भुवनेश्वर में 19वीं अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026

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भुवनेश्वर में 19वीं अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026

✎ शहरी सुगमता और रहने योग्यता के लिए अवसंरचना के साथ सेवा-दक्षता, वितरण प्रणाली और 74वें संविधान संशोधन के अंतर्गत स्थानीय निकायों की सशक्तिकरण आवश्यक है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (Governance): स्थानीय स्वशासन, नगरपालिकाओं की शक्तियाँ और केंद्र-राज्य-स्थानीय निकायों के बीच समन्वय  |  GS Paper II — संविधान (Constitution): 74वाँ संविधान संशोधन और शहरी स्थानीय निकाय  |  GS Paper III — अवसंरचना (Infrastructure): शहरी परिवहन, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन तथा किफ़ायती आवास  |  GS Paper III — पर्यावरण (Environment): शहरी अपशिष्ट, उपचारित जल का पुनः उपयोग और जलवायु-अनुकूल निर्माण
  • Prelims: अर्बन मोबिलिटी इंडिया (Urban Mobility India — UMI) सम्मेलन: आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) का वार्षिक प्रमुख आयोजन, राष्ट्रीय शहरी संगोष्ठी (National Urban Symposium): पहला संस्करण नवंबर 2025 में नई दिल्ली में हुआ, हुडको (HUDCO) और एनबीसीसी (NBCC) — केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम, इस आयोजन के प्रमुख प्रायोजक, राष्ट्रीय शहरी मामलों का संस्थान (National Institute of Urban Affairs — NIUA): ज्ञान-साझेदार, 74वाँ संविधान संशोधन (1992): अनुच्छेद 243ण (नगरपालिकाएँ) और बारहवीं अनुसूची के 18 विषय, अनुच्छेद 243ZD (जिला योजना समिति) और अनुच्छेद 243ZE (महानगर योजना समिति), राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति (National Urban Transport Policy), 2006, मेट्रो रेल नीति (Metro Rail Policy), 2017
  • Essay: शहरों का भविष्य: सुगम, सुरक्षित और रहने योग्य शहरी स्थान, केवल अवसंरचना नहीं, सेवा-दक्षता: शहरी शासन में वितरण प्रणाली की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: शहरी सुगमता और रहने योग्यता के लिए अवसंरचना के साथ सेवा-दक्षता, वितरण प्रणाली और 74वें संविधान संशोधन के अंतर्गत स्थानीय निकायों की सशक्तिकरण आवश्यक है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने ओडिशा सरकार के सहयोग से भुवनेश्वर में दो प्रमुख आयोजनों की घोषणा की है। 19वाँ अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 23–24 अक्टूबर 2026 को होगा, जिसका विषय ‘डिजिटल युग में शहरी सुगमता और रहने योग्यता’ रखा गया है। इसके बाद 24–25 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय शहरी संगोष्ठी का दूसरा संस्करण होगा, जिसका विषय ‘अर्बन राइजिंग — शहरी प्रणालियों, समाधानों और वितरण प्रणाली पर पुनर्विचार’ है। संगोष्ठी का उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ओडिशा के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में करेंगे, और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा सदस्य मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य नीति-निर्माताओं, शहरी प्रशासकों, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर भारतीय शहरों की कार्यप्रणाली सुधारने के व्यावहारिक उपाय खोजना है। प्रारंभिक घोषणा में संगोष्ठी के सात विषय-क्षेत्रों में से पैदल चलने का अधिकार, जल-अपशिष्ट एवं संसाधन दक्षता तथा किफ़ायती आवास जैसे क्षेत्र प्रमुखता से उल्लिखित हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत में शहरीकरण तेज़ी से बढ़ रहा है। जनगणना 2011 के अनुसार देश की लगभग 31.16 प्रतिशत जनसंख्या नगरीय क्षेत्रों में रहती थी, और आने वाले दशकों में यह हिस्सा और बढ़ने का अनुमान है।
  • संविधान के 74वें संशोधन (1992) ने नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया। बारहवीं अनुसूची में शहरी स्थानीय निकायों के 18 विषय सूचीबद्ध हैं, जिनमें नगर नियोजन, सड़कें, जल आपूर्ति और शहरी गरीबों का कल्याण शामिल हैं। इसके बावजूद कई राज्यों में इन निकायों को वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता सीमित है।
  • शहरी परिवहन के क्षेत्र में राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति (2006) ने पैदल यात्रियों और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने पर बल दिया था। बाद में मेट्रो रेल नीति (2017) ने मेट्रो परियोजनाओं के लिए संस्थागत और वित्तीय ढाँचा स्पष्ट किया।
  • भारत सरकार की प्रमुख शहरी योजनाओं में स्मार्ट सिटीज़ मिशन (2015), अमृत (AMRUT, 2015) और प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) शामिल हैं। इनके अनुभव से यह स्पष्ट हुआ है कि परियोजनाओं के निर्माण के साथ-साथ सेवाओं के संचालन, रखरखाव और वित्तीय स्थायित्व पर ध्यान देना आवश्यक है।
  • राष्ट्रीय शहरी संगोष्ठी की स्थापना भारत में शहरी विकास के भविष्य पर वार्षिक चर्चा के मंच के रूप में की गई है। इसका पहला संस्करण नवंबर 2025 में नई दिल्ली में हुआ था।

शहरी गतिशीलता और रहने योग्यता क्या है?

  • शहरी गतिशीलता (Urban Mobility) से आशय नागरिकों और वस्तुओं के सुरक्षित, किफ़ायती, कुशल और पर्यावरण-अनुकूल आवागमन की व्यवस्था से है, जिसमें पैदल यात्री, साइकिल, सार्वजनिक परिवहन और निजी वाहन सभी शामिल हैं।
  • ‘पैदल चलने का अधिकार’ की अवधारणा के अंतर्गत निरंतर फुटपाथ, सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग, स्कूल क्षेत्रों में सुरक्षा और अंतिम-मील कनेक्टिविटी पर बल दिया जाता है।
  • रहने योग्यता (Liveability) से तात्पर्य ऐसे शहर से है जहाँ आवास, जल, स्वच्छता, परिवहन और सार्वजनिक स्थान नागरिकों के लिए सुलभ और सुरक्षित हों।
  • सेवा-दक्षता में केवल नई अवसंरचना बनाना पर्याप्त नहीं माना जाता; जल-हानि में कमी, उपचारित जल का पुनः उपयोग और अपशिष्ट से संसाधन पुनर्प्राप्ति जैसे उपाय भी आवश्यक हैं।
  • किफ़ायती आवास के संदर्भ में भूमि और वित्त तक पहुँच, सरल नियामक अनुमोदन प्रक्रिया तथा जलवायु-अनुकूल निर्माण तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
  • ‘डिजिटल युग में शहरी सुगमता’ का आशय शहरी सेवाओं और परिवहन में डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग से है, जिससे योजना, संचालन और नागरिक सेवाओं की पारदर्शिता तथा दक्षता बढ़ाई जा सके।
  • शहरी विकास में ‘वितरण प्रणाली’ से आशय उस तंत्र से है जिसके माध्यम से योजनाएँ और सेवाएँ अंतिम नागरिक तक पहुँचती हैं; इसमें संस्थागत समन्वय और कार्यान्वयन क्षमता केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
आयोजन और तिथि 19वीं अर्बन मोबिलिटी इंडिया (Urban Mobility India) सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 23–24 अक्टूबर 2026 को और दूसरी राष्ट्रीय शहरी संगोष्ठी 24–25 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित होगी। दोनों आयोजन होटल मेफेयर सैंक्चुअरी में होंगे।
आयोजक और सहयोग आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs, MoHUA) ओडिशा सरकार के सहयोग से आयोजन कर रहा है। केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम हुडको और एनबीसीसी प्रमुख प्रायोजक हैं, जबकि राष्ट्रीय शहरी मामलों का संस्थान (National Institute of Urban Affairs, NIUA) ज्ञान-साझेदार है।
विषय सम्मेलन का विषय ‘डिजिटल युग में शहरी सुगमता और रहने योग्यता’ है। संगोष्ठी का विषय ‘अर्बन राइजिंग — शहरी प्रणालियों, समाधानों और वितरण प्रणाली पर पुनर्विचार’ है।
संगोष्ठी का स्वरूप राष्ट्रीय शहरी संगोष्ठी को भारत में शहरी विकास के भविष्य पर चर्चा हेतु वार्षिक मंच के रूप में स्थापित किया गया है। इसका पहला संस्करण नवंबर 2025 में नई दिल्ली में हुआ था।
विषय-क्षेत्र संगोष्ठी सात प्रमुख विषय-क्षेत्रों पर केंद्रित होगी। स्रोत में पैदल चलने का अधिकार, जल, अपशिष्ट और संसाधन दक्षता, किफायती आवास तथा एकीकृत शहरी विकास और अवसंरचना वितरण जैसे क्षेत्रों का उल्लेख है।

महत्व

नीतिगत और शासकीय

  • नीति-निर्माताओं, शहरी प्रशासकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर शहरी नीति की कार्यान्वयन-कमियों की पहचान का अवसर मिलता है।
  • ‘पुनर्विचार’ शब्द से संकेत मिलता है कि शहरी प्रणालियों, संस्थाओं और वितरण तंत्र में सुधार की आवश्यकता को मान्यता दी जा रही है।
  • केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से होने वाला यह आयोजन सहकारी संघवाद की कार्यप्रणाली का एक व्यावहारिक उदाहरण है।

संस्थागत और संवैधानिक

  • शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता बढ़ाना 74वें संविधान संशोधन की मूल भावना से जुड़ा है, क्योंकि इसमें नगरपालिकाओं को स्वशासन की इकाई के रूप में सशक्त करने पर बल दिया गया था।
  • एकीकृत शहरी विकास पर चर्चा से महानगरीय क्षेत्रों में समन्वित योजना की आवश्यकता रेखांकित होती है।

आर्थिक और सामाजिक

  • किफायती आवास और भूमि व वित्त तक बेहतर पहुँच शहरी आबादी के बड़े वर्ग की आवास-आवश्यकता से सीधे जुड़ी है।
  • जल-हानि में कमी, उपचारित जल के पुनः उपयोग और अपशिष्ट से मूल्य पुनर्प्राप्ति से संसाधन दक्षता और सेवा-वितरण की गुणवत्ता बढ़ सकती है।
  • पैदल चलने योग्य और सुरक्षित सड़कें सामाजिक समावेशन और सार्वजनिक स्वास्थ्य में योगदान देती हैं।

तकनीकी और डिजिटल

  • ‘डिजिटल युग में शहरी सुगमता’ विषय से स्पष्ट है कि डिजिटल उपकरणों को सेवा-वितरण और परिवहन प्रबंधन में समावेशी ढंग से अपनाने पर विचार होगा।

चुनौतियाँ

1. शहरी अवसंरचना और सेवा-वितरण में अंतर

  • स्रोत के अनुसार चर्चा अवसंरचना निर्माण से आगे बढ़कर सेवा-दक्षता पर केंद्रित है, जो संकेत देता है कि निर्मित संपत्ति का पूरा लाभ जनता तक नहीं पहुँच पा रहा।
  • रखरखाव, संचालन और वित्तीय क्षमता की कमी से परिसंपत्तियों का प्रभावी उपयोग प्रभावित होता है।

2. पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सड़क डिज़ाइन

  • निरंतर फुटपाथ, सुरक्षित स्कूल क्षेत्र और बेहतर पैदल क्रॉसिंग का अभाव सड़क दुर्घटनाओं और असुरक्षा को बढ़ाता है।
  • अंतिम-मील कनेक्टिविटी की कमी सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को सीमित करती है।

3. जल-हानि, अपशिष्ट और संसाधन दक्षता

  • जल-वितरण में रिसाव और अपर्याप्त उपचार से जल-हानि और जल-संकट की स्थिति बनती है।
  • अपशिष्ट का पुनर्चक्रण और उपचारित जल का पुनः उपयोग अभी सीमित स्तर पर है।

4. किफायती आवास की बढ़ती मांग

  • किराये के आवास की माँग बढ़ रही है, जबकि नियामक अनुमोदन की जटिलता और भूमि की उपलब्धता बाधाएँ हैं।
  • वित्त तक सीमित पहुँच, विशेषकर कम आय वर्ग के लिए, आवास-कमी को बढ़ाती है।
  • जलवायु-अनुकूल निर्माण तकनीकों का व्यापक उपयोग अभी प्रारंभिक चरण में है।

5. बहु-एजेंसी समन्वय की चुनौती

  • शहरी विकास में केंद्र, राज्य, स्थानीय निकाय और विभिन्न विकास प्राधिकरण शामिल होते हैं, जिससे योजनाओं में अधिव्यापन और विलंब होता है।
  • एकीकृत शहरी विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों की योजनाओं को एक साथ जोड़ना कठिन रहता है।

6. डिजिटल तकनीक का समावेशी उपयोग

  • डिजिटल सेवाओं का लाभ सभी नागरिकों, विशेषकर डिजिटल रूप से वंचित वर्गों तक, समान रूप से पहुँचना सुनिश्चित करना चुनौती है।
  • डेटा सुरक्षा और तकनीकी क्षमता-निर्माण के बिना डिजिटल समाधान प्रभावी नहीं हो सकते।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
सेवा-दक्षता अवसंरचना निर्माण के बावजूद सेवा-वितरण और रखरखाव में कमी
सड़क सुरक्षा पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ, क्रॉसिंग और सुरक्षित स्कूल क्षेत्रों का अभाव
जल और अपशिष्ट जल-हानि, उपचारित जल के सीमित पुनः उपयोग और अपशिष्ट से मूल्य-पुनर्प्राप्ति की कम दर
आवास वित्त व भूमि किफायती आवास के लिए भूमि, वित्त और नियामक अनुमोदन तक सीमित पहुँच
समन्वय केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच नियोजन और कार्यान्वयन में तालमेल की कमी
डिजिटल समावेशन डिजिटल समाधानों का लाभ सभी वर्गों तक न पहुँचना

आगे की राह

  • शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय और तकनीकी क्षमता बढ़ाकर सेवा-दक्षता पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
  • सड़क डिज़ाइन में पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देते हुए निरंतर फुटपाथ, सुरक्षित क्रॉसिंग और अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाए।
  • जल-हानि नियंत्रण, उपचारित जल के पुनः उपयोग और अपशिष्ट से मूल्य-पुनर्प्राप्ति के लिए स्पष्ट लक्ष्य और निगरानी तंत्र बनाए जाएँ।
  • किफायती आवास के लिए नियामक अनुमोदन को सरल बनाया जाए तथा भूमि और वित्त तक पहुँच बढ़ाई जाए।
  • जलवायु-अनुकूल और कम लागत वाली निर्माण तकनीकों के प्रसार हेतु प्रदर्शन-परियोजनाएँ और क्षमता-निर्माण कार्यक्रम चलाए जाएँ।
  • केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच एकीकृत शहरी योजना और समन्वय तंत्र को संस्थागत रूप दिया जाए।
  • डिजिटल सेवाओं में डिजिटल साक्षरता, डेटा सुरक्षा और समावेशी पहुँच को साथ-साथ सुनिश्चित किया जाए।
  • संगोष्ठी और सम्मेलन में प्राप्त सुझावों को नीति-दस्तावेज़ों और कार्य-योजनाओं में परिवर्तित करने के लिए अनुवर्ती प्रक्रिया बनाई जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies) · 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (74th Constitutional Amendment Act) · बारहवीं अनुसूची (Twelfth Schedule) · राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) · महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) · पैदल चलने का अधिकार (Right to Walk) · किफ़ायती आवास (Affordable Housing) · एकीकृत शहरी विकास (Integrated Urban Development) · जल-हानि न्यूनीकरण (Water Loss Reduction) · राष्ट्रीय शहरी नीति ढाँचा (National Urban Policy Framework) · प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (PMAY-Urban 2.0) · शहरी स्थानीय निकायों का वित्तीय सशक्तिकरण (Fiscal Empowerment of ULBs)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं को स्वशासन की शक्तियाँ
  • बारहवीं अनुसूची: नगरीय कार्यों की सूची, जिसमें सड़क और जल शामिल
  • अनुच्छेद 243ZE: महानगर योजना समिति, एकीकृत नगरीय नियोजन

अवधारणा प्रवाह

शहरों की बढ़ती जनसंख्या से परिवहन, आवास, जल और अपशिष्ट पर दबाव बढ़ता है।  →  सेवा-वितरण और अवसंरचना में कमियाँ नीति-पुनर्विचार की आवश्यकता पैदा करती हैं।  →  आवास और शहरी कार्य मंत्रालय राज्य सरकार और हितधारकों के सहयोग से सम्मेलन और संगोष्ठी का आयोजन करता है।  →  संगोष्ठी में सात विषय-क्षेत्रों पर विचार-विमर्श होता है और व्यावहारिक समाधान पहचाने जाते हैं।  →  सुझावों को नीति-निर्माण और शहरी स्थानीय निकायों के कार्यान्वयन तंत्र में शामिल कर शहरी सेवा-वितरण सुधारा जाता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में भाग IX-क (Part IXA) जोड़ा गया, जिसमें नगरपालिकाओं से संबंधित प्रावधान हैं।
2. संविधान की बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के लिए सौंपे जा सकने वाले 18 विषय सूचीबद्ध हैं।
3. बारहवीं अनुसूची को 73वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा जोड़ा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. इनमें से कोई नहीं, क्योंकि सभी कथन गलत हैं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: भाग IX-क नगरपालिकाओं से संबंधित है और 74वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया। कथन 2 सही है: बारहवीं अनुसूची में 18 विषय हैं, जिन्हें अनुच्छेद 243W के अंतर्गत नगरपालिकाओं को सौंपा जा सकता है। कथन 3 गलत है: बारहवीं अनुसूची 74वें संशोधन द्वारा जोड़ी गई, 73वें द्वारा नहीं; 73वें संशोधन ने ग्यारहवीं अनुसूची (पंचायतें) जोड़ी थी। अतः उत्तर ‘केवल दो’ है।

Q2. कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): किराये के आवास से संबंधित सुधार विभिन्न राज्यों में असमान गति से लागू हुए हैं।
कारण (R): मॉडल किराया अधिनियम, 2021 एक आदर्श विधि (Model Law) है, जो तब तक प्रभावी नहीं होता जब तक राज्य या संघ राज्य क्षेत्र उसे अपने विधान या प्रशासनिक कदम से अपनाते नहीं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — मॉडल किराया अधिनियम, 2021 केंद्र द्वारा प्रस्तावित आदर्श विधि है, जिसे अपनाना राज्यों के अधिकार में है, इसलिए उसके क्रियान्वयन में असमानता स्वाभाविक है। आवास और शहरी विकास राज्य विषय के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र हैं, जिससे राज्यों की भूमिका निर्णायक हो जाती है। अतः (R), (A) की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित योजनाओं/नीतियों को उनके उद्देश्यों से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
1. अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT)
2. स्मार्ट सिटीज़ मिशन
3. प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-Urban)
4. मेट्रो रेल नीति, 2017

सूची-II
A. किफ़ायती आवास उपलब्ध कराना
B. जल आपूर्ति और सीवरेज जैसी मूलभूत शहरी सेवाएँ सुधारना
C. क्षेत्र-आधारित, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सक्षम शहरी विकास
D. शहरी सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो रेल का नियोजन

सही सुमेलन चुनिए:

  1. 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
  2. 1-B, 2-C, 3-A, 4-D
  3. 1-C, 2-A, 3-B, 4-D
  4. 1-B, 2-A, 3-C, 4-D

उत्तर: 1-B, 2-C, 3-A, 4-D — AMRUT का मुख्य लक्ष्य चयनित शहरों में जल आपूर्ति और सीवरेज जैसी मूलभूत सेवाएँ सुधारना है (1-B)। स्मार्ट सिटीज़ मिशन क्षेत्र-आधारित और ICT-सक्षम विकास पर केंद्रित है (2-C)। PMAY-Urban सभी के लिए आवास के लक्ष्य से जुड़ा है (3-A)। मेट्रो रेल नीति, 2017 मेट्रो परियोजनाओं के नियोजन और विकास का ढाँचा देती है (4-D)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया, फिर भी अनेक नगरपालिकाएँ कार्यों, वित्त और कार्मिक व्यवस्था के मामलों में राज्य सरकारों पर निर्भर बनी हुई हैं। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि ‘अर्बन राइजिंग’ जैसे विषयों पर शहरी प्रणालियों, संस्थाओं और वितरण तंत्र के पुनर्विचार से यह स्थिति किस प्रकार बदल सकती है। (15 Marks)

रूपरेखा: 1) संवैधानिक ढाँचा: भाग IX-क (अनुच्छेद 243Q से 243ZG तक नगरपालिकाओं का प्रावधान); अनुच्छेद 243W के अंतर्गत बारहवीं अनुसूची के 18 विषयों का हस्तांतरण राज्य विधान पर निर्भर; अनुच्छेद 243X के अंतर्गत कर, शुल्क और फीस लगाने की शक्ति; अनुच्छेद 243I के अंतर्गत हर पाँच वर्ष पर राज्य वित्त आयोग और अनुच्छेद 243Y के अंतर्गत उसकी सिफ़ारिशों का राज्य सरकार द्वारा विचारण।
2) नियोजन: अनुच्छेद 243ZD के अंतर्गत जिला योजना समिति और अनुच्छेद 243ZE के अंतर्गत महानगर योजना समिति का गठन; कार्यान्वयन में राज्य-स्तरीय एजेंसियों और विशेष प्रयोजन इकाइयों (Parastatals) का प्रभुत्व।
3) वित्तीय पक्ष: संपत्ति कर और उपयोगकर्ता शुल्क जैसे अपने स्रोतों की कमजोरी; वित्त आयोग अनुदान पर निर्भरता; राज्य वित्त आयोग रिपोर्टों का देर से या अधूरा क्रियान्वयन। जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (JnNURM, 2005) में सुधार-आधारित शर्तों ने ULB सुधारों को गति दी, परंतु मिशन की समाप्ति के बाद निरंतरता पर प्रश्न उठे।
4) प्रशासनिक एवं सेवा पक्ष: निर्वाचित पार्षदों की भूमिका बनाम नगर आयुक्त/कार्यकारी अधिकारी; जल-हानि, अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन में सेवा दक्षता की समस्या।
5) संतुलित दृष्टिकोण: विकेंद्रीकरण के पक्ष में तर्क (स्थानीय आवश्यकताओं की समझ, जवाबदेही, द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की स्थानीय शासन पर सिफ़ारिशें) और राज्य नियंत्रण के पक्ष में तर्क (क्षमता की कमी, राजकोषीय अनुशासन, राज्य-स्तरीय समन्वय की आवश्यकता)।
6) समकालीन आयाम: राष्ट्रीय शहरी नीति ढाँचा (2018), प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (2024), बजट 2025-26 में घोषित शहरी चुनौती निधि (Urban Challenge Fund) और शहरी सुगमता सूचकांक (Ease of Living Index) जैसे उपकरणों की भूमिका; पैदल चलने का अधिकार, जल व अपशिष्ट दक्षता तथा किफ़ायती आवास पर संगोष्ठी-स्तर के विचार-विमर्श को शासन-सुधार से जोड़ना।
7) निष्कर्ष: संवैधानिक प्रावधान और वास्तविक स्वायत्तता के बीच अंतर को पाटने के लिए कार्य-वित्त-कार्मिक तीनों मोर्चों पर ‘सहायक-सिद्धांत’ (Subsidiarity) की भावना से सुधार का तर्क।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा 23–24 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित की जाने वाली 19वीं अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन एवं प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. A. शहरी गतिशीलता में नवाचार और टिकाऊ परिवहन समाधानों को बढ़ावा देना
  2. B. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर वार्ता करना
  3. C. पर्यटन स्थलों का विकास करना
  4. D. कृषि उत्पादन में वृद्धि करना

उत्तर: A. शहरी गतिशीलता में नवाचार और टिकाऊ परिवहन समाधानों को बढ़ावा देना — इस सम्मेलन का उद्देश्य शहरी परिवहन में नवाचार, टिकाऊ समाधान और तकनीकी हस्तक्षेपों को बढ़ावा देना है, जिससे शहरी गतिशीलता में सुधार हो सके।

Mains: अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 के आयोजन से ओडिशा राज्य को मिलने वाले संभावित लाभों का विश्लेषण करते हुए, राज्य में शहरी परिवहन अवसंरचना के विकास में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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