19 Oct भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘औस्ट्राहिन्द-25’ का शुभारंभ
✎ ऑस्ट्राहिंद भारतीय थलसेना और ऑस्ट्रेलियाई थलसेना का द्विपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जो भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक भागीदारी (2020) के रक्षा आयाम को दर्शाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंध, भारत-प्रशांत क्षेत्र, क्वाड) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा एवं रक्षा (सशस्त्र बलों की भूमिका, आतंकवाद-रोधी और उग्रवाद-रोधी अभ्यास)
- Prelims: ऑस्ट्राहिंद (AUSTRAHIND): भारतीय थलसेना और ऑस्ट्रेलियाई थलसेना के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास, व्यापक सामरिक भागीदारी (Comprehensive Strategic Partnership), भारत-ऑस्ट्रेलिया, वर्ष 2020, क्वाड (Quad): भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका का समूह, मलाबार अभ्यास: बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की भागीदारी वर्ष 2020 से है, पिच ब्लैक (Pitch Black): ऑस्ट्रेलिया द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास, संघ सूची की प्रविष्टि 1: देश की रक्षा तथा सैन्य बलों की स्थापना एवं संचालन (संविधान की सातवीं अनुसूची), अनुच्छेद 53: संघ की कार्यपालिका शक्ति और राष्ट्रपति का सर्वोच्च सेनापति होना, दक्षिणी वायु कमान (Southern Air Command) का मुख्यालय तिरुवनंतपुरम में होना
- Essay: सैन्य कूटनीति (Military Diplomacy): राष्ट्रीय हितों की पूर्ति में सैन्य सहयोग की भूमिका, भारत-प्रशांत में समान विचारधारा वाले लोकतंत्रों के बीच साझेदारी: अवसर और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: ऑस्ट्राहिंद भारतीय थलसेना और ऑस्ट्रेलियाई थलसेना का द्विपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जो भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक भागीदारी (2020) के रक्षा आयाम को दर्शाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्राहिंद का पाँचवाँ संस्करण तिरुवनंतपुरम में आरंभ हुआ है। यह दोनों देशों की थलसेनाओं के बीच नियमित रूप से होने वाला द्विपक्षीय अभ्यास है। इसका आयोजन यह दर्शाता है कि भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक भागीदारी के अंतर्गत रक्षा सहयोग कितनी गहराई तक पहुँच चुका है। प्रेस विज्ञप्ति में अभ्यास के प्रतिभागियों, अवधि और विशिष्ट सैन्य गतिविधियों का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है, इसलिए परीक्षा के लिए इस समाचार के संदर्भ में केवल पुष्ट तथ्यों पर ही ध्यान केंद्रित करना उचित है।
पृष्ठभूमि
- भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग का आधार विभिन्न स्तरों पर द्विपक्षीय संवाद और समझौते हैं। जून 2020 में दोनों देशों के संबंध व्यापक सामरिक भागीदारी के स्तर तक उन्नत किए गए थे।
- थलसेना, नौसेना और वायुसेना, तीनों स्तरों पर अभ्यास होते हैं। थलसेना के स्तर पर ऑस्ट्राहिंद, नौसेना के स्तर पर AUSINDEX, और बहुराष्ट्रीय स्तर पर मलाबार जैसे अभ्यास इसी ढाँचे का हिस्सा हैं।
- भारत-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति साझा हित ने दोनों देशों के रक्षा संवाद को बढ़ावा दिया है।
- क्वाड जैसे मंचों के माध्यम से भारत और ऑस्ट्रेलिया के सैन्य एवं सुरक्षा सहयोग को व्यापक संदर्भ मिला है, हालाँकि ऑस्ट्राहिंद एक द्विपक्षीय अभ्यास है।
- भारत की सैन्य संरचना में दक्षिणी क्षेत्र में वायु कमान का मुख्यालय तिरुवनंतपुरम में स्थित है, जिससे इस स्थान का सामरिक महत्त्व भी ध्यान में रखा जाता है।
ऑस्ट्राहिंद क्या है?
- ऑस्ट्राहिंद भारतीय थलसेना और ऑस्ट्रेलियाई थलसेना के बीच आयोजित होने वाला द्विपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास है।
- इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच परिचालन समन्वय, प्रशिक्षण मानकों के आदान-प्रदान और अनुभवों को साझा करना है।
- यह अभ्यास दोनों देशों के बीच विश्वास-निर्माण (Confidence Building) और सैन्य-से-सैन्य संपर्क को सुदृढ़ करता है।
- इसका आयोजन भारत और ऑस्ट्रेलिया में बारी-बारी से होता है, और यह पाँचवें संस्करण में तिरुवनंतपुरम में आरंभ हुआ है।
- भारत में सैन्य बलों की स्थापना और संचालन संघ सूची का विषय है, जबकि सशस्त्र बलों का सर्वोच्च नियंत्रण राष्ट्रपति के पास है (अनुच्छेद 53)।
- संयुक्त अभ्यास राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का एक साधन है, जो रक्षा कूटनीति के माध्यम से राष्ट्रीय हितों की पूर्ति करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| संस्करण (Edition) | यह भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्रेलियाई सेना और भारतीय सेना के बीच सहयोग की निरंतरता का पाँचवाँ चरण है |
| आयोजन स्थल | तिरुवनंतपुरम (केरल), जहाँ से इस संस्करण का शुभारंभ हुआ |
| प्रकृति | द्विपक्षीय प्रशिक्षण अभ्यास, जिसमें दोनों देशों के सैनिक साझा युद्धाभ्यास, रणनीति-निर्माण और परिचालन समन्वय का अभ्यास करते हैं |
| द्विपक्षीय ढाँचा | व्यापक सामरिक भागीदारी (Comprehensive Strategic Partnership) और रक्षा सहयोग से संबंधित समझौतों के व्यावहारिक क्रियान्वयन का एक प्रमुख माध्यम |
| अंतर-परिचालनीयता (Interoperability) | साझा प्रक्रियाओं, संचार प्रणालियों और प्रशिक्षण मानकों के विकास से संयुक्त अभियानों की क्षमता बढ़ती है |
महत्व
सामरिक महत्व
- हिन्द-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में समुद्री और भूमि सीमाओं पर साझा सुरक्षा चिंताओं के प्रति दोनों देशों का समन्वित दृष्टिकोण स्पष्ट होता है
- बहुपक्षीय मंचों, जिनमें क्वाड (Quad) भी शामिल है, में ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यावहारिक सैन्य संवाद से क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे को सहारा मिलता है
रक्षा-कूटनीतिक महत्व
- सैन्य अभ्यास विश्वास-निर्माण (Confidence Building Measures) का एक सशक्त साधन है, जो दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर बनाता है
- भारत की नीति में रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए साझेदारी को गहरा करने का यह उदाहरण है
परिचालन महत्व
- विभिन्न भू-भागों और जलवायु परिस्थितियों में प्रशिक्षण से सैनिकों की व्यावसायिक दक्षता और अनुकूलन क्षमता बढ़ती है
- वरिष्ठ अधिकारियों और सैनिकों के बीच अनुभव-साझाकरण से सैन्य सिद्धांतों और प्रक्रियाओं में परस्पर समझ विकसित होती है
चुनौतियाँ
1. परिचालन अंतर-परिचालनीयता की सीमाएँ
- दोनों देशों की सेनाओं के उपकरण, संचार प्रणालियाँ और सैन्य सिद्धांत अलग-अलग मानकों पर आधारित हैं
- साझा संचालन के लिए तकनीकी और प्रक्रियागत समन्वय को लगातार अद्यतन करना आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS-3: रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण और सुरक्षा चुनौतियाँ
2. हिन्द-प्रशांत सुरक्षा परिदृश्य की जटिलता
- क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, सैन्य गतिविधियों में वृद्धि और शक्ति-संतुलन में बदलाव जैसे कारक लगातार विकसित हो रहे हैं
- बहुपक्षीय और द्विपक्षीय साझेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना नीति-निर्माताओं के लिए चुनौतीपूर्ण है
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध और क्षेत्रीय गठबंधन
3. रणनीतिक स्वायत्तता बनाम गठबंधन-आधारित सहयोग
- सैन्य साझेदारी को गठबंधन के रूप में देखे जाने से भारत की गुटनिरपेक्ष परंपरा से जुड़े प्रश्न उठ सकते हैं
- भारत की नीति बहु-संरेखण (Multi-alignment) पर आधारित है, जिसमें हर साझेदारी का स्वतंत्र मूल्यांकन आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारतीय विदेश नीति के मूल सिद्धांत
4. साइबर और सूचना सुरक्षा के खतरे
- संयुक्त अभ्यास के दौरान संवेदनशील सैन्य सूचनाओं और संचार नेटवर्क की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है
- आधुनिक युद्ध में साइबर और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र की भूमिका बढ़ने से जोखिम के नए आयाम सामने आए हैं
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा और साइबर सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| तकनीकी मानकीकरण | विभिन्न उपकरणों और प्रणालियों के बीच समन्वय के लिए निरंतर तकनीकी तालमेल आवश्यक है |
| रणनीतिक संतुलन | बहुपक्षीय साझेदारियों के बीच स्वायत्त निर्णय-क्षमता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है |
| साइबर सुरक्षा | संयुक्त अभ्यास में सूचना-प्रवाह की सुरक्षा के लिए सुदृढ़ प्रोटोकॉल आवश्यक हैं |
| समुद्री और भू-भागीय परिस्थितियाँ | विविध भौगोलिक परिस्थितियों में प्रशिक्षण से लॉजिस्टिक्स और रसद-समन्वय पर दबाव बढ़ता है |
| सार्वजनिक धारणा | सैन्य अभ्यासों के उद्देश्य और दायरे के बारे में पारदर्शी संवाद बनाए रखना आवश्यक है |
आगे की राह
- प्रशिक्षण के बाद संयुक्त मूल्यांकन और सबक-साझाकरण की औपचारिक व्यवस्था बनाई जाए, ताकि अगले संस्करणों में परिचालन दक्षता बढ़े
- संचार प्रणालियों और साझा प्रक्रियाओं के लिए तकनीकी मानकों का नियमित अद्यतन किया जाए
- साइबर और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रोटोकॉल को अभ्यास की योजना का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए
- रक्षा उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग से स्वदेशी तकनीक और क्षमता-निर्माण को प्रोत्साहन दिया जाए
- बहुपक्षीय सुरक्षा मंचों पर सैन्य सहयोग को पारदर्शी और नियम-आधारित ढाँचे में रखा जाए
- विभिन्न भू-भागों में अभ्यास के दौरान मानव-संसाधन और प्रशिक्षण-पाठ्यक्रम के बीच तालमेल सुनिश्चित किया जाए
- अभ्यास के उद्देश्यों के बारे में नागरिक समाज और शिक्षा-जगत के साथ सूचनात्मक संवाद बढ़ाया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) · हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) · संयुक्त सैन्य अभ्यास · अंतर-संचालनीयता (Interoperability) · पारस्परिक लॉजिस्टिक सहायता व्यवस्था (Mutual Logistics Support Arrangement) · चतुर्भुजीय सुरक्षा संवाद (Quad) · रक्षा कूटनीति (Defence Diplomacy) · रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) · गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment) · हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) · सामूहिक सुरक्षा और गठबंधन (Collective Security and Alliance)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 53: संघ की कार्यपालिका शक्ति और सशस्त्र बलों का सर्वोच्च कमान
- अनुच्छेद 253: अंतरराष्ट्रीय संधियों के क्रियान्वयन हेतु संसद की विधायी शक्ति
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची की प्रविष्टि 1: भारत की रक्षा, सशस्त्र बल और सैन्य संगठन
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची की प्रविष्टि 14: विदेशी देशों के साथ संधियाँ और समझौते
अवधारणा प्रवाह
द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और व्यापक सामरिक भागीदारी का ढाँचा तैयार होता है → ढाँचे के तहत दोनों देशों की सेनाएँ नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करती हैं → अभ्यास के दौरान साझा प्रशिक्षण, रणनीति-निर्माण और परिचालन समन्वय का अभ्यास होता है → अंतर-परिचालनीयता और संचार मानकों में सुधार से संयुक्त क्षमता बढ़ती है → सैन्य सहयोग से विश्वास-निर्माण और रक्षा-कूटनीति सुदृढ़ होती है → हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को समर्थन मिलता है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा एवं सामरिक सहयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक साझेदारी की घोषणा वर्ष 2020 में की गई थी।
2. पारस्परिक लॉजिस्टिक सहायता व्यवस्था (MLSA) के अंतर्गत दोनों देशों की सशस्त्र सेनाएँ एक-दूसरे की लॉजिस्टिक सुविधाओं का पारस्परिक उपयोग कर सकती हैं।
3. क्वाड (Quad) के सदस्य देश भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: जून 2020 में वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान संबंधों को व्यापक सामरिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। कथन 2 सही है: MLSA के अंतर्गत सैन्य लॉजिस्टिक सहायता, ईंधन और आपूर्ति सेवाओं का पारस्परिक प्रावधान होता है, यह किसी सैन्य गठबंधन की संधि नहीं है। कथन 3 गलत है: क्वाड का चौथा सदस्य दक्षिण कोरिया नहीं, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): संयुक्त सैन्य अभ्यास दो देशों की सशस्त्र सेनाओं की अंतर-संचालनीयता (Interoperability) बढ़ाते हैं।
कारण (R): संयुक्त अभ्यासों में साझा प्रक्रियाओं, संचार प्रणालियों और समन्वित संचालन के अभ्यास से सैन्य बलों के बीच परिचालन-समन्वय सुदृढ़ होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं। साझा प्रक्रियाएँ, संचार मानक और समन्वित संचालन का अभ्यास ही अंतर-संचालनीयता का आधार है, अतः कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास AUSTRAHIND जैसी गतिविधियों को भारत की हिंद-प्रशांत नीति के प्रभावी उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। किंतु भारत की गुटनिरपेक्षता और रणनीतिक स्वायत्तता की परंपरा के संदर्भ में इनकी संगति पर समालोचनात्मक दृष्टि से चर्चा कीजिए। क्या ऐसे संयुक्त अभ्यास औपचारिक सैन्य गठबंधन का विकल्प हो सकते हैं? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना इस प्रकार हो:
(क) तथ्यात्मक आधार: AUSTRAHIND भारतीय थलसेना और ऑस्ट्रेलियाई सेना के बीच द्विपक्षीय अभ्यास है, जिसका यह पाँचवाँ संस्करण तिरुवनंतपुरम में आरंभ हुआ। इसकी तुलना यूएस के साथ युद्ध अभ्यास (Yudh Abhyas) और नौसैनिक बहुपक्षीय मालाबार अभ्यास से करें, जिसमें क्वाड के सदस्य शामिल हैं।
(ख) संस्थागत ढाँचा: वर्ष 2014 का सुरक्षा सहयोग ढाँचा (Framework for Security Cooperation); वर्ष 2020 में व्यापक सामरिक साझेदारी में उन्नयन; वर्ष 2020 में हस्ताक्षरित MLSA, जो लॉजिस्टिक सहायता का पारस्परिक प्रावधान करता है किंतु पारस्परिक रक्षा दायित्व नहीं बनाता।
(ग) सैद्धांतिक विमर्श: कौटिल्य के मंडल सिद्धांत के संदर्भ में शक्ति-संतुलन की प्रासंगिकता; पं. जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति और रणनीतिक स्वायत्तता का सिद्धांत; सी. राजा मोहन जैसे विद्वानों द्वारा प्रस्तुत हिंद-प्रशांत में ‘बहु-संरेखण’ (multi-alignment) की अवधारणा।
(घ) तुलनात्मक बिंदु: ऑस्ट्रेलिया की संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ ANZUS (1951) संधि, जो औपचारिक सामूहिक प्रतिरक्षा दायित्व देती है; भारत की ऐसी किसी पारस्परिक रक्षा संधि में बँधे न होने की स्थिति; इसलिए अभ्यास और गठबंधन का अंतर स्पष्ट करें।
(ड़) विभिन्न दृष्टिकोण: समर्थन में तर्क: अंतर-संचालनीयता, समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और विश्वास-निर्माण। विरोध या सावधानी के तर्क: चीन जैसे देशों द्वारा इन्हें घेराबंदी के रूप में देखे जाने की आशंका, और रणनीतिक स्वायत्तता पर संभावित प्रभाव।
(च) निष्कर्ष: संयुक्त अभ्यास अंतर-संचालनीयता और सामरिक विश्वास का साधन हैं, पर वे औपचारिक गठबंधन के विकल्प नहीं हैं, क्योंकि उनमें कोई बाध्यकारी सामूहिक प्रतिरक्षा दायित्व नहीं होता। भारत की नीति में ‘बहु-संरेखण’ और सामरिक संतुलन की संतुलित भूमिका का मूल्यांकन करते हुए निष्कर्ष दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केरल राज्य लोक सेवा आयोग (KAS) की प्रारंभिक परीक्षा के संदर्भ में, ‘ऑस्ट्राहिन्द’ नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. यह अभ्यास भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विवार्षिक सैन्य अभ्यास है, जिसका आयोजन केरल में पहली बार किया जा रहा है।
- B. इसका आयोजन केरल के तिरुवनंतपुरम में किया जा रहा है और इसमें दोनों देशों की थल सेना, नौसेना और वायु सेना शामिल हैं।
- C. यह अभ्यास केरल राज्य लोक सेवा आयोग (KAS) द्वारा आयोजित किया जाता है ताकि राज्य के नागरिकों को सैन्य प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।
- D. इसका उद्देश्य केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है, न कि सैन्य सहयोग को।
उत्तर: A. यह अभ्यास भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विवार्षिक सैन्य अभ्यास है, जिसका आयोजन केरल में पहली बार किया जा रहा है। — ऑस्ट्राहिन्द अभ्यास भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विवार्षिक सैन्य अभ्यास है, जिसका आयोजन पहली बार केरल के तिरुवनंतपुरम में किया जा रहा है। इसमें दोनों देशों की थल सेना शामिल होती है।
Mains: विस्तृत चर्चा करें कि ‘ऑस्ट्राहिन्द’ नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग को किस प्रकार सुदृढ़ करता है। साथ ही, केरल राज्य के संदर्भ में इस अभ्यास के महत्व पर प्रकाश डालें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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