खाद्य मुद्रास्फीति का शिकार: खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतें क्यों हैं चिंता का विषय

खाद्य मुद्रास्फीति का शिकार: खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतें क्यों हैं चिंता का विषय

खाद्य मुद्रास्फीति का शिकार: खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतें क्यों हैं चिंता का विषय

खाद्य तेलों की कीमत वृद्धि के कारणअल नीनोमौसम पैटर्नरूस-यूक्रेन युद्धआपूर्ति व्यवधानजैव ईंधन अधिदेशइंडोनेशियावैश्विक आपूर्ति में कमवनस्पति तेलFAO सूचकांक वृद्धिकीमतों में उछालखाद्य मुद्रास्फीतिउपभोक्ताओं पर बोझ
खाद्य तेलों की कीमत वृद्धि के कारण

✎ वैश्विक खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतें अल नीनो, रूस-यूक्रेन युद्ध और प्रमुख उत्पादक देशों के आक्रामक जैव ईंधन अधिदेशों का परिणाम हैं, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ पैदा करती हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी  |  GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
  • Prelims: खाद्य मुद्रास्फीति, वनस्पति तेल, जैव ईंधन अधिदेश, अल नीनो, रूस-यूक्रेन युद्ध, FAO खाद्य मूल्य सूचकांक
  • Essay: वैश्विक खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के निहितार्थ, सतत विकास लक्ष्य और ऊर्जा संक्रमण

त्वरित पुनरावृत्ति: वैश्विक खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतें अल नीनो, रूस-यूक्रेन युद्ध और प्रमुख उत्पादक देशों के आक्रामक जैव ईंधन अधिदेशों का परिणाम हैं, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ पैदा करती हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक में वृद्धि देखी गई है, जिसमें वनस्पति तेलों की कीमतें विशेष रूप से तेजी से बढ़ी हैं। यह वृद्धि अल नीनो मौसम पैटर्न, रूस-यूक्रेन युद्ध और प्रमुख उत्पादक देशों जैसे इंडोनेशिया द्वारा आक्रामक जैव ईंधन अधिदेशों (biofuel mandates) के संयोजन का परिणाम है, जिसका सीधा असर भारत सहित विश्व भर में खाद्य मुद्रास्फीति (food inflation) पर पड़ रहा है।

पृष्ठभूमि

  • FAO खाद्य मूल्य सूचकांक सितंबर में 136 अंक पर पहुंच गया, जो नवंबर 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। वनस्पति तेलों का FAO सूचकांक 198.6 अंक रहा, जो सितंबर 2025 से 18.3% अधिक है और जून 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है।
  • मार्च 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के तुरंत बाद यह सूचकांक 251.8 अंक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था, जिसके बाद जून 2023 तक यह गिरकर 115.8 अंक हो गया था। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से कीमतों में फिर से वृद्धि देखी जा रही है।
  • वनस्पति तेलों (जैसे पाम, सोयाबीन या रेपसीड) को ट्रांसएस्टरीफिकेशन (transesterification) नामक रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से फैटी एसिड मिथाइल एस्टर (FAME) में परिवर्तित किया जा सकता है, जो मूल रूप से वनस्पति तेल-आधारित बायोडीजल है।
  • वैश्विक सोयाबीन तेल का लगभग 25%, पाम तेल का 28% और रेपसीड तेल का 29% बायोडीजल बनाने के लिए फीडस्टॉक (feedstock) के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे प्रमुख उत्पादक देशों ने पाम तेल-आधारित FAME को डीजल में मिलाने के लिए कड़े जैव ईंधन अधिदेश लागू किए हैं, जिससे वैश्विक बाजार में इन तेलों की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

जैव ईंधन अधिदेश (Biofuel Mandates) क्या हैं?

  • जैव ईंधन अधिदेश सरकारी नीतियां हैं जो तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) जैसे जीवाश्म परिवहन उत्पादों में जैव ईंधन के एक निर्दिष्ट न्यूनतम प्रतिशत या मात्रा को मिलाने के लिए बाध्य करती हैं।
  • इन अधिदेशों का प्राथमिक उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है।
  • भारत में, पेट्रोल में कम से कम 20% इथेनॉल (E20) मिश्रण अनिवार्य है, जो गन्ने के शीरे और रस या चावल, मक्का और अन्य स्टार्च युक्त अनाज से उत्पादित होता है।
  • इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश पाम तेल-आधारित FAME को डीजल में मिलाने के लिए समान अधिदेश लागू करते हैं, जिससे उनके घरेलू जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।
  • ये अधिदेश वैश्विक कृषि बाजारों को प्रभावित करते हैं क्योंकि खाद्य फसलों या उनके उप-उत्पादों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ईंधन उत्पादन के लिए मोड़ दिया जाता है, जिससे खाद्य पदार्थों की आपूर्ति कम हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ भी क्रमशः सोयाबीन तेल और रेपसीड तेल का एक बड़ा हिस्सा बायोडीजल और बायो-ATF के लिए उपयोग करते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतें वैश्विक खाद्य मुद्रास्फीति में प्रमुख योगदानकर्ता, विशेष रूप से वनस्पति तेल सूचकांक में वृद्धि।
एल नीनो प्रभाव कृषि उत्पादन को प्रभावित करता है, जिससे खाद्य तेलों की आपूर्ति बाधित होती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करता है और ऊर्जा तथा खाद्य वस्तुओं की कीमतों को बढ़ाता है।
जैव ईंधन अधिदेश (Biofuel Mandates) पाम तेल, सोयाबीन तेल और रेपसीड तेल जैसे खाद्य तेलों को जैव ईंधन उत्पादन की ओर मोड़ता है, जिससे खाद्य उपलब्धता कम होती है।
वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा जारी, वैश्विक खाद्य कीमतों के रुझान को दर्शाता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतें उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक बोझ डालती हैं, जिससे परिवारों का बजट प्रभावित होता है।
  • यह मुद्रास्फीति (Inflation) को बढ़ाता है, विशेष रूप से खाद्य मुद्रास्फीति को, जो केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के लिए चुनौती है।
  • भारत जैसे प्रमुख आयातक देशों के लिए आयात बिल बढ़ाता है, जिससे व्यापार घाटा (Trade Deficit) और विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हो सकता है।

सामाजिक महत्व

  • खाद्य तेलों की ऊंची कीमतें निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा (Food Security) संबंधी चिंताएं पैदा करती हैं।
  • यह पोषण संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकता है यदि लोग महंगे तेलों के बजाय कम पौष्टिक विकल्पों का चयन करते हैं।

पर्यावरणीय महत्व

  • जैव ईंधन उत्पादन के लिए खाद्य तेलों का उपयोग वनों की कटाई और जैव विविधता के नुकसान को बढ़ावा दे सकता है, खासकर पाम तेल के संदर्भ में।
  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से संबंधित घटनाएं जैसे एल नीनो कृषि उत्पादन को प्रभावित करती हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा और कीमतों पर असर पड़ता है।

रणनीतिक महत्व

  • खाद्य तेलों पर निर्भरता आयात करने वाले देशों के लिए भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risk) बढ़ाती है।
  • जैव ईंधन नीतियों का खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन पर रणनीतिक प्रभाव पड़ता है।

चुनौतियाँ

1. खाद्य मुद्रास्फीति का प्रबंधन

  • खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतें समग्र खाद्य मुद्रास्फीति को बढ़ाती हैं, जिससे आम जनता पर बोझ पड़ता है।
  • आपूर्ति पक्ष के झटके और वैश्विक कारकों के कारण मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।

2. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना

  • वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान और जैव ईंधन के लिए मोड़ से खाद्य तेलों की उपलब्धता कम हो सकती है।
  • कमजोर वर्गों के लिए पौष्टिक और किफायती खाद्य तेलों तक पहुंच सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

3. जैव ईंधन नीति और खाद्य बनाम ईंधन की दुविधा

  • जैव ईंधन अधिदेशों से खाद्य तेलों की मांग बढ़ती है, जिससे उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं और खाद्य उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
  • खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।

4. जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव

  • एल नीनो जैसी मौसमी घटनाएं कृषि उत्पादन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं, जिससे खाद्य तेलों की आपूर्ति में कमी आती है।
  • जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और शमन के उपाय आवश्यक हैं ताकि कृषि को इन झटकों से बचाया जा सके।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य भू-राजनीतिक तनावों के कारण खाद्य तेलों की आवाजाही और उपलब्धता प्रभावित होती है।
जैव ईंधन के लिए खाद्य तेलों का मोड़ इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों के आक्रामक जैव ईंधन अधिदेश खाद्य तेलों की वैश्विक उपलब्धता को कम करते हैं, जिससे कीमतें बढ़ती हैं।
जलवायु संबंधी झटके (एल नीनो) एल नीनो जैसी मौसमी घटनाएं प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल उत्पादन को प्रभावित करती हैं, जिससे आपूर्ति में कमी आती है।
आयात पर निर्भरता भारत जैसे देश जो खाद्य तेलों के बड़े आयातक हैं, वैश्विक मूल्य अस्थिरता के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
घरेलू उत्पादन में कमी पर्याप्त घरेलू उत्पादन न होने से आयात पर निर्भरता बढ़ती है और वैश्विक झटकों का प्रभाव बढ़ जाता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (National Food Security Mission)
  • राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-पाम तेल (National Edible Oil Mission-Oil Palm)

आगे की राह

  • खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश करना, विशेष रूप से तिलहन फसलों में।
  • जैव ईंधन नीतियों की समीक्षा करना ताकि खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के बीच एक उचित संतुलन स्थापित किया जा सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत किया जा सके और व्यापार बाधाओं को कम किया जा सके।
  • किसानों को जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों (Climate-Resilient Agricultural Practices) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना ताकि एल नीनो जैसे मौसमी झटकों का सामना किया जा सके।
  • रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) बनाने पर विचार करना ताकि आपातकालीन स्थितियों में खाद्य तेलों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
  • उपभोक्ताओं को जागरूक करना और स्वस्थ व टिकाऊ खाद्य तेल विकल्पों को बढ़ावा देना।
  • खाद्य तेलों के आयात स्रोतों में विविधता लाना ताकि किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।
  • खाद्य तेलों के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन में निवेश करना ताकि घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिल सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

खाद्य मुद्रास्फीति · वनस्पति तेल की कीमतें · जैव ईंधन अधिदेश · अल नीनो · रूस-यूक्रेन युद्ध · खाद्य और कृषि संगठन (FAO) · पाम तेल · सोयाबीन तेल · रेपसीड तेल · वसा अम्ल मिथाइल एस्टर (FAME) · जैवडीजल · ईंधन सम्मिश्रण नीति

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देगा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाना’}

अवधारणा प्रवाह

एल नीनो, युद्ध, जैव ईंधन अधिदेश  →  वैश्विक खाद्य तेलों की आपूर्ति में कमी  →  खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि  →  खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) सूचकांक में वृद्धि  →  खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि  →  उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ और खाद्य सुरक्षा चिंताएं

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैवडीजल (बायोडीजल) वनस्पति तेलों से वसा अम्ल मिथाइल एस्टर (FAME) के रासायनिक रूपांतरण द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
2. भारत में पेट्रोल में इथेनॉल सम्मिश्रण का अधिदेश है, जबकि इंडोनेशिया और मलेशिया में डीजल में पाम तेल-आधारित FAME के सम्मिश्रण का अधिदेश है।
3. अल नीनो की घटना आमतौर पर वैश्विक खाद्य कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं डालती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। जैवडीजल, जिसे FAME भी कहा जाता है, वनस्पति तेलों (जैसे पाम, सोयाबीन, रेपसीड) को ट्रांसएस्टरीफिकेशन नामक रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से मेथनॉल के साथ प्रतिक्रिया करके बनाया जाता है। कथन 2 सही है। भारत में पेट्रोल में इथेनॉल सम्मिश्रण के अधिदेश हैं, और इंडोनेशिया तथा मलेशिया जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में डीजल में पाम तेल-आधारित FAME के सम्मिश्रण के अधिदेश हैं, जो वनस्पति तेलों की मांग को बढ़ाते हैं। कथन 3 गलत है। अल नीनो एक जलवायु घटना है जो अक्सर दुनिया भर में कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों को प्रभावित करती है, जिससे सूखे या बाढ़ जैसी चरम मौसमी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।

Q2. अभिकथन (A): हाल के वर्षों में वैश्विक खाद्य मुद्रास्फीति में वनस्पति तेलों की कीमतों में वृद्धि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
कारण (R): प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा आक्रामक जैव ईंधन अधिदेशों ने वनस्पति तेलों की खाद्य आपूर्ति को जैवडीजल उत्पादन की ओर मोड़ दिया है।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि वनस्पति तेलों की कीमतें वास्तव में वैश्विक खाद्य मुद्रास्फीति में एक प्रमुख कारक रही हैं। कारण (R) भी सही है और A का सही स्पष्टीकरण है, क्योंकि इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों के जैव ईंधन अधिदेशों ने खाद्य उपयोग के लिए उपलब्ध वनस्पति तेलों की आपूर्ति को कम कर दिया है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वैश्विक खाद्य मुद्रास्फीति में वनस्पति तेलों की बढ़ती कीमतों के प्रमुख कारणों का विश्लेषण कीजिए। भारत जैसे आयातक देशों पर इसके प्रभावों की भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: वैश्विक खाद्य मुद्रास्फीति में वनस्पति तेलों के महत्व और हालिया मूल्य वृद्धि का संक्षिप्त उल्लेख।
2. बढ़ती कीमतों के प्रमुख कारण (विश्लेषण):
a. रूस-यूक्रेन युद्ध: सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में व्यवधान, अन्य तेलों पर दबाव।
b. अल नीनो घटना: प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में सूखे या अत्यधिक वर्षा से उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव (जैसे पाम तेल, सोयाबीन)।
c. जैव ईंधन अधिदेश: इंडोनेशिया (पाम तेल), मलेशिया (पाम तेल) और संयुक्त राज्य अमेरिका (सोयाबीन तेल) तथा यूरोपीय संघ (रेपसीड तेल) जैसे प्रमुख उत्पादकों द्वारा जैवडीजल उत्पादन के लिए वनस्पति तेलों का उपयोग बढ़ाना। FAME (वसा अम्ल मिथाइल एस्टर) के उत्पादन में वनस्पति तेलों की बड़ी मात्रा का उपयोग।
d. वैश्विक मांग-आपूर्ति असंतुलन: बढ़ती आबादी और उपभोग पैटर्न के कारण मांग में वृद्धि।
e. व्यापार नीतियां और निर्यात प्रतिबंध (यदि कोई हो)।
3. भारत जैसे आयातक देशों पर प्रभाव (चर्चा):
a. आयात बिल में वृद्धि: भारत अपनी वनस्पति तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे आयात बिल और व्यापार घाटा बढ़ता है।
b. घरेलू खाद्य मुद्रास्फीति: वनस्पति तेलों की कीमतें सीधे खाद्य टोकरी को प्रभावित करती हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ता है।
c. खाद्य सुरक्षा चिंताएँ: आवश्यक खाद्य पदार्थों तक पहुँच प्रभावित हो सकती है।
d. सरकार पर राजकोषीय दबाव: कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सब्सिडी या आयात शुल्क में कटौती जैसे उपायों की आवश्यकता।
e. किसानों और घरेलू उद्योग पर प्रभाव: घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता।
4. निष्कर्ष: इन चुनौतियों का सामना करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता, जिसमें घरेलू उत्पादन बढ़ाना, वैकल्पिक स्रोतों की खोज और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल है।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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