उत्तराखंड में श्रम संहिता: सचिव ने रुद्रपुर में किया ‘श्रम संवाद’ आयोजन, जानिए प्रमुख बिंदु

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उत्तराखंड में श्रम संहिता: सचिव ने रुद्रपुर में किया ‘श्रम संवाद’ आयोजन, जानिए प्रमुख बिंदु

श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन चक्रश्रम कानूनों का सरलीकरचार संहिताओं में समेकननियमों का अधिसूचन21 नवम्बर 2025 लागूहितधारकों को प्रशिक्षणश्रम संवाद कार्यक्रमऔद्योगिक संबंधों में सनिवेश एवं विकासश्रमिक कल्याण में वृद्सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन चक्र

✎ श्रम संहिताएँ भारत में श्रम कानूनों को सरल बनाने, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास
  • Prelims: श्रम संहिताएँ, सामाजिक सुरक्षा, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY), प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PMSYM)
  • Essay: भारत में श्रम सुधारों का महत्व, सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: श्रम संहिताएँ भारत में श्रम कानूनों को सरल बनाने, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार के श्रम विभाग के सहयोग से रुद्रपुर, उत्तराखंड में ‘श्रम संवाद’ – जिला स्तरीय क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नियोक्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों को नई श्रम संहिताओं और केंद्रीय नियमों के बारे में जागरूक करना तथा उनके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना था।

पृष्ठभूमि

  • भारत में श्रम कानूनों को चार व्यापक संहिताओं में समेकित किया गया है: मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, तथा सामाजिक सुरक्षा संहिता।
  • इन श्रम संहिताओं को 21 नवंबर 2025 को लागू किया गया था, और इनके केंद्रीय नियमों को 8 मई 2026 को अधिसूचित किया गया।
  • इन संहिताओं का उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना, व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देना और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • ‘श्रम संवाद’ जैसे कार्यक्रम हितधारकों, विशेषकर नियोक्ताओं और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच नई नियामक व्यवस्था की समझ को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • कार्यक्रम में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PMSYM) जैसी प्रमुख सामाजिक सुरक्षा पहलों पर भी प्रकाश डाला गया।
  • श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, केंद्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के अधिकारियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

भारत में श्रम संहिताएँ

  • भारत सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार व्यापक संहिताओं में समेकित किया है ताकि श्रम कानूनों को सरल, तर्कसंगत और आधुनिक बनाया जा सके।
  • ये चार संहिताएँ हैं: मजदूरी संहिता, 2019; औद्योगिक संबंध संहिता, 2020; व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020; और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020।
  • मजदूरी संहिता, 2019, मजदूरी, बोनस और संबंधित मामलों से संबंधित कानूनों को समेकित करती है, जिसमें न्यूनतम मजदूरी, समान पारिश्रमिक और बोनस का भुगतान शामिल है।
  • औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, ट्रेड यूनियनों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों में रोजगार की शर्तों, औद्योगिक विवादों की जांच और निपटान से संबंधित कानूनों को संशोधित और समेकित करती है।
  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020, कारखानों, खानों, डॉक कार्य, निर्माण कार्य और अन्य प्रतिष्ठानों में कार्यरत व्यक्तियों की व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों से संबंधित कानूनों को समेकित करती है।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा से संबंधित कानूनों को संशोधित और समेकित करती है, जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ शामिल हैं।
  • इन संहिताओं का उद्देश्य श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करते हुए निवेश और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देना है।
  • इनके कार्यान्वयन से देश में श्रम कानूनों का एक समान और प्रभावी ढाँचा स्थापित होने की उम्मीद है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
श्रम संवाद कार्यक्रम श्रम संहिताओं (Labour Codes) पर जागरूकता और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना।
हितधारकों की भागीदारी नियोक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, मानव संसाधन पेशेवरों और कानूनी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना।
तकनीकी सत्र श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों, अनुपालन आवश्यकताओं और सामाजिक सुरक्षा पहलों पर व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना।
प्रश्न-उत्तर सत्र कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों का समाधान करना और नई नियामक व्यवस्था की बेहतर समझ विकसित करना।
केंद्रीय योजनाओं पर प्रकाश प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PMSYM) जैसी योजनाओं की जानकारी देना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • श्रम संहिताओं के सुचारु कार्यान्वयन से औद्योगिक संबंधों में सुधार होगा, जिससे निवेश और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
  • श्रम कानूनों के सरलीकरण से व्यवसायों के लिए अनुपालन लागत कम होगी, जिससे व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) बढ़ेगी।

सामाजिक महत्व

  • श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे PMVBRY और PMSYM के बारे में जानकारी से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लाभ मिलेगा।

शासनिक महत्व

  • केंद्र और राज्य सरकार के विभागों तथा औद्योगिक हितधारकों के बीच सहयोग से नीति कार्यान्वयन में दक्षता आएगी।
  • क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से श्रम कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन में मदद मिलेगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता का अभाव

  • कई छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों की पूरी जानकारी नहीं है।
  • असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी पहुंचाना एक चुनौती है।

2. कार्यान्वयन में जटिलता

  • नई संहिताओं के तहत अनुपालन आवश्यकताओं को समझना और लागू करना कुछ नियोक्ताओं के लिए जटिल हो सकता है।
  • राज्यों द्वारा नियमों को अंतिम रूप देने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में भिन्नता एक चुनौती हो सकती है।

3. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

  • श्रम विभाग के अधिकारियों और हितधारकों के लिए नई संहिताओं के तहत अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को समझने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
  • उद्योगों को नए नियमों के अनुरूप अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को अनुकूलित करने के लिए सहायता की आवश्यकता है।

4. डिजिटल डिवाइड

  • श्रम संहिताओं से संबंधित ऑनलाइन पोर्टलों और डिजिटल सेवाओं तक सभी हितधारकों की समान पहुंच सुनिश्चित करना एक चुनौती है, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • डिजिटल साक्षरता की कमी भी ऑनलाइन अनुपालन में बाधा बन सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
श्रम संहिताओं की समझ छोटे उद्योगों और श्रमिकों के बीच नए कानूनों के बारे में पूरी जानकारी का अभाव।
अनुपालन बोझ विशेषकर छोटे व्यवसायों के लिए नई अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई।
राज्यों द्वारा कार्यान्वयन राज्यों के बीच नियमों के कार्यान्वयन में एकरूपता की कमी।
सामाजिक सुरक्षा का विस्तार असंगठित क्षेत्र के विशाल कार्यबल तक सामाजिक सुरक्षा लाभों को प्रभावी ढंग से पहुंचाना।
प्रौद्योगिकी का उपयोग श्रम कानूनों के प्रशासन और अनुपालन में डिजिटल उपकरणों को अपनाने में चुनौतियाँ।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY)
  • प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PMSYM)

आगे की राह

  • श्रम संहिताओं पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं, विशेषकर छोटे और मध्यम उद्यमों तथा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए।
  • श्रम विभाग के अधिकारियों और औद्योगिक हितधारकों के लिए नियमित क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
  • श्रम कानूनों के अनुपालन को सरल बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-गवर्नेंस (e-Governance) समाधानों का प्रभावी उपयोग किया जाए।
  • राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन में एकरूपता सुनिश्चित की जाए।
  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए स्थानीय निकायों और नागरिक समाज संगठनों को शामिल किया जाए।
  • श्रम कानूनों के कार्यान्वयन से संबंधित हितधारकों की प्रतिक्रिया और सुझावों को नियमित रूप से एकत्र कर आवश्यक सुधार किए जाएं।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 19(1)(g): व्यापार और व्यवसाय की स्वतंत्रता
  • अनुच्छेद 23: मानव दुर्व्यापार और बलात् श्रम का प्रतिषेध
  • अनुच्छेद 24: कारखानों आदि में बच्चों के नियोजन का प्रतिषेध
  • अनुच्छेद 39(a): आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार
  • अनुच्छेद 41: काम पाने का अधिकार
  • अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाएँ

अवधारणा प्रवाह

श्रम कानूनों का सरलीकरण  →  श्रम संहिताओं का निर्माण  →  जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम  →  हितधारकों की भागीदारी और संवाद  →  प्रभावी कार्यान्वयन और अनुपालन  →  औद्योगिक संबंधों में सुधार और श्रमिक कल्याण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में श्रम संहिताएँ केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाती हैं और राज्य सरकारों द्वारा लागू की जाती हैं।
2. ‘श्रम संवाद’ कार्यक्रम का उद्देश्य श्रम कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए हितधारकों के बीच जागरूकता बढ़ाना है।
3. प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना एक स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि श्रम संहिताएँ केंद्र द्वारा अधिसूचित होती हैं और उनके कार्यान्वयन में राज्य सरकारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कथन 2 सही है क्योंकि ‘श्रम संवाद’ जैसे कार्यक्रम जागरूकता और क्षमता निर्माण पर केंद्रित होते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि PMSYM असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है।

Q2. प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता बढ़ाना।
  2. शहरी गरीबों को आवास प्रदान करना।
  3. औपचारिक क्षेत्र में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना।
  4. छोटे और मध्यम उद्यमों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।

उत्तर: औपचारिक क्षेत्र में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना। — प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) का मुख्य उद्देश्य औपचारिक क्षेत्र में रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है, विशेषकर COVID-19 महामारी के बाद।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में श्रम सुधारों के महत्व पर चर्चा कीजिए और नई श्रम संहिताओं के प्रमुख उद्देश्यों का विश्लेषण कीजिए। इन संहिताओं के प्रभावी कार्यान्वयन में ‘श्रम संवाद’ जैसे क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की भूमिका का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में श्रम सुधारों के महत्व और उनके आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावों पर प्रकाश डालें। मुख्य भाग में, नई श्रम संहिताओं (जैसे औद्योगिक संबंध संहिता, मजदूरी संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता) के प्रमुख उद्देश्यों, जैसे श्रम कानूनों का सरलीकरण, निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन और श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करना, का विश्लेषण करें। इसके बाद, ‘श्रम संवाद’ जैसे क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका का मूल्यांकन करें, जिसमें हितधारकों की भागीदारी, अनुपालन में सुधार, कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों का समाधान और नियामक व्यवस्था की बेहतर समझ विकसित करने पर जोर दिया जाए। निष्कर्ष में, श्रम सुधारों के समग्र लाभों और उनके सफल कार्यान्वयन के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Uttarakhand PCS (UKPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हाल ही में उत्तराखंड के रुद्रपुर में आयोजित ‘श्रम संवाद’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?

  1. राज्य में श्रमिकों के अधिकारों एवं कल्याण संबंधी नीतियों पर विचार-विमर्श करना
  2. उत्तराखंड में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देना
  3. राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करना
  4. उत्तराखंड में औद्योगिक विकास हेतु विदेशी निवेश आकर्षित करना

उत्तर: राज्य में श्रमिकों के अधिकारों एवं कल्याण संबंधी नीतियों पर विचार-विमर्श करना — इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य में श्रमिकों के अधिकारों, कल्याण एवं रोजगार संबंधी नीतियों पर चर्चा एवं सुझाव प्राप्त करना था।

Mains: उत्तराखंड सरकार द्वारा आयोजित ‘श्रम संवाद’ कार्यक्रम राज्य के श्रमिक वर्ग के कल्याण एवं रोजगार सृजन में किस प्रकार सहायक सिद्ध हो सकता है? अपने उत्तर में राज्य की विशिष्ट भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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