जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक आज: प्रक्रिया सुधार पर होगा चर्चा

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक आज: प्रक्रिया सुधार पर होगा चर्चा

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक आज: प्रक्रिया सुधार पर होगा चर्चा

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GST प्रक्रिया सुधार चक्र

✎ GST परिषद एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र और राज्यों के बीच GST से संबंधित सभी प्रमुख निर्णय लेता है, जिसका उद्देश्य कर अनुपालन को सरल बनाना और राजकोषीय संघवाद को बढ़ावा देना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय, सरकारी बजट
  • Prelims: GST परिषद, वस्तु एवं सेवा कर (GST), संघीय ढाँचा, राजकोषीय संघवाद, इनपुट टैक्स क्रेडिट, GST अधिनियम की धारा 69 और 132
  • Essay: भारत में राजकोषीय संघवाद की चुनौतियाँ और संभावनाएँ, आर्थिक सुधार और सुशासन: GST का योगदान

त्वरित पुनरावृत्ति: GST परिषद एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र और राज्यों के बीच GST से संबंधित सभी प्रमुख निर्णय लेता है, जिसका उद्देश्य कर अनुपालन को सरल बनाना और राजकोषीय संघवाद को बढ़ावा देना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

GST अनुपालन को व्यवसायों और करदाताओं के लिए आसान बनाने हेतु कई प्रक्रियागत सुधारों पर चर्चा की गई। इन सुधारों में पंजीकरण, रिटर्न और रिफंड तंत्र के साथ-साथ GST विवादों को सुलझाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) के प्रवाह को बेहतर बनाने के उपाय शामिल हैं, जिनका उद्देश्य अनुपालन के समय और लागत को कम करना है।

पृष्ठभूमि

  • GST परिषद एक संवैधानिक निकाय है, जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत किया गया है।
  • यह केंद्र और राज्यों दोनों के प्रतिनिधियों से मिलकर बना है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं।
  • इसका मुख्य कार्य GST से संबंधित महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों को सिफारिशें करना है।
  • GST को 1 जुलाई, 2017 को ‘एक राष्ट्र, एक कर’ के सिद्धांत के साथ लागू किया गया था, जिसने कई अप्रत्यक्ष करों का स्थान लिया।
  • समय-समय पर GST परिषद की बैठकें होती रहती हैं ताकि GST व्यवस्था में आवश्यक सुधार और संशोधन किए जा सकें।
  • वर्तमान में, सरकार GST अनुपालन को और अधिक सरल बनाने तथा करदाताओं के लिए इसे और अधिक कुशल बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

GST परिषद क्या है?

  • GST परिषद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है।
  • यह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच GST से संबंधित मुद्दों पर समन्वय स्थापित करने वाला प्रमुख निर्णय लेने वाला निकाय है।
  • केंद्रीय वित्त मंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं, और केंद्रीय राजस्व राज्य मंत्री तथा सभी राज्यों के वित्त मंत्री या उनके द्वारा नामित अन्य मंत्री इसके सदस्य होते हैं।
  • परिषद का मुख्य कार्य GST से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को सिफारिशें करना है, जैसे कि कर दरें, छूट, सीमाएँ, नियम और कानून।
  • कोई भी निर्णय परिषद में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम तीन-चौथाई बहुमत से लिया जाता है।
  • केंद्र सरकार के वोट का भार एक-तिहाई होता है, जबकि सभी राज्य सरकारों के वोटों का कुल भार दो-तिहाई होता है।
  • यह भारतीय संघीय ढाँचे में राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) का एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण है, जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर कर नीति पर निर्णय लेते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव व्यवसायों के लिए GST पंजीकरण को सरल बनाना, जिससे नए उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा।
रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में सुधार करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने को आसान बनाना और अनुपालन लागत (compliance cost) को कम करना।
रिफंड तंत्र में सुधार व्यवसायों को समय पर रिफंड सुनिश्चित करना, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी (working capital) की उपलब्धता बढ़ेगी।
विवाद समाधान तंत्र में सुधार GST से संबंधित विवादों को शीघ्र और प्रभावी ढंग से हल करना, जिससे मुकदमेबाजी कम होगी।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit – ITC) प्रवाह में सुधार ITC का सुचारु और निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित करना, जिससे व्यवसायों पर कर का बोझ कम होगा।
ई-कॉमर्स आपूर्तिकर्ताओं के लिए अनुपालन में आसानी डिजिटल अर्थव्यवस्था में शामिल व्यवसायों के लिए GST अनुपालन को सरल बनाना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • GST अनुपालन को सरल बनाने से व्यवसायों पर प्रशासनिक बोझ कम होगा, जिससे वे निवेश और विस्तार के लिए अधिक आश्वस्त महसूस करेंगे।
  • रिफंड प्रक्रिया में सुधार से व्यवसायों के लिए पूंजी की उपलब्धता बढ़ेगी, जो आर्थिक संवृद्धि (economic growth) को बढ़ावा देगी।
  • विवाद समाधान में तेजी से व्यापारिक माहौल में सुधार होगा और निवेश आकर्षित होगा।

शासन और प्रशासनिक महत्व

  • प्रक्रियागत सुधारों से कर प्रशासन (tax administration) की दक्षता बढ़ेगी और करदाताओं के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
  • जानबूझकर कर चोरी और अनजाने में हुई चूक के बीच अंतर करने से कर प्रणाली अधिक न्यायसंगत बनेगी।
  • ई-कॉमर्स आपूर्तिकर्ताओं के लिए अनुपालन में आसानी से डिजिटल अर्थव्यवस्था का एकीकरण बेहतर होगा।

संघवाद (Federalism) का महत्व

  • GST परिषद (GST Council) केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधियों से बनी एक संवैधानिक निकाय है, जो सहकारी संघवाद (cooperative federalism) का प्रतीक है।
  • परिषद की बैठकें केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय मामलों पर आम सहमति बनाने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं।
  • सुधारों पर चर्चा और निर्णय लेने में राज्यों की भागीदारी GST प्रणाली में उनके विश्वास को मजबूत करती है।

चुनौतियाँ

1. जटिल अनुपालन प्रक्रियाएँ

  • GST प्रणाली की शुरुआत के बाद से, व्यवसायों, विशेषकर छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने और रिफंड प्राप्त करने की प्रक्रियाएँ अक्सर जटिल पाई गई हैं।
  • इन जटिलताओं के कारण अनुपालन लागत (compliance cost) बढ़ जाती है और व्यवसायों के लिए समय और संसाधनों का अपव्यय होता है।

2. इनपुट टैक्स क्रेडिट का बाधित प्रवाह

  • ITC के दावों और सत्यापन से संबंधित मुद्दे अक्सर व्यवसायों के लिए पूंजी के फंसने का कारण बनते हैं, जिससे उनकी तरलता (liquidity) प्रभावित होती है।
  • ITC के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाए गए नियम कभी-कभी वैध व्यवसायों के लिए भी बाधाएँ उत्पन्न करते हैं।

3. विवादों का समाधान

  • GST से संबंधित विवादों की बढ़ती संख्या और उनके समाधान में लगने वाला समय व्यवसायों के लिए अनिश्चितता पैदा करता है।
  • विवाद समाधान तंत्र में सुधार की आवश्यकता है ताकि मामलों को तेजी से और प्रभावी ढंग से निपटाया जा सके।

4. कर चोरी और धोखाधड़ी

  • GST प्रणाली में कर चोरी और धोखाधड़ी, विशेषकर फर्जी ITC के माध्यम से, एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
  • कानून प्रवर्तन और अनुपालन के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है ताकि ईमानदार करदाताओं को परेशान किए बिना कर चोरी को रोका जा सके।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
जटिल पंजीकरण नए व्यवसायों के लिए प्रवेश बाधाएँ और अनुपालन बोझ।
रिटर्न दाखिल करने में कठिनाई समय और संसाधनों का अपव्यय, त्रुटियों की संभावना।
रिफंड में देरी व्यवसायों की कार्यशील पूंजी पर नकारात्मक प्रभाव, तरलता की कमी।
इनपुट टैक्स क्रेडिट के मुद्दे ITC का बाधित प्रवाह, पूंजी का फंसना, व्यापारिक गतिविधियों में बाधा।
GST विवाद कानूनी अनिश्चितता, मुकदमेबाजी की लागत, व्यापारिक माहौल पर नकारात्मक प्रभाव।
ई-कॉमर्स अनुपालन डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए विशिष्ट चुनौतियों का समाधान न होना।

आगे की राह

  • GST परिषद को अनुपालन प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग करना चाहिए, जैसे कि AI-आधारित सहायता और स्वचालित सत्यापन प्रणाली।
  • छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए विशेष रूप से सरल पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने के विकल्प प्रदान किए जाने चाहिए ताकि उनका बोझ कम हो सके।
  • रिफंड प्रक्रिया को पूरी तरह से स्वचालित और समयबद्ध बनाया जाना चाहिए, जिसमें स्पष्ट समय-सीमा और देरी के लिए जवाबदेही तय हो।
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग को रोकने के लिए डेटा एनालिटिक्स और जोखिम-आधारित मूल्यांकन पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, ताकि ईमानदार करदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
  • GST अपीलीय न्यायाधिकरणों (GST Appellate Tribunals) की स्थापना में तेजी लाई जानी चाहिए ताकि विवादों का शीघ्र और प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके।
  • ई-कॉमर्स आपूर्तिकर्ताओं के लिए GST अनुपालन को आसान बनाने के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश और सरलीकृत प्रक्रियाएँ विकसित की जानी चाहिए।
  • करदाताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने और उन्हें नई प्रक्रियाओं के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाने चाहिए।
  • GST कानून समिति की सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए, जिसमें जानबूझकर कर चोरी और अनजाने में हुई चूक के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 279A: GST परिषद का गठन और कार्य।

अवधारणा प्रवाह

GST परिषद की बैठक  →  प्रक्रियागत सुधारों पर चर्चा  →  अनुपालन में आसानी  →  व्यवसायों का आत्मविश्वास बढ़ना  →  निवेश और विस्तार को बढ़ावा  →  आर्थिक संवृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. GST परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं।
2. GST परिषद में केवल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
3. GST परिषद की सिफारिशें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के लिए बाध्यकारी होती हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। GST परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं। कथन 2 गलत है। GST परिषद में केंद्र और राज्यों दोनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। कथन 3 गलत है। सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय के अनुसार, GST परिषद की सिफारिशें केंद्र और राज्यों के लिए बाध्यकारी नहीं, बल्कि केवल प्रेरक होती हैं।

Q2. GST (वस्तु एवं सेवा कर) के संदर्भ में, ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (Input Tax Credit) का सबसे सटीक वर्णन क्या है?

  1. यह वह कर है जो उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की खरीद पर भुगतान करते हैं।
  2. यह वह कर है जो सरकार व्यवसायों को उनकी बिक्री पर सब्सिडी के रूप में वापस करती है।
  3. यह वह तंत्र है जिसके तहत एक व्यवसाय अपने आउटपुट पर देय कर को इनपुट पर भुगतान किए गए कर से घटा सकता है।
  4. यह वह कर है जो निर्यातकों को उनके निर्यात पर लगाया जाता है।

उत्तर: यह वह तंत्र है जिसके तहत एक व्यवसाय अपने आउटपुट पर देय कर को इनपुट पर भुगतान किए गए कर से घटा सकता है। — इनपुट टैक्स क्रेडिट वह तंत्र है जिसके तहत एक व्यवसाय अपने आउटपुट पर देय कर को उन इनपुट पर भुगतान किए गए कर से घटा सकता है जिनका उपयोग उसने वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन या आपूर्ति के लिए किया है। यह कर पर कर (cascading effect) के प्रभाव को समाप्त करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ GST परिषद भारत में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और उन प्रक्रियागत सुधारों पर चर्चा कीजिए जिनकी आवश्यकता GST व्यवस्था को और अधिक कुशल और व्यवसाय-अनुकूल बनाने के लिए है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत GST परिषद की संरचना और भूमिका का संक्षिप्त परिचय देकर करें, जिसमें यह बताया जाए कि यह कैसे केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग का प्रतीक है (अनुच्छेद 279A)। सहकारी संघवाद के उदाहरणों को उजागर करें जैसे कि साझा निर्णय लेने की प्रक्रिया, राज्यों का प्रतिनिधित्व और राजस्व साझाकरण।

फिर, इसके समालोचनात्मक परीक्षण में उन चुनौतियों और सीमाओं पर चर्चा करें जो सहकारी संघवाद के पूर्ण क्रियान्वयन में बाधा डालती हैं, जैसे कि केंद्र के पास वीटो शक्ति, राज्यों की राजस्व स्वायत्तता पर प्रभाव और कुछ निर्णयों पर असहमति।

दूसरे भाग में, GST व्यवस्था को अधिक कुशल और व्यवसाय-अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक प्रक्रियागत सुधारों पर विस्तार से चर्चा करें। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल होने चाहिए:
1. पंजीकरण प्रक्रिया का सरलीकरण।
2. रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और त्रुटियों को कम करना।
3. रिफंड (वापसी) प्रक्रिया में तेजी लाना और इसे पारदर्शी बनाना।
4. इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के प्रवाह में सुधार और इसके दुरुपयोग को रोकना।
5. GST विवाद समाधान तंत्र को मजबूत करना और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना।
6. ई-कॉमर्स आपूर्तिकर्ताओं के लिए अनुपालन को आसान बनाना।
7. जानबूझकर कर चोरी और अनजाने में हुई चूक के बीच अंतर करने के लिए कानूनों को स्पष्ट करना (धारा 69 और 132 का संदर्भ)।

निष्कर्ष में, इन सुधारों के महत्व को रेखांकित करें और यह बताएं कि कैसे ये सुधार GST को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक अधिक प्रभावी और न्यायसंगत कर प्रणाली बना सकते हैं, जिससे निवेश और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

स्रोत: orissapost.com


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