पीएम-एसईटीयू: महाराष्ट्र, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में 1,194 करोड़ के आईटीआई उन्नयन को मंजूरी

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पीएम-एसईटीयू: महाराष्ट्र, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में 1,194 करोड़ के आईटीआई उन्नयन को मंजूरी

Map of Maharashtra, Odisha, Jammu and Kashmir highlighted on the map of India — पीएम-एसईटीयू आईटीआई उन्नयन महाराष्ट्र…
मानचित्र: पीएम-एसईटीयू के अंतर्गत आईटीआई क्लस्टरों के लिए स्वीकृत निवेश वाले राज्य

✎ पीएम-एसईटीयू हब-एवं-स्पोक मॉडल और उद्योग भागीदारी के माध्यम से सरकारी आईटीआई को उद्योग-अनुकूल कौशल संस्थानों में बदलने की योजना है, जिसका प्रशासनिक नियंत्रण MSDE और तकनीकी मानकीकरण DGT के पास है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था (रोजगार, मानव संसाधन विकास और कौशल विकास)  |  GS Paper II — शासन (केंद्र-राज्य संबंध, सरकारी योजनाएं और सार्वजनिक-निजी भागीदारी)
  • Prelims: पीएम-एसईटीयू (PM-SETU) और इसका हब-एवं-स्पोक मॉडल, आईटीआई (ITI) का शासन: प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) और राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (NCVT), संविधान की समवर्ती सूची, प्रविष्टि 26: श्रमिकों के लिए व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण, वर्ल्डस्किल्स (WorldSkills) और उसके मानकों के अनुरूप व्यापार क्षेत्र, कौशल भारत मिशन (Skill India Mission) और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), बहुपक्षीय विकास बैंक (MDB) की भूमिका और ISO प्रमाणन
  • Essay: कौशल-आधारित रोजगार: जनसांख्यिकीय लाभांश को उत्पादक श्रम-शक्ति में बदलने की चुनौती, सार्वजनिक संस्थानों और उद्योग की साझेदारी: प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगारपरकता पर प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम-एसईटीयू हब-एवं-स्पोक मॉडल और उद्योग भागीदारी के माध्यम से सरकारी आईटीआई को उद्योग-अनुकूल कौशल संस्थानों में बदलने की योजना है, जिसका प्रशासनिक नियंत्रण MSDE और तकनीकी मानकीकरण DGT के पास है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी की अध्यक्षता में पीएम-एसईटीयू की छठी राष्ट्रीय संचालन समिति की बैठक हुई, जिसमें महाराष्ट्र, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर के पांच आईटीआई क्लस्टरों के लिए 1,194.92 करोड़ रुपये की रणनीतिक निवेश योजनाओं को मंजूरी दी गई। इससे योजना के अंतर्गत स्वीकृत कुल निवेश 3,687 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ओडिशा के कटक क्लस्टर के लिए 240.50 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र के पुणे क्लस्टर के लिए 241 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत हुईं। टाटा स्टील फाउंडेशन, बीवीजी इंडिया, बेलराइज इंडस्ट्रीज, ईगल इंफ्रा इंडिया और इंदरदीप इंफ्रा इंडिया उद्योग भागीदार के रूप में इन क्लस्टरों के उन्नयन में शामिल होंगे। समिति ने क्लस्टरों को ISO प्रमाणन की दिशा में काम करने और अपनी योजनाओं में कम से कम एक वर्ल्डस्किल्स-संरेखित व्यापार या दक्षता क्षेत्र शामिल करने का प्रोत्साहन दिया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) की परंपरा 1950 की कारीगर प्रशिक्षण योजना (Craftsmen Training Scheme) से जुड़ी है। आईटीआई मुख्यतः कुशल कारीगर और तकनीशियन तैयार करते हैं।
  • शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण दोनों विषय संविधान की समवर्ती सूची में आते हैं, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों इस क्षेत्र में विधायी और प्रशासनिक भूमिका निभाते हैं।
  • पुराने आईटीआई में उद्योग-अप्रचलित पाठ्यक्रम, पुराने उपकरण और प्रशिक्षकों की कमी जैसी समस्याएं रही हैं, जिससे प्रशिक्षित युवाओं की रोजगारपरकता प्रभावित होती है।
  • कौशल भारत मिशन (2015) और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) ने कौशल प्रशिक्षण को मानकीकृत करने और उसे औपचारिक शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया।
  • पीएम-एसईटीयू के अंतर्गत चयनित आईटीआई को हब-एवं-स्पोक मॉडल में जोड़ा जाता है, जिसमें एक उन्नत संस्थान (हब) आसपास के संस्थानों (स्पोक) को संसाधन, प्रशिक्षक और पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है।

पीएम-एसईटीयू क्या है?

  • प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता रूपांतरण उन्नत आईटीआई योजना (Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) (PM-SETU) सरकारी आईटीआई को उद्योग-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार संस्थानों में बदलने की योजना है।
  • इस योजना का क्रियान्वयन कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) करता है, और तकनीकी मानक एवं प्रशिक्षण गुणवत्ता में प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) की प्रमुख भूमिका होती है।
  • योजना में हब-एवं-स्पोक मॉडल अपनाया गया है, जिसमें क्लस्टर का चयन किया जाता है और उसके लिए रणनीतिक निवेश योजना (SIP) तैयार की जाती है।
  • उद्योग भागीदार (जैसे कंपनियां और फाउंडेशन) प्रशिक्षण कार्यक्रम, उपकरण, प्रशिक्षक क्षमता-निर्माण और रोजगार-संबंधी सहभागिता में योगदान देते हैं। इससे सार्वजनिक-निजी भागीदारी का स्वरूप बनता है।
  • राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) योजना की प्रगति की समीक्षा करती है और रणनीतिक निवेश योजनाओं को स्वीकृति देती है। सदस्यों में राज्य सरकारें, केंद्र शासित प्रदेश और बहुपक्षीय विकास बैंक (MDB) के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
  • वर्ल्डस्किल्स (WorldSkills) के मानकों से संरेखण का उद्देश्य प्रशिक्षण को अंतरराष्ट्रीय कौशल मानकों के अनुरूप बनाना है, जबकि ISO प्रमाणन संस्थागत गुणवत्ता प्रबंधन को सुदृढ़ करता है।
  • इस योजना का लक्ष्य पाठ्यक्रम में सुधार, प्रशिक्षकों की क्षमता बढ़ाना, बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और अंततः युवाओं की रोजगारपरकता बढ़ाना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता रूपांतरण उन्नत आईटीआई योजना (Pradhan Mantri Kaushal Vikas evam Rozgar Kshamta Parivartan Unnat ITI Yojana / PM-SETU) की छठी राष्ट्रीय संचालन समिति (National Steering Committee, NSC) द्वारा पांच क्लस्टरों की रणनीतिक निवेश योजनाओं (Strategic Investment Plan, SIP) को मंजूरी योजना के अंतर्गत अब तक स्वीकृत कुल निवेश 3,687 करोड़ रुपये हो गया है। इस स्वीकृति से योजना के चरणबद्ध कार्यान्वयन की प्रगति का पता चलता है।
हब-और-स्पोक (Hub-and-Spoke) मॉडल कटक, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर जैसे क्लस्टरों में एक केंद्रीय हब आईटीआई और उससे जुड़े स्पोक आईटीआई होते हैं। इससे संसाधनों, प्रशिक्षकों और उपकरणों का साझा उपयोग संभव होता है।
उद्योग भागीदारी (Industry Partnership) टाटा स्टील फाउंडेशन, बीवीजी इंडिया, बेलराइज इंडस्ट्रीज, ईगल इंफ्रा इंडिया और इंदरदीप इंफ्रा इंडिया जैसे उद्योग भागीदार उन्नयन में शामिल हैं। पाठ्यक्रम को बाज़ार की मांग से जोड़ने में यह सहभागिता मददगार है।
बहुपक्षीय विकास बैंकों (Multilateral Development Banks, MDBs) की भागीदारी बैंक सहयोग से परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रक्रियाएं विकसित होने की संभावना बढ़ती है।
आईएसओ प्रमाणन और वर्ल्डस्किल्स (WorldSkills) संरेखण क्लस्टरों को आईएसओ प्रमाणन की दिशा में काम करने और कम से कम एक वर्ल्डस्किल्स-संरेखित व्यापार या दक्षता क्षेत्र शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता के मानक तय होते हैं।
कार्यान्वयन के घटक बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, उद्योग-अनुकूल पाठ्यक्रम, प्रशिक्षकों की क्षमता-वृद्धि, उद्योग सहभागिता और रोजगार के अवसरों में सुधार, ये पांच मुख्य लक्ष्य हैं।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • आईटीआई से प्रशिक्षित कुशल श्रमिकों की आपूर्ति बढ़ने से विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्र की उत्पादकता में सुधार की संभावना बनती है।
  • औद्योगिक क्षेत्रों, जैसे इस्पात (ओडिशा) और ऑटो-घटक विनिर्माण (महाराष्ट्र), की नियोक्ता-मांग के अनुरूप पाठ्यक्रम से कौशल-बेमेल (Skill Mismatch) कम करने में मदद मिलती है।

मानव संसाधन और रोजगार

  • युवाओं को बेहतर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना योजना का केंद्रीय उद्देश्य है।
  • प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रमाणन मानकों में सुधार से प्रशिक्षित युवाओं की रोजगार-योग्यता बढ़ती है।

संघीय और प्रशासनिक महत्व

  • राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, उद्योग भागीदारों और बहुपक्षीय विकास बैंकों की साझेदारी से सहकारी संघवाद की भावना का व्यावहारिक उदाहरण सामने आता है।
  • केंद्र द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और राज्य स्तर पर कार्यान्वयन, दोनों का समन्वय इस मॉडल की विशेषता है।

क्षेत्रीय संतुलन

  • जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों में क्लस्टरों का चयन कौशल-अवसरों के क्षेत्रीय विस्तार की दिशा को दर्शाता है।
  • पिछड़े और उभरते क्षेत्रों में आईटीआई का उन्नयन स्थानीय स्तर पर पलायन घटाने में सहायक हो सकता है।

चुनौतियाँ

1. प्रशिक्षकों की गुणवत्ता और उपलब्धता

  • आधुनिक तकनीक और उभरते व्यवसायों के लिए अद्यतन प्रशिक्षकों की कमी एक बड़ी बाधा है।
  • प्रशिक्षकों का नियमित पुनःप्रशिक्षण और उद्योग में उनका अनुभव-आदान-प्रदान सुनिश्चित करना आवश्यक है।

2. पाठ्यक्रम और उद्योग मांग के बीच तालमेल

  • बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के साथ पाठ्यक्रम को समय पर अद्यतन करना कठिन होता है।
  • उद्योग-अनुकूल पाठ्यक्रम तभी प्रभावी होगा जब प्रशिक्षुता (Apprenticeship) और वास्तविक कार्यस्थल अनुभव उसका हिस्सा हों।

3. क्षेत्रीय क्षमता में असमानता

  • राज्यों की वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता में भिन्नता के कारण कार्यान्वयन की गति और गुणवत्ता असमान हो सकती है।
  • दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में उद्योग भागीदारों की रुचि अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ सकता है।

4. दीर्घकालिक रखरखाव और स्थिरता

  • नई प्रयोगशालाओं और उपकरणों के रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था आवश्यक है।
  • परियोजना-आधारित वित्तपोषण समाप्त होने के बाद संस्थानों का संचालन कैसे जारी रहे, यह प्रश्न बना रहता है।

5. गुणवत्ता प्रमाणन का क्रियान्वयन

  • आईएसओ प्रमाणन और वर्ल्डस्किल्स मानकों को सभी आईटीआई में एक समान रूप से लागू करना चुनौतीपूर्ण है।
  • प्रमाणन प्रक्रिया के लिए आवश्यक आंतरिक प्रणालियां और दस्तावेजीकरण कई संस्थानों के लिए नई होंगी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता का विषय
प्रशिक्षकों की कमी आधुनिक कौशल के अनुरूप प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
कौशल-बेमेल प्रशिक्षित युवाओं और उद्योग की वास्तविक मांग के बीच अंतर बना रह सकता है।
राज्यों के बीच असमान क्षमता कुछ राज्यों में कार्यान्वयन धीमा रह सकता है, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ सकता है।
वित्तीय स्थिरता परियोजना अवधि के बाद रखरखाव और संचालन के लिए स्थायी स्रोत स्पष्ट नहीं हैं।
उद्योग भागीदारों पर निर्भरता निजी भागीदारों के हितों और सार्वजनिक उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
प्रमाणन मानकों का एकरूप क्रियान्वयन आईएसओ और वर्ल्डस्किल्स मानकों को सभी क्लस्टरों में समान रूप से लागू करना कठिन हो सकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता रूपांतरण उन्नत आईटीआई योजना (Pradhan Mantri Kaushal Vikas evam Rozgar Kshamta Parivartan Unnat ITI Yojana / PM-SETU)

आगे की राह

  • प्रशिक्षकों के लिए नियमित उद्योग-प्रशिक्षण और पुनःप्रशिक्षण कार्यक्रम अनिवार्य किए जाएं, ताकि शिक्षण की गुणवत्ता तकनीकी बदलावों के साथ बनी रहे।
  • पाठ्यक्रम निर्धारण में उद्योग संघों और स्थानीय नियोक्ताओं की नियमित भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
  • प्रशिक्षुता (Apprenticeship) को प्रशिक्षण का अभिन्न हिस्सा बनाकर कार्यस्थल अनुभव को बढ़ाया जाए।
  • क्लस्टरों के लिए परियोजना-पश्चात संचालन और रखरखाव की स्थायी वित्तीय योजना पहले से तैयार की जाए।
  • पिछड़े राज्यों और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त तकनीकी सहायता और क्षमता-निर्माण सहयोग दिया जाए।
  • आईएसओ प्रमाणन और वर्ल्डस्किल्स मानकों की प्रगति के लिए एक पारदर्शी निगरानी और मूल्यांकन ढांचा विकसित किया जाए।
  • हब-और-स्पोक मॉडल में हब और स्पोक आईटीआई के बीच संसाधन-साझेदारी की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कौशल विकास (Skill Development) · औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (Industrial Training Institute, ITI) · हब-और-स्पोक मॉडल (Hub-and-Spoke Model) · सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership, PPP) · राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (National Skills Qualification Framework, NSQF) · प्रशिक्षण महानिदेशालय (Directorate General of Training, DGT) · समवर्ती सूची (Concurrent List) · कौशल भारत मिशन (Skill India Mission) · युवा जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) · बहुपक्षीय विकास बैंक (Multilateral Development Bank, MDB) · रोजगार-योग्यता (Employability) · उद्योग-शिक्षा अंतराल (Industry-Academia Gap)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 41: काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता का अधिकार
  • सातवीं अनुसूची, समवर्ती सूची, प्रविष्टि 25: व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण

अवधारणा प्रवाह

राष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक कुशल श्रमिकों की बढ़ती मांग और आईटीआई के पुराने ढांचे के बीच अंतर  →  पीएम-एसईटीयू के अंतर्गत आईटीआई को हब-और-स्पोक क्लस्टरों में संगठित करने का निर्णय  →  राज्य सरकारों द्वारा रणनीतिक निवेश योजनाएं (SIP) प्रस्तुत करना और उद्योग भागीदारों का चयन  →  राष्ट्रीय संचालन समिति द्वारा समीक्षा और 1,194.92 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी  →  बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, उद्योग-अनुकूल पाठ्यक्रम और प्रशिक्षकों की क्षमता-वृद्धि  →  प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, आईएसओ व वर्ल्डस्किल्स मानकों का पालन और उद्योग सहभागिता में वृद्धि  →  प्रशिक्षित युवाओं के लिए बेहतर रोजगार और कौशल-बेमेल में कमी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता रूपांतरण उन्नत आईटीआई योजना (PM-SETU) का कार्यान्वयन कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के अंतर्गत किया जाता है।
2. इस योजना के अंतर्गत आईटीआई को क्लस्टर के रूप में उन्नत किया जाता है, जिसमें एक केंद्रीय हब और उससे जुड़े स्पोक होते हैं।
3. इस योजना का प्रशासनिक नियंत्रण शिक्षा मंत्रालय के पास है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: PM-SETU MSDE की योजना है और इसकी राष्ट्रीय संचालन समिति की अध्यक्षता MSDE की सचिव करती हैं। कथन 2 सही है: समाचार में कटक, पुणे और अन्य क्लस्टरों में हब (मुख्य आईटीआई) और स्पोक (सहबद्ध आईटीआई) का उल्लेख है। कथन 3 गलत है, क्योंकि योजना का नियंत्रण शिक्षा मंत्रालय के पास नहीं, बल्कि MSDE के पास है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): आईटीआई के हब-और-स्पोक मॉडल में अलग-अलग आईटीआई विशेष उपकरण, प्रशिक्षकों और पाठ्यक्रम संसाधनों को साझा कर सकते हैं।
कारण (R): स्पोक आईटीआई हब संस्थान के उपकरणों और प्रशिक्षकों की क्षमता का उपयोग कर पाते हैं, जिससे प्रत्येक संस्थान में अलग-अलग पूर्ण निवेश की आवश्यकता कम होती है।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — हब-और-स्पोक मॉडल का मूल सिद्धांत संसाधनों का साझा उपयोग है, इसलिए (A) सही है। स्पोक संस्थान हब की विशेषज्ञता और उपकरणों का लाभ लेते हैं, जो (A) की सही व्याख्या देता है। इसलिए विकल्प (a) सही है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
सूची I (संस्था/ढांचा)
1. राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF)
2. प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT)
3. वर्ल्डस्किल्स इंटरनेशनल (WorldSkills International)
4. अपरेंटिसशिप अधिनियम, 1961

सूची II (विवरण)
a. कौशल प्रतियोगिताएं आयोजित करने वाला अंतरराष्ट्रीय निकाय
b. कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत आईटीआई और राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रमाणन की नोडल तकनीकी संस्था
c. कौशल आधारित योग्यताओं के स्तरों को परिभाषित करने वाला ढांचा
d. उद्योगों में प्रशिक्षुओं की भर्ती और प्रशिक्षण को नियंत्रित करने वाला विधान

सही सुमेल चुनिए:

  1. 1-c, 2-b, 3-a, 4-d
  2. 1-b, 2-c, 3-a, 4-d
  3. 1-c, 2-a, 3-b, 4-d
  4. 1-d, 2-b, 3-a, 4-c

उत्तर: 1-c, 2-b, 3-a, 4-d — NSQF कौशल योग्यता के स्तरों का ढांचा है (1-c)। DGT आईटीआई और NCVT का नोडल तकनीकी निकाय है (2-b)। WorldSkills International अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिताएं आयोजित करता है (3-a)। अपरेंटिसशिप अधिनियम, 1961 प्रशिक्षुता को विनियमित करता है (4-d)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को उद्योग-भागीदारी आधारित क्लस्टर मॉडल में उन्नत करने की नीति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस मॉडल से रोजगार-योग्यता में सुधार की कितनी संभावना है, और इसकी सीमाएं क्या हैं? उदाहरण के साथ विवेचना कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: प्रस्तावना: भारत की जनसांख्यिकीय संरचना और युवा श्रमबल में कौशल अंतर; PM-SETU (प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता रूपांतरण उन्नत आईटीआई योजना) का परिचय, जिसे MSDE की राष्ट्रीय संचालन समिति की छठी बैठक में 1,194.92 करोड़ रुपये की पांच रणनीतिक निवेश योजनाओं (SIP) की स्वीकृति के साथ आगे बढ़ाया गया; कुल स्वीकृत निवेश 3,687 करोड़ रुपये।

संवैधानिक और संस्थागत आधार: संविधान की सातवीं अनुसूची में समवर्ती सूची की प्रविष्टि 25 (श्रमिकों का व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण), प्रविष्टि 26 (व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षण संस्थान, समवर्ती सूची) और अनुच्छेद 41 (कार्य का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और कुछ दशाओं में लोक सहायता, राज्य नीति का निदेशक तत्व) का उल्लेख; केंद्र-राज्य सहयोग के सिद्धांत से संघवाद का संदर्भ; प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) और राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (NCVT) की भूमिका; अपरेंटिसशिप अधिनियम, 1961 और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) का संबंध।

नीति के सकारात्मक पक्ष: हब-और-स्पोक मॉडल के माध्यम से संसाधनों, प्रशिक्षकों और उपकरणों का साझा उपयोग; कटक क्लस्टर में टाटा स्टील फाउंडेशन (240.50 करोड़ रुपये) और पुणे क्लस्टर में बीवीजी इंडिया (241 करोड़ रुपये) की भागीदारी का उदाहरण; ISO प्रमाणन और वर्ल्डस्किल्स-संरेखित व्यापारों को प्रोत्साहन; बहुपक्षीय विकास बैंकों की भागीदारी से वित्तीय और तकनीकी क्षमता में वृद्धि।

सीमाएं और आलोचनात्मक विश्लेषण: उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम का शिक्षा-क्षेत्र पर संभावित एकांगी प्रभाव; प्रशिक्षकों का अद्यतन होना और उद्योग से प्रशिक्षकों का स्थानांतरण; प्रशिक्षण के बाद वास्तविक प्लेसमेंट और अनौपचारिक क्षेत्र की स्थिति; राज्य सरकारों की क्षमता और कार्यान्वयन में विलंब; पूर्व की योजनाओं (जैसे ITI अपग्रेडेशन योजना) के अनुभव से सीख; शिक्षा और कौशल के बीच समन्वय की कमी।

निष्कर्ष: सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से कौशल संस्थानों का आधुनिकीकरण आवश्यक है, परंतु रोजगार-परिणामों की निगरानी, प्रशिक्षक-विकास, नियमित मूल्यांकन और राज्यों की भागीदारी के बिना इसका प्रभाव सीमित रह सकता है। कौशल भारत मिशन के व्यापक ढांचे में इसकी सफलता का आकलन परिणामों के आधार पर होना चाहिए।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Jammu & Kashmir PCS (JKPSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: राष्ट्रीय संचालन समिति द्वारा हाल ही में मंजूर किए गए 1,194.92 करोड़ रुपये के निवेश का संबंध पीएम-एसईटीयू योजना के अंतर्गत किन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्थापित किए जाने वाले आईटीआई क्लस्टरों से है?

  1. महाराष्ट्र, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, गुजरात एवं राजस्थान
  2. महाराष्ट्र, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश एवं बिहार
  3. महाराष्ट्र, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु एवं कर्नाटक
  4. महाराष्ट्र, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब एवं हरियाणा

उत्तर: महाराष्ट्र, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, गुजरात एवं राजस्थान — पीएम-एसईटीयू योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में पांच आईटीआई क्लस्टरों के लिए निवेश को मंजूरी दी गई है।

Mains: पीएम-एसईटीयू योजना के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर में स्थापित किए जाने वाले आईटीआई क्लस्टरों के माध्यम से राज्य में कौशल विकास एवं रोजगार सृजन पर प्रकाश डालिए। इसके अतिरिक्त, राज्य में कौशल विकास के लिए अपनाई जा रही अन्य प्रमुख पहलों का भी उल्लेख कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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