13 Oct एआई तकनीक से दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण: पर्यावरण मंत्री और सीएम की समीक्षा
✎ आनंद विहार जैसे हॉटस्पॉट पर स्थान-विशिष्ट शमन और DPCC के AI-सक्षम ICCC से डेटा-आधारित निगरानी — इसे NCAP, CAQM और GRAP के व्यापक ढाँचे के साथ जोड़कर याद रखें।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण: प्रदूषण, पर्यावरणीय क्षरण और संरक्षण | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का अनुप्रयोग | GS Paper II — शासन: केंद्र-राज्य समन्वय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) का प्रशासनिक ढाँचा और संस्थागत तंत्र
- Prelims: आनंद विहार — दिल्ली का प्रदूषण हॉटस्पॉट, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (Delhi Pollution Control Committee – DPCC), एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (Integrated Command and Control Centre – ICCC), राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP), वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM), श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (Graded Response Action Plan – GRAP), वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) और राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS), PM2.5 और PM10 (सूक्ष्म कणिकीय पदार्थ), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
- Essay: स्वच्छ हवा नागरिक का अधिकार: महानगरों में प्रदूषण से निपटने में शासन, प्रौद्योगिकी और जन-भागीदारी की भूमिका, आँकड़ों से निर्णय तक: पर्यावरण शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाएँ और सीमाएँ
त्वरित पुनरावृत्ति: आनंद विहार जैसे हॉटस्पॉट पर स्थान-विशिष्ट शमन और DPCC के AI-सक्षम ICCC से डेटा-आधारित निगरानी — इसे NCAP, CAQM और GRAP के व्यापक ढाँचे के साथ जोड़कर याद रखें।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली (NCT Delhi) के मुख्यमंत्री ने आनंद विहार हॉटस्पॉट पर वायु प्रदूषण शमन उपायों की समीक्षा की। इसके बाद दोनों ने शास्त्री पार्क में DPCC की AI-सक्षम एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (ICCC) सुविधा का भी दौरा किया। यह घटना इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि इसमें वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार का समन्वय दिखता है, साथ ही प्रदूषण स्रोतों की निगरानी में डेटा-आधारित और प्रौद्योगिकी-आधारित शासन पर बल भी स्पष्ट होता है।
पृष्ठभूमि
- दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता लंबे समय से चिंता का विषय है, विशेषकर शीत ऋतु में। इसके पीछे वाहनों का उत्सर्जन, सड़क और निर्माण की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा और बायोमास दहन तथा प्रतिकूल मौसम-दशाएँ प्रमुख कारण हैं।
- आनंद विहार में अंतरराज्यीय बस अड्डा (ISBT), रेलवे टर्मिनल और मेट्रो स्टेशन स्थित हैं। यहाँ भारी यातायात और वाहनों का जमावड़ा रहता है, इसलिए यह स्थान लगातार उच्च प्रदूषण स्तर वाले ‘हॉटस्पॉट’ के रूप में जाना जाता है।
- ‘हॉटस्पॉट’ उस स्थान को कहते हैं जहाँ प्रदूषकों का स्तर शेष शहर के औसत से लगातार अधिक रहता है। ऐसे स्थानों के लिए स्रोत-आधारित, स्थान-विशिष्ट शमन योजना बनाई जाती है।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) 2019 में शुरू हुआ। इसका लक्ष्य गैर-प्राप्ति (नॉन-अटेनमेंट) शहरों में PM10 और PM2.5 की सांद्रता में चरणबद्ध कमी लाना है।
- वर्ष 2021 में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम के तहत CAQM का गठन हुआ। यह दिल्ली-NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का समन्वय, अनुसंधान और समाधान करने वाली वैधानिक संस्था है। शीत ऋतु में प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार GRAP के चरण लागू किए जाते हैं।
- स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 (जीवन और दैहिक स्वतंत्रता) के अंतर्गत मान्य किया है। अनुच्छेद 48A (राज्य का पर्यावरण संरक्षण का दायित्व) और अनुच्छेद 51A(g) (नागरिकों का मौलिक कर्तव्य) भी इससे जुड़े हैं।
वायु प्रदूषण शमन और AI-सक्षम ICCC क्या है?
- ICCC (एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र) एक केंद्रीकृत निगरानी कक्ष है। इसमें विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आँकड़े एक डैशबोर्ड पर आते हैं, जैसे वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र, कैमरे और शिकायतें। इनके आधार पर विश्लेषण कर संबंधित एजेंसियों को शीघ्र कार्रवाई के लिए सतर्क किया जाता है। AI के प्रयोग से पैटर्न की पहचान और त्वरित निर्णय में सहायता मिलती है।
- DPCC दिल्ली सरकार की प्रदूषण नियंत्रण संस्था है। यह वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों को लागू करने वाली राज्य स्तरीय प्राधिकारी है और CPCB के दिशा-निर्देशों के अनुरूप काम करती है।
- वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) विभिन्न प्रदूषकों के आँकड़ों को एक संख्या और रंग-श्रेणी में बदल देता है। इसे CPCB ने 2014 में शुरू किया था। इसकी श्रेणियाँ हैं: अच्छा, संतोषजनक, मध्यम प्रदूषित, खराब, बहुत खराब और गंभीर।
- NAAQS (2009) के अनुसार PM2.5 की सीमा वार्षिक औसत 40 µg/m³ और 24 घंटे में 60 µg/m³ है। PM10 के लिए ये सीमाएँ क्रमशः 60 और 100 µg/m³ हैं। PM2.5 के कण फेफड़ों में गहराई तक पहुँचकर रक्त-प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए ये अधिक हानिकारक हैं।
- हॉटस्पॉट-स्तरीय शमन के सामान्य उपायों में शामिल हैं: सड़कों की यांत्रिक सफाई और जल-छिड़काव, धूल नियंत्रण, यातायात-प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहन, निर्माण-स्थलों पर धूल-रोधी मानकों का अनुपालन तथा खुले में कचरा जलाने पर रोक।
- GRAP शीत ऋतु में AQI के स्तर के अनुसार लागू होने वाली आपातकालीन कार्य योजना है। इसमें प्रदूषण बढ़ने पर निर्माण कार्य, वाहनों के उपयोग और उद्योगों पर क्रमशः कठोर प्रतिबंध लगते जाते हैं। इसे CAQM लागू करवाता है।
- इस पूरे तंत्र में केंद्र (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, CPCB, CAQM) और दिल्ली सरकार (DPCC और अन्य विभाग) की साझा भूमिका है। दिल्ली एक विशेष संवैधानिक दर्जे वाला राज्यक्षेत्र (अनुच्छेद 239AA) है, इसलिए प्रभावी परिणाम के लिए ऐसा समन्वय आवश्यक है।
- चुनौतियाँ: वायु प्रदूषण की अंतरराज्यीय प्रकृति (पराली दहन जैसे स्रोत), तकनीकी निगरानी के बाद भी प्रवर्तन में कमी, आँकड़ों की गुणवत्ता और नियमित रखरखाव, तथा जन-जागरूकता और व्यवहार-परिवर्तन की आवश्यकता।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| आनंद विहार अति-प्रदूषित क्षेत्र (Hotspot) की समीक्षा | आनंद विहार में अंतर-राज्यीय बस टर्मिनल, रेलवे स्टेशन और दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा का भारी यातायात एक साथ है। इसलिए यह दिल्ली के उन स्थानों में गिना जाता है जहाँ वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बार-बार खराब श्रेणी में पहुँचता है। स्थल पर जाकर समीक्षा करने से उपायों का ज़मीनी क्रियान्वयन परखा जा सकता है। |
| केंद्र और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार की संयुक्त समीक्षा | केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री की संयुक्त उपस्थिति सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का उदाहरण है। वायु प्रदूषण किसी एक सरकार के अधिकार-क्षेत्र में सीमित नहीं है, इसलिए नीति और क्रियान्वयन में तालमेल ज़रूरी है। |
| दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) का AI-सक्षम एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (ICCC), शास्त्री पार्क | यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित केंद्र है, जिसका उद्देश्य निगरानी और निर्णय-प्रक्रिया को एक मंच पर लाना है। इससे प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, शिकायतों की निगरानी और कार्रवाई में लगने वाला समय घट सकता है। यह प्रतिक्रियात्मक शासन से आँकड़ा-आधारित शासन की ओर बढ़ने का संकेत है। |
| स्रोत-विशिष्ट शमन उपाय | सड़क की धूल, वाहन उत्सर्जन, निर्माण-स्थल की धूल और खुले में कचरा जलाना जैसे स्थानीय स्रोतों पर लक्षित कार्रवाई की जाती है। इनमें यांत्रिक सफ़ाई, जल-छिड़काव और यातायात-प्रबंधन शामिल हैं। अति-प्रदूषित क्षेत्र के स्तर पर हस्तक्षेप पूरे शहर की नीति से अधिक प्रभावी माना जाता है। |
| निगरानी से प्रवर्तन तक की कड़ी | वास्तविक समय के आँकड़े तभी उपयोगी हैं जब उन पर तुरंत कार्रवाई हो। ICCC जैसी व्यवस्था निगरानी, शिकायत-निवारण और प्रवर्तन एजेंसियों को जोड़ने का प्रयास है। यही उत्तरदायित्व तय करने का आधार भी बन सकता है। |
| वर्ष भर चलने वाली रणनीति की ओर बदलाव | समीक्षा का महत्व इसलिए है कि प्रदूषण को केवल सर्दियों की आपात समस्या न मानकर पूरे वर्ष की प्रशासनिक प्राथमिकता बनाया जाए। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) जैसे आपात उपायों पर निर्भरता घटाकर स्थायी उपायों की ओर बढ़ना ज़रूरी है। |
महत्व
पर्यावरणीय एवं जन-स्वास्थ्य
- सूक्ष्म कणिकीय पदार्थ (PM2.5) फेफड़ों में गहराई तक पहुँचकर श्वसन रोग, हृदय रोग और बच्चों-बुजुर्गों में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाते हैं। अति-प्रदूषित क्षेत्र पर ध्यान देने से सबसे अधिक जोखिम वाली आबादी तक राहत पहुँचती है।
- स्वच्छ वायु अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का अंग मानी गई है। इसलिए प्रदूषण-नियंत्रण केवल नीतिगत विकल्प नहीं, संवैधानिक दायित्व भी है।
- स्थानीय स्तर पर प्रदूषण-स्रोतों में कमी से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लक्ष्यों को पाने में योगदान मिलता है।
शासन एवं प्रौद्योगिकी
- AI-सक्षम ICCC आँकड़ा-आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा देता है। इससे प्रदूषण के पैटर्न, स्रोत और समय की पहचान तेज़ होती है।
- अलग-अलग विभागों (परिवहन, नगर निगम, निर्माण, पुलिस) के बीच एकीकृत कमान से समन्वय की कमी घट सकती है।
- निगरानी के आँकड़े सार्वजनिक होने पर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है, और नागरिक भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
संघीय एवं संस्थागत
- केंद्र और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार का संयुक्त प्रयास अनुच्छेद 239AA के तहत दिल्ली की विशेष संवैधानिक स्थिति में समन्वय की आवश्यकता दर्शाता है।
- वायु क्षेत्र (Airshed) की अवधारणा के अनुसार दिल्ली का प्रदूषण पड़ोसी राज्यों से जुड़ा है। इसलिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) जैसी क्षेत्रीय संस्था और राज्यों का सहयोग निर्णायक है।
आर्थिक एवं सामाजिक
- खराब वायु गुणवत्ता से स्वास्थ्य-व्यय बढ़ता है, कार्य-दिवस घटते हैं और उत्पादकता प्रभावित होती है। शमन उपाय इन आर्थिक हानियों को कम करने का निवेश हैं।
- सार्वजनिक परिवहन और स्वच्छ ईंधन की ओर बदलाव से हरित रोज़गार और नई प्रौद्योगिकी के अवसर बनते हैं।
- वायु प्रदूषण का बोझ गरीब, बाहर काम करने वाले श्रमिकों और यात्रियों पर अधिक पड़ता है, इसलिए यह पर्यावरणीय न्याय का भी प्रश्न है।
चुनौतियाँ
1. बहु-स्रोत एवं सीमा-पार प्रदूषण
- दिल्ली का प्रदूषण वाहन, धूल, उद्योग, बायोमास दहन और पड़ोसी राज्यों से आने वाले प्रदूषकों का मिश्रण है। केवल अति-प्रदूषित क्षेत्र पर कार्रवाई से पूरा समाधान संभव नहीं।
- सर्दियों में पराली जलाना, कम हवा की गति और तापमान-व्युत्क्रमण (Temperature Inversion) प्रदूषकों को सतह के पास रोक देते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण; GS-2: केंद्र-राज्य संबंध
2. संस्थागत विखंडन
- DPCC, दिल्ली नगर निगम, परिवहन विभाग, दिल्ली पुलिस, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और CAQM के बीच अधिकार-क्षेत्र का अतिव्यापन रहता है।
- ज़िम्मेदारी तय न होने से कार्रवाई में विलंब होता है और जवाबदेही कमज़ोर पड़ती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन, सांविधिक एवं नियामक निकाय
3. आँकड़ों से कार्रवाई तक का अंतराल
- AI और निगरानी प्रणालियाँ तभी लाभकारी हैं जब प्रवर्तन एजेंसियों के पास कार्रवाई करने की क्षमता, जनशक्ति और अधिकार हों।
- सेंसरों का अंशांकन, आँकड़ों की गुणवत्ता और एल्गोरिदम की पारदर्शिता भी चुनौती है। इनके बिना निर्णय भ्रामक हो सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: सूचना प्रौद्योगिकी का शासन में उपयोग; GS-2: ई-गवर्नेंस
4. प्रवर्तन की कमज़ोरी और व्यवहार-परिवर्तन
- निर्माण-धूल के मानदंडों, वाहन उत्सर्जन जाँच (PUC) और कचरा दहन पर रोक का प्रवर्तन असमान रहता है।
- निजी वाहनों पर निर्भरता और सार्वजनिक परिवहन की अंतिम-छोर संपर्कता की कमी नागरिक व्यवहार में बदलाव को कठिन बनाती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण संरक्षण; GS-2: नीति का क्रियान्वयन
5. आपात-केंद्रित दृष्टिकोण
- GRAP जैसे उपाय प्रदूषण बढ़ने के बाद लागू होते हैं और मूलतः प्रतिक्रियात्मक हैं। इनसे आर्थिक गतिविधियों पर अस्थायी बाधा भी आती है।
- दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार, जैसे परिवहन, ऊर्जा और भूमि-उपयोग में बदलाव, धीमी गति से होते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: सतत विकास; पर्यावरण नीति
6. निधि का उपयोग एवं प्राथमिकताएँ
- NCAP के अंतर्गत मिली धनराशि का बड़ा भाग सड़क-धूल नियंत्रण जैसे कार्यों में गया है। वाहन, उद्योग और ऊर्जा जैसे अन्य स्रोतों पर निवेश अपेक्षाकृत कम रहा है।
- शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय एवं तकनीकी क्षमता सीमित होने से योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शहरी स्थानीय शासन; GS-3: संसाधन-संग्रहण एवं सार्वजनिक व्यय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| वायु क्षेत्र की साझा प्रकृति | प्रदूषक राज्यों की सीमा नहीं मानते। केवल दिल्ली में कार्रवाई से स्थायी सुधार संभव नहीं, पड़ोसी राज्यों का सहयोग अनिवार्य है। |
| प्रौद्योगिकी पर अत्यधिक निर्भरता | AI-आधारित निगरानी प्रवर्तन का विकल्प नहीं है। आँकड़ों की विश्वसनीयता और मानव-निरीक्षण के बिना यह प्रभावहीन रह सकती है। |
| सार्वजनिक परिवहन की कमी | अंतिम-छोर संपर्कता और सुविधा के अभाव में निजी वाहनों का उपयोग घटाना कठिन है। |
| निर्माण एवं सड़क धूल | धूल-नियंत्रण मानदंडों के उल्लंघन पर निरंतर निगरानी और दंड की आवश्यकता है, पर निरीक्षण-क्षमता सीमित है। |
| जन-भागीदारी का अभाव | नागरिकों में जागरूकता और व्यवहार-परिवर्तन के बिना नियम-आधारित उपाय अधूरे रहते हैं। |
| नीति में निरंतरता | आपात उपाय सर्दियों में केंद्रित रहते हैं, जबकि समस्या का स्वरूप वर्ष भर का है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP): 2019 में आरंभ, शहर-स्तरीय कार्ययोजनाओं के माध्यम से PM10 और PM2.5 सांद्रता घटाने का लक्ष्य
- PRANA पोर्टल: NCAP के अंतर्गत शहरों की प्रगति की निगरानी का ऑनलाइन मंच
- ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan – GRAP): दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में AQI की श्रेणी के अनुसार चरणबद्ध आपात कार्रवाई की रूपरेखा, जिसे CAQM लागू कराता है
- राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (National Air Quality Index – NAQI): 2014 में आरंभ, वायु गुणवत्ता को छह श्रेणियों में बताने की प्रणाली
- पंद्रहवें वित्त आयोग के अंतर्गत दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए वायु गुणवत्ता से संबद्ध अनुदान
- पराली प्रबंधन के लिए फसल अवशेष प्रबंधन की केंद्रीय योजना (पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के लिए): पराली जलाने की घटनाएँ घटाने हेतु मशीनों पर सहायता
आगे की राह
- अति-प्रदूषित क्षेत्र-आधारित कार्ययोजनाएँ बनाई जाएँ, जिनमें स्रोतों का वैज्ञानिक विभाजन (Source Apportionment) हो और हर क्षेत्र की समयबद्ध लक्ष्य-सहित निगरानी की जाए।
- ICCC के आँकड़ों को परिवहन, नगर निगम, निर्माण और पुलिस विभागों के प्रवर्तन तंत्र से सीधे जोड़ा जाए, और कार्रवाई की समय-सीमा तथा जवाबदेही तय हो।
- सेंसर-नेटवर्क का नियमित अंशांकन हो, आँकड़े खुले रूप में उपलब्ध कराए जाएँ और AI मॉडलों का स्वतंत्र मूल्यांकन हो।
- CAQM के नेतृत्व में दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के बीच वायु क्षेत्र-स्तरीय समन्वय मज़बूत हो, विशेषकर पराली और औद्योगिक उत्सर्जन पर।
- इलेक्ट्रिक बसों, मेट्रो विस्तार और अंतिम-छोर संपर्कता में निवेश कर सार्वजनिक परिवहन को निजी वाहनों का व्यवहार्य विकल्प बनाया जाए।
- निर्माण-धूल मानदंडों का सख्ती से पालन कराया जाए और सड़कों की यांत्रिक सफ़ाई तथा हरित आवरण बढ़ाया जाए।
- GRAP जैसे आपात उपायों पर निर्भरता घटाकर वर्ष भर चलने वाली संरचनात्मक रणनीति अपनाई जाए।
- नागरिक जागरूकता अभियान और शिकायत-निवारण प्रणाली के माध्यम से जन-भागीदारी बढ़ाई जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCP) · चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) · प्रदूषण हॉटस्पॉट · स्रोत-विभाजन अध्ययन (Source Apportionment) · एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (ICCC) · अनुच्छेद 21 – स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार · सहकारी संघवाद एवं अंतर-राज्यीय समन्वय · सूक्ष्म कणिकीय पदार्थ (PM2.5) · वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · अनुच्छेद 48A एवं 51A(g)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: स्वच्छ पर्यावरण और जीवन का अधिकार
- अनुच्छेद 48A: राज्य का पर्यावरण-संरक्षण का निदेशक सिद्धांत
- अनुच्छेद 51A(g): नागरिकों का पर्यावरण-संरक्षण का मूल कर्तव्य
- अनुच्छेद 239AA: दिल्ली की विशेष संवैधानिक स्थिति और प्रशासन
अवधारणा प्रवाह
वाहन, धूल, निर्माण, उद्योग और बायोमास दहन से उत्सर्जन → प्रतिकूल मौसम और पराली के धुएँ से दिल्ली में प्रदूषक सतह के पास जमा होते हैं → आनंद विहार जैसे अति-प्रदूषित क्षेत्र में AQI खराब श्रेणी में पहुँचता है → केंद्र और दिल्ली सरकार संयुक्त समीक्षा से स्रोत-विशिष्ट उपाय तय करती हैं → DPCC का AI-सक्षम ICCC निगरानी, विश्लेषण और शिकायतों को एक मंच पर लाता है → प्रवर्तन एजेंसियाँ आँकड़ों के आधार पर लक्षित कार्रवाई करती हैं → स्थानीय उत्सर्जन घटने से वायु गुणवत्ता में सुधार और जन-स्वास्थ्य का लाभ होता है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. वायु प्रदूषण के नियंत्रण से संबंधित संस्थाओं और विधियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 का अधिनियमन 1972 के स्टॉकहोम (संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण) सम्मेलन में लिए गए निर्णयों को लागू करने के लिए किया गया।
2. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं समीपवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक सांविधिक निकाय है, जिसकी स्थापना 2021 के अधिनियम द्वारा की गई।
3. वायु अधिनियम, 1981 के अंतर्गत राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों का गठन केंद्र सरकार करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अधिनियम की प्रस्तावना में स्टॉकहोम सम्मेलन का उल्लेख है। कथन 2 सही है: CAQM की स्थापना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 से हुई और इसने EPCA का स्थान लिया। कथन 3 गलत है: राज्य बोर्डों का गठन राज्य सरकार करती है, केंद्र सरकार केवल केंद्रीय बोर्ड का गठन करती है।
Q2. अभिकथन (A): वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों के संदर्भ में PM2.5, PM10 की तुलना में अधिक हानिकारक माना जाता है।
कारण (R): PM2.5 के कण अत्यंत सूक्ष्म होते हैं, इसलिए वे फेफड़ों के भीतरी भागों तक पहुँच जाते हैं और रक्त-प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं।
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सत्य हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सत्य है, किंतु R असत्य है
- A असत्य है, किंतु R सत्य है
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है — PM2.5 का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। इतने सूक्ष्म कण श्वसन तंत्र की प्राकृतिक छनन प्रणाली को पार कर फेफड़ों में गहराई तक जम जाते हैं और रक्त में भी पहुँचते हैं। इसी कारण ये हृदय-श्वसन रोगों का अधिक जोखिम पैदा करते हैं। अतः R, A की सही व्याख्या है।
Q3. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- यह वायु अधिनियम के अंतर्गत बनाया गया विधिक रूप से बाध्यकारी कार्यक्रम है, जिसमें शहरों पर दंड का प्रावधान है
- यह 2019 में शुरू की गई समयबद्ध राष्ट्रीय रणनीति है, जिसका आधार वर्ष 2017 है और जो गैर-प्राप्ति (नॉन-अटेनमेंट) शहरों पर केंद्रित है
- इसका कार्यान्वयन नीति आयोग द्वारा किया जाता है
- यह केवल सिंधु-गंगा मैदान के महानगरों पर लागू है
उत्तर: यह 2019 में शुरू की गई समयबद्ध राष्ट्रीय रणनीति है, जिसका आधार वर्ष 2017 है और जो गैर-प्राप्ति (नॉन-अटेनमेंट) शहरों पर केंद्रित है — NCAP पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2019 में शुरू किया गया। यह विधिक रूप से बाध्यकारी नहीं है, बल्कि नीतिगत रणनीति है। इसमें 2017 को आधार वर्ष मानकर गैर-प्राप्ति शहरों में PM सांद्रता घटाने के लक्ष्य रखे गए हैं। यह सिंधु-गंगा मैदान तक सीमित नहीं है और इसका कार्यान्वयन नीति आयोग के बजाय MoEFCC के नेतृत्व में होता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ दिल्ली में आनंद विहार जैसे प्रदूषण हॉटस्पॉट पर केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त समीक्षा तथा DPCC के AI-सक्षम एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (ICCC) का उपयोग वायु गुणवत्ता प्रशासन में प्रौद्योगिकी-आधारित, स्थान-विशिष्ट दृष्टिकोण को दर्शाता है। दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से निपटने के संस्थागत ढाँचे का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए तथा बताइए कि ऐसे प्रयास स्थायी सुधार लाने में कहाँ तक सफल हो सकते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: भूमिका (2-3 पंक्तियाँ): आनंद विहार जैसे हॉटस्पॉट में बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, यातायात जाम और धूल जैसे बहुविध स्रोत एकत्र हैं; ICCC वास्तविक काल (real-time) की निगरानी और AI-आधारित विश्लेषण से कार्रवाई को तीव्र बनाने का प्रयास है।
1. संवैधानिक एवं विधिक आधार: अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार; सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य, एम.सी. मेहता मामले), अनुच्छेद 48A (राज्य का कर्तव्य), 51A(g) (नागरिक का कर्तव्य); वायु अधिनियम, 1981; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; CAQM अधिनियम, 2021; प्रदूषक भुगतान और पूर्वोपाय सिद्धांत।
2. संस्थागत ढाँचा: MoEFCC, CPCB, DPCC, CAQM (EPCA का उत्तराधिकारी), NCAP (2019, आधार वर्ष 2017, गैर-प्राप्ति शहर), GRAP (AQI श्रेणियों पर आधारित चरणबद्ध आपातकालीन उपाय), राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (2014)। मानक: NAAQS (PM2.5 – 24 घंटे 60 µg/m³) बनाम WHO 2021 दिशानिर्देश (24 घंटे 15 µg/m³)।
3. प्रौद्योगिकी-आधारित दृष्टिकोण के लाभ: निरंतर निगरानी, स्रोत-विभाजन अध्ययनों (IIT कानपुर, TERI-ARAI) पर आधारित लक्षित हस्तक्षेप, जवाबदेही और त्वरित प्रतिक्रिया, आँकड़ों पर आधारित निर्णय।
4. समालोचना: (क) अंतर-राज्यीय स्रोतों (पराली दहन, वाहन, ताप विद्युत संयंत्र) पर दिल्ली का सीमित नियंत्रण, सहकारी संघवाद की चुनौती; (ख) GRAP का प्रतिक्रियात्मक स्वरूप, रोकथाम पर कम बल; (ग) निगरानी केंद्रों की संख्या और आँकड़ों की विश्वसनीयता; (घ) वाहन उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण-ध्वस्तीकरण अपशिष्ट जैसे संरचनात्मक कारण; (ङ) NCAP निधि का कम उपयोग और वायु अधिनियम के दंड की सीमित प्रभावशीलता; (च) केवल ‘निगरानी’ से उत्सर्जन नहीं घटता, प्रवर्तन आवश्यक है।
5. आगे की राह: सार्वजनिक परिवहन और विद्युत गतिशीलता का विस्तार, एयरशेड-आधारित क्षेत्रीय योजना, पराली प्रबंधन हेतु प्रोत्साहन, स्वच्छ ईंधन, कठोर प्रवर्तन के साथ पारदर्शी आँकड़े, नागरिक भागीदारी, निरंतर वित्तपोषण और परिणाम-आधारित मूल्यांकन।
निष्कर्ष: प्रौद्योगिकी सहायक उपकरण है; स्थायी सुधार तभी होगा जब स्रोत-स्तर पर उत्सर्जन घटाने के लिए बहु-राज्यीय समन्वय और प्रवर्तन सुदृढ़ हो।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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