दक्षिण-पश्चिम मानसून की ओडिशा से वापसी आरंभ, जानिए प्रमुख जिले

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मॉनसून वापसी प्रक्रिया

✎ दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून की वापसी एक मौसमी घटना है जिसमें मॉनसून पवनें भारतीय उपमहाद्वीप से पीछे हटती हैं, जिससे वर्षा में कमी आती है और यह भारतीय कृषि चक्र के लिए महत्वपूर्ण है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारतीय भूगोल)  |  GS Paper III — पर्यावरण और आपदा प्रबंधन
  • Prelims: दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून, मॉनसून की वापसी, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), अल नीनो, ला नीना, भारतीय कृषि पर मॉनसून का प्रभाव, जलवायु परिवर्तन
  • Essay: भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि पर मॉनसून का प्रभाव, जलवायु परिवर्तन और भारत में मौसमी पैटर्न में बदलाव

त्वरित पुनरावृत्ति: दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून की वापसी एक मौसमी घटना है जिसमें मॉनसून पवनें भारतीय उपमहाद्वीप से पीछे हटती हैं, जिससे वर्षा में कमी आती है और यह भारतीय कृषि चक्र के लिए महत्वपूर्ण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून ने ओडिशा के कुछ हिस्सों से अपनी वापसी शुरू कर दी है। मॉनसून की वापसी की यह प्रक्रिया भारतीय उपमहाद्वीप में मौसमी चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो खरीफ फसलों की कटाई और रबी फसलों की बुवाई के लिए महत्वपूर्ण समय को चिह्नित करती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में मॉनसून एक प्रमुख मौसमी घटना है जो देश की कृषि, अर्थव्यवस्था और जल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून आमतौर पर जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है और भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 75-80 प्रतिशत प्रदान करता है।
  • मॉनसून की शुरुआत और वापसी की तिथियां हर साल थोड़ी भिन्न हो सकती हैं, जो विभिन्न वायुमंडलीय और समुद्री कारकों पर निर्भर करती हैं।
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) देश में मौसम संबंधी पूर्वानुमान और मॉनसून की निगरानी के लिए जिम्मेदार प्रमुख एजेंसी है।
  • मॉनसून की समय पर और पर्याप्त वर्षा कृषि उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है।
  • मॉनसून की वापसी आमतौर पर उत्तर-पश्चिमी भारत से शुरू होती है और धीरे-धीरे देश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों की ओर बढ़ती है।

दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून की वापसी क्या है?

  • दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून की वापसी (Withdrawal of Southwest Monsoon) वह प्रक्रिया है जब मॉनसून पवनें भारतीय उपमहाद्वीप से पीछे हटने लगती हैं, जिससे वर्षा की गतिविधि में कमी आती है।
  • मॉनसून की वापसी का मुख्य कारण सूर्य का दक्षिण की ओर बढ़ना है, जिससे उत्तरी गोलार्ध में तापमान कम होने लगता है और उच्च दाब प्रणाली (High Pressure System) विकसित होती है।
  • उच्च दाब प्रणाली के कारण मॉनसून पवनें कमजोर पड़ जाती हैं और पीछे हटने लगती हैं, जिससे शुष्क और ठंडी हवाएं चलने लगती हैं।
  • इस अवधि के दौरान, कुछ क्षेत्रों में ‘मॉनसून ब्रेक’ या ‘अक्टूबर हीट’ का अनुभव हो सकता है, जहां दिन के तापमान में वृद्धि होती है।
  • मॉनसून की वापसी के बाद, भारत में उत्तर-पूर्वी मॉनसून (North-East Monsoon) का प्रभाव शुरू होता है, जो मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के कुछ हिस्सों में वर्षा लाता है।
  • मॉनसून की वापसी की गति और समय कृषि गतिविधियों, विशेषकर रबी फसलों की बुवाई के लिए महत्वपूर्ण होता है।
  • IMD मॉनसून की वापसी की निगरानी के लिए विशिष्ट मापदंडों का उपयोग करता है, जिसमें वर्षा में कमी, वायुमंडलीय दाब में वृद्धि और हवा की दिशा में बदलाव शामिल है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मानसून की वापसी दक्षिण-पश्चिम मानसून का अपने मौसमी चक्र को पूरा करना और शुष्क मौसम की शुरुआत का संकेत
IMD की भूमिका भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा मौसम संबंधी पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करना, जो कृषि और आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है
भौगोलिक कवरेज मानसून की वापसी ओडिशा के कुछ जिलों से शुरू हुई, जो धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों में फैलेगी
कृषि पर प्रभाव मानसून की वापसी खरीफ फसलों की कटाई और रबी फसलों की बुवाई के लिए महत्वपूर्ण है
जल संसाधन प्रबंधन मानसून के बाद जल स्तर और भूजल पुनर्भरण का आकलन, जो दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए आवश्यक है

महत्व

आर्थिक महत्व

  • मानसून की वापसी खरीफ फसलों की कटाई के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती है, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित होती है।
  • यह रबी फसलों की बुवाई के लिए मिट्टी की नमी की स्थिति को प्रभावित करता है, जो आगामी कृषि चक्र के लिए महत्वपूर्ण है।
  • पर्यटन और अन्य मौसम-संवेदनशील उद्योगों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है, क्योंकि शुष्क मौसम बाहरी गतिविधियों के लिए अधिक अनुकूल होता है।

पर्यावरण और पारिस्थितिकीय महत्व

  • मानसून की वापसी के साथ, नदियों और जलाशयों में जल स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे जल प्रबंधन की आवश्यकता बढ़ जाती है।
  • यह विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों, विशेषकर आर्द्रभूमि और वन क्षेत्रों में जल उपलब्धता को प्रभावित करता है।
  • मौसम के पैटर्न में बदलाव जैव विविधता और वन्यजीवों के व्यवहार पर भी असर डालता है।

सामाजिक महत्व

  • मानसून की वापसी से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ बदल जाती हैं, जैसे जलजनित बीमारियों का कम होना और श्वसन संबंधी समस्याओं का बढ़ना।
  • यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दैनिक जीवन और गतिविधियों को प्रभावित करता है, जैसे परिवहन और निर्माण कार्य।
  • आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवधि है, क्योंकि उन्हें मानसून के बाद की स्थितियों और संभावित सूखे या जल संकट के लिए तैयार रहना होता है।

चुनौतियाँ

1. अनियमित मानसून पैटर्न

  • मानसून की शुरुआत और वापसी की तारीखों में अनिश्चितता, जिससे किसानों के लिए बुवाई और कटाई की योजना बनाना मुश्किल हो जाता है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के पैटर्न में बदलाव, जिससे कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और अन्य में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

2. जल संसाधन प्रबंधन

  • मानसून की वापसी के बाद जल स्तर में कमी, जिससे पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए जल संकट की संभावना बढ़ जाती है।
  • भूजल पुनर्भरण की धीमी गति और अत्यधिक दोहन, जिससे दीर्घकालिक जल सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न होता है।

3. कृषि पर प्रभाव

  • मानसून की वापसी में देरी या जल्दी होने से खरीफ और रबी दोनों फसलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है।
  • फसल बीमा योजनाओं और कृषि ऋण तक पहुँच की कमी, जिससे किसानों को मौसमी अनिश्चितताओं से निपटने में कठिनाई होती है।

4. आपदा जोखिम

  • मानसून की वापसी के बाद भी, चक्रवात और अन्य मौसमी घटनाएँ तटीय क्षेत्रों के लिए खतरा बनी रहती हैं, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है।
  • मौसम संबंधी सटीक पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणालियों की पहुँच और प्रभावशीलता में कमी, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
मानसून की वापसी की अनिश्चितता कृषि नियोजन में बाधा, फसल चक्र पर नकारात्मक प्रभाव
जल संकट की संभावना पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए जल उपलब्धता पर दबाव
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अत्यधिक मौसमी घटनाएँ, जैसे सूखा या बाढ़, की बढ़ती आवृत्ति
ग्रामीण आजीविका पर असर किसानों की आय में कमी और खाद्य सुरक्षा पर खतरा
बुनियादी ढाँचे पर दबाव जल निकासी, भंडारण और वितरण प्रणालियों पर बढ़ते तनाव

आगे की राह

  • मौसम संबंधी पूर्वानुमान प्रणालियों को और अधिक उन्नत बनाना और किसानों तक समय पर और सटीक जानकारी पहुँचाना।
  • जल संचयन (Water Harvesting) और भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) के प्रयासों को तेज करना, विशेषकर सूखाग्रस्त क्षेत्रों में।
  • फसल विविधीकरण (Crop Diversification) और जलवायु-स्मार्ट कृषि (Climate-Smart Agriculture) तकनीकों को बढ़ावा देना।
  • किसानों के लिए फसल बीमा योजनाओं को सुलभ और प्रभावी बनाना, ताकि वे मौसमी जोखिमों से सुरक्षित रह सकें।
  • आपदा प्रबंधन योजनाओं को मजबूत करना और स्थानीय समुदायों को मौसमी आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित करना।
  • जल उपयोग दक्षता में सुधार के लिए आधुनिक सिंचाई तकनीकों, जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, को प्रोत्साहित करना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियाँ विकसित करना और उनका कार्यान्वयन करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होती है।  →  मौसम विभाग (IMD) द्वारा इसकी घोषणा की जाती है।  →  धीरे-धीरे शुष्क मौसम की शुरुआत होती है।  →  खरीफ फसलों की कटाई और रबी फसलों की बुवाई के लिए परिस्थितियाँ बनती हैं।  →  जल संसाधनों पर प्रभाव पड़ता है, जल स्तर घटने लगता है।  →  कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ता है।  →  दीर्घकालिक जल प्रबंधन और कृषि नियोजन की आवश्यकता बढ़ती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण-पश्चिमी मानसून आमतौर पर जून की शुरुआत में भारत में प्रवेश करता है और सितंबर के अंत तक वापस चला जाता है।
2. मानसून की वापसी की प्रक्रिया उत्तर-पश्चिमी भारत से शुरू होती है।
3. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) देश में मौसम संबंधी पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करने के लिए जिम्मेदार है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। दक्षिण-पश्चिमी मानसून आमतौर पर जून की शुरुआत में आता है और सितंबर के अंत तक वापस चला जाता है। कथन 2 भी सही है। मानसून की वापसी की प्रक्रिया सामान्यतः उत्तर-पश्चिमी भारत से शुरू होती है। कथन 3 भी सही है। IMD भारत सरकार की एक प्रमुख एजेंसी है जो मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिए जिम्मेदार है।

Q2. अभिकथन (A): दक्षिण-पश्चिमी मानसून भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
कारण (R): भारत की अधिकांश कृषि वर्षा-आधारित है और मानसून की वर्षा पर निर्भर करती है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि दक्षिण-पश्चिमी मानसून भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि भारत में कृषि का एक बड़ा हिस्सा सिंचाई के लिए मानसून की वर्षा पर निर्भर करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ दक्षिण-पश्चिमी मानसून की वापसी की प्रक्रिया को समझाइए और भारतीय अर्थव्यवस्था, विशेषकर कृषि पर इसके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना: दक्षिण-पश्चिमी मानसून की वापसी की प्रक्रिया का विस्तृत विवरण (कब शुरू होती है, किन क्षेत्रों से, प्रमुख कारक)। भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके व्यापक प्रभावों का विश्लेषण, जिसमें कृषि (फसल चक्र, जल उपलब्धता, खाद्य सुरक्षा), जल संसाधन (बांधों का भरना, भूजल स्तर), ऊर्जा उत्पादन (जलविद्युत), और ग्रामीण आय शामिल हैं। जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में मानसून के बदलते पैटर्न और इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर भी चर्चा की जा सकती है।

स्रोत: orissapost.com

Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा हाल ही में जारी सूचना के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ओडिशा से वापसी की प्रक्रिया कब शुरू हुई?

  1. 15 सितंबर, 2023
  2. 20 सितंबर, 2023
  3. 25 सितंबर, 2023
  4. 1 अक्टूबर, 2023

उत्तर: 20 सितंबर, 2023 — IMD द्वारा 20 सितंबर, 2023 को दक्षिण-पश्चिम मानसून के ओडिशा से वापसी की शुरुआत की घोषणा की गई थी।

Mains: मानसून की वापसी ओडिशा की कृषि एवं जल संसाधनों पर किस प्रकार प्रभाव डालती है? राज्य में जल संरक्षण एवं कृषि उत्पादन बनाए रखने हेतु सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का विवरण प्रस्तुत कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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