15 Oct डीजीसीए से मिला ड्रोगो एयरोस्पेस के डिफेंस ड्रोन को टाइप सर्टिफिकेशन
✎ प्रकार प्रमाणन (Type Certification) किसी विमान डिज़ाइन की वायुयोग्यता की नियामक स्वीकृति है, और JK 250e जैसे हाइब्रिड VTOL UAV का DGCA प्रमाणन दोहरे उपयोग प्रौद्योगिकी में स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रमाण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वदेशी प्रौद्योगिकी, रक्षा में नवाचार) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (रक्षा सुरक्षा और निगरानी क्षमता) | GS Paper II — शासन (नागरिक विमानन नियामक व्यवस्था, DGCA की भूमिका)
- Prelims: DGCA (नागरिक विमानन महानिदेशालय) और प्रकार प्रमाणन (Type Certification), मानवरहित हवाई वाहन (UAV) और VTOL (ऊर्ध्वाधर उड़ान एवं अवतरण) क्षमता, स्थिर पंख (Fixed-wing) बनाम बहु-रोटर (Multirotor) विन्यास, ड्रोन नियम, 2021 (Drone Rules, 2021) और वायुयान अधिनियम, 1934 (Aircraft Act, 1934), नागरिक उड्डयन आवश्यकताएँ (Civil Aviation Requirements – CAR), ISR (निगरानी, टोह और सूचना संग्रह) क्षमता, रक्षा अनुसंधान एवं नवाचार की पहल: iDEX (Innovations for Defence Excellence), डिजिटल स्काई (Digital Sky) प्लेटफॉर्म
- Essay: स्वदेशी रक्षा विनिर्माण और आत्मनिर्भर भारत: स्टार्टअप की भूमिका, दोहरे उपयोग प्रौद्योगिकी (Dual-use Technology): नागरिक नियमन और सैन्य आवश्यकता के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: प्रकार प्रमाणन (Type Certification) किसी विमान डिज़ाइन की वायुयोग्यता की नियामक स्वीकृति है, और JK 250e जैसे हाइब्रिड VTOL UAV का DGCA प्रमाणन दोहरे उपयोग प्रौद्योगिकी में स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रमाण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ड्रोन स्टार्टअप Drogo Aerospace को अपने JK 250e मॉडल के लिए नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) से प्रकार प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह स्थिर पंख और ऊर्ध्वाधर उड़ान एवं अवतरण (VTOL) क्षमता वाला मानवरहित हवाई वाहन है, जिसे भारतीय सशस्त्र बलों की ISR (निगरानी, टोह और सूचना संग्रह) आवश्यकताओं के लिए विकसित किया गया है। कंपनी के अनुसार यह प्रमाणन मुख्यतः UAV संचालकों के प्रशिक्षण और देश में प्रशिक्षण क्षमता विकसित करने में सहायक होगा। इस वर्ष की शुरुआत में कंपनी भारतीय सेना को JK 250e इकाइयाँ सौंप चुकी है। कंपनी का दावा है कि प्रमाणित प्लेटफॉर्मों की कुल संख्या अब छह हो गई है, और वह स्वयं को प्रशिक्षण उद्देश्य हेतु यह प्रमाणन पाने वाला भारत का एकमात्र हाइब्रिड UAV बताती है। यह समाचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नागरिक नियामक प्रमाणन और सैन्य आवश्यकता का मेल रक्षा स्वदेशीकरण का एक व्यावहारिक उदाहरण है।
पृष्ठभूमि
- भारत में नागरिक विमानन का नियमन वायुयान अधिनियम, 1934 के अंतर्गत होता है, और DGCA इसके तहत विमानों की वायुयोग्यता (Airworthiness) सुनिश्चित करने वाला प्रमुख नियामक है।
- ड्रोन नियम, 2021 ने ड्रोन के वज़न के आधार पर नैनो, माइक्रो, छोटे, मध्यम और बड़े वर्ग निर्धारित किए तथा ड्रोन के पंजीकरण, अनुमति और संचालन की प्रक्रिया को डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म से जोड़ा।
- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु रक्षा मंत्रालय ने iDEX जैसी पहलें शुरू की हैं, जिनके माध्यम से स्टार्टअप और MSME को रक्षा आवश्यकताओं से जोड़ा जाता है।
- सैन्य अभियानों में UAV की भूमिका निगरानी, लक्ष्य पहचान और स्थिति-जागरूकता तक विस्तृत हो चुकी है, इसलिए सशस्त्र बलों में मानवरहित प्रणालियों की माँग लगातार बढ़ रही है।
- पारंपरिक UAV को उड़ान के लिए रनवे या प्रक्षेपण स्थल की आवश्यकता होती है, जबकि VTOL क्षमता वाले वाहन सीमित स्थान से उड़ान भर सकते हैं, जो दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में उपयोगी है।
प्रकार प्रमाणन (Type Certification) और मानवरहित हवाई वाहन क्या है?
- प्रकार प्रमाणन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी विमान या उसके डिज़ाइन के एक प्रकार (Type) को नियामक द्वारा निर्धारित वायुयोग्यता मानकों पर खरा होने की औपचारिक स्वीकृति दी जाती है। इसके बाद उसी डिज़ाइन के उत्पादन और संचालन के लिए आधार बनता है।
- मानवरहित हवाई वाहन (UAV) ऐसा विमान है जिसमें चालक दल सवार नहीं होता और जिसे दूर से या स्वचालित प्रणाली द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इसे सामान्यतः ड्रोन भी कहा जाता है।
- स्थिर पंख (Fixed-wing) UAV पंखों के सहारे उड़ते हैं, जिससे इनकी उड़ान दक्षता और उड़ान अवधि अधिक होती है। बहु-रोटर (Multirotor) UAV रोटरों से उड़ते हैं और सीधे ऊपर उड़ान भरने तथा मंडराने (Hovering) में सक्षम होते हैं।
- हाइब्रिड VTOL विन्यास में दोनों विशेषताएँ मिलती हैं, अर्थात् ऊपर से उड़ान भरने की क्षमता और स्थिर पंख उड़ान की दक्षता। यही कारण है कि ऐसे वाहन सैन्य निगरानी में लोकप्रिय हो रहे हैं।
- ISR (निगरानी, टोह और सूचना संग्रह) का अर्थ है लक्ष्य क्षेत्र की सूचना एकत्र करना, उसकी निरंतर निगरानी करना और कमांडरों के लिए स्थिति-जागरूकता (Situational Awareness) तैयार करना।
- उड़ान अवधि (Endurance) से आशय उस अधिकतम समय से है जितनी देर कोई UAV बिना ईंधन या बैटरी बदले उड़ सकता है। दी गई जानकारी के अनुसार JK 250e की उड़ान अवधि 2 से 3 घंटे है।
- भारत में नागरिक नियामक प्रमाणन का सैन्य लाभ यह है कि इससे संचालकों के प्रशिक्षण और स्वदेशी प्रशिक्षण ढाँचे को मानक आधार मिलता है, जो रक्षा प्रौद्योगिकी के दोहरे उपयोग पक्ष को दर्शाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ऊर्ध्वाधर उड़ान एवं अवतरण क्षमता (VTOL) | रनवे के बिना संचालन संभव होता है, जिससे दुर्गम और सीमित ढाँचे वाले क्षेत्रों में तैनाती आसान होती है |
| स्थिर-पंख और बहु-रोटर का संकर विन्यास | स्थिर-पंख की ईंधन-दक्षता और बहु-रोटर की ऊर्ध्वाधर क्षमता को जोड़ता है, इसलिए उड़ान के दोनों चरणों में लाभ मिलता है |
| सहनशक्ति (Endurance): 2-3 घंटे | निरंतर निगरानी के लिए उड़ान-अवधि सीमित है; इसलिए इसे अधिक सहनशक्ति वाले प्लेटफॉर्मों के पूरक के रूप में देखना उपयुक्त है |
| ISR भूमिका (Intelligence, Surveillance and Reconnaissance) | खुफिया जानकारी, निगरानी और टोह के माध्यम से सैन्य स्थिति-जागरूकता बढ़ाने के लिए बनाया गया है |
| DGCA प्रकार प्रमाणन (प्रशिक्षण उद्देश्य) | संचालकों के प्रशिक्षण और स्वदेशी प्रशिक्षण क्षमता के विकास का आधार बनता है; कंपनी के दावे के अनुसार यह संकर विन्यास वाले UAV के लिए इस उद्देश्य से पहला प्रमाणन है |
| प्रमाणित प्लेटफॉर्मों की संख्या: छह | कंपनी के अनुसार अब तक छह प्लेटफॉर्म प्रमाणित हो चुके हैं; इसी वर्ष भारतीय सेना को JK 250e की आपूर्ति की गई थी |
महत्व
सामरिक एवं रक्षा
- सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में वास्तविक-समय की निगरानी और स्थिति-जागरूकता की क्षमता बढ़ती है
- रनवे-मुक्त संचालन से अग्रिम क्षेत्रों में परिचालन लचीलापन मिलता है
- सेना को आपूर्ति से वास्तविक परिस्थितियों में परिचालन-परीक्षण और उपयोगकर्ता-फीडबैक का अवसर मिलता है
नियामक एवं विमानन
- DGCA द्वारा प्रकार प्रमाणन का अर्थ है कि डिज़ाइन को वायुयोग्यता और सुरक्षा मानकों पर परखा गया है
- सैन्य-उपयोग वाले प्लेटफॉर्म और नागर विमानन नियमों के बीच एक व्यावहारिक सेतु बनता है
औद्योगिक एवं तकनीकी
- स्वदेशी डिज़ाइन और विनिर्माण में निजी क्षेत्र और स्टार्टअप की भूमिका स्पष्ट होती है
- रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस उदाहरण सामने आता है
प्रशिक्षण एवं मानव संसाधन
- प्रमाणित प्रशिक्षण ढाँचा संचालकों की कुशल आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक हो सकता है
- स्वदेशी प्रशिक्षण क्षमता से विदेशी प्रशिक्षण पर निर्भरता घट सकती है
चुनौतियाँ
1. सहनशक्ति की सीमा
- 2-3 घंटे की उड़ान-अवधि लंबी और निरंतर निगरानी के लिए पर्याप्त नहीं है
- इसके लिए बड़ी संख्या में प्लेटफॉर्म या उच्च-सहनशक्ति वाले उपकरणों की आवश्यकता होती है, जिससे लागत बढ़ती है
यूपीएससी लिंक: GS-III: रक्षा तैयारी और आंतरिक सुरक्षा
2. वायुक्षेत्र प्रबंधन और नागर-सैन्य समन्वय
- मानवरहित वायु यानों का संचालन नागरिक वायुक्षेत्र में होता है, इसलिए नो-फ्लाई ज़ोन और अनुमति-तंत्र का समन्वय आवश्यक है
- वायु यातायात नियंत्रण के साथ तालमेल न होने पर नागरिक और सैन्य उड़ानों में जोखिम बढ़ सकता है
यूपीएससी लिंक: GS-III: आंतरिक सुरक्षा और आधारभूत ढाँचा (विमानन)
3. प्रमाणन प्रक्रिया और मानक
- सैन्य-उपयोग वाले प्लेटफॉर्म पर नागर नियमों को किस सीमा तक लागू किया जाए, यह स्पष्ट होना चाहिए
- प्रमाणन की गति और क्षमता बढ़ाए बिना उद्योग के विस्तार में बाधा आ सकती है
यूपीएससी लिंक: GS-III: विज्ञान-प्रौद्योगिकी और नियामक ढाँचा
4. आयात पर निर्भरता
- इंजन, सेंसर, नेविगेशन और संचार घटकों में विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता बनी रह सकती है
- स्वदेशीकरण की वास्तविक गहराई प्रमाणन के दावे से अलग हो सकती है, इसलिए घटक-स्तर पर जाँच आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS-III: आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास
5. साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध
- डेटा-लिंक का सुरक्षित होना अनिवार्य है, ताकि सिग्नल जैमिंग और स्पूफिंग से बचाव हो सके
- संवेदनशील निगरानी डेटा की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है
यूपीएससी लिंक: GS-III: आंतरिक सुरक्षा और साइबर सुरक्षा
6. स्केल-अप और खरीद-प्रक्रिया
- परीक्षण और सीमित आपूर्ति से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर उत्पादन तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण है
- रक्षा अधिग्रहण की समय-सीमा और निरंतर आदेश की अनिश्चितता निजी निवेश को प्रभावित कर सकती है
यूपीएससी लिंक: GS-III: रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी और रक्षा अधिग्रहण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सहनशक्ति | एक प्लेटफॉर्म से लंबी अवधि की निगरानी संभव नहीं; परिचालन-क्षमता के लिए अधिक इकाइयाँ चाहिए |
| वायुक्षेत्र समन्वय | नागरिक वायुक्षेत्र में सैन्य-प्रशिक्षण और नियमित उड़ानों के बीच सुरक्षा-जोखिम |
| घटक-स्तर स्वदेशीकरण | इंजन, सेंसर और बैटरी में आयात-निर्भरता से आपूर्ति-शृंखला का जोखिम |
| साइबर एवं इलेक्ट्रॉनिक खतरे | डेटा-लिंक पर जैमिंग और स्पूफिंग से मिशन की विफलता का खतरा |
| प्रमाणन और उत्पादन की गति | प्रमाणन में देरी या सीमित क्षमता से औद्योगिक विस्तार धीमा हो सकता है |
आगे की राह
- नागर-सैन्य प्रमाणन के लिए DGCA और रक्षा मंत्रालय के बीच स्पष्ट और समयबद्ध प्रोटोकॉल तय किए जाएँ
- मानवरहित वायु यान प्रणाली नियम, 2021 (Unmanned Aircraft System Rules, 2021) के अंतर्गत सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों के लिए अनुमति-तंत्र को सरल बनाया जाए
- इंजन, सेंसर और बैटरी जैसे प्रमुख घटकों के लिए घरेलू आपूर्ति-शृंखला विकसित की जाए
- प्रमाणित संचालकों का कैडर तैयार करने के लिए प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता बढ़ाई जाए
- सेना की खरीद में दीर्घकालिक अनुबंध और परिचालन-फीडबैक के आधार पर उत्पाद-सुधार की व्यवस्था हो
- साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध-प्रतिरोध के मानक प्रमाणन की शर्तों में शामिल किए जाएँ
- सहनशक्ति और पेलोड-क्षमता बढ़ाने के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश को प्रोत्साहित किया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ड्रोन प्रौद्योगिकी · नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) · प्रकार प्रमाणन (Type Certification) · रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता · मानव रहित हवाई वाहन (UAV) · वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (VTOL) · खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) · मेक इन इंडिया · एयरोस्पेस नवाचार · सैन्य प्रशिक्षण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 246 — संघ सूची विषयों पर संसद की विधायी शक्ति
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 1 — भारत की रक्षा का विषय
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 29 — वायुमार्ग, विमान और वायु-नौवहन
अवधारणा प्रवाह
स्वदेशी डिज़ाइन में स्थिर-पंख और बहु-रोटर का संकर विन्यास विकसित होता है → ISR आवश्यकताओं के लिए भारतीय सेना को प्लेटफॉर्म की आपूर्ति होती है → DGCA द्वारा प्रशिक्षण उद्देश्य हेतु प्रकार प्रमाणन प्रदान किया जाता है → प्रमाणन से संचालक-प्रशिक्षण और स्वदेशी प्रशिक्षण क्षमता का विकास संभव होता है → प्रमाणित प्लेटफॉर्मों की संख्या बढ़ने से उत्पादन और आपूर्ति-शृंखला मजबूत होती है → रक्षा-क्षमता में आत्मनिर्भरता और नागर-सैन्य विमानन ढाँचे में समन्वय सुदृढ़ होता है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) भारत में नागरिक उड्डयन के लिए नियामक संस्था है।
2. प्रकार प्रमाणन (Type Certification) किसी विमान डिजाइन के सुरक्षा और प्रदर्शन मानकों के अनुपालन को प्रमाणित करता है।
3. मानव रहित हवाई वाहन (UAV) केवल सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। DGCA भारत में नागरिक उड्डयन सुरक्षा मानकों को विनियमित करता है। कथन 2 भी सही है। प्रकार प्रमाणन यह सुनिश्चित करता है कि एक विशेष विमान डिजाइन सभी लागू सुरक्षा और प्रदर्शन आवश्यकताओं को पूरा करता है। कथन 3 गलत है। UAV का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के अलावा कृषि, सर्वेक्षण, आपदा प्रबंधन और वितरण जैसे नागरिक क्षेत्रों में भी किया जाता है।
Q2. रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ के संदर्भ में, हाल ही में DGCA द्वारा एक रक्षा UAV को प्रकार प्रमाणन प्रदान किया जाना किस नीतिगत पहल के अनुरूप है?
- प्रधानमंत्री जन धन योजना
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
- मेक इन इंडिया
- स्वच्छ भारत अभियान
उत्तर: मेक इन इंडिया — DGCA द्वारा स्वदेशी रक्षा UAV को प्रकार प्रमाणन प्रदान किया जाना ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारत को विनिर्माण और डिजाइन का वैश्विक केंद्र बनाना है, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में रक्षा प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण में प्रकार प्रमाणन (Type Certification) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इस प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में प्रकार प्रमाणन (Type Certification) और इसके महत्व को संक्षेप में बताएं। मुख्य भाग में, रक्षा प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण में प्रकार प्रमाणन की भूमिका पर विस्तार से चर्चा करें, जैसे सुरक्षा मानकों का अनुपालन, विश्वसनीयता में वृद्धि, निर्यात क्षमता, अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन। इसके बाद, इस प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियों (जैसे उच्च लागत, लंबी प्रक्रिया, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी) और अवसरों (जैसे नवाचार को बढ़ावा, रोजगार सृजन, भू-राजनीतिक लाभ) का विश्लेषण करें। निष्कर्ष में, भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रकार प्रमाणन के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
स्रोत: The Hindu
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