13 Oct भाषिणी: बहुभाषी AI क्रांति, सीमाओं को लाँघेगी
✎ BHASHINI = NLTM का क्रियान्वयन-मंच (जुलाई 2022, MeitY/डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन) — 22 अनुसूचित भाषाओं में वाणी-प्रथम AI अनुवाद; भाषादान से जन-सहभागी डेटा; NCGG, मसूरी में प्रस्तुति से शासन और वैश्विक साझेदारी दोनों को बल।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन: ई-गवर्नेंस, नागरिक-केंद्रित सेवा-प्रदायगी, सिविल सेवकों का क्षमता निर्माण | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध: डिजिटल कूटनीति और विकासशील देशों के साथ प्रौद्योगिकी-साझेदारी | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना | GS Paper I / II — भारतीय भाषाएँ, भाषायी विविधता और संवैधानिक प्रावधान
- Prelims: BHASHINI (Bhasha Interface for India), राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (NLTM), डिजिटल इंडिया BHASHINI प्रभाग (DIBD), Digital India Corporation (MeitY के अधीन), स्वचालित वाक् पहचान (ASR) और पाठ-से-वाक् (TTS), तंत्रिका मशीनी अनुवाद (NMT), भाषादान (Bhashadaan) — जन-सहभागिता से डेटा संग्रह, संविधान की आठवीं अनुसूची — 22 भाषाएँ, राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG), मसूरी, IndiaAI मिशन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)
- Essay: भाषा की बाधा से मुक्त भारत: प्रौद्योगिकी के माध्यम से डिजिटल समावेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सुशासन: नागरिक की अपनी भाषा में शासन तक पहुँच
त्वरित पुनरावृत्ति: BHASHINI = NLTM का क्रियान्वयन-मंच (जुलाई 2022, MeitY/डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन) — 22 अनुसूचित भाषाओं में वाणी-प्रथम AI अनुवाद; भाषादान से जन-सहभागी डेटा; NCGG, मसूरी में प्रस्तुति से शासन और वैश्विक साझेदारी दोनों को बल।
यह खबर चर्चा में क्यों?
PIB की विज्ञप्ति के अनुसार राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (National Centre for Good Governance – NCGG), मसूरी में भारत के वाणी-प्रथम (Voice-First) बहुभाषी AI मंच BHASHINI को प्रस्तुत किया गया। इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं की इस डिजिटल अवसंरचना को सिविल सेवकों और प्रशिक्षण-कार्यक्रमों से जुड़े प्रतिभागियों तक पहुँचाना और इसे अन्य देशों के साथ साझा करने की संभावनाएँ तलाशना है। NCGG लोक प्रशासन के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का संस्थान है, जो अन्य विकासशील देशों के अधिकारियों को भी प्रशिक्षित करता है। इसलिए यह पहल शासन में भाषायी समावेशन और भारत की डिजिटल कूटनीति, दोनों से जुड़ती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ सूचीबद्ध हैं। इनके अतिरिक्त सैकड़ों बोलियाँ प्रचलित हैं। अंग्रेज़ी-केंद्रित डिजिटल सामग्री के कारण बड़ी आबादी सेवाओं और सूचना तक पूरी तरह नहीं पहुँच पाती थी। इसे ‘भाषायी डिजिटल विभाजन’ कहा जाता है।
- इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (National Language Translation Mission – NLTM) की परिकल्पना की। BHASHINI इसी मिशन का क्रियान्वयन-मंच है। इसे जुलाई 2022 में डिजिटल इंडिया सप्ताह के दौरान आरंभ किया गया।
- इसका संचालन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन की इकाई ‘डिजिटल इंडिया BHASHINI प्रभाग’ करता है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बहुभाषिकता और मातृभाषा में शिक्षण पर बल देती है। संविधान का अनुच्छेद 350A प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा का प्रावधान करता है, और अनुच्छेद 351 हिन्दी के विकास का निर्देश देता है। BHASHINI इन संवैधानिक एवं नीतिगत लक्ष्यों को तकनीकी आधार प्रदान करता है।
- IndiaAI मिशन (मार्च 2024 में स्वीकृत) स्वदेशी AI क्षमता, कंप्यूटिंग अवसंरचना और डेटासेट के निर्माण पर केंद्रित है। भारतीय भाषाओं के लिए बड़े भाषा-मॉडल और डेटासेट इस व्यापक AI पारिस्थितिकी का भाग हैं।
- भारत UPI, आधार और कोविन जैसी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure – DPI) को वैश्विक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। BHASHINI को भाषा के क्षेत्र में इसी श्रृंखला की अगली कड़ी माना जा रहा है।
BHASHINI क्या है?
- BHASHINI का पूरा नाम ‘Bhasha Interface for India’ है। यह एक राष्ट्रीय भाषा-प्रौद्योगिकी मंच है, जो भारतीय भाषाओं में AI-आधारित अनुवाद और वाक्-सेवाएँ उपलब्ध कराता है। यह NLTM का क्रियान्वयन-माध्यम है।
- मुख्य सेवाएँ: स्वचालित वाक् पहचान (ASR – बोले हुए शब्दों को पाठ में बदलना), पाठ-से-वाक् (TTS), तंत्रिका मशीनी अनुवाद (NMT), प्रकाशीय अक्षर पहचान (OCR) और भाषा-पहचान। इन सेवाओं को एक साथ जोड़कर आवाज़ से आवाज़ में अनुवाद संभव होता है।
- ‘वाणी-प्रथम’ (Voice-First) दृष्टिकोण का अर्थ है कि उपयोगकर्ता को टाइप करना या पढ़ना न पड़े, वह बोलकर सेवा ले सके। यह कम साक्षर, वृद्ध, दिव्यांग और पहली बार इंटरनेट उपयोग करने वाले नागरिकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
- भाषादान (Bhashadaan) BHASHINI की जन-सहभागिता पहल है। इसमें नागरिक अपनी भाषा में वाक्य बोलकर या लिखकर, अथवा अनुवाद की जाँच करके डेटासेट के निर्माण में योगदान देते हैं। इससे कम-संसाधन वाली भाषाओं के लिए डेटा की कमी दूर होती है।
- इसकी अवसंरचना खुली (Open) है। सरकारी विभाग, स्टार्टअप और निजी संस्थाएँ API के माध्यम से इन सेवाओं को अपने ऐप और पोर्टल में जोड़ सकती हैं। इससे अलग-अलग विभागों को अपने स्तर पर अनुवाद-प्रणाली नहीं बनानी पड़ती और दोहराव घटता है।
- शासन में उपयोग: नागरिक अपनी भाषा में शिकायत दर्ज कर सकते हैं, योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं और सरकारी दस्तावेज़ों का अनुवाद पा सकते हैं। इससे सेवा-प्रदायगी अधिक समावेशी और पारदर्शी बनती है।
- NCGG, मसूरी कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के अंतर्गत कार्य करने वाला संस्थान है। यहाँ प्रस्तुति से भावी और वर्तमान अधिकारियों में भाषा-प्रौद्योगिकी के प्रति जागरूकता बढ़ती है। साथ ही भारत की ‘डिजिटल सार्वजनिक वस्तु’ की साझेदारी का अवसर मिलता है।
- चुनौतियाँ: बोलियों और उच्चारण-भिन्नता में सटीकता, कम-संसाधन भाषाओं के डेटा की कमी, डेटा गोपनीयता (डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के संदर्भ में), इंटरनेट और उपकरणों की पहुँच, तथा अनुवाद में सांस्कृतिक और विधिक शब्दावली की शुद्धता।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (National Language Translation Mission) के अंतर्गत BHASHINI | इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की यह पहल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित अनुवाद और भाषा-प्रौद्योगिकी को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराती है। इसे जुलाई 2022 में आरंभ किया गया। |
| वाणी-प्रथम (Voice-First) दृष्टिकोण | बोलकर सेवा लेने की सुविधा से कम साक्षर और पहली बार इंटरनेट अपनाने वाले नागरिक भी डिजिटल सेवाओं तक पहुँच सकते हैं। केवल पाठ-आधारित इंटरफ़ेस की सीमा इससे टूटती है। |
| ओपन-सोर्स और API-आधारित मंच | सरकारी विभाग, स्टार्ट-अप और निजी संस्थाएँ अनुवाद, वाक्-से-पाठ और पाठ-से-वाक् मॉडल अपने ऐप में जोड़ सकती हैं। यह डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) की भावना के अनुरूप है। |
| भाषा-दान (Bhasha Daan) जैसी जन-सहभागिता | नागरिक आवाज़ और पाठ के नमूने देकर डेटासेट समृद्ध करते हैं। इससे कम संसाधन वाली भाषाओं और बोलियों के लिए आँकड़े जुटाने में मदद मिलती है। |
| भारतीय भाषाओं का व्यापक समर्थन | संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ सम्मिलित हैं। मंच का लक्ष्य इन सभी में सेवाएँ देना है, ताकि अंग्रेज़ी या हिन्दी न जानने वाले नागरिक शासन-सेवाओं से बाहर न रहें। |
| NCGG, मसूरी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहुँच | राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (National Centre for Good Governance) लोक सेवकों और विभिन्न देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षण देता है। इस मंच से भारत का भाषा-प्रौद्योगिकी मॉडल अन्य देशों के साथ साझा हो सकता है। यह भारत की ‘डिजिटल कूटनीति’ का भाग है। |
महत्व
सामाजिक एवं समावेशी पक्ष
- भाषाई बाधा घटने से कल्याणकारी योजनाओं, स्वास्थ्य, कृषि सलाह और शिकायत निवारण की जानकारी नागरिक की अपनी भाषा में मिलती है।
- वाणी-प्रथम सुविधा डिजिटल विभाजन को कम करती है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और कम साक्षर समूहों के लिए।
- बोलियों और जनजातीय भाषाओं के डिजिटलीकरण से भाषाई विविधता का संरक्षण होता है और भाषाई अल्पसंख्यकों की डिजिटल उपस्थिति बढ़ती है।
शासन एवं प्रशासनिक पक्ष
- अधिकारियों और नागरिकों के बीच संवाद सुगम होता है। इससे सेवा-प्रदान की गुणवत्ता और प्रशासन में उत्तरदायित्व बढ़ता है।
- न्यायिक निर्णयों, विधायी दस्तावेज़ों और सरकारी अधिसूचनाओं का बहुभाषी अनुवाद संभव हो सकता है, जिससे सूचना तक पहुँच बेहतर होती है।
- NCGG जैसे संस्थान में इसका प्रदर्शन लोक सेवकों की डिजिटल क्षमता निर्माण (Capacity Building) में सहायक है।
आर्थिक एवं प्रौद्योगिकीय पक्ष
- भारतीय भाषाओं के लिए स्वदेशी AI मॉडल विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता घटाते हैं।
- खुले API से भारतीय स्टार्ट-अप के लिए भाषा-आधारित नवाचार का बाज़ार बनता है। ई-वाणिज्य, फ़िनटेक और ई-शिक्षा में स्थानीय भाषा के उपयोगकर्ता बढ़ते हैं।
- डेटा-एनोटेशन और भाषा-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में नए रोज़गार की संभावना बनती है।
सामरिक एवं कूटनीतिक पक्ष
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (UPI, आधार जैसे मॉडल) की तरह BHASHINI भी वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ साझा किया जा सकता है। इससे भारत की सॉफ़्ट पावर बढ़ती है।
- बहुभाषी देशों को कम लागत वाला, समावेशी और ओपन-सोर्स विकल्प मिलता है, जिससे भारत की तकनीकी नेतृत्व की भूमिका सुदृढ़ होती है।
- AI के क्षेत्र में भारत की ऐसी पहचान बनती है जो केवल बड़े-भाषा मॉडल की होड़ पर नहीं, बल्कि जन-उपयोगी और समावेशी अनुप्रयोगों पर आधारित है।
चुनौतियाँ
1. कम संसाधन वाली भाषाओं के लिए आँकड़ों का अभाव
- अनेक भारतीय भाषाओं और बोलियों के पास पर्याप्त डिजिटल पाठ और वाक् डेटा नहीं है, इसलिए मॉडल की सटीकता असमान रहती है।
- क्षेत्रीय उच्चारण, मिश्रित भाषा (कोड-मिक्सिंग) और बोलियों की विविधता वाक्-पहचान को कठिन बनाती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; GS-1: भारतीय भाषाएँ और विविधता
2. सटीकता, पूर्वाग्रह और विश्वसनीयता
- AI अनुवाद में त्रुटि होने पर विधिक या चिकित्सा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
- प्रशिक्षण डेटा में निहित पूर्वाग्रह कुछ भाषाओं या समुदायों के साथ भेदभावपूर्ण परिणाम दे सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: AI के नैतिक पक्ष; GS-4: प्रौद्योगिकी और नीतिशास्त्र
3. डेटा गोपनीयता और आवाज़ संबंधी सुरक्षा
- आवाज़ के नमूने व्यक्तिगत पहचान से जुड़े हो सकते हैं। सहमति, भंडारण और दुरुपयोग रोकने की स्पष्ट व्यवस्था आवश्यक है।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप अनुपालन और सीमा-पार डेटा प्रवाह पर स्पष्टता चाहिए।
यूपीएससी लिंक: GS-2/3: निजता, साइबर सुरक्षा, डेटा शासन
4. डिजिटल विभाजन और अवसंरचना की सीमाएँ
- दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट संपर्क, स्मार्टफ़ोन की उपलब्धता और डिजिटल साक्षरता अपर्याप्त है।
- तकनीक होने पर भी सेवा-विभागों द्वारा उसे अपनाने की गति धीमी रह सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप; GS-3: समावेशी संवृद्धि
5. वैश्विक विस्तार की चुनौतियाँ
- अन्य देशों की भाषाओं, नियामक ढाँचों और डेटा-संप्रभुता की माँगों के अनुरूप मॉडल ढालना आवश्यक होगा।
- बड़ी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा और कंप्यूट संसाधनों की लागत एक बाधा है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: अंतरराष्ट्रीय संबंध; भारत की डिजिटल कूटनीति
6. संस्थागत निरंतरता और वित्तपोषण
- क्राउडसोर्सिंग पर निर्भर डेटा-संग्रह में गुणवत्ता नियंत्रण और स्वयंसेवकों की सतत सहभागिता कठिन है।
- मिशन अवधि के बाद दीर्घकालिक वित्त और रखरखाव की स्पष्ट व्यवस्था आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन; GS-3: सार्वजनिक निवेश
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डेटा की कमी | कम संसाधन वाली भाषाओं और बोलियों में मॉडल की सटीकता कम रहती है |
| सटीकता और पूर्वाग्रह | संवेदनशील सेवाओं में अनुवाद-त्रुटि से नागरिक अधिकारों और सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है |
| आवाज़ की निजता | सहमति, भंडारण और दुरुपयोग रोकने के लिए सुदृढ़ संरक्षण ढाँचा आवश्यक है |
| डिजिटल विभाजन | संपर्क और साक्षरता के अभाव में लाभ सीमित वर्गों तक रह सकता है |
| वैश्विक अनुकूलन | अन्य देशों की भाषाओं, कानूनों और डेटा-संप्रभुता की माँगों के अनुरूप ढालना कठिन है |
| निरंतर वित्तपोषण | क्राउडसोर्सिंग की गुणवत्ता और मिशन के बाद के रखरखाव पर अनिश्चितता है |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (National Language Translation Mission) – BHASHINI का मूल ढाँचा
- डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (Digital India BHASHINI Division) – डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के अंतर्गत कार्यान्वयन इकाई
- भाषा-दान (Bhasha Daan) – भाषा डेटा के लिए जन-सहभागिता का मंच
- इंडिया AI मिशन (IndiaAI Mission) – AI के लिए कंप्यूट, डेटासेट और स्वदेशी मॉडल को सहायता
- भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (ITEC) – विदेशी अधिकारियों के प्रशिक्षण का मार्ग, जिससे साझेदार देशों तक पहुँच संभव है
आगे की राह
- कम संसाधन वाली भाषाओं और जनजातीय बोलियों के लिए लक्षित डेटा-संग्रह अभियान चलाया जाए, जिसमें विश्वविद्यालयों, भाषा संस्थानों और समुदायों की भागीदारी हो।
- संवेदनशील क्षेत्रों (न्याय, स्वास्थ्य, विधि) में मानव-समीक्षा के साथ AI अनुवाद का उपयोग हो तथा सटीकता के मानक और स्वतंत्र परीक्षण की व्यवस्था बने।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप आवाज़-डेटा के लिए स्पष्ट सहमति, अनामीकरण और भंडारण संबंधी मानदंड लागू किए जाएँ।
- पंचायतों, सामान्य सेवा केंद्रों और स्थानीय निकायों में वाणी-आधारित सेवाओं का एकीकरण हो तथा डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम साथ चलें।
- NCGG और ITEC जैसे मंचों से साझेदार देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर मॉडल का हस्तांतरण हो, साथ ही स्थानीय भाषाओं के लिए सह-विकास की व्यवस्था रहे।
- ओपन-सोर्स और अंतर-संचालनीयता के सिद्धांतों के साथ वैश्विक मानकों पर संवाद किया जाए, ताकि भारतीय मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य बनें।
- दीर्घकालिक वित्त-पोषण, स्टार्ट-अप के लिए प्रोत्साहन और कंप्यूट-सुविधाओं तक सुलभ पहुँच सुनिश्चित हो।
- उपयोगकर्ता-प्रतिक्रिया तंत्र बनाया जाए, जिससे त्रुटियों का सुधार और मॉडल का निरंतर उन्नयन हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भाषिणी (BHASHINI) एवं राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन · वाणी-प्रथम (Voice-First) डिजिटल समावेशन · डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) · भाषाई विविधता एवं आठवीं अनुसूची · भाषादान (जन-सहभागिता से डेटा संग्रह) · स्वचालित वाक् पहचान एवं वाक् संश्लेषण · मशीनी अनुवाद एवं बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता · डिजिटल विभाजन · ई-शासन एवं अंतिम छोर तक सेवा-वितरण · क्षमता निर्माण (NCGG) · डेटा संप्रभुता एवं निजता · ओपन-सोर्स डिजिटल सार्वजनिक वस्तु
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- आठवीं अनुसूची – 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त
- अनुच्छेद 343 – संघ की राजभाषा हिन्दी
- अनुच्छेद 345 – राज्य की राजभाषा का निर्धारण
- अनुच्छेद 350A – प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा-शिक्षा
- अनुच्छेद 351 – हिन्दी के विकास का निर्देश
- अनुच्छेद 29(1) – भाषा-संस्कृति संरक्षण का अधिकार
अवधारणा प्रवाह
भारत की भाषाई विविधता और अंग्रेज़ी/हिन्दी तक सीमित डिजिटल सेवाएँ → भाषाई बाधा से नागरिकों का डिजिटल बहिष्करण और सेवाओं तक असमान पहुँच → राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन के अंतर्गत BHASHINI का ओपन-सोर्स, वाणी-प्रथम मंच → भाषा-दान और डेटासेट से 22 भाषाओं के AI मॉडल का विकास और सरकारी सेवाओं में एकीकरण → भाषाई समावेशन, बेहतर सेवा-प्रदान और सुशासन में सुधार → NCGG, मसूरी जैसे संस्थानों के माध्यम से अन्य देशों के अधिकारियों के साथ अनुभव-साझाकरण → वैश्विक दक्षिण में भारतीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का प्रसार और सॉफ़्ट पावर में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. BHASHINI के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (National Language Translation Mission) के अंतर्गत विकसित मंच है, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं में ओपन-सोर्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
2. इसका क्रियान्वयन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग द्वारा किया जाता है।
3. यह केवल लिखित पाठ के अनुवाद तक सीमित है और इसमें वाक् (Speech) आधारित सेवाएँ सम्मिलित नहीं हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: BHASHINI राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन का क्रियान्वयन-मंच है और भारतीय भाषाओं के लिए ओपन-सोर्स भाषा-प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराता है। कथन 2 सही है: इसे MeitY के अधीन डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन का डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग संचालित करता है। कथन 3 गलत है: इसमें स्वचालित वाक् पहचान, पाठ से वाक् तथा वाक् से वाक् अनुवाद जैसी वाणी-आधारित सेवाएँ भी हैं, और ‘वाणी-प्रथम’ पहुँच इसका मुख्य बल है।
Q2. अभिकथन (A): वाणी-प्रथम बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत में डिजिटल समावेशन के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है।
कारण (R): भारत की बड़ी जनसंख्या अपनी मातृभाषा में बोलकर सहज है, जबकि लिखित और अंग्रेज़ी-प्रधान डिजिटल इंटरफ़ेस उसके लिए बाधा बनते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, किंतु R गलत है
- A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है — वाणी-आधारित इंटरफ़ेस पढ़ने-लिखने या अंग्रेज़ी की जानकारी की शर्त हटाकर डिजिटल विभाजन को घटाते हैं। इसलिए R, A का सीधा कारण बताता है।
Q3. भाषा से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों (स्तंभ I) का उनके विषय (स्तंभ II) से मिलान कीजिए:
स्तंभ I: A. अनुच्छेद 343 B. अनुच्छेद 344 C. अनुच्छेद 350A D. अनुच्छेद 350B
स्तंभ II: 1. प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा 2. भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी 3. संघ की राजभाषा 4. राजभाषा के संबंध में आयोग और संसदीय समिति
- A-3, B-4, C-1, D-2
- A-4, B-3, C-2, D-1
- A-3, B-4, C-2, D-1
- A-1, B-2, C-3, D-4
उत्तर: A-3, B-4, C-1, D-2 — अनुच्छेद 343 संघ की राजभाषा से, 344 राजभाषा आयोग और संसदीय समिति से, 350A प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा से तथा 350B भाषाई अल्पसंख्यकों के विशेष अधिकारी से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भाषिणी (BHASHINI) जैसे वाणी-प्रथम बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंच भारत के भाषाई बहुलवाद और डिजिटल समावेशन को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकते हैं? शासन में इनके उपयोग की प्रमुख चुनौतियों का भी आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: भूमिका: भाषिणी राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन का क्रियान्वयन-मंच है (जुलाई 2022 में शुभारंभ), जिसे MeitY के अधीन डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन का डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग चलाता है। यह ASR, TTS, मशीनी अनुवाद और OCR जैसी ओपन-सोर्स भाषा-सेवाएँ देता है। NCGG, मसूरी में इसका प्रदर्शन लोक सेवकों के क्षमता निर्माण और अन्य देशों के साथ साझेदारी की संभावना दर्शाता है।
भाग 1, संभावनाएँ: (i) संविधान की आठवीं अनुसूची की 22 भाषाओं और अनुच्छेद 350A तथा 351 की भावना के अनुरूप भाषाई बहुलवाद का संरक्षण; (ii) वाणी-आधारित पहुँच से निरक्षर और कम डिजिटल-साक्षर नागरिकों का समावेशन, यानी डिजिटल विभाजन में कमी; (iii) ई-शासन, न्यायिक अनुवाद, कृषि, स्वास्थ्य और DBT जैसी सेवाओं का अंतिम छोर तक वितरण; (iv) भाषादान के माध्यम से जन-सहभागिता से डेटा-संग्रह; (v) डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (UPI, आधार की तरह) के भारतीय मॉडल का वैश्विक दक्षिण को निर्यात, जो सॉफ्ट पावर और डिजिटल कूटनीति का साधन है; (vi) NCGG के माध्यम से अधिकारियों का प्रशिक्षण।
भाग 2, चुनौतियाँ: (i) अल्प-संसाधन भाषाओं, बोलियों और जनजातीय भाषाओं के लिए प्रशिक्षण-डेटा की कमी तथा उच्चारण और बोली की विविधता से घटती सटीकता; (ii) अनुवाद में त्रुटि और सांस्कृतिक या विधिक संदर्भ की हानि, जो न्याय और कल्याण-सेवाओं में जोखिम पैदा करती है; (iii) डेटा-निजता और सहमति के प्रश्न तथा डिजिटल व्यक्ति डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का अनुपालन; (iv) वाक्-डेटा के दुरुपयोग, डीपफ़ेक और पक्षपात (Bias) की आशंका; (v) इंटरनेट-संपर्क, उपकरणों और बिजली की कमी तथा ग्रामीण इलाकों में अपर्याप्त अवसंरचना; (vi) स्थानीय स्तर पर कर्मियों में अपर्याप्त क्षमता तथा मानव-निरीक्षण की आवश्यकता।
संतुलित मत: प्रौद्योगिकी पूरक है, मानव अनुवादकों और स्थानीय भाषाओं में शिक्षा का विकल्प नहीं।
आगे की राह: बोलियों का डेटासेट, खुले मानक, मानव-निरीक्षण, निजता-सुरक्षा के उपाय, शुद्धता की स्वतंत्र जाँच, राज्य भाषा-विभागों और शिक्षा संस्थानों के साथ सहयोग।
उपसंहार: समावेशी और नागरिक-केंद्रित शासन के लिए भाषाई प्रौद्योगिकी को अधिकार-आधारित, पारदर्शी और जवाबदेह ढाँचे में रखना चाहिए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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