10 Oct यूएस-ईयू कार्बन टैक्स विवाद: भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? यूपीएससी/पीसीएस के लिए महत्वपूर्ण
✎ कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) यूरोपीय संघ द्वारा आयातित उत्पादों पर कार्बन शुल्क लगाने की एक पहल है, जिसका उद्देश्य कार्बन लीकेज को रोकना और वैश्विक जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देना है, लेकिन यह भारत जैसे देशों के निर्यात को…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — पर्यावरण
- Prelims: कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM), यूरोपीय संघ (EU), संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR), सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN) खंड, निर्यात, कार्बन मूल्य निर्धारण, गैर-टैरिफ बाधाएँ, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
- Essay: वैश्विक व्यापार में पर्यावरण संबंधी नीतियां और विकासशील देशों पर उनका प्रभाव, जलवायु परिवर्तन से निपटने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) यूरोपीय संघ द्वारा आयातित उत्पादों पर कार्बन शुल्क लगाने की एक पहल है, जिसका उद्देश्य कार्बन लीकेज को रोकना और वैश्विक जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देना है, लेकिन यह भारत जैसे देशों के निर्यात को प्रभावित कर सकता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने यूरोपीय संघ (EU) के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) के विस्तार की जांच शुरू की है। यह कदम अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा सकता है। इस जांच से भारत को लाभ होने की संभावना है, क्योंकि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते में एक ‘फॉरवर्ड-मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) खंड शामिल है, जिसके तहत भारत को यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिका को दी जाने वाली किसी भी रियायत का लाभ मिल सकता है।
पृष्ठभूमि
- यूरोपीय संघ का कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) एक कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र है जिसका उद्देश्य आयातित उत्पादों पर कार्बन मूल्य लगाना है, जो यूरोपीय संघ के उत्पादकों द्वारा भुगतान किए जाने वाले कार्बन मूल्य के बराबर हो।
- CBAM एल्यूमीनियम, सीमेंट, बिजली, उर्वरक, हाइड्रोजन और लौह एवं इस्पात जैसे क्षेत्रों में कवर किए गए उत्पादों के यूरोपीय संघ के आयातकों के लिए आयातित वस्तुओं के अंतर्निहित उत्सर्जन की घोषणा करना अनिवार्य करता है।
- यूरोपीय संघ डिफ़ॉल्ट मूल्यों की गणना देश- और क्षेत्र-स्तरीय उत्पादन और ऊर्जा डेटा का उपयोग करके करता है, लेकिन कंपनी-स्तरीय डेटा के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए दंडात्मक मार्क-अप जोड़ता है।
- भारत ने CBAM पर यूरोपीय संघ के साथ कठिन बातचीत की है, और यह विनियमन भारत के धातु निर्यात की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रभावित करने की उम्मीद है।
- थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का अनुमान है कि CBAM से यूरोपीय संघ को भारत के लौह, इस्पात और एल्यूमीनियम उत्पादों के निर्यात पर 20-35% तक का कर लग सकता है।
- भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते में शामिल ‘फॉरवर्ड-मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) खंड भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिका को दी जाने वाली किसी भी रियायत का लाभ उठाने में मदद कर सकता है।
कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) क्या है?
- कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) यूरोपीय संघ द्वारा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक नीतिगत उपकरण है।
- इसका मुख्य उद्देश्य ‘कार्बन लीकेज’ (Carbon Leakage) को रोकना है, जहां यूरोपीय संघ के भीतर सख्त जलवायु नीतियों के कारण कंपनियां अपने उत्पादन को कम सख्त उत्सर्जन नियमों वाले देशों में स्थानांतरित कर सकती हैं।
- यह तंत्र यूरोपीय संघ में आयात होने वाले कुछ विशिष्ट उत्पादों पर कार्बन उत्सर्जन के लिए शुल्क लगाता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आयातित वस्तुओं पर भी यूरोपीय संघ के घरेलू उत्पादों के समान कार्बन मूल्य लगे।
- CBAM के तहत कवर किए गए प्रमुख क्षेत्र हैं: सीमेंट, लोहा और इस्पात, एल्यूमीनियम, उर्वरक, बिजली और हाइड्रोजन।
- आयातकों को आयातित वस्तुओं में निहित कार्बन उत्सर्जन की घोषणा करनी होती है, और यदि आवश्यक हो तो ‘CBAM प्रमाणपत्र’ खरीदने होते हैं, जिनकी कीमत यूरोपीय संघ के कार्बन उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (ETS) में कार्बन के मूल्य से जुड़ी होती है।
- यह प्रणाली यूरोपीय संघ के व्यापार भागीदारों को अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे वैश्विक स्तर पर जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा मिलता है।
- भारत जैसे विकासशील देशों के लिए, CBAM एक व्यापार बाधा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह उनके निर्यात को महंगा बना सकता है, खासकर उन उद्योगों के लिए जिनमें कार्बन उत्सर्जन अधिक होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) | यूरोपीय संघ द्वारा आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र, जिसका उद्देश्य यूरोपीय संघ के उत्पादकों द्वारा भुगतान किए गए कार्बन मूल्य के बराबर कार्बन मूल्य लगाना है। |
| कवर किए गए उत्पाद | एल्यूमीनियम, सीमेंट, बिजली, उर्वरक, हाइड्रोजन, और लौह एवं इस्पात क्षेत्र। |
| दंडात्मक मार्क-अप | यूरोपीय संघ द्वारा डिफ़ॉल्ट मूल्यों में जोड़ा गया, कंपनी-स्तरीय डेटा के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए। |
| फॉरवर्ड-मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) क्लॉज़ | भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते में शामिल एक खंड, जो भारत को यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिका को दी जाने वाली किसी भी रियायत का लाभ उठाने की अनुमति देता है। |
| अमेरिकी जांच | यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) द्वारा CBAM के विस्तार की जांच, व्यापार तनाव बढ़ने की संभावना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- CBAM भारतीय धातुओं, विशेषकर लौह, इस्पात और एल्यूमीनियम उत्पादों के यूरोपीय संघ को निर्यात पर 20-35% तक कर लगा सकता है, जिससे भारतीय निर्यात प्रभावित होंगे।
- अमेरिका द्वारा CBAM को अधिक लचीला बनाने के किसी भी उपाय से भारतीय निर्यात को लाभ मिल सकता है, क्योंकि भारत के व्यापार सौदे में MFN क्लॉज़ शामिल है।
सामरिक महत्व
- यह घटनाक्रम यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव को बढ़ा सकता है, जिसका वैश्विक व्यापार नीतियों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
- भारत की व्यापार वार्ता रणनीति, विशेषकर MFN क्लॉज़ को शामिल करना, भविष्य के व्यापार समझौतों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करती है।
पर्यावरणीय महत्व
- CBAM का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना है, लेकिन यह विकासशील देशों के लिए एक व्यापार बाधा बन सकता है, जो कम कार्बन उत्सर्जन प्रौद्योगिकियों में निवेश करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
- यह वैश्विक स्तर पर कार्बन मूल्य निर्धारण और जलवायु परिवर्तन शमन प्रयासों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है।
चुनौतियाँ
1. निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रभाव
- CBAM भारतीय लौह, इस्पात और एल्यूमीनियम उत्पादों को यूरोपीय संघ के बाजारों में 20-35% तक महंगा बना सकता है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाएगी।
- भारतीय उद्योग, जो मुख्य रूप से ब्लास्ट फर्नेस मार्ग का उपयोग करते हैं, CBAM की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कम तैयार हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना
2. गैर-टैरिफ बाधाएं
- CBAM को भारतीय उद्योग द्वारा एक गैर-टैरिफ बाधा के रूप में देखा जा रहा है, जो व्यापार को प्रतिबंधित करता है, भले ही इसका उद्देश्य पर्यावरणीय हो।
- यूरोपीय संघ द्वारा स्टील स्क्रैप के निर्यात पर अंकुश लगाने से भी भारतीय निर्माताओं के लिए कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित होती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: व्यापार समझौते
3. सत्यापन और डेटा चुनौतियां
- CBAM के लिए कंपनी-स्तरीय डेटा को यूरोपीय संघ-मान्यता प्राप्त तृतीय-पक्ष सत्यापनकर्ता द्वारा सत्यापित करने की आवश्यकता है, जो भारतीय छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए एक चुनौती हो सकती है।
- डिफ़ॉल्ट मूल्यों में दंडात्मक मार्क-अप कंपनी-स्तरीय डेटा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहन देता है, लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा करना जटिल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति
4. प्रौद्योगिकी उन्नयन की आवश्यकता
- भारतीय इस्पात निर्माताओं को कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों, जैसे स्क्रैप-आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) मार्गों में निवेश करने की आवश्यकता होगी, जिसके लिए महत्वपूर्ण पूंजी और समय की आवश्यकता होगी।
- यह संक्रमण भारतीय उद्योगों के लिए एक बड़ी वित्तीय और तकनीकी चुनौती प्रस्तुत करता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च कार्बन उत्सर्जन | भारतीय इस्पात उत्पादन मुख्य रूप से ब्लास्ट फर्नेस मार्ग का उपयोग करता है, जिसमें उच्च उत्सर्जन होता है, जिससे CBAM के तहत उच्च कर लगता है। |
| निर्यात पर कर | CBAM भारतीय लौह, इस्पात और एल्यूमीनियम निर्यात पर 20-35% कर लगाएगा, जिससे यूरोपीय संघ के बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता कम होगी। |
| सत्यापन की लागत | कंपनी-स्तरीय डेटा को यूरोपीय संघ-मान्यता प्राप्त तृतीय-पक्ष सत्यापनकर्ता द्वारा सत्यापित करने की आवश्यकता से छोटे व्यवसायों के लिए लागत बढ़ सकती है। |
| प्रौद्योगिकी अंतराल | भारतीय उद्योग कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों को अपनाने में पीछे हैं, जिससे CBAM की आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। |
| व्यापार तनाव | CBAM पर अमेरिका की जांच यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव को बढ़ा सकती है, जिसका वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। |
आगे की राह
- भारतीय उद्योगों को कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों, जैसे स्क्रैप-आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) और गैस-आधारित डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- सरकार को CBAM के तहत भारतीय निर्यातकों के लिए सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाने और लागत कम करने के लिए यूरोपीय संघ के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए।
- भारत को यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच CBAM पर चल रही वार्ता पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए और MFN क्लॉज़ का उपयोग करके किसी भी रियायत का लाभ उठाना चाहिए।
- घरेलू स्तर पर कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र विकसित करने पर विचार करना, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो, ताकि CBAM जैसे तंत्रों के प्रभाव को कम किया जा सके।
- भारतीय निर्यातकों को CBAM की आवश्यकताओं के बारे में शिक्षित करना और उन्हें अनुपालन के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करना।
- अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना ताकि भारतीय उद्योग कम कार्बन उत्सर्जन वाली उत्पादन प्रक्रियाओं को अपना सकें और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रह सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कार्बन सीमा समायोजन तंत्र · CBAM · यूरोपीय संघ · अमेरिका · भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता · सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र खंड · फॉरवर्ड-सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र खंड · निर्यात · गैर-शुल्क बाधाएँ · जलवायु परिवर्तन · कार्बन मूल्य निर्धारण · इस्पात उद्योग · एल्युमीनियम उद्योग
अवधारणा प्रवाह
यूरोपीय संघ CBAM लागू करता है → CBAM भारतीय निर्यात पर कर लगाता है → अमेरिका CBAM की जांच शुरू करता है → अमेरिका CBAM में लचीलापन चाहता है → भारत MFN क्लॉज़ के तहत लाभ उठा सकता है → भारतीय निर्यात को संभावित लाभ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह यूरोपीय संघ द्वारा आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लगाने की एक प्रणाली है।
2. इसका उद्देश्य यूरोपीय संघ के उत्पादकों द्वारा भुगतान किए जाने वाले कार्बन मूल्य के बराबर आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लागू करना है।
3. यह मुख्य रूप से कृषि और खाद्य उत्पादों को लक्षित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। CBAM यूरोपीय संघ द्वारा आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लगाने की एक प्रणाली है, जिसका उद्देश्य यूरोपीय संघ के उत्पादकों द्वारा भुगतान किए जाने वाले कार्बन मूल्य के बराबर आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लागू करना है। कथन 3 गलत है, क्योंकि CBAM मुख्य रूप से एल्युमीनियम, सीमेंट, बिजली, उर्वरक, हाइड्रोजन और लौह व इस्पात जैसे क्षेत्रों को लक्षित करता है, न कि कृषि और खाद्य उत्पादों को।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) के संभावित प्रभावों के संबंध में सही है/हैं?
1. यह भारत के लौह, इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों के यूरोपीय संघ को निर्यात को प्रभावित कर सकता है।
2. यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक गैर-शुल्क बाधा (Non-Tariff Barrier) के रूप में कार्य कर सकता है।
3. भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते में ‘फॉरवर्ड-सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र’ (Forward-Most Favoured Nation) खंड भारत को CBAM के तहत अन्य देशों को दी गई रियायतों का लाभ उठाने में मदद कर सकता है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी कथन सही हैं। CBAM भारत के लौह, इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों के निर्यात को प्रभावित कर सकता है और इसे एक गैर-शुल्क बाधा के रूप में देखा जा रहा है। भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते में ‘फॉरवर्ड-सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र’ खंड भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ द्वारा अन्य देशों को दी जाने वाली रियायतों का लाभ उठाने में सक्षम बनाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) क्या है और यह भारत के निर्यात को कैसे प्रभावित कर सकता है? भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते में ‘फॉरवर्ड-सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र’ खंड की प्रासंगिकता की चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) की संक्षिप्त परिभाषा दें – यूरोपीय संघ द्वारा आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लगाने की एक प्रणाली।
2. **CBAM का उद्देश्य:** बताएं कि इसका उद्देश्य यूरोपीय संघ के उत्पादकों द्वारा भुगतान किए जाने वाले कार्बन मूल्य के बराबर आयातित वस्तुओं पर कार्बन मूल्य लागू करना है, ताकि कार्बन रिसाव (Carbon Leakage) को रोका जा सके।
3. **CBAM का भारत पर प्रभाव:**
* **नकारात्मक प्रभाव:** भारत के लौह, इस्पात और एल्युमीनियम जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर 20-35% तक कर लगने का अनुमान।
* **गैर-शुल्क बाधा:** इसे एक गैर-शुल्क बाधा के रूप में देखा जा रहा है, विशेषकर इस्पात स्क्रैप के निर्यात पर प्रतिबंध के साथ।
* **उत्पादन प्रक्रियाएँ:** भारतीय निर्माताओं द्वारा मुख्य रूप से ब्लास्ट फर्नेस मार्ग का उपयोग, जो उच्च उत्सर्जन वाला है, उन्हें CBAM के लिए अप्रस्तुत बनाता है।
4. **’फॉरवर्ड-सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र’ खंड की प्रासंगिकता:**
* **परिभाषा:** समझाएं कि यह खंड भारत को यूरोपीय संघ द्वारा किसी अन्य देश (जैसे अमेरिका) को दी जाने वाली किसी भी रियायत या लचीलेपन का लाभ उठाने की अनुमति देता है।
* **लाभ:** अमेरिका द्वारा CBAM की जांच और संभावित लचीलेपन की मांग से भारत को भी समान लाभ मिल सकते हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों पर CBAM का बोझ कम हो सकता है।
* **रणनीतिक महत्व:** यह खंड भारतीय व्यापार वार्ताकारों की दूरदर्शिता को दर्शाता है और भविष्य में व्यापार बाधाओं से निपटने में सहायक है।
5. **निष्कर्ष:** CBAM के पर्यावरणीय लक्ष्यों और व्यापारिक प्रभावों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दें, और भारत के लिए इस खंड के महत्व को दोहराएं।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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