियान, एक्ट ईस्ट नीति, सागर (SAGAR) दृष्टिकोण, समुद्री सुरक्षा, बहुपक्षीय नौसेना अभ्यास, आईएनएस सह्याद्रि, आईएनएस कुलिश
- Essay: भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता में भूमिका, बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में समुद्री कूटनीति का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय नौसेना की ADMM-प्लस समुद्री सुरक्षा संयुक्त सहयोग गतिविधि में भागीदारी भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और ‘सागर’ दृष्टिकोण के अनुरूप क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्रि और मिसाइल कार्वेट आईएनएस कुलिश ने फिलीपींस के सुबिक बे में आयोजित समुद्री सुरक्षा पर विशेषज्ञ कार्य समूह की संयुक्त सहयोग गतिविधि (EWG-MS JCA) में अपनी भागीदारी सफलतापूर्वक पूरी की। यह गतिविधि आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के 23वें विशेषज्ञ कार्य समूह के तहत आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य समुद्री परिचालन समन्वय और अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना था।
पृष्ठभूमि
- ADMM-प्लस (ASEAN Defence Ministers’ Meeting-Plus) आसियान (ASEAN) के दस सदस्य देशों और आठ संवाद साझेदार देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका) के रक्षा मंत्रियों का एक मंच है।
- इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास के लिए रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
- EWG-MS JCA समुद्री सुरक्षा पर विशेषज्ञ कार्य समूह की संयुक्त सहयोग गतिविधि है, जो ADMM-प्लस के तहत आयोजित की जाती है। यह समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए व्यावहारिक सहयोग पर केंद्रित है।
- भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ (Act East Policy) का उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है।
- भारत का ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण हिंद महासागर क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने पर केंद्रित है, जिसमें समुद्री सहयोग एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
- इस गतिविधि में खोज एवं बचाव, जल सर्वेक्षण, चिकित्सा निकासी और समुद्र में फंसे जहाजों की सहायता जैसी कई समन्वित गतिविधियां शामिल थीं, जो बहुपक्षीय समुद्री सहयोग के महत्व को दर्शाती हैं।
ADMM-प्लस और भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति
- ADMM-प्लस एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय सुरक्षा मंच है जो आसियान और इसके संवाद साझेदारों को रक्षा और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने और सहयोग करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- यह मंच समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी, मानवीय सहायता और आपदा राहत, शांति स्थापना अभियान, सैन्य चिकित्सा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है।
- भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और ‘सागर’ दृष्टिकोण समुद्री सुरक्षा सहयोग को भारत की विदेश नीति का एक अभिन्न अंग बनाते हैं, विशेषकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में।
- भारतीय नौसेना की ऐसी गतिविधियों में भागीदारी क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने, समुद्री डकैती और आतंकवाद जैसी चुनौतियों का मुकाबला करने तथा आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- ये अभ्यास विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता (Inter-operability) को बढ़ाते हैं, जिससे संकट की स्थिति में बेहतर समन्वय संभव हो पाता है।
- भारत की भागीदारी क्षेत्रीय साझेदारियों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है और एक नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बनाए रखने में उसके योगदान को रेखांकित करती है।
- आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश जैसे स्वदेशी रूप से निर्मित युद्धपोतों की भागीदारी भारत की बढ़ती नौसैनिक क्षमताओं और ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Self-Reliant India) पहल को भी प्रदर्शित करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ADMM-प्लस EWG-MS JCA में भागीदारी | यह आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ASEAN Defence Ministers’ Meeting-Plus) के तहत समुद्री सुरक्षा पर विशेषज्ञ कार्य समूह की संयुक्त सहयोग गतिविधि है, जो क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देती है। |
| भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश की उपस्थिति | भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ (Act East Policy) और ‘क्षेत्रों में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ (Security and Growth for All in the Region – SAGAR) दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| फिलीपींस के सुबिक बे में आयोजन | दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत के बढ़ते रणनीतिक और रक्षा संबंधों को रेखांकित करता है। |
| बंदरगाह और समुद्री चरण की गतिविधियाँ | खोज एवं बचाव, जल सर्वेक्षण, चिकित्सा निकासी और समुद्र में फंसे जहाजों की सहायता जैसी गतिविधियों के माध्यम से परिचालन समन्वय और अंतर-संचालन क्षमता (Inter-operability) में वृद्धि। |
| पेशेवर संवाद और व्यावहारिक बहुपक्षीय सहभागिता | समुद्री सहयोग को उन्नत करने और साझा समुद्री चुनौतियों का समाधान करने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। |
महत्व
सामरिक महत्व
- यह गतिविधि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को मजबूत करती है, जिसके तहत भारत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को गहरा कर रहा है।
- यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में भारत की सक्रिय भूमिका को प्रदर्शित करता है।
- आसियान (ASEAN) देशों के साथ रक्षा सहयोग को बढ़ावा देता है, जो क्षेत्रीय भू-राजनीति में महत्वपूर्ण हैं।
रक्षा और सुरक्षा महत्व
- भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और अंतर-संचालन क्षमता को अन्य नौसेनाओं के साथ बढ़ाता है।
- समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और प्राकृतिक आपदाओं जैसी साझा समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षीय समन्वय को मजबूत करता है।
- समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) में सुधार और सूचना साझाकरण को बढ़ावा देता है।
कूटनीतिक महत्व
- भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा संवादों में एक विश्वसनीय और जिम्मेदार हितधारक के रूप में स्थापित करता है।
- यह भारत के ‘सागर’ (SAGAR) दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास पर केंद्रित है।
- फिलीपींस और जापान जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है।
चुनौतियाँ
1. क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री दावों को लेकर तनाव।
- समुद्री डकैती, अवैध, असूचित और अनियमित (Illegal, Unreported and Unregulated – IUU) मछली पकड़ना, और समुद्री प्रदूषण जैसी गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सुरक्षा
2. अंतर-संचालन क्षमता का अभाव
- विभिन्न नौसेनाओं के बीच अलग-अलग उपकरण, प्रशिक्षण और प्रक्रियाओं के कारण पूर्ण अंतर-संचालन क्षमता प्राप्त करने में चुनौतियाँ।
- मानकीकृत प्रोटोकॉल और संचार प्रणालियों की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: रक्षा प्रौद्योगिकी, सुरक्षा सहयोग
3. संसाधन और क्षमता निर्माण
- छोटे देशों की नौसेनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन और क्षमता निर्माण की आवश्यकता ताकि वे क्षेत्रीय सुरक्षा में प्रभावी ढंग से योगदान कर सकें।
- प्रशिक्षण और बुनियादी ढाँचे के विकास में सहयोग की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, विकासशील देशों की चुनौतियाँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| समुद्री विवाद | दक्षिण चीन सागर जैसे क्षेत्रों में क्षेत्रीय दावों को लेकर तनाव, जो स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। |
| गैर-राज्य अभिकर्ता | समुद्री डकैती और आतंकवाद जैसे गैर-राज्य अभिकर्ताओं द्वारा उत्पन्न खतरे, जो समुद्री व्यापार और सुरक्षा को बाधित करते हैं। |
| पर्यावरणीय चुनौतियाँ | समुद्री प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और समुद्री संसाधनों का अत्यधिक दोहन, जो क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करते हैं। |
| सूचना साझाकरण में अंतराल | क्षेत्रीय नौसेनाओं के बीच वास्तविक समय की जानकारी और खुफिया जानकारी साझा करने में चुनौतियाँ, जो प्रभावी प्रतिक्रिया को बाधित कर सकती हैं। |
आगे की राह
- क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा संवादों और अभ्यासों में भारत की सक्रिय भागीदारी को और बढ़ाना।
- समुद्री डोमेन जागरूकता और सूचना साझाकरण के लिए क्षेत्रीय तंत्र को मजबूत करना।
- छोटे और विकासशील देशों की नौसेनाओं की क्षमता निर्माण में सहायता प्रदान करना।
- समुद्री पर्यावरण संरक्षण और सतत समुद्री संसाधनों के प्रबंधन के लिए सहयोग को बढ़ावा देना।
- अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन और नेविगेशन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों को बनाए रखने पर जोर देना।
- आपदा राहत और मानवीय सहायता (Humanitarian Assistance and Disaster Relief – HADR) अभियानों में क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) · समुद्री सुरक्षा · विशेषज्ञ कार्य समूह (EWG-MS) · हिंद-प्रशांत क्षेत्र · एक्ट ईस्ट नीति · सागर (SAGAR) दृष्टिकोण · अंतर-संचालन क्षमता · बहुपक्षीय सहयोग · भारतीय नौसेना · क्षेत्रीय स्थिरता
अवधारणा प्रवाह
भारतीय नौसेना की ADMM-प्लस EWG-MS JCA में भागीदारी → क्षेत्रीय नौसेनाओं के साथ परिचालन समन्वय और अंतर-संचालन क्षमता में वृद्धि → हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा → भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और ‘सागर’ दृष्टिकोण को मजबूती → क्षेत्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद के माध्यम से साझा समुद्री चुनौतियों का समाधान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (ASEAN) के सदस्य देशों और आठ संवाद साझेदारों के बीच एक मंच है।
2. भारत ADMM-Plus के संवाद साझेदारों में से एक है।
3. ADMM-Plus का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-विरोधी और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। ADMM-Plus में 10 आसियान सदस्य देश और आठ संवाद साझेदार (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका) शामिल हैं। कथन 2 सही है। भारत ADMM-Plus के आठ संवाद साझेदारों में से एक है। कथन 3 सही है। ADMM-Plus का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों और संवाद साझेदारों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है, जिसमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-विरोधी, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
Q2. अभिकथन (A): भारतीय नौसेना की ADMM-Plus समुद्री सुरक्षा संयुक्त सहयोग गतिविधि में भागीदारी भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और ‘सागर (SAGAR)’ दृष्टिकोण के अनुरूप है।
कारण (R): ये नीतियां और दृष्टिकोण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय साझेदारियों और समुद्री सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित हैं।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि ADMM-Plus में भारत की भागीदारी वास्तव में उसकी ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और ‘सागर (SAGAR)’ दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि ये नीतियां और दृष्टिकोण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इसके अलावा, कारण (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण भी है, क्योंकि ये नीतियां और दृष्टिकोण ही भारत की ऐसी गतिविधियों में भागीदारी का आधार प्रदान करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) जैसे बहुपक्षीय मंचों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और ‘सागर (SAGAR)’ दृष्टिकोण इस संदर्भ में किस प्रकार योगदान करते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सामरिक महत्व और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों (जैसे समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ना, क्षेत्रीय विवाद, प्राकृतिक आपदाएँ) का संक्षिप्त उल्लेख। ADMM-Plus जैसे बहुपक्षीय मंचों की आवश्यकता पर प्रकाश डालना।
2. **ADMM-Plus की भूमिका:**
* **सहयोग का मंच:** आसियान सदस्य देशों और संवाद साझेदारों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना।
* **विशेषज्ञ कार्य समूह (EWG-MS):** समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण।
* **अंतर-संचालन क्षमता:** सदस्य देशों की नौसेनाओं के बीच समन्वय और अंतर-संचालन क्षमता (inter-operability) बढ़ाना।
* **विश्वास निर्माण:** क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा देना।
* **सामूहिक प्रतिक्रिया:** साझा समुद्री सुरक्षा खतरों के प्रति सामूहिक प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना।
3. **भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ का योगदान:**
* **पूर्वी एशिया के साथ जुड़ाव:** आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना।
* **क्षेत्रीय सुरक्षा में भागीदारी:** आसियान-केंद्रित सुरक्षा वास्तुकला में सक्रिय भूमिका निभाना।
* **रक्षा सहयोग:** पूर्वी एशियाई देशों के साथ रक्षा अभ्यास और प्रशिक्षण।
4. **भारत के ‘सागर (SAGAR)’ दृष्टिकोण का योगदान:**
* **क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास:** हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा प्रदाता और पसंदीदा साझेदार के रूप में भारत की भूमिका।
* **समुद्री डोमेन जागरूकता:** सूचना साझाकरण और निगरानी क्षमता में वृद्धि।
* **आपदा राहत और मानवीय सहायता:** प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान करना।
* **क्षमता निर्माण:** मित्र देशों की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करना।
5. **निष्कर्ष:** ADMM-Plus जैसे मंचों और भारत की नीतियों के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के महत्व पर बल देना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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