1.8 डिग्री सेल्सियस तक वैश्विक तापमान सीमित करने से बचेंगे 1.89 अरब स्वस्थ जीवन वर्ष: अध्ययन

1.8 डिग्री सेल्सियस तक वैश्विक तापमान सीमित करने से बचेंगे 1.89 अरब स्वस्थ जीवन वर्ष: अध्ययन

1.8 डिग्री सेल्सियस तक वैश्विक तापमान सीमित करने से बचेंगे 1.89 अरब स्वस्थ जीवन वर्ष: अध्ययन

ग्लोबल वार्मिंग और स्वास्थ्य हानिवर्तमान उत्सर्जन4.4°C तक वृद्धिस्वस्थ जीवन वर्षों की 1.89 अरब वर्षतापमान सीमा 1.8°Cहानि रोकी जा सकती हैस्वास्थ्य प्रभावगर्मी, प्रदूषणनीतिगत उपायNCAP, NPCCHH
ग्लोबल वार्मिंग और स्वास्थ्य हानि

✎ लैंसेट आयोग (बर्लिन, विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2026) ने 2025–2100 के लिए 17 परस्पर जुड़े विनाशकारी स्वास्थ्य खतरे चिह्नित किए; तापमान वृद्धि 4.4°C के बजाय लगभग 1.8°C पर रोकने से 1.89 अरब स्वस्थ जीवन वर्षों की हानि टल सकती है…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — स्वास्थ्य, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ एवं वैश्विक शासन  |  GS Paper III — पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी (AI) एवं आंतरिक/बाह्य सुरक्षा  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन
  • Prelims: द लैंसेट आयोग: ’21वीं सदी के वैश्विक स्वास्थ्य खतरे’, विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन (World Health Summit), बर्लिन, विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (DALY), पेरिस समझौता: 1.5°C और 2°C के लक्ष्य, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR), राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), स्वास्थ्य हेतु आधिकारिक विकास सहायता, एकल स्वास्थ्य (One Health) दृष्टिकोण, राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC), IHME, वॉशिंगटन विश्वविद्यालय
  • Essay: जलवायु संकट मूलतः स्वास्थ्य संकट है: आज की नीतिगत देरी की कीमत आने वाली पीढ़ियाँ चुकाएँगी, आपस में जुड़े वैश्विक खतरे: अलग-अलग नहीं, समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता

त्वरित पुनरावृत्ति: लैंसेट आयोग (बर्लिन, विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2026) ने 2025–2100 के लिए 17 परस्पर जुड़े विनाशकारी स्वास्थ्य खतरे चिह्नित किए; तापमान वृद्धि 4.4°C के बजाय लगभग 1.8°C पर रोकने से 1.89 अरब स्वस्थ जीवन वर्षों की हानि टल सकती है, और परमाणु संघर्ष तथा दुर्भावनापूर्ण AI को अस्तित्व-संकट वाले खतरे माना गया।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

बर्लिन (जर्मनी) में आयोजित विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2026 में ‘द लैंसेट आयोग: 21वीं सदी के वैश्विक स्वास्थ्य खतरे’ (The Lancet Commission on 21st Century Global Threats to Health) की रिपोर्ट जारी की गई। आयोग ने सैकड़ों संभावित खतरों की जाँच कर 2025 से 2100 के बीच मानव स्वास्थ्य और अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर 17 खतरे चिह्नित किए। विश्लेषण के अनुसार वैश्विक तापमान वृद्धि को 4.4°C तक पहुँचने देने के बजाय लगभग 1.8°C पर सीमित करने से अत्यधिक गर्मी और वायु प्रदूषण जैसे कारणों से होने वाली लगभग 1.89 अरब स्वस्थ जीवन वर्षों की हानि रोकी जा सकती है। आयोग के अनुसार परमाणु संघर्ष और AI का दुर्भावनापूर्ण उपयोग अस्तित्व-संकट की क्षमता वाले दो खतरे हैं, यद्यपि उनकी संभावना ‘कम’ आँकी गई है।

पृष्ठभूमि

  • जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) की रिपोर्टें बताती हैं कि तापमान वृद्धि के साथ ऊष्मा-लहर, वेक्टर-जनित रोग, खाद्य असुरक्षा और विस्थापन का जोखिम बढ़ता है। पेरिस समझौते (2015) में तापमान वृद्धि को औद्योगिक-पूर्व स्तर से 2°C से काफ़ी नीचे और प्रयास के रूप में 1.5°C तक सीमित रखने का लक्ष्य है।
  • वर्तमान राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) इन लक्ष्यों के अनुरूप उत्सर्जन कटौती के लिए अपर्याप्त माने जाते हैं। इसी कारण इस सदी के अंत तक तापमान में बड़ी वृद्धि के परिदृश्य चर्चा में रहते हैं।
  • स्वास्थ्य पर जलवायु के प्रभाव का वार्षिक आकलन ‘लैंसेट काउंटडाउन’ जैसे अध्ययनों में होता है। नया आयोग इससे आगे बढ़कर जलवायु के साथ संघर्ष, प्रौद्योगिकी, आर्थिक-सामाजिक स्थितियों और रोगों को एक ही ढाँचे में आँकता है।
  • स्वास्थ्य हेतु विकास सहायता में गिरावट, रोगाणुरोधी प्रतिरोध और बाल कुपोषण जैसे खतरे पहले से निम्न-आय और विकासशील देशों पर अधिक बोझ डाल रहे हैं।
  • भारत में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP, 2019), जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCCHH), रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर राष्ट्रीय कार्ययोजना और राज्यों की ऊष्मा-कार्ययोजनाएँ इन खतरों से निपटने के प्रमुख नीतिगत उपकरण हैं।

द लैंसेट आयोग: 21वीं सदी के वैश्विक स्वास्थ्य खतरे क्या हैं?

  • यह एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ आयोग है। इसकी रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2026 (बर्लिन) में जारी हुई। सह-अध्यक्ष क्रिस्टोफर जे.एल. मरे, वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य मापन एवं मूल्यांकन संस्थान (IHME) के निदेशक हैं।
  • आयोग ने सैकड़ों संभावित खतरों की जाँच कर 17 ऐसे ‘विनाशकारी’ खतरे चुने जो 2025–2100 के बीच स्वास्थ्य और अस्तित्व के लिए सबसे बड़े हैं। ये रोग, सामाजिक-आर्थिक स्थितियों, पर्यावरणीय परिवर्तन, प्रौद्योगिकी और संघर्ष जैसे क्षेत्रों में फैले हैं। साथ ही ये नीति, वित्त-पोषण और नवाचार से टाले जा सकने वाले खतरे हैं।
  • इनमें वायु प्रदूषण, रोगाणुरोधी प्रतिरोध, बाल कुपोषण, पारंपरिक संघर्ष, स्वास्थ्य हेतु विकास सहायता में गिरावट, परमाणु संघर्ष और AI का दुर्भावनापूर्ण उपयोग शामिल हैं। समाचार में सूची के शेष खतरों का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है।
  • प्रभाव का मापन ‘स्वस्थ जीवन वर्षों की हानि’ के रूप में किया गया है, जो DALY की अवधारणा के निकट है। DALY में असमय मृत्यु से खोए वर्ष और रोग या विकलांगता के साथ बीते वर्ष दोनों जुड़ते हैं।
  • मुख्य आँकड़े: तापमान वृद्धि 4.4°C के बजाय लगभग 1.8°C पर रुकने से 1.89 अरब स्वस्थ जीवन वर्षों की हानि टल सकती है। परमाणु संघर्ष की रोकथाम से 2100 तक लगभग 13.3 करोड़ मृत्यु और 9.35 अरब स्वस्थ जीवन वर्षों की हानि टल सकती है। दुर्भावनापूर्ण AI का जोखिम घटाने से लगभग 10.4 अरब स्वस्थ जीवन वर्षों की हानि टल सकती है।
  • परमाणु संघर्ष और दुर्भावनापूर्ण AI में मानव-अस्तित्व को खतरा पहुँचाने की क्षमता है, पर आयोग ने इनकी संभावना ‘कम’ आँकी है। निष्कर्ष प्रभाव और संभावना दोनों को जोड़कर निकाले गए हैं।
  • आयोग के अनुसार हर देश जोखिम में है, पर सीमित संसाधनों वाले लोगों और हाशिये के समुदायों पर बोझ सबसे अधिक पड़ता है। उत्सर्जन में तीव्र कटौती के बिना 2100 के बाद भी स्वास्थ्य-हानि बढ़ती जाएगी और विस्थापन जैसे अन्य खतरे गहराएँगे। आयोग का मूल संदेश है कि सभी 17 खतरे परस्पर जुड़े हैं, इसलिए उनसे अलग-अलग नहीं, साथ मिलकर निपटना होगा। कार्रवाई में देरी से लागत केवल आगे खिसकती और बढ़ती है।
  • नीतिगत निहितार्थ: जलवायु शमन को स्वास्थ्य नीति का अंग मानना, स्वच्छ वायु और ऊष्मा-अनुकूलन में निवेश, रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर एकल स्वास्थ्य (One Health) दृष्टिकोण, तथा परमाणु निरस्त्रीकरण और AI शासन पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
आयोग और प्रारंभ: ‘सदी के 21वें दशकों में स्वास्थ्य के लिए वैश्विक खतरे’ (21st Century Global Threats to Health) पर लैंसेट आयोग, जिसका शुभारंभ बर्लिन (जर्मनी) में विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2026 में हुआ स्वास्थ्य को केवल रोगों तक सीमित न रखकर पर्यावरण, प्रौद्योगिकी, संघर्ष और आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ने वाला व्यापक विश्लेषण है। सह-अध्यक्ष क्रिस्टोफर जे.एल. मरे (IHME, वाशिंगटन विश्वविद्यालय) हैं।
17 ‘विनाशकारी’ खतरों की पहचान: सैकड़ों संभावित खतरों की जाँच के बाद 2025 से 2100 के बीच मानव स्वास्थ्य और अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतरे चुने गए चयन का आधार वे खतरे हैं जिन्हें नीति, वित्त-पोषण और नवाचार से टाला जा सकता है। इनमें वायु प्रदूषण, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance), बाल कुपोषण, पारंपरिक संघर्ष और स्वास्थ्य हेतु विकास सहायता में गिरावट शामिल हैं।
मापक: ‘स्वस्थ जीवन-वर्षों की हानि’ (DALY जैसा मापक) और संभावित मृत्यु-संख्या मृत्यु के साथ रुग्णता और विकलांगता से हुई हानि भी जुड़ जाती है। इससे विभिन्न खतरों की तुलना और प्राथमिकता-निर्धारण संभव होता है।
जलवायु परिदृश्य: तापमान वृद्धि को लगभग 1.8°C पर रोकने बनाम 4.4°C तक जाने देने की तुलना 1.8°C पर रोकने से अत्यधिक गर्मी और वायु प्रदूषण जैसे कारणों से होने वाली लगभग 1.89 अरब स्वस्थ जीवन-वर्षों की हानि टाली जा सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार वास्तविक बोझ इससे अधिक हो सकता है।
अस्तित्व-स्तर के दो खतरे: परमाणु संघर्ष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का दुर्भावनापूर्ण उपयोग दोनों की संभावना ‘कम’ आँकी गई है, पर परिणाम मानव विलोपन तक जा सकते हैं। परमाणु संघर्ष की रोकथाम से लगभग 13.3 करोड़ मृत्यु और 9.35 अरब स्वस्थ जीवन-वर्षों की हानि टल सकती है। दुर्भावनापूर्ण AI के जोखिम में कमी से लगभग 10.4 अरब स्वस्थ जीवन-वर्षों की हानि रोकी जा सकती है।
परस्पर संबद्धता और असमानता: सभी खतरे एक-दूसरे से जुड़े हैं और हर देश जोखिम में है, पर सीमित संसाधन वाले तथा हाशिये के समुदायों पर बोझ सबसे अधिक पड़ता है समाधान एकल क्षेत्रक के बजाय समन्वित नीति (Health in All Policies) से ही संभव है। कार्रवाई में देरी से लागत भविष्य में खिसककर बढ़ती जाती है।

महत्व

स्वास्थ्य एवं मानव विकास

  • जलवायु शमन को स्वास्थ्य-नीति के रूप में स्थापित करता है। उत्सर्जन में कटौती से गर्मी से होने वाली मृत्यु, श्वसन रोग और वायु प्रदूषण का बोझ एक साथ घटता है, जिसे ‘सह-लाभ’ (Co-benefits) कहते हैं।
  • ‘स्वस्थ जीवन-वर्ष’ जैसे मापक से स्वास्थ्य हानि का परिमाणन होता है, जिससे सीमित संसाधनों का प्राथमिकता-आधारित आवंटन सरल होता है।
  • बाल कुपोषण और रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसे मौजूदा खतरों को भविष्य के खतरों के साथ रखकर दिखाता है कि मानव पूँजी की क्षति पीढ़ियों तक चलती है।

आर्थिक

  • स्वास्थ्य हानि का अर्थ श्रम उत्पादकता में गिरावट, स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि और आर्थिक संवृद्धि में कमी है। कार्रवाई में देरी से लागत बढ़ती है, जैसा आयोग के सह-अध्यक्ष ने कहा।
  • अत्यधिक गर्मी का खुले में काम करने वाले श्रमिकों (कृषि, निर्माण) की आय पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यह भारत जैसी बड़ी अनौपचारिक श्रम-शक्ति वाली अर्थव्यवस्था के लिए प्रासंगिक है।
  • निवारक निवेश (स्वच्छ ऊर्जा, पोषण, रोगाणुरोधी प्रबंधन) उपचारात्मक व्यय की तुलना में अधिक लागत-प्रभावी माना जाता है।

सामरिक एवं वैश्विक शासन

  • परमाणु संघर्ष और AI के दुर्भावनापूर्ण उपयोग को स्वास्थ्य के अस्तित्वगत खतरे मानने से निरस्त्रीकरण और प्रौद्योगिकी-शासन को वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के एजेंडे से जोड़ने का तर्क मजबूत होता है।
  • स्वास्थ्य हेतु विकास सहायता में गिरावट को खतरा बताना वैश्विक स्वास्थ्य वित्त-पोषण और बहुपक्षवाद की कमजोरी की ओर संकेत करता है।
  • खतरों की सीमा-पार प्रकृति (जलवायु, महामारी, प्रवास) सामूहिक कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को पुष्ट करती है।

सामाजिक एवं समता

  • सीमित संसाधन वाले और हाशिये के समुदायों पर सर्वाधिक बोझ पड़ने से जलवायु न्याय (Climate Justice) और स्वास्थ्य समता का प्रश्न सामने आता है।
  • जलवायु-जनित प्रवास जैसे द्वितीयक प्रभाव शहरी बस्तियों, आजीविका और सामाजिक सौहार्द पर दबाव बढ़ाते हैं। आयोग के अनुसार इन्हें आँकड़ों में अभी पूरी तरह नहीं गिना गया है।

भारत के लिए प्रासंगिकता

  • भारत उच्च तापमान, गंभीर वायु प्रदूषण, रोगाणुरोधी प्रतिरोध और बाल कुपोषण, इन चारों के भारी बोझ वाले देशों में है। इसलिए आयोग के कई निष्कर्ष सीधे उसकी नीतिगत प्राथमिकताओं से जुड़ते हैं।
  • यह ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ (One Health) दृष्टिकोण और स्वास्थ्य-अनुकूल जलवायु नीति के पक्ष में प्रमाण देता है।

चुनौतियाँ

1. उत्सर्जन में कटौती और तापमान लक्ष्य के बीच अंतर

  • 1.8°C और 4.4°C के बीच का अंतर नीतिगत विकल्पों पर निर्भर है, जबकि वर्तमान संकल्प पेरिस समझौते के तापमान लक्ष्य से कम पड़ते हैं।
  • विकसित और विकासशील देशों में ऐतिहासिक उत्तरदायित्व तथा जलवायु वित्त को लेकर मतभेद शमन को धीमा करते हैं।

2. खतरों की परस्पर संबद्धता और खंडित शासन

  • 17 खतरे आपस में जुड़े हैं, पर स्वास्थ्य, पर्यावरण, रक्षा और प्रौद्योगिकी से जुड़े मंत्रालय और संस्थाएँ अलग-अलग काम करती हैं।
  • एक क्षेत्रक का समाधान दूसरे में नई समस्या खड़ी कर सकता है, इसलिए समन्वित मूल्यांकन आवश्यक है।

3. स्वास्थ्य हेतु विकास सहायता में गिरावट और वित्त-पोषण की कमी

  • विकास सहायता घटने से निम्न-आय देशों की रोग-निगरानी, टीकाकरण और पोषण कार्यक्रम प्रभावित होते हैं।
  • भारत सहित अनेक देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय अब भी सीमित है, जिससे निवारक निवेश के लिए गुंजाइश कम रहती है।

4. अस्तित्व-स्तर के खतरों का अनिश्चित स्वरूप

  • परमाणु संघर्ष और दुर्भावनापूर्ण AI की संभावना कम है, पर प्रभाव अपरिवर्तनीय है। इसलिए जोखिम-आकलन और नीतिगत प्राथमिकता तय करना कठिन है।
  • AI और परमाणु शासन के लिए बाध्यकारी वैश्विक नियम सीमित हैं, और सामरिक प्रतिस्पर्धा सहयोग में बाधा बनती है।

5. असमान बोझ और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा

  • गरीब, श्रमिक, महिलाएँ, बच्चे और वृद्ध गर्मी, प्रदूषण और कुपोषण से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं, जबकि उनके पास अनुकूलन के साधन कम होते हैं।
  • स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में क्षेत्रीय असमानता मौजूदा कमजोरियों को और गहरा करती है।

6. आँकड़ों और मापन की सीमाएँ

  • आयोग स्वयं मानता है कि वास्तविक बोझ अधिक हो सकता है, क्योंकि प्रवास जैसे द्वितीयक प्रभाव और 2100 के बाद की हानि गणना में शामिल नहीं हैं।
  • दीर्घकालिक अनुमान मान्यताओं पर आधारित होते हैं, इसलिए उन्हें संभावित परिदृश्य मानना चाहिए, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
तापमान वृद्धि का मार्ग 1.8°C और 4.4°C के बीच का अंतर नीतिगत विकल्पों पर टिका है; देरी से स्वस्थ जीवन-वर्षों की हानि आगे और बढ़ती जाती है।
वायु प्रदूषण जीवाश्म ईंधन-जनित प्रदूषण जलवायु और स्वास्थ्य दोनों को क्षति पहुँचाता है, पर शहरों में कार्यान्वयन की गति धीमी है।
रोगाणुरोधी प्रतिरोध एंटीबायोटिक का अनियंत्रित उपयोग सामान्य संक्रमणों के उपचार को कठिन बनाता है, और इसका बोझ निर्धन वर्ग पर अधिक पड़ता है।
बाल कुपोषण अल्पपोषण से मानव पूँजी की हानि स्थायी होती है, और जलवायु-जनित खाद्य असुरक्षा इसे और गंभीर बनाती है।
स्वास्थ्य हेतु विकास सहायता वित्त-पोषण में गिरावट से निम्न-आय देशों की स्वास्थ्य प्रणालियाँ कमजोर पड़ती हैं।
अस्तित्व-स्तर के खतरे परमाणु संघर्ष और दुर्भावनापूर्ण AI की संभावना कम है, पर परिणाम विनाशकारी और अपरिवर्तनीय हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम (National Programme on Climate Change and Human Health – NPCCHH): स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत; गर्मी, वायु प्रदूषण और जलवायु-जनित रोगों के लिए स्वास्थ्य तंत्र की तैयारी
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP): चयनित शहरों में वायु प्रदूषण घटाने का कार्यक्रम
  • पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan): बच्चों, किशोरियों और महिलाओं में कुपोषण में कमी का मिशन
  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर राष्ट्रीय कार्ययोजना (National Action Plan on AMR): ‘एक स्वास्थ्य’ दृष्टिकोण पर आधारित, एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग और निगरानी पर केंद्रित
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशानिर्देशों के अंतर्गत ताप कार्य योजनाएँ (Heat Action Plans): राज्यों और नगरों द्वारा लू से बचाव हेतु तैयार

आगे की राह

  • जलवायु शमन को स्वास्थ्य नीति का अंग मानकर उत्सर्जन में तेज कटौती करना और NDC की महत्वाकांक्षा बढ़ाना, ताकि तापमान वृद्धि पेरिस लक्ष्य के निकट रहे।
  • स्वास्थ्य को सभी नीतियों में शामिल करना (Health in All Policies): स्वास्थ्य, पर्यावरण, ऊर्जा और शहरी विकास मंत्रालयों के बीच संस्थागत समन्वय बनाना।
  • ताप कार्य योजनाओं, पूर्व-चेतावनी प्रणाली और जलवायु-अनुकूल स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करना, विशेषकर श्रमिकों और झुग्गी-बस्तियों के लिए।
  • वायु प्रदूषण नियंत्रण में स्वच्छ ऊर्जा, सार्वजनिक परिवहन और स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन को प्राथमिकता देना, और NCAP के लक्ष्यों की निगरानी को सुदृढ़ करना।
  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध के विरुद्ध ‘एक स्वास्थ्य’ दृष्टिकोण अपनाना: एंटीबायोटिक के उपयोग का नियमन, मानव-पशु-कृषि क्षेत्रक में निगरानी और नई औषधियों के अनुसंधान को प्रोत्साहन।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय बढ़ाना और पोषण कार्यक्रमों को संवेदनशील वर्गों तक पहुँचाना, ताकि असमान बोझ कम हो।
  • परमाणु जोखिम घटाने के लिए कूटनीति, निरस्त्रीकरण संवाद और विश्वास-निर्माण उपायों को बढ़ावा देना, तथा AI के दुर्भावनापूर्ण उपयोग पर अंतरराष्ट्रीय मानदंड और जवाबदेही-ढाँचे के निर्माण में भागीदारी करना।
  • वैश्विक स्वास्थ्य वित्त-पोषण को स्थिर रखने हेतु बहुपक्षीय सहयोग तथा घरेलू संसाधनों से स्वास्थ्य सुरक्षा की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वैश्विक तापन (Global Warming) और स्वास्थ्य · विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (DALY) · 17 विनाशकारी खतरे (Lancet Commission) · परस्पर संबद्ध खतरे (Interconnected Threats) · पेरिस समझौता और 1.5°C का लक्ष्य · रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) · वायु प्रदूषण और अत्यधिक ऊष्मा · परमाणु संघर्ष और दुर्भावनापूर्ण AI · स्वास्थ्य हेतु विकास सहायता में कमी · जलवायु न्याय और संवेदनशील वर्ग · वन हेल्थ दृष्टिकोण (One Health) · निवारक कार्रवाई की लागत बनाम विलंब की लागत

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21 — स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार
  • अनुच्छेद 47 — पोषण-स्तर और लोक स्वास्थ्य का सुधार
  • अनुच्छेद 48क — राज्य द्वारा पर्यावरण का संरक्षण
  • अनुच्छेद 51क(छ) — नागरिकों का पर्यावरण-संरक्षण कर्तव्य
  • अनुच्छेद 51 — अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा
  • अनुच्छेद 253 — अंतरराष्ट्रीय करारों के कार्यान्वयन हेतु विधि

अवधारणा प्रवाह

जीवाश्म ईंधन का उपयोग और उत्सर्जन में वृद्धि → वैश्विक तापन (Global Warming) और वायु प्रदूषण  →  तापमान वृद्धि से अत्यधिक गर्मी, खाद्य असुरक्षा और रोग-प्रसार → स्वस्थ जीवन-वर्षों की हानि  →  कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली, कुपोषण और रोगाणुरोधी प्रतिरोध → गरीब और हाशिये के समुदायों पर असमान बोझ  →  जलवायु-जनित प्रवास, संघर्ष और विकास सहायता में गिरावट → खतरों का परस्पर संवर्धन  →  परमाणु संघर्ष और दुर्भावनापूर्ण AI जैसे अस्तित्व-स्तर के जोखिम → संभावना कम, पर विनाशकारी परिणाम  →  समन्वित नीति, वित्त-पोषण और नवाचार → तापमान वृद्धि 1.8°C के निकट रोकना और स्वास्थ्य हानि टालना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. पेरिस समझौते (Paris Agreement) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका उद्देश्य वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2°C से काफ़ी नीचे रखना तथा 1.5°C तक सीमित रखने के प्रयास करना है।
2. राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) में दर्ज उत्सर्जन-लक्ष्य अनुपालन न करने पर दंड के साथ विधिक रूप से प्रवर्तनीय हैं।
3. इसे UNFCCC के अंतर्गत 2015 में COP-21 में अपनाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: यह समझौते के अनुच्छेद 2 का मूल तापमान लक्ष्य है। कथन 2 गलत है: NDC प्रस्तुत करना बाध्यकारी प्रक्रिया है, परंतु लक्ष्य स्वयं राष्ट्र तय करते हैं और उनके लिए कोई दंड-व्यवस्था नहीं है। कथन 3 सही है: समझौता 2015 में पेरिस में COP-21 में अपनाया गया।

Q2. अभिकथन (A): किसी खतरे से होने वाली ‘स्वस्थ जीवन के वर्षों की हानि’ को सामान्यतः विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (DALY) के रूप में मापा जाता है।
कारण (R): DALY, अकाल मृत्यु के कारण खोए गए जीवन-वर्षों (YLL) तथा रुग्णता या विकलांगता के साथ बिताए गए वर्षों (YLD) का योग होता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  2. A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. A सही है, परंतु R गलत है
  4. A गलत है, परंतु R सही है

उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है — DALY = YLL + YLD। यह एक ही सूचकांक में मृत्यु और रुग्णता दोनों के बोझ को जोड़ता है। इसलिए ‘स्वस्थ जीवन के वर्षों की हानि’ का मापन इसी सूत्र पर आधारित है और R, A की सही व्याख्या करता है।

Q3. स्तंभ-I (नीति/साधन) को स्तंभ-II (संबंधित स्वास्थ्य खतरा) से सुमेलित कीजिए:
स्तंभ-I: (A) राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP); (B) रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर राष्ट्रीय कार्य योजना; (C) परमाणु हथियार निषेध संधि (TPNW); (D) पोषण अभियान
स्तंभ-II: (1) वायु प्रदूषण; (2) रोगाणुरोधी प्रतिरोध; (3) परमाणु संघर्ष का जोखिम; (4) बाल कुपोषण
सही सुमेल चुनिए:

  1. A-1, B-2, C-3, D-4
  2. A-2, B-1, C-3, D-4
  3. A-1, B-2, C-4, D-3
  4. A-4, B-2, C-3, D-1

उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — NCAP (2019) शहरों में PM के स्तर घटाने का कार्यक्रम है। AMR पर राष्ट्रीय कार्य योजना रोगाणुरोधी प्रतिरोध से संबंधित है। TPNW परमाणु हथियारों को प्रतिबंधित करने वाली संधि है। पोषण अभियान बच्चों के कुपोषण से लड़ने का मिशन है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ‘स्वास्थ्य के लिए 21वीं सदी के वैश्विक खतरों’ पर लैंसेट आयोग (Lancet Commission) ने 17 परस्पर संबद्ध विनाशकारी खतरे चिह्नित किए हैं और कहा है कि उन्हें अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ संबोधित करना होगा। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में इस एकीकृत दृष्टिकोण को अपनाने के लिए क्या कदम आवश्यक हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: भूमिका (2-3 पंक्तियाँ): लैंसेट आयोग का शुभारंभ बर्लिन में विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2026 में हुआ। इसने 2025-2100 के लिए 17 सर्वाधिक गंभीर खतरे चिह्नित किए। निष्कर्ष: तापन 4.4°C के बजाय लगभग 1.8°C पर सीमित रहे तो लगभग 1.89 अरब स्वस्थ जीवन-वर्षों की हानि टल सकती है। सह-अध्यक्ष क्रिस्टोफर मरे (IHME) का मत है कि सभी खतरे परस्पर जुड़े हैं।

भाग-1: ‘एकीकृत कार्रवाई’ के पक्ष में तर्क: (i) खतरों की अंतर्संबद्धता: जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, कुपोषण, प्रवासन और संघर्ष एक-दूसरे को बढ़ाते हैं, इसलिए खंडित नीति से लाभ सीमित रहता है। (ii) जो खतरे नीति, वित्त और नवाचार से टाले जा सकते हैं, उन पर ही ध्यान केंद्रित है। (iii) विलंब से लागत भविष्य में खिसकती और बढ़ती है। (iv) हर देश जोखिम में है, पर निर्धन और हाशिये के समुदायों पर बोझ सबसे अधिक है, इसलिए समानता का तर्क बनता है। (v) कम संभावना पर अत्यधिक प्रभाव वाले खतरे (परमाणु संघर्ष, दुर्भावनापूर्ण AI) के लिए संभावना और प्रभाव दोनों के आधार पर जोखिम-आकलन।

समालोचना: (i) अनुमान मॉडल और मान्यताओं पर आधारित हैं और 2100 तक के दीर्घकालिक अनुमानों में अनिश्चितता बहुत अधिक है। (ii) 17 खतरों को समान प्राथमिकता देने से संसाधन-सीमित देशों में प्राथमिकता तय करना कठिन हो सकता है। (iii) खतरों की प्रकृति भिन्न है: रोग, भू-राजनीति और प्रौद्योगिकी के लिए संस्थाएँ और शासन-स्तर अलग हैं, जैसे परमाणु संघर्ष पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का प्रभाव सीमित है। (iv) स्वास्थ्य हेतु विकास सहायता में गिरावट से बहुपक्षीय वित्त की व्यवहार्यता पर प्रश्न उठता है। (v) एकीकरण की संस्थागत लागत और अंतर-मंत्रालयी समन्वय की चुनौती।

भाग-2: भारत के लिए कदम: (i) वन हेल्थ दृष्टिकोण: मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य का एकीकरण, रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर राष्ट्रीय कार्य योजना का सुदृढ़ क्रियान्वयन (केरल की KARSAP जैसे राज्य-स्तरीय मॉडल)। (ii) राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) को स्वास्थ्य-परिणाम सूचकांकों से जोड़ना। (iii) NDMA के दिशानिर्देशों के अनुरूप ऊष्मा कार्य योजनाएँ (अहमदाबाद 2013 का मॉडल), जिनमें असंगठित श्रमिकों पर विशेष ध्यान हो। (iv) पोषण अभियान और आयुष्मान भारत के माध्यम से बाल कुपोषण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश। (v) जलवायु और स्वास्थ्य नीतियों का एकीकरण: भारत के NDC (2070 तक शुद्ध-शून्य) में स्वास्थ्य सह-लाभ को शामिल करना। (vi) अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार, जिसमें स्वच्छ पर्यावरण शामिल), अनुच्छेद 47 (लोक स्वास्थ्य का सुधार) के निर्देशक सिद्धांत से संवैधानिक आधार। (vii) वैश्विक मंच पर जलवायु न्याय, परमाणु निःशस्त्रीकरण और AI के उत्तरदायी शासन की वकालत।

निष्कर्ष: एकीकृत दृष्टिकोण तर्कसंगत है, किंतु उसे चरणबद्ध प्राथमिकता, ठोस वित्त-व्यवस्था और स्थानीय अनुकूलन के साथ लागू किया जाए; निवारक कार्रवाई की लागत विलंब की लागत से कम है।

स्रोत: orissapost.com


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