20 Oct भारत-अमेरिका व्यापार समझौता निकट, रुबियो बोले- ऊर्जा एवं रक्षा खरीद बढ़े
✎ भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, ऊर्जा व्यापार और रक्षा खरीद आर्थिक विविधीकरण और रणनीतिक साझेदारी, दोनों को एक साथ साधते हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत और प्रमुख शक्तियाँ; भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (व्यापार नीति, ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी व्यापार) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा (रक्षा खरीद और रक्षा औद्योगिक सहयोग)
- Prelims: द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement) और मुक्त व्यापार समझौता (FTA) में अंतर, सामरिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) और ISPRL, जामनगर रिफाइनरी: विश्व के सबसे बड़े एकल-स्थान रिफाइनरी परिसरों में से एक, नागरिक परमाणु सहयोग समझौता (123 Agreement, 2008) और नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम, 2010, रक्षा संबंधों का 10 वर्षीय ढाँचा (2015) और ‘मेजर डिफेंस पार्टनर’ का दर्जा, COMCASA (2018) और LEMOA (2016): सैन्य सहयोग से जुड़े समझौते, क्वाड (Quad): भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का मंच, विश्व व्यापार संगठन (WTO) और सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (MFN) सिद्धांत
- Essay: ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला का विविधीकरण: क्या आर्थिक हित और रणनीतिक हित एक दिशा में चलते हैं?, व्यापार नीति में अनिश्चितता के बीच रणनीतिक साझेदारी की स्थिरता
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, ऊर्जा व्यापार और रक्षा खरीद आर्थिक विविधीकरण और रणनीतिक साझेदारी, दोनों को एक साथ साधते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो की भारत की दूसरी यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई वार्ता में ऊर्जा व्यापार, रक्षा खरीद और नागरिक परमाणु सहयोग पर चर्चा हुई। रूबियो ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम रूप के बेहद करीब है और कुछ सीमित बिंदु शेष हैं। उन्होंने भारत की कच्चे तेल शोधन क्षमता की सराहना की और जामनगर रिफाइनरी के दौरे का कार्यक्रम रखा। वहीं, अमेरिकी व्यापार नीति की अनिश्चितता और आप्रवासन नियमों की सख़्ती जैसे मुद्दों से द्विपक्षीय संबंधों में कुछ तनाव भी बना हुआ है। इस पृष्ठभूमि में यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा और व्यापार को एक साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की कोशिश को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत-अमेरिका संबंधों को 2000 के दशक में नागरिक परमाणु सहयोग समझौते (123 Agreement) से नई गति मिली, जिसके लिए भारत ने परमाणु ऊर्जा के नागरिक उपयोग को अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में लाना स्वीकार किया।
- 2015 में दोनों देशों ने रक्षा संबंधों के लिए 10 वर्षीय ढाँचे पर हस्ताक्षर किए और 2016 में अमेरिका ने भारत को ‘मेजर डिफेंस पार्टनर’ का दर्जा दिया।
- सैन्य सहयोग के लिए LEMOA (2016) और COMCASA (2018) जैसे समझौते हुए, जो रसद सहयोग और संचार-सुरक्षित उपकरणों के हस्तांतरण से संबंधित हैं।
- भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता अधिक है, इसलिए कच्चे तेल और LNG के स्रोतों का विविधीकरण भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति का प्रमुख लक्ष्य है।
- द्विपक्षीय व्यापार में शुल्क, गैर-शुल्क बाधाओं और बाज़ार पहुँच जैसे मुद्दों पर वार्ताएँ लंबे समय से चल रही हैं; व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक है।
- क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों और द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से भारत-अमेरिका सहयोग को रणनीतिक आयाम दिया गया है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और ऊर्जा-रक्षा सहयोग क्या है?
- व्यापार समझौता (Trade Agreement) दो देशों के बीच शुल्क, बाज़ार पहुँच और व्यापार नियमों पर आधारित द्विपक्षीय व्यवस्था है। यह मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की तुलना में सीमित या चरणबद्ध भी हो सकता है।
- ऊर्जा सहयोग में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और परिष्कृत उत्पादों का व्यापार शामिल है। इससे भारत की आपूर्ति शृंखला में विविधता आती है और किसी एक स्रोत पर निर्भरता घटती है।
- जामनगर रिफाइनरी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की है और यह विश्व के सबसे बड़े एकल-स्थान रिफाइनरी परिसरों में से एक है। भारत का शोधन क्षमता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में महत्व है।
- सामरिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) आपात स्थिति में आपूर्ति बाधित होने से बचाव के लिए रखा जाता है। भारत में इसका संचालन ISPRL द्वारा होता है।
- रक्षा खरीद में अमेरिकी प्रौद्योगिकी और प्रणालियों का आयात तथा सह-उत्पादन दोनों शामिल हो सकते हैं। इससे भारत की रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी और तकनीकी क्षमता प्रभावित होती है।
- नागरिक परमाणु सहयोग के लिए नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम, 2010 भारत में प्रासंगिक घरेलू विधिक ढाँचा है, जिसके प्रावधान आपूर्तिकर्ता और ऑपरेटर की ज़िम्मेदारी से जुड़े हैं।
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियम सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (MFN) सिद्धांत पर आधारित हैं, जबकि क्षेत्रीय या द्विपक्षीय समझौते इसके अपवाद के रूप में देखे जाते हैं और इन्हें WTO के प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समझौते की स्थिति | व्यापार समझौता अंतिम रूप के निकट है, परंतु अभी कुछ बिंदुओं पर सहमति शेष है और इस पर औपचारिक हस्ताक्षर होने बाकी हैं |
| ऊर्जा व्यापार का विस्तार | अमेरिका से कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों के अधिक आयात से भारत की आपूर्ति शृंखला में विविधता आने की संभावना है |
| शोधन क्षमता (Refining Capacity) | भारत को शोधन क्षमता के मामले में प्रमुख केंद्र बताया गया है और जामनगर रिफाइनरी का दौरा इसी संदर्भ में है |
| रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग | रक्षा प्रौद्योगिकी और प्रणालियों की खरीद तथा असैन्य परमाणु सहयोग में हुई प्रगति को दोनों देशों ने सकारात्मक माना है |
| रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि | व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और जन-से-जन संबंधों पर चर्चा से द्विपक्षीय संबंधों के बहुआयामी स्वरूप का संकेत मिलता है |
| क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे | पश्चिम एशिया के घटनाक्रम सहित क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर परामर्श हुआ, जो ऊर्जा सुरक्षा से सीधे जुड़ा है |
महत्व
आर्थिक महत्व
- व्यापार समझौता पूरा होने से द्विपक्षीय व्यापार में पारदर्शिता और पूर्वानुमेयता बढ़ने की संभावना है।
- ऊर्जा व्यापार के विस्तार से भारत की आर्थिक संवृद्धि के लिए ऊर्जा आपूर्ति का आधार व्यापक हो सकता है।
- निर्यात-उन्मुख उद्योगों, विशेषकर इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र, को नए बाज़ार अवसर मिल सकते हैं।
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security)
- कच्चे तेल के स्रोतों का विविधीकरण किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता घटाकर आपूर्ति जोखिम कम करता है।
- भारत की शोधन क्षमता का उपयोग कर वैश्विक पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात केंद्र के रूप में भूमिका मजबूत हो सकती है।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) जैसी व्यवस्थाएँ आपूर्ति में अस्थायी व्यवधान से बचाव में सहायक होती हैं।
रणनीतिक और रक्षा महत्व
- रक्षा उपकरणों और प्रणालियों की खरीद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की संस्थागत गहराई बढ़ती है।
- क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में साझा परामर्श भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के साथ संतुलन की माँग करता है।
परमाणु और प्रौद्योगिकी सहयोग
- असैन्य परमाणु सहयोग में प्रगति ऊर्जा-विविधीकरण के दीर्घकालिक लक्ष्यों से जुड़ी है।
- उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग से नवाचार और आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा दोनों को बल मिल सकता है।
चुनौतियाँ
1. व्यापार नीति की अनिश्चितता
- अमेरिकी व्यापार नीति में बार-बार परिवर्तन से समझौते की समय-सीमा और शर्तों के बारे में अनिश्चितता बनी रहती है।
- समझौते के अंतिम चरण में छोटे-छोटे बिंदु भी वार्ता को लंबा खींच सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के हितों पर प्रभाव डालने वाले द्विपक्षीय समझौते
2. आप्रवासन नियमों का प्रभाव
- कड़े आप्रवासन नियम कुशल पेशेवरों की गतिशीलता और जन-से-जन संबंधों पर असर डाल सकते हैं।
- आर्थिक सहयोग और सेवा व्यापार के लिए मानव संसाधन की सुलभता एक महत्वपूर्ण पक्ष है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारतीय प्रवासी और द्विपक्षीय संबंध
3. ऊर्जा आयात की रणनीतिक संतुलन-समस्या
- किसी भी स्रोत से कच्चे तेल की खरीद पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध व्यवस्थाओं और कूटनीतिक संतुलन का प्रभाव पड़ता है।
- आयात के स्रोत बदलने पर परिवहन लागत, परिशोधन की तकनीकी अनुकूलता और मूल्य-स्थिरता जैसे पहलू जुड़ते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2 और GS-3: ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंध
4. स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आयात का संतुलन
- विदेशी रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ने से स्वदेशी रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की शर्तों पर ध्यान देना आवश्यक होता है।
- आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के लक्ष्य और आयात-आधारित खरीद के बीच संतुलन बनाना एक नीतिगत चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| व्यापार शर्तों की अस्थिरता | अंतिम हस्ताक्षर में देरी या शर्तों में बदलाव से निवेशकों और व्यापारियों की योजना प्रभावित हो सकती है |
| आप्रवासन नीति | कुशल कार्यबल की आवाजाही पर प्रतिबंधों से सेवा क्षेत्र और अनुसंधान सहयोग प्रभावित हो सकते हैं |
| ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण | नए स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाने से परिवहन लागत, तकनीकी अनुकूलता और मूल्य-जोखिम जैसे प्रश्न उठते हैं |
| रक्षा आयात बनाम स्वदेशीकरण | विदेशी खरीद पर बढ़ती निर्भरता घरेलू रक्षा उद्योग के विकास की गति को धीमा कर सकती है |
| प्रतिबंध-अनुपालन | कुछ स्रोतों से तेल आयात में अंतरराष्ट्रीय नियमों और वित्तीय लेन-देन की जटिलताएँ आ सकती हैं |
आगे की राह
- व्यापार समझौते के शेष बिंदुओं पर समयबद्ध वार्ता और स्पष्ट प्रावधानों के साथ औपचारिक हस्ताक्षर सुनिश्चित किए जाएँ।
- ऊर्जा आयात में विविधता लाते समय परिवहन लागत, मूल्य-जोखिम और अंतरराष्ट्रीय अनुपालन का समग्र मूल्यांकन किया जाए।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की क्षमता बढ़ाकर आपूर्ति व्यवधानों के विरुद्ध बफ़र तैयार किया जाए।
- रक्षा खरीद में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन की शर्तों को प्राथमिकता दी जाए ताकि स्वदेशी विनिर्माण मजबूत हो।
- असैन्य परमाणु सहयोग के संदर्भ में असैन्य परमाणु क्षति के लिए दायित्व अधिनियम, 2010 (Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010) से जुड़े प्रावधानों की स्पष्टता बनाए रखी जाए।
- आप्रवासन और कौशल गतिशीलता से जुड़े नीतिगत निर्णयों में द्विपक्षीय सेवा और शिक्षा संबंधों का ध्यान रखा जाए।
- व्यापार, ऊर्जा और रक्षा से संबंधित समझौतों के बीच समन्वय के लिए अंतर-मंत्रालयी तंत्र को सुदृढ़ किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (India-US Trade Agreement) · ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) · ऊर्जा विविधीकरण (Energy Diversification) · आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) · प्रमुख रक्षा भागीदार (Major Defence Partner) · LEMOA · COMCASA · BECA · सिविल परमाणु सहयोग (Civil Nuclear Cooperation) · रणनीतिक भागीदारी (Strategic Partnership) · अनुच्छेद 73 (Article 73) · अनुच्छेद 253 (Article 253)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 253: अंतरराष्ट्रीय संधियों के कार्यान्वयन हेतु विधि-निर्माण
- अनुच्छेद 73: संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची: विदेशी संधियों और करारों पर संघ का अधिकार
अवधारणा प्रवाह
द्विपक्षीय व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर वार्ता का नवीनीकरण → व्यापार समझौते के शेष बिंदुओं पर सहमति और औपचारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया → कच्चे तेल के स्रोत-विविधीकरण और शोधन क्षमता के उपयोग से ऊर्जा आपूर्ति का विस्तार → रक्षा खरीद और असैन्य परमाणु सहयोग में प्रगति से रणनीतिक साझेदारी का गहराना → आर्थिक एवं सुरक्षा हितों का संतुलन, जिसके लिए घरेलू विधि-निर्माण और नीतिगत समन्वय आवश्यक है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लेमोआ (LEMOA) दोनों देशों को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर रसद (logistics) सहायता के लिए पारस्परिक पहुँच की सुविधा देता है।
2. कोमकासा (COMCASA) संचार संगतता और सुरक्षा से संबंधित है, जिसके अंतर्गत संवेदनशील सैन्य संचार उपकरणों के हस्तांतरण की व्यवस्था है।
3. बेका (BECA) भू-स्थानिक (geospatial) सूचना के आदान-प्रदान से संबंधित मूलभूत समझौता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: सभी — तीनों कथन सही हैं। लेमोआ 2016 में हस्ताक्षरित लॉजिस्टिक्स विनिमय ज्ञापन समझौता है। कोमकासा 2018 में और बेका 2020 में हस्ताक्षरित हुए, जो क्रमशः संचार संगतता व सुरक्षा तथा भू-स्थानिक सूचना साझेदारी से जुड़े हैं। ये रक्षा सहयोग के मूल ढाँचे के चार स्तंभों में से तीन हैं।
Q2. कथन (A): भारत की कच्चे तेल की आयात पर निर्भरता को देखते हुए आपूर्तिकर्ता देशों में विविधता लाना नीतिगत प्राथमिकता है।
कारण (R): सामरिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में कुछ समय तक ऊर्जा आवश्यकताओं को सँभालने में सहायक होते हैं।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
(a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(b) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(c) A सही है, परंतु R गलत है।
(d) A गलत है, परंतु R सही है।
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, परंतु R गलत है।
- A गलत है, परंतु R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — कच्चे तेल के आयात पर भारत की भारी निर्भरता आपूर्ति के स्रोतों के विविधीकरण को नीतिगत आवश्यकता बनाती है। सामरिक पेट्रोलियम भंडार आपातकालीन व्यवधान में बफर का कार्य करते हैं, इसलिए R, A की तार्किक व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन (match) कीजिए:
स्तंभ I
1. लेमोआ (LEMOA)
2. कोमकासा (COMCASA)
3. बेका (BECA)
4. भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता (123 Agreement)
स्तंभ II
A. 2008
B. 2016
C. 2018
D. 2020
सही सुमेलन का चयन कीजिए:
- 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
- 1-B, 2-C, 3-D, 4-A
- 1-C, 2-D, 3-A, 4-B
- 1-D, 2-A, 3-B, 4-C
उत्तर: 1-B, 2-C, 3-D, 4-A — भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता (123 Agreement) 2008 में हस्ताक्षरित हुआ। लेमोआ 2016, कोमकासा 2018 और बेका 2020 में हस्ताक्षरित हुए। इसलिए सही सुमेलन 1-B, 2-C, 3-D, 4-A है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम रूप के निकट बताया जा रहा है, जबकि ऊर्जा और रक्षा खरीद में सहयोग का विस्तार भी प्रस्तावित है। भारत में अंतरराष्ट्रीय समझौतों के संपादन की संवैधानिक प्रक्रिया की विवेचना कीजिए। क्या ऐसे समझौतों के क्रियान्वयन के लिए संसद का विधायी हस्तक्षेप अनिवार्य होता है? अनुच्छेद 73 और अनुच्छेद 253 के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) भूमिका: समझौते की वर्तमान स्थिति, वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की भूमिका, तथा व्यापार, ऊर्जा और रक्षा के बीच संबंध। (2) संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 73 के अंतर्गत संघीय कार्यपालिका की संधि-संपादन शक्ति का विस्तार; अनुच्छेद 53 और 77 के अंतर्गत राष्ट्रपति के नाम पर कार्यपालिका कार्य; सातवीं अनुसूची की संघ सूची में विदेशी मामलों और अंतरराष्ट्रीय संधियों की प्रविष्टि। (3) न्यायिक दृष्टिकोण: राम जवाया कपूर बनाम पंजाब राज्य (1955) में कार्यपालिका की शक्ति के दायरे पर व्याख्या; संधि-संपादन और घरेलू विधि-परिवर्तन के बीच अंतर। (4) अनुच्छेद 253 का विश्लेषण: संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों और निर्णयों को लागू करने के लिए विधि बनाने की शक्ति; यदि समझौते के लिए शुल्क, सीमा शुल्क, निर्यात नियंत्रण या बौद्धिक संपदा में घरेलू कानून में परिवर्तन आवश्यक हो तो संसद की भूमिका। (5) व्यावहारिक पक्ष: संसदीय स्थायी समितियों द्वारा संधियों की जाँच, पारदर्शिता तथा संसद की सीमित भूमिका पर आलोचना। (6) रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग (LEMOA, COMCASA, BECA, 123 Agreement) के उदाहरण से तुलना: कुछ समझौते कार्यपालिका स्तर पर संपन्न हुए, जबकि परमाणु दायित्व से जुड़े प्रावधानों के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 जैसी घरेलू विधि की आवश्यकता पड़ी। (7) संतुलित निष्कर्ष: कार्यपालिका की दक्षता और संसदीय उत्तरदायित्व के बीच संतुलन; सुझाव: व्यापार समझौतों में संसदीय परामर्श की संस्थागत व्यवस्था।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- Pakistan Army’s Plan to Redraw Provincial Map: UPSC Security Analysis - October 21, 2026
- आईसीएआर के स्वच्छता अभियान 6.0 में 4000 से अधिक अभियान, जानिए मुख्य उपलब्धियां - October 21, 2026
- Defence Ministry signs Rs 770 crore deal with BEL for air defence radars - October 21, 2026

No Comments