06 Oct यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर पर जीएसटी न लगाने की मांग: सी. रंगराजन
✎ UPI लेनदेन पर MDR शुल्क पर GST लगाने का मुद्दा डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और भुगतान प्रणाली की लागत वसूली के बीच संतुलन स्थापित करने से संबंधित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।
- Prelims: UPI (एकीकृत भुगतान इंटरफेस), MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट), GST (वस्तु एवं सेवा कर), भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
- Essay: डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन: चुनौतियाँ एवं अवसर, भारत की आर्थिक संवृद्धि में प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: UPI लेनदेन पर MDR शुल्क पर GST लगाने का मुद्दा डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और भुगतान प्रणाली की लागत वसूली के बीच संतुलन स्थापित करने से संबंधित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
यह टिप्पणी नए UPI भुगतान नियमों 2026 के संदर्भ में आई है, जो ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (person-to-merchant) लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क निर्धारित करते हैं।
पृष्ठभूमि
- UPI भारत में एक त्वरित भुगतान प्रणाली है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित किया गया है।
- यह प्रणाली स्मार्टफोन के माध्यम से दो बैंक खातों के बीच तत्काल धन हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करती है।
- MDR वह शुल्क है जो एक व्यापारी ग्राहक से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करता है।
- भारत सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कुछ समय से UPI लेनदेन पर MDR शुल्क को शून्य कर दिया था।
- नए UPI भुगतान नियम 2026 के तहत, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी UPI लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क लागू होगा।
- GST एक अप्रत्यक्ष कर है जो भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाता है।
- डिजिटल डिवाइड और वित्तीय बहिष्करण (financial exclusion) की चिंताएँ भी उठाई गई हैं, खासकर कम सामाजिक-आर्थिक समूहों और महिलाओं के बीच डिजिटल पहुँच के अंतर को लेकर।
UPI, MDR और GST क्या हैं?
- UPI (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) एक ऐसी प्रणाली है जो कई बैंक खातों को एक ही मोबाइल एप्लिकेशन (किसी भी भाग लेने वाले बैंक के) में शक्ति प्रदान करती है, जो कई बैंकिंग सुविधाओं, निर्बाध फंड रूटिंग और व्यापारी भुगतान को एक ‘दूसरी-कारक’ प्रमाणीकरण के साथ जोड़ती है।
- MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वह लागत है जो एक व्यापारी को अपने ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए चुकानी पड़ती है। यह शुल्क आम तौर पर लेनदेन मूल्य के प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है और भुगतान सेवा प्रदाता (जैसे बैंक या फिनटेक कंपनी) को जाता है।
- GST (वस्तु एवं सेवा कर) भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाने वाला एक व्यापक, बहु-स्तरीय, गंतव्य-आधारित कर है। इसने कई अप्रत्यक्ष करों जैसे उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट का स्थान ले लिया है।
- NPCI (भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम) भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणाली के संचालन के लिए एक छत्र संगठन है। यह भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंक संघ (IBA) की एक पहल है।
- MDR शुल्क का उद्देश्य भुगतान प्रणाली को चलाने की लागत को कवर करना और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार को बढ़ावा देना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| UPI लेनदेन पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) | ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क। यह 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होगा। |
| GST परिषद की भूमिका | पूर्व RBI गवर्नर सी. रंगराजन ने GST परिषद से MDR शुल्कों पर GST न लगाने के संबंध में स्पष्ट बयान जारी करने का आग्रह किया है। |
| UPI की सफलता | पिछले 10 वर्षों में UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसमें NPCI की महत्वपूर्ण भूमिका है। |
| वित्तीय समावेशन की चिंताएँ | डिजिटल डिवाइड (विशेषकर लैंगिक और सामाजिक-आर्थिक समूहों में) के कारण वित्तीय बहिष्करण की संभावना पर चिंता व्यक्त की गई है। |
| सार्वजनिक वस्तु के रूप में UPI | UPI को एक सार्वजनिक वस्तु माना जाता है, जिसके संचालन में लागत आती है, लेकिन इसके मूल्य निर्धारण का समय महत्वपूर्ण है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- MDR और GST का प्रभाव डिजिटल लेनदेन की लागत को बढ़ा सकता है, जिससे छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ सकता है।
- UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने से डिजिटल भुगतान को अपनाने की गति धीमी हो सकती है, खासकर जब 75% लेनदेन ₹2,000 से कम के हों।
सामाजिक महत्व
- डिजिटल डिवाइड, विशेषकर लैंगिक और सामाजिक-आर्थिक समूहों में, वित्तीय बहिष्करण (financial exclusion) को बढ़ा सकता है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- UPI की व्यापक पहुंच और उपयोग ने वित्तीय समावेशन (financial inclusion) को बढ़ावा दिया है, लेकिन MDR और GST इसे बाधित कर सकते हैं।
शासन और नीतिगत महत्व
- GST परिषद का निर्णय डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र और सरकार की ‘कैशलेस राष्ट्र’ की परिकल्पना को प्रभावित करेगा।
- सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना (digital public infrastructure) के रूप में UPI के मूल्य निर्धारण और कराधान पर नीतिगत स्पष्टता आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल डिवाइड और वित्तीय बहिष्करण
- डिजिटल पहुंच में लैंगिक और सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ अभी भी मौजूद हैं, जिससे समाज के बड़े हिस्से को डिजिटल भुगतान से बाहर रखा जा सकता है।
- MDR और GST जैसे शुल्क डिजिटल लेनदेन को महंगा बनाकर इस डिवाइड को और गहरा कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: वित्तीय समावेशन, डिजिटल डिवाइड
2. डिजिटल भुगतान को अपनाने की गति
- UPI ने डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर लोकप्रिय बनाया है, लेकिन MDR और GST जैसे शुल्क इसे अपनाने की गति को धीमा कर सकते हैं, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में।
- जब अधिकांश लेनदेन कम मूल्य के होते हैं, तो शुल्क लगाने से उपयोगकर्ताओं को नकद लेनदेन की ओर वापस धकेला जा सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन
3. UPI पारिस्थितिकी तंत्र का वित्तीयन
- UPI प्रणाली को चलाने में लागत आती है, और इस लागत की वसूली एक चुनौती है।
- MDR एक तरीका है जिससे इस लागत को वसूला जा सकता है, लेकिन इसका समय और प्रभाव महत्वपूर्ण विचारणीय बिंदु हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: डिजिटल अवसंरचना, वित्तीय प्रौद्योगिकी
4. नीतिगत स्पष्टता और नियामक ढाँचा
- MDR पर GST लगाने के संबंध में नीतिगत स्पष्टता की कमी अनिश्चितता पैदा कर सकती है।
- GST परिषद और RBI जैसे नियामक निकायों के बीच समन्वय और स्पष्ट दिशानिर्देशों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: नियामक निकाय, आर्थिक नीतियाँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| MDR पर GST | डिजिटल लेनदेन की लागत में वृद्धि, छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ। |
| डिजिटल डिवाइड | लैंगिक और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के कारण वित्तीय बहिष्करण का बढ़ना। |
| UPI को अपनाने की दर | शुल्क लगने से डिजिटल भुगतान को अपनाने की गति धीमी हो सकती है, खासकर कम मूल्य के लेनदेन में। |
| UPI प्रणाली का वित्तीयन | प्रणाली के संचालन की लागत की वसूली और शुल्क लगाने के सही समय का निर्धारण। |
| नीतिगत अनिश्चितता | MDR पर GST के संबंध में स्पष्ट नीतिगत दिशानिर्देशों की कमी। |
आगे की राह
- GST परिषद को UPI लेनदेन पर MDR शुल्कों पर GST न लगाने के संबंध में एक स्पष्ट और त्वरित बयान जारी करना चाहिए।
- डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के लिए MDR शुल्कों के प्रभाव का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
- डिजिटल डिवाइड को पाटने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए, जिसमें डिजिटल साक्षरता और पहुंच में सुधार शामिल है, खासकर महिलाओं और वंचित समूहों के लिए।
- UPI प्रणाली के संचालन लागतों को वहन करने के लिए वैकल्पिक वित्तीय मॉडल पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि उपयोगकर्ताओं पर बोझ कम हो।
- नियामक निकायों (जैसे RBI और GST परिषद) के बीच समन्वय और संवाद को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि एक सुसंगत नीति ढाँचा सुनिश्चित किया जा सके।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (digital public infrastructure) के रूप में UPI के दीर्घकालिक विकास और स्थिरता के लिए एक व्यापक रणनीति विकसित की जानी चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
UPI लेनदेन · मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) · वस्तु एवं सेवा कर (GST) · डिजिटल भुगतान · वित्तीय समावेशन · डिजिटल डिवाइड · भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) · डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना · आर्थिक संवृद्धि · भुगतान प्रणाली
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 279A’, ‘note’: ‘GST परिषद का गठन और कार्य’}
अवधारणा प्रवाह
UPI लेनदेन पर MDR शुल्क लागू → MDR पर GST लगाने की संभावना पर चर्चा → पूर्व RBI गवर्नर द्वारा GST न लगाने का आग्रह → डिजिटल लेनदेन की लागत में वृद्धि की चिंता → वित्तीय समावेशन और डिजिटल डिवाइड पर प्रभाव → GST परिषद के निर्णय का इंतजार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो व्यापारी क्रेडिट/डेबिट कार्ड या UPI जैसे डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक को भुगतान करता है।
2. भारत में UPI लेनदेन पर MDR शुल्क भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा निर्धारित किया जाता है।
3. वर्तमान में, ₹2,000 से अधिक के UPI पर्सन-टू-मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क लागू है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। MDR वह लागत है जो व्यापारी डिजिटल लेनदेन स्वीकार करने के लिए भुगतान करते हैं। कथन 2 गलत है। MDR शुल्क RBI के परामर्श से NPCI द्वारा निर्धारित किया जाता है, लेकिन यह सरकार की नीतिगत दिशा-निर्देशों से भी प्रभावित होता है। कथन 3 गलत है। समाचार के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के UPI पर्सन-टू-मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा, यह वर्तमान स्थिति नहीं है।
Q2. अभिकथन (A): डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा UPI लेनदेन पर MDR शुल्क को GST से मुक्त रखना आवश्यक है।
कारण (R): MDR पर GST लगाने से व्यापारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा, जिससे वे डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से हतोत्साहित हो सकते हैं और वित्तीय समावेशन में बाधा आ सकती है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है। MDR पर GST लगाने से व्यापारियों की लागत बढ़ जाएगी, जिससे डिजिटल भुगतान अपनाने की उनकी इच्छा कम हो सकती है, विशेषकर छोटे व्यापारियों के लिए। यह डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों के विपरीत होगा।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। साथ ही, MDR शुल्क पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगाने के संभावित प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में UPI की अवधारणा, इसके विकास और भारत में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में इसकी सफलता का उल्लेख होना चाहिए। इसमें भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की भूमिका को उजागर किया जाना चाहिए। MDR शुल्क की अवधारणा और इसके महत्व को समझाना चाहिए। MDR पर GST लगाने के पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत करने चाहिए, जिसमें व्यापारियों, उपभोक्ताओं और व्यापक अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों को शामिल किया जाए। वित्तीय समावेशन, डिजिटल डिवाइड और सरकार के डिजिटल इंडिया लक्ष्यों पर इसके प्रभावों का विश्लेषण करना चाहिए। पूर्व RBI गवर्नर सी. रंगराजन जैसे विशेषज्ञों के विचारों को शामिल किया जा सकता है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best economics services coaching
- Best economics optional coaching
- Best economics optional coaching for upsc
- best teacher of economics optional
- उपचुनाव 2026: असम लोकसभा और 5 विधानसभा सीटों पर मतदान आज, जाने कारण - October 6, 2026
- Supreme Court Questions ECI on Unapproved Form 6 Changes: Polity Explained - October 6, 2026
- यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर पर जीएसटी न लगाने की मांग: सी. रंगराजन - October 6, 2026

No Comments