06 Oct रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस फायर कंट्रोल प्रणाली और लांचरों की खरीद को मंजूरी दी
✎ भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा | GS पेपर III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (रक्षा प्रौद्योगिकी)
- Prelims: ब्रह्मोस मिसाइल, रक्षा अधिग्रहण, आत्मनिर्भर भारत, रक्षा मंत्रालय, भारतीय नौसेना, मेक इन इंडिया
- Essay: भारत की रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता का महत्व, आधुनिक युद्धपोतों के लिए उन्नत मिसाइल प्रणालियों की आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
यह खरीद ‘बाय इंडियन’ (Buy Indian) श्रेणी के तहत की जा रही है, जो भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली भारत और रूस का एक संयुक्त उद्यम है, जिसे ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है।
- यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है, जो ध्वनि की गति से लगभग 2.8 गुना अधिक गति से उड़ान भर सकती है।
- ब्रह्मोस मिसाइल को पनडुब्बियों, जहाजों, विमानों या भूमि से लॉन्च किया जा सकता है, जिससे यह विभिन्न सैन्य प्लेटफार्मों के लिए उपयुक्त है।
- यह अधिग्रहण भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाएगा और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देगी, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली को पहले ही भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल किया जा चुका है, जो इसकी बहुमुखी प्रतिभा और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
ब्रह्मोस मिसाइल क्या है?
- ब्रह्मोस एक मध्यम दूरी की रैमजेट (Ramjet) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया (NPO Mashinostroyeniya) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
- इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है।
- यह ‘फायर एंड फॉरगेट’ (Fire and Forget) सिद्धांत पर काम करती है, जिसका अर्थ है कि एक बार लॉन्च होने के बाद इसे लक्ष्य तक पहुंचने के लिए किसी और मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती है।
- ब्रह्मोस मिसाइल सटीक निशाना लगाने की क्षमता रखती है और विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है, जिसमें जहाज, बंकर और रडार स्टेशन शामिल हैं।
- इसके विभिन्न संस्करण विकसित किए गए हैं, जिनमें एंटी-शिप (Anti-Ship), लैंड-अटैक (Land-Attack) और एयर-लॉन्च (Air-Launch) संस्करण शामिल हैं।
- यह मिसाइल प्रणाली भारत को एक महत्वपूर्ण सामरिक बढ़त प्रदान करती है, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में।
- ब्रह्मोस की उन्नत गति और सटीकता इसे दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों के लिए पता लगाना और रोकना मुश्किल बनाती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली | भारत और रूस का संयुक्त उद्यम, विश्व की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में से एक। |
| फायर कंट्रोल सिस्टम (FCS) | मिसाइल लॉन्च करने और लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक और सॉफ्टवेयर प्रणाली। |
| लॉन्चर | जहाजों से मिसाइलों को दागने के लिए उपयोग किया जाने वाला यांत्रिक उपकरण। |
| आत्मनिर्भरता | घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना। |
| नौसेना की मारक क्षमता | भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की शत्रु लक्ष्यों को भेदने की क्षमता में वृद्धि। |
| रणनीतिक महत्व | हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और शक्ति प्रक्षेपण क्षमताओं को मजबूत करना। |
महत्व
सामरिक महत्व
- यह अधिग्रहण भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा, जिससे समुद्री क्षेत्र में भारत की निवारक क्षमता (Deterrence Capability) मजबूत होगी।
- ब्रह्मोस मिसाइलें अपनी गति और सटीकता के लिए जानी जाती हैं, जो नौसेना को किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम बनाती हैं।
- यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और समुद्री सुरक्षा हितों को रेखांकित करता है।
आर्थिक महत्व
- ₹661 करोड़ का यह अनुबंध घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देगा, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति मिलेगी।
- यह रक्षा उद्योग में रोज़गार सृजन और तकनीकी कौशल विकास को प्रोत्साहित करेगा।
- घरेलू उत्पादन से आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
तकनीकी महत्व
- फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चरों का अधिग्रहण भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन का प्रतीक है।
- यह उन्नत मिसाइल प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण और विकास में भारत की क्षमताओं को दर्शाता है।
- यह प्रणाली नौसेना को विभिन्न प्रकार के युद्धपोतों पर ब्रह्मोस मिसाइलों को एकीकृत करने में सक्षम बनाएगी।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी एकीकरण
- नए फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चरों को मौजूदा नौसैनिक प्लेटफार्मों में सफलतापूर्वक एकीकृत करना एक जटिल तकनीकी चुनौती हो सकती है।
- विभिन्न युद्धपोतों के डिज़ाइन और प्रणालियों के साथ अनुकूलता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – रक्षा प्रौद्योगिकी
2. रखरखाव और उन्नयन
- इन उन्नत प्रणालियों के दीर्घकालिक रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और भविष्य के उन्नयन को सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- घरेलू स्तर पर रखरखाव क्षमताओं का विकास महत्वपूर्ण होगा।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा – रक्षा क्षमताएं
3. लागत प्रभावी उत्पादन
- घरेलू रक्षा उत्पादन में लागत-प्रभावशीलता बनाए रखना और वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती है।
- अनुसंधान और विकास में निवेश की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
4. मानव संसाधन विकास
- इन जटिल प्रणालियों के संचालन और रखरखाव के लिए उच्च कुशल कर्मियों को प्रशिक्षित करना आवश्यक है।
- तकनीकी विशेषज्ञता का निरंतर विकास महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन – कौशल विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी जटिलता | उन्नत प्रणालियों का एकीकरण और संचालन जटिलताएँ प्रस्तुत कर सकता है। |
| रखरखाव की लागत | दीर्घकालिक रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करना महंगा हो सकता है। |
| प्रशिक्षण की आवश्यकता | इन प्रणालियों को संचालित करने और बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। |
| साइबर सुरक्षा | फायर कंट्रोल सिस्टम जैसे संवेदनशील प्रणालियों को साइबर हमलों से बचाना महत्वपूर्ण है। |
| वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला | कुछ घटकों के लिए अभी भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता बनी रह सकती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- आत्मनिर्भर भारत अभियान
- रक्षा उत्पादन में मेक इन इंडिया
आगे की राह
- घरेलू रक्षा अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना ताकि भविष्य की प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को और प्रोत्साहित करना और उन्हें रक्षा उत्पादन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाना।
- रक्षा क्षेत्र में कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना ताकि उन्नत प्रणालियों के संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध हो।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ भारत को अभी भी तकनीकी अंतराल को पाटना है।
- रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना ताकि परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके।
- निर्यात क्षमता का विकास करना ताकि भारत एक प्रमुख रक्षा निर्यातक बन सके और वैश्विक रक्षा बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रक्षा अधिग्रहण · आत्मनिर्भर भारत · रक्षा विनिर्माण · ब्रह्मोस मिसाइल · भारतीय नौसेना · मेक इन इंडिया · रक्षा आधुनिकीकरण · रणनीतिक स्वायत्तता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246 (सातवीं अनुसूची)’, ‘note’: ‘रक्षा संघ सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
रक्षा मंत्रालय द्वारा अनुबंध पर हस्ताक्षर → ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चरों का अधिग्रहण → भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर एकीकरण → नौसेना की मारक क्षमता में वृद्धि → समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक शक्ति का सुदृढ़ीकरण → आत्मनिर्भर भारत और रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस का एक संयुक्त उद्यम है।
2. यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसे पनडुब्बी, जहाज, विमान या भूमि से लॉन्च किया जा सकता है।
3. हाल ही में भारतीय नौसेना के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर के अधिग्रहण का अनुबंध रक्षा मंत्रालय ने एक विदेशी कंपनी के साथ किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। ब्रह्मोस मिसाइल भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO Mashinostroyeniya का एक संयुक्त उद्यम है। कथन 2 सही है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसकी गति ध्वनि की गति से लगभग 2.8 से 3 गुना अधिक है और इसे विभिन्न प्लेटफार्मों से लॉन्च किया जा सकता है। कथन 3 गलत है। यह अनुबंध रक्षा मंत्रालय ने भारतीय कंपनी, ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (BAPL) के साथ किया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप है।
Q2. ब्रह्मोस मिसाइल के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह ‘फायर एंड फॉरगेट’ सिद्धांत पर कार्य करती है।
2. यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है।
सही उत्तर का चयन नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके कीजिए:
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। ब्रह्मोस मिसाइल ‘फायर एंड फॉरगेट’ सिद्धांत पर कार्य करती है, जिसका अर्थ है कि एक बार लॉन्च होने के बाद इसे आगे मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती है। कथन 2 गलत है। ब्रह्मोस एक क्रूज मिसाइल है, बैलिस्टिक मिसाइल नहीं। बैलिस्टिक मिसाइलें एक प्रक्षेपवक्र में उड़ती हैं जबकि क्रूज मिसाइलें नियंत्रित उड़ान पथ का अनुसरण करती हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के महत्व का परीक्षण कीजिए। भारतीय नौसेना के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर के हालिया अधिग्रहण के संदर्भ में रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का संक्षिप्त परिचय और रक्षा क्षेत्र में इसके महत्व पर प्रकाश डालना।
2. ‘आत्मनिर्भर भारत’ का महत्व:
– रक्षा क्षमताओं में वृद्धि: स्वदेशी उत्पादन से सैन्य शक्ति में वृद्धि।
– रणनीतिक स्वायत्तता: विदेशी निर्भरता में कमी और राष्ट्रीय सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण।
– आर्थिक लाभ: रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और निर्यात क्षमता में वृद्धि।
– अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा: नवाचार और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास को प्रोत्साहन।
3. ब्रह्मोस अधिग्रहण का संदर्भ:
– अधिग्रहण का विवरण: रक्षा मंत्रालय द्वारा ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (BAPL) से ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर का अधिग्रहण।
– स्वदेशीकरण का उदाहरण: यह अनुबंध ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का एक प्रमुख उदाहरण है।
– नौसेना के लिए महत्व: भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता में वृद्धि और समुद्री सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण।
4. रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण की भूमिका:
– लागत प्रभावी समाधान: आयात की तुलना में दीर्घकालिक लागत बचत।
– आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा: भू-राजनीतिक तनाव के दौरान आपूर्ति में व्यवधान के जोखिम को कम करना।
– अनुकूलन क्षमता: विशिष्ट भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार उपकरणों का विकास और अनुकूलन।
– प्रौद्योगिकी संप्रभुता: महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों पर नियंत्रण।
5. निष्कर्ष: ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और वैश्विक रक्षा शक्ति के रूप में उसकी स्थिति को मजबूत करने में इसके योगदान पर बल देना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- India-Australia AUSTRAHIND 2026 Exercise: Key Highlights for UPSC & State PCS - October 22, 2026
- एससीओ बैठक में भारत का आतंकवाद विरोध: क्षेत्रीय सहयोग पर जोर - October 22, 2026
- SEC Directs Strict SC Order Compliance for Andhra ULB Polls - October 22, 2026

No Comments